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अमित शाह बैग जांच: महाराष्ट्र में गृह मंत्री शाह के बैग की तलाशी, चुनाव आयोग के फ्लाइंग स्क्वॉड द्वारा कार्रवाई..

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024: हिंगोली में अमित शाह के हेलीकॉप्टर और बैग की तलाशी

महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हेलीकॉप्टर और बैग की तलाशी का मामला सामने आया है। यह कार्रवाई चुनाव आयोग की फ्लाइंग स्क्वॉड टीम ने हिंगोली में की। इस बारे में गृह मंत्री अमित शाह ने खुद जानकारी दी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने लिखा, “आज महाराष्ट्र के हिंगोली विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान चुनाव आयोग के अधिकारियों ने मेरे हेलीकॉप्टर की जांच की। भाजपा निष्पक्ष चुनाव और स्वस्थ चुनाव प्रणाली में विश्वास करती है और माननीय चुनाव आयोग द्वारा बनाए गए सभी नियमों का पालन करती है।”

निष्पक्ष चुनाव प्रणाली की अहमियत पर जोर

गृह मंत्री शाह ने आगे कहा कि हमें सभी को निष्पक्ष चुनाव प्रणाली में योगदान देना चाहिए और भारत को दुनिया का सबसे मजबूत लोकतंत्र बनाए रखने में अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।

लोकसभा चुनाव में भी हुई थी तलाशी

यह पहला मौका नहीं है जब अमित शाह के हेलीकॉप्टर की तलाशी ली गई हो। इससे पहले 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी शाह के हेलीकॉप्टर की तलाशी ली गई थी। चुनाव आयोग ने यह कार्रवाई बिहार के कटिहार में की थी। इस बीच, 12 नवंबर को उद्धव ठाकरे के हेलीकॉप्टर की दूसरी बार तलाशी लेने को लेकर विवाद उठ चुका था, जिसके बाद निर्वाचन आयोग ने अपनी नीतियों को स्पष्ट किया था।

चुनाव आयोग का बयान

चुनाव आयोग के सूत्रों ने 12 नवंबर को उद्धव ठाकरे के बैग की तलाशी को लेकर बयान जारी किया था। चुनाव आयोग ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं के हेलीकॉप्टरों और विमानों की जांच मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत की जाती है। आयोग के अनुसार, पिछले चुनावों में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और अमित शाह के विमानों और हेलीकॉप्टरों की भी जांच की गई थी।

समान अवसर की दिशा में चुनाव आयोग की कार्रवाई

चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशियों को समान अवसर प्रदान करने के लिए एसओपी का पालन किया जाता है। आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि बिहार में 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान नड्डा और शाह के हेलीकॉप्टरों की जांच की गई थी। आयोग ने सभी प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश दिया है कि सभी प्रत्याशियों के हेलीकॉप्टरों की जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी पक्ष को विशेष लाभ न मिले।

महाराष्ट्र में कई नेताओं की तलाशी

महाराष्ट्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग की टीम ने कई नेताओं के बैग की तलाशी ली है। इनमें मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे जैसे प्रमुख नेता शामिल हैं।

महाराष्ट्र में सियासी समीकरण

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में सियासी समीकरण काफी दिलचस्प होने वाले हैं। महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार के गिरने के बाद भाजपा समर्थित सरकार बन चुकी है, और अब राज्य में पहले बार विधानसभा चुनाव होंगे। वर्तमान में राज्य की 288 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए सरकार के पास 202 विधायक हैं। भाजपा के पास 102 विधायक हैं, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना के पास 38 विधायक और अजीत पवार की नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के पास 40 विधायक हैं।

विपक्षी खेमे की स्थिति

विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) में कुल 71 विधायक हैं। कांग्रेस 37 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि शिवसेना (उद्धव गुट) के पास 16 विधायक और शरद पवार की NCP-SP के पास 12 विधायक हैं। विपक्षी खेमे में अन्य छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी शामिल है।

खाली सीटें
महाराष्ट्र विधानसभा में इस बार 15 सीटें खाली हैं, जो चुनावी समीकरण को और भी दिलचस्प बना देती हैं।

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चैंपियंस ट्रॉफी 2025 की मेजबानी को लेकर बढ़ी आईसीसी की परेशानी

क्रिकेट जगत में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा यदि किसी एक चीज को लेकर देखने को मिल रही है तो वह साल 2025 के शुरू में होने वाले आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी टूर्नामेंट की। सात सालों के बाद हो रही इस टूर्नामेंट की मेजबानी का अधिकार पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी पीसीबी को मिला है, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने आईसीसी को ये आधिकारिक जानकारी दे दी है कि टीम इंडिया पाकिस्तान खेलने नहीं जाएगी। इसके बाद आईसीसी ने टूर्नामेंट को हाइब्रिड मॉडल पर कराने का प्रस्ताव पीसीबी को दिया है लेकिन वह इसके लिए भी तैयार नहीं है। ऐसे में इस टूर्नामेंटको किसी और देश में आयोजित करने पर भी आईसीसी विचार कर है, जिसमें रेस में सबसे आगे साउथ अफ्रीका का नाम चर्चा में आया था लेकिन अब वहां भी टूर्नामेंट को कराना मुश्किल लग रहा है।
इस वजह से साउथ अफ्रीका में नहीं हो सकती चैंपियंस ट्रॉफी- पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी को साफतौर पर जहां चैंपियंस ट्रॉफी 2025 को हाइब्रिड मॉडल पर कराने से मना कर दिया है तो वहीं इस स्थिति में इसे कहीं और आयोजित करने का ही विकल्प बचता है। इस रेस में सबसे आगे नाम साउथ अफ्रीका का आया था लेकिन वहां पर साल 2025 की शुरूआत में एसए-20 का तीसरा सीजन खेला जाना है जिसके आधिकारिक शेड्यूल का ऐलान किया जा चुका है। एसए-20 की शुरूआत 9 जनवरी से होगी और फाइनल मुकाबला 8 फरवरी को खेला जाएगा, जिसमें इसके मैच सेंचुरियन, गकेबरहा, डरबन, पार्ल, जोहान्सबर्ग और केपटाउन में खेले जाएंगे। वहीं चैंपियंस ट्रॉफी के आधिकारिक शेड्यूल का ऐलान भले ही नहीं किया गया है लेकिन इसकी शुरूआत 19 फरवरी से होना तय माना जा रहा है, ऐसी स्थिति में अफ्रीका में यदि टूर्नामेंट कराए जाने का फैसला लिया जाता है तो इन स्टेडियम की पिच मुकाबलों के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं होंगी। वहीं आईसीसी अपने टूर्नामेंट के लिए पहले से ही पिच और स्टेडियम को लेकर अपनी तैयारी करती है ताकि उनके मानक अनुसार चीजों को तैयार किया जा सके, लेकिन इस परिस्थिति में ऐसा कुछ भी नहीं होता दिख रहा है, जिससे टूर्नामेंट को साउथ अफ्रीका में भी कराया जाना काफी मुश्किल है।

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सोने, चांदी और काष्ठ से बने 108 रथों की यात्रा निकली, दोपहर 3 बजे तक रूट रहेगा डायवर्ट

जैन समाज द्वारा आयोजित धार्मिक अनुष्ठान में आज सुबह से 108 रथों की सामूहिक रथयात्रा निकल रही है। विजय नगर से शुरू होकर यह यात्रा अलग-अलग मार्गों से होकर निकल रही है। इस समारोह में हजारों की संख्या में समाजजन शामिल हो रहे हैं।
रथयात्रा वाले मार्ग पर यातायात प्रभावित न हो, इसलिए यातायात विभाग ने रूट प्लान जारी किया है। यह प्लान दोपहर तीन बजे तक लागू रहेगा। चल समारोह विजय नगर से शुरू हुआ है जो रसोमा चौराहा, एलआईजी चौराहा, एमआईजी थाने के सामने से होते हुए पाटनीपुरा, आस्था टॉकीज, भमोरी, आरके एलाइनमेंट, रसोमा चौराहा से होते हुए वापस विजयनगर चौराहा पर समाप्त होगा। शहर में पहली बार देश के विभिन्न राज्यों से आए 108 रजत-स्वर्ण और अन्य रथ एक साथ नजर आए। अष्टाह्निका पर्व में विजय नगर बिजनेस पार्क पर आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन पर सुबह आठ बजे रथ यात्रा का आयोजन किया गया। इनमें दो स्वर्ण और 35 से ज्यादा रजत रथ शामिल हैं। साथ ही 150 वर्ष पुराने रथ भी शामिल हैं। इनकी ऊंचाई 10 से 20 फीट तक है। रथ बिहार, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश से लाए गए हैं।

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पुलिस कमिश्नर ने वायरलेस सेट पर लगाई फटकार…थानों का 75 प्रतिशत बल रात्रि गश्त में शामिल हो…

अधिकारियों में मचा हड़कंप

हिन्दुस्तान मेल, इंदौर
शहर में सालों से सुस्त पड़ी रात्रिकालीन गश्ती दल की सारी सुस्ती पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह के एक मैसेज ने दूर कर दी है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि 13 नवंबर को ह्लहिंदुस्तान मेलह्व प्रकाशित खबर के बाद पुलिस कमिश्नर का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने विभाग में कामचोरी कर रहे अधिकारियों की वायरलैस सेट पर ही लू उतार दी। कड़े शब्दों में लताड़ लगाते हुए कहा कि सभी थानों के कुल स्टफ का 75 प्रतिशत बल रात्रिकालिन गश्त में शामिल होगा। इस निर्देश को सुनने के बाद कई पुलिस अधिकारियों के हाथ पैर फूल गए और वे अधिकारी भी मैदान में दिखाई दिए जो सालों से रात्रि गश्त छोड़कर घर में चैन की निंद निकालते थे।
सीपी से फटकार मिलने के बाद थाना प्रभारियों ने अपने स्टाफ पर खीज उतारी और उन्हें रात्रिकालीन गश्त को लेकर निर्देश दिए कि गश्त में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं गश्त का मतलब सिर्फ गाड़ी में बैठकर घूमना नहीं है, बल्कि जहां अपराध या गैरकानूनी गतिविधियां चल रही हैं उन पर लगाम कसना है। भले पैदल जाना पड़े तो भी गलियों में जाओ। सीपी की फटकार का असर यह था कि 13 नवंबर की रात को कई बड़े अधिकारी रात्रिगश्त के दौरान अपने-अपने क्षेत्र की गलियां झांक रहे थे।

घर जाकर सो जाते थे… अब नहीं सो पाएंगे
नाम न छापने की शर्त पर एक पुलिसकर्मी ने बताया कि सीपी की फटकार के बाद विभाग में दो अलग-अलग चचार्ओं का जोर है। पहली चर्चा तो यह है कि इस तरह के आदेश हर बार होते है, दो-चार दिन की सख्ती दिखती है इसके बाद फिर वहीं पुराना ढर्रा शुरू हो जाता है। वहीं कुछ का कहना है कि नहीं, यह संतोष सिंह साहब हैंङ्घएक बार जिद पकड़ ली तो सबको ठीक करके ही दम लेंगे। इस सबके बीच वह पुलिसकर्मी खुश है जो लगातार ईमानदारी से अपनी ड्यूटी और रात्रिकालीन गश्त करते थे। इन पुलिसकर्मियों का कहना है कि साब (संतोष सिंह) ने अच्छी फटकार लगाई है, कई लोग बहुत दिनों से रात्रिगश्त की आड़ में घर जाकर सो जाते थे, अब इनको ड्यूटी ( रात्रिगश्त) करना पड़ेंगी। क्योंकि यह पुलिसकर्मी थाना प्रभारियों के चहेते हैं और टीआई साब के करीबी होकर उनके बाहर मामले संभालते है।

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कागजों से बाहर निकलो सरकार और देखो…न्यूनतम को भी तरस रहे अन्नदाता…

इंदौर। किसानों के हित में कागजों पर बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाने वाले सरकारी अधिकारियों और नेता-मंत्री को जरा जमीन पर उतरकर हकीकत भी जानना चाहिए। कागजों पर तो सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सोयाबीन की खरीदी कर रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस बात का उल्लेख अपने भाषणों में भी कर रहे हैं लेकिन हकीकत उसके उलट है। किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम मूल्य भी नहीं मिल रहा हैङ्घअधिकत्म मूल्य तो दिन में सपने देखने जैसा है। मालवा सोयाबीन उत्पादन का गढ़ है लेकिन वर्तमान में इंदौर के साथ ही प्रदेश भर के सोयाबीन उत्पादन किसान परेशान है। क्योंकि उन्हें उनकी फसल का लागत मूल्य ही नहीं मिल रहा है। प्रदेश सरकार ने कुल उत्पादन में से मात्र 26 फीसदी ही खरीदने की बात कही है उसमें भी 12 फीसदी से अधिक नमी वाली फसलों को सख्ती से रिजेक्ट किया जा रहा है। सोयाबीन के साथ कपास उत्पादन करने वाले किसानों की फसल भी एमएसपी से नीचे ही बिक रही है। इससे पहले मूंग बोने वाले किसानों को भी अपनी फसल काफी कम कीमतों पर बेचना पड़ी थी। कुल मिलाकर प्रदेश का अन्नदाता परेशान हैं और सरकार के मंत्रियों और सत्तधारी दल के नेताओं को कोई फर्क नहीं पड़ रहा।

मात्र 9718 ने कराया पंजीयन…
एमएसपी पर सोयाबीन बेचने के लिए 25 सितंबर से 20 अक्टूबर तक पंजीयन किए गए थे। उसमें काफी कम किसानों ने पंजीयन करवाया है। मप्र के 3 लाख 43 हजार किसानों ने पंजीयन करवाया है। वहीं इंदौर जिले से 9718 किसानों ने एमएसपी पर अपनी फसल बेचने के लिए पंजीयन करवाया है। किसान नेताओं का कहना है कि पंजीयन में काफी परेशानियां हो रही थी जिसके चलते इंदौर जिले में मात्र 10 फीसदी किसानों ने ही पंजीयन करवाया है। इंदौर जिले में सोयाबीन खरीद के लिए 15 केंद्र बनाए गए हैं। वर्तमान में पंजियन बंद कर दिया गया है।

इंदौर के साथ ही मप्र के सोयाबीन उत्पादक किसान अपनी फसल का उचित दाम नहीं मिलने से परेशान है। मप्र की मंडियों में सोयाबीन की कीमतें वर्तमान में एमएसपी से नीचे ही चल रही है। प्रदेश सरकार द्वारा एमएसपी 4892 रुपए प्रति क्विंटल पर 25 अक्टूबर से सोयाबीन खरीदी प्रारंभ होने का दावा किया है। लेकिन हकिकत इसके उलट है। मंडियों में किसानों की फसल एमएसपी पर बिक ही नहीं पा रही है। एमएसपी पर खरीदी के लिए मप्र में 460 उपार्जन केन्द्र बनाए गए है। लेकिन अधिकांश केन्द्रों पर सरकारी खरीदी अब तक प्रारंभ ही नहीं हुई है। उल्लेखनीय है कि मप्र सरकार की मांग पर केन्द्र सरकार ने 13.68 लाख टन सोयाबीन के उपार्जन की अनुमति प्रदान की है।
फिलहाल जिन केन्द्रों पर सरकारी खरीद प्रारंभ है वहां पहुंचने वाले किसानों को नियमों का हवाला देकर माल खरीदने से इंकार किया जा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा 12 फीसदी तक नमी वाले सोयाबीन को खरीदने की बात कही गई है। वहीं जिन किसानों के सोयाबीन में नमी की मात्रा 12 फीसदी से दशमलव एक फीसदी भी ज्यादा है, नियमों का हवाला देकर उनका सोयाबीन नहीं लिया जा रहा है। इस संबंध में मप्र के किसान संगठनों में खासा रोष देखा जा रहा है। किसान नेताओं का कहना है कि आधा फीसदी नमी ज्यादा होने पर भी माल रिजेक्ट किया जा रहा है। जबकि अधिकारियों को भी यह पता है कि तुलाई करने के बाद गोदाम तक जाते-जाते नमी में काफी कमी आ जाती है। किसान नेताओं का कहना है कि मप्र की मंडियों में किसानों को सोयाबीन का एमएसपी रेट 4892 मिलना तो दूर की कौड़ी है, हकिकत में तो किसानों को उससे बहुत कम दामों पर अपनी फसल व्यापारियों को बेचना पड़ रही है। वर्तमान में मप्र की मंडियों में सोयाबीन के भाव 3500 से 4400 रुपए प्रति क्विंटल के मध्य बोले जा रहे हैं जो एमएसपी मूल्य 4892 से काफी कम है। इंदौर मंडी में सोयाबीन के भाव 3500 से 4250 रुपए हैं। वहीं उज्जैन में सोयाबीन का औसत मूल्य 4250 रुपए है। देवास, धार, खंडवा, खरगोन सहित संपूर्ण मालवा निमाड़ की सभी मंडियों में सोयाबीन के भाव एमएसपी से काफी नीचे हैं। प्लांट रेट भी 4500 से 4600 रुपए प्रति क्विंटल के मध्य है। मप्र की मंडियों में फिलहाल सोयाबीन की औसत आवक 65 से 70 हजार बोरी प्रतिदिन हो रही है।

52 लाख उत्पादन, खरीदेंगे सिर्फ 13 लाख टन..

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया (सोपा) के अनुसार इस बार मप्र में लगभग 52 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ है। जबकि मप्र सरकार द्वारा एमएसपी पर मात्र 13.68 लाख टन सोयाबीन का उपार्जन करने की बात कही है। जो कि कुल सोयाबीन उत्पादन का मात्र 26 फीसदी ही है। शेष 74 फीसदी सोयाबीन जो कि 38.42 लाख टन होता है उसे सरकार नहीं खरीदेगी। इन किसानों को कम कीमत पर अपनी फसल व्यापारियों को बेचना ही पड़ेगी। वहीं सरकार ने एमएसपी पर 13.68 लाख टन सोयाबीन खरीदने के लिए जो कवायद प्रारंभ की है उसमें भी अधी खरीदी ही होने की बात जानकारों द्वारा की जा रही है।

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