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पद्मश्री डॉ. पुरु दाधीच को आज राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के हाथों से भारत सरकार के सर्वोच्च ’संगीत नाटक अकादमी रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इंदौर। पद्मश्री डॉ. पुरु दाधीच को आज राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के हाथों से भारत सरकार के सर्वोच्च ’संगीत नाटक अकादमी रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार किसी भी समय देश के केवल 40 जीवित विभूतियों को दिया जाता है। अगला पुरस्कार इन महान कलाकारों में से किसी के निधन पर ही अगले को मिलता है। प्रदेश के किसी कलाकार को यह सर्वोच्च पुरस्कार 1988 के बाद अब मिला है।

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अपराध मुक्त इंदौर 2030 अभियान का शुभारंभ 14 अगस्त को।

संस्था न्यायाश्रय के अनुसार अपराध की रोकथाम केवल कानून और प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। इसी सोच के साथ “अपराध मुक्त इंदौर 2030” को एक व्यापक जन-अभियान के रूप में आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया है।

अभियान का शुभारंभ समारोह 14 अगस्त 2026 को शाम 4:30 बजे जिला कोर्ट ऑडिटोरियम, नई बिल्डिंग, इंदौर में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में श्री शंकर लालवानी, माननीय सांसद, इंदौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। वहीं इंदौर जिला न्यायालय के माननीय प्रधान न्यायाधीश, अधिवक्ता श्री राकेश पाल, अध्यक्ष इंदौर अभिभाषक संघ तथा अधिवक्ता श्री मनीष यादव, अध्यक्ष मध्य प्रदेश हाई कोर्ट संगठन विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

कार्यक्रम के संयोजक एवं संस्था न्यायाश्रय के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पंकज वाधवानी ने बताया कि अभियान का मूल उद्देश्य नागरिकों में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ अपराध की रोकथाम में समाज की भूमिका को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और अपराध मुक्त शहर का निर्माण तभी संभव है, जब प्रशासन, न्याय व्यवस्था, अधिवक्ता समुदाय, युवा वर्ग और आम नागरिक मिलकर इस दिशा में कार्य करें।

संस्था न्यायाश्रय ने नागरिकों से अपील की है कि वे “अपराध मुक्त इंदौर 2030” के संकल्प से जुड़ें और सुरक्षित, जागरूक एवं न्यायपूर्ण इंदौर के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।

संस्था न्यायाश्रय
“न्याय सबके लिए”

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देवास में धूमधाम से मनाया गया श्री अरविंद जन्मोत्सव, भैया जी जोशी ने दिया अखंड भारत का संदेश

देवास में धूमधाम से मनाया गया श्री अरविंद जन्मोत्सव, भैया जी जोशी ने दिया अखंड भारत का संदेश

देवास। महायोगी श्री अरविंद के जन्मोत्सव पर शनिवार, 9 अगस्त को देवास में भव्य आध्यात्मिक समागम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम श्री अरविंद सोसाइटी, पांडिचेरी के केंद्र देवास, कालिंदी अलौकिक सामाजिक परमार्थ ट्रस्ट एवं सहयोगी संस्थाओं के संयुक्त तत्वाधान मेंडकी रोड स्थित कलश गार्डन में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निवर्तमान सरकार्यवाह एवं कार्यकारी मंडल सदस्य आदरणीय भैया जी जोशी थे। उन्होंने “अखंड भारत – संस्कृत राष्ट्र चेतना का स्वरूप” विषय पर मार्गदर्शन देते हुए कहा कि महायोगी अरविंद का संपूर्ण जीवन योग, राष्ट्र निर्माण, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। हमें उनके विचारों को आत्मसात कर समग्र योग के पथ पर आगे बढ़ना होगा।

कार्यक्रम में विधायक गायत्री राजे पवार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। अध्यक्षता महंत रितेश दास बैरागी जी ने की।

इस अवसर पर अरविंद सोसाइटी उज्जैन शाखा के विभाग उपाध्यक्ष एवं शक्ति धाम न्यास के सचिव राकेश शर्मा तथा अरविंद सोसाइटी मध्य प्रदेश के अध्यक्ष मनोज शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं नागरिक उपस्थित थे।

आयोजन के दौरान 51 शक्तिपीठ की परिकल्पना एवं उसके भावी स्वरूप का प्रस्तुतीकरण भी किया गया। यह परिकल्पना भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, शक्ति उपासना, सेवा और राष्ट्रभाव को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

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जस्टिस यशवंत केस: जांच समिति ने तीनों आरोपों में माना दोषी, घर से मिले नोटों पर नहीं मिला संतोषजनक जवाब

जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड: जांच समिति ने तीनों आरोप सही माने, साजिश के सबूत नहीं मिले

नई दिल्ली: पूर्व इलाहाबाद हाईकोर्ट जज जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कैश कांड में जांच समिति ने अपने निष्कर्ष में उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को सही माना है। समिति ने नकदी की मौजूदगी, साक्ष्यों के संरक्षण और जस्टिस वर्मा के स्पष्टीकरण को लेकर गंभीर टिप्पणियां की हैं। हालांकि, रिपोर्ट में किसी साजिश के संकेत मिलने की बात नहीं कही गई है।

स्टोररूम में मिले ₹500 के नोटों पर उठे सवाल

समिति के मुताबिक, नई दिल्ली के 30, तुगलक क्रिसेंट स्थित जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास के स्टोररूम में बड़ी संख्या में ₹500 के नोट मिले थे। जस्टिस वर्मा यह स्पष्ट नहीं कर सके कि नकदी वहां कैसे पहुंची, उसका स्रोत क्या था और उसका मालिक कौन था। समिति ने इस स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना।

साक्ष्यों के संरक्षण में भी गंभीर चूक

रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टोररूम में मौजूद भौतिक साक्ष्यों को उचित तरीके से सुरक्षित नहीं रखा गया। समिति के अनुसार, स्टोररूम को कानूनी प्रक्रिया के तहत सील करने और निरीक्षण से पहले उसकी स्थिति में बदलाव हो गया था। बाद में वहां मौजूद नकदी के नोट भी उपलब्ध नहीं रहे। समिति ने नकदी के गायब होने की स्थिति को भी स्पष्ट नहीं माना।

जस्टिस वर्मा के जवाब को बताया असंतोषजनक

समिति ने 22 मार्च 2025 को जस्टिस वर्मा की ओर से दिए गए जवाब और बाद के उनके रुख की भी समीक्षा की। रिपोर्ट के अनुसार, उनका जवाब परिस्थितियों के अनुरूप स्पष्ट और संतोषजनक नहीं था। समिति ने स्वतंत्र गवाहों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से तुलना के बाद उनके जवाब को टालमटोल वाला माना।

मार्च 2025 में सामने आया था मामला

यह मामला मार्च 2025 में उस समय सामने आया था, जब जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास के स्टोररूम में आग लगने के बाद बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की बात सामने आई। इसके बाद नकदी के स्रोत और स्वामित्व को लेकर सवाल उठे। जस्टिस वर्मा ने नकदी से किसी भी संबंध से इनकार करते हुए इसे साजिश की संभावना से जोड़ा था।

मामले की जांच के लिए लोकसभा अध्यक्ष की ओर से तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दी थी। जस्टिस वर्मा ने 9 अप्रैल 2026 को राष्ट्रपति को इस्तीफा सौंप दिया था। इसके बावजूद जांच रिपोर्ट को संसद के समक्ष रखने की प्रक्रिया जारी रही।

निष्कर्ष: समिति ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ तीनों आरोपों को सही माना है, लेकिन मामले में किसी साजिश के सबूत नहीं पाए। रिपोर्ट अब संसद में पेश किए जाने के बाद आगे की संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा बनेगी।

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टांडा क्षेत्र के 91 गांवों में नल-जल योजना बेदम, ग्रामीण गंदा पानी पीने को मजबूर

48 पंचायतों के 476 टोले-मजरों तक नहीं पहुंचा पानी, महिलाओं को 2-3 किमी दूर से लाना पड़ रहा पानी; दूषित पानी से बीमारी फैलने का खतरा

टांडा/धार। अशोक मांझी। हिंदुस्तान मेल संवाददाता

गंधवानी विधानसभा क्षेत्र के बाग विकासखंड की 48 पंचायतों के 91 गांवों और करीब 476 टोले-मजरों में नल-जल मिशन योजना का लाभ नहीं पहुंच पाने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई गांवों में आज भी लोग झिरों, नालों और दूर स्थित कुओं से पानी लाकर पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी के कारण गंभीर बीमारियों का खतरा बना हुआ है।

ग्रामीणों के अनुसार, अधिकारियों और ठेकेदारों की लापरवाही के चलते कई स्थानों पर नल कनेक्शन नहीं हुए हैं। वहीं कुछ गांवों में योजना का काम शुरू ही नहीं हुआ या कागजों तक सीमित रह गया है। महिलाओं और बच्चों को पानी के लिए दो से तीन किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ रहा है।

विधानसभा में भी उठ चुका है मामला

गंधवानी विधायक एवं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार इस मामले को विधानसभा में उठा चुके हैं। उन्होंने नल-जल मिशन में प्रदेश स्तर पर करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाते हुए सरकार पर मामले को दबाने और आदिवासी ग्रामीणों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

इन गांवों में नहीं पहुंचा नल का पानी

ग्राम पंचायत झाई के झड़ामली, गुराडिया और पीपलदलिया, ग्राम पंचायत नरवाली के गुड़ा, गढ़रावत और नरवाली सहित कई गांवों में ग्रामीण नल-जल योजना के लाभ से वंचित हैं। ग्राम पंचायत चमझार, घोड़दलिया, बगोली और सिंगाचोरी में भी योजना का काम नहीं होने की शिकायत सामने आई है।

ग्राम पंचायत जेतगढ़ के खोखरिया फलिया में परिवार नाले का पानी पीने को मजबूर हैं। इसी पंचायत के गातला गांव के डोडवा फलिया में करीब 40 परिवार झिरे के पानी पर निर्भर हैं। ग्राम पंचायत मगदी के खड़ापुरा में करीब 30 परिवार दूषित झिरे का पानी पी रहे हैं।

तरसिंग गांव के तड़वीपुरा के करीब 40 परिवारों को करीब दो किलोमीटर दूर स्थित कुएं से पानी लाना पड़ रहा है।

आजादी के बाद भी नल का इंतजार

ग्राम पंचायत झाई के गुराडिया के पटेल फलिया के ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के बाद से आज तक उनके घरों तक नल नहीं पहुंचा है। यहां लोग वर्षों से झिरे का पानी पी रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है—“गांव में नल भी नहीं है और जल भी नहीं।”

जिले के अंतिम छोर पर बसे गांवों की अलग परेशानी

ग्राम पंचायत काकड़वा के करछट गांव के बामनिया फलिया के ग्रामीणों को अलीराजपुर जिले की चूल्या नदी से पानी लाना पड़ता है। नदी गांव से करीब दो से तीन किलोमीटर दूर है। इसी तरह छड़ावद गांव के लोग भी चूल्या नदी से पानी लाकर अपनी जरूरत पूरी कर रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक पानी लाने के रास्ते में जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है।

कलेक्टर को कई बार दिया ज्ञापन, नहीं हुई सुनवाई

बाग जनपद अध्यक्ष सकरीबाई भूरिया ने बताया कि नल-जल योजना को लेकर कई बार कलेक्टर को आवेदन और ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक गरीब आदिवासी परिवारों की समस्या का समाधान नहीं हुआ। बड़दा क्षेत्र में भी ग्रामीणों को योजना का लाभ नहीं मिलने और गंदे झिरे का पानी पीने की शिकायत है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नल-जल मिशन की जमीनी स्थिति की जांच कराई जाए, अधूरे कार्य तत्काल पूरे किए जाएं और सभी टोले-मजरों तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाया जाए। साथ ही दूषित पानी से संभावित बीमारी के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी तत्काल जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाए।

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