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Indore Breaking: शुभेंद्र गौड़ व नयन सनी पर अनुशासनात्क कार्रवाई, भाजयुमो से हटाया

भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष वैभव पंवार की मौजूदगी में नगर अध्यक्ष सौगात मिश्रा पर हमला करने वाले प्रदेश मंत्री शुभेंद्र गौड़ व नयन सनी पर अनुशासनात्क कार्रवाई की गई है। दोनों को प्रदेश मोर्चा से हटाया। सोमवार को इस मामले में पार्टी के आलाकमान ने यह निर्देश जारी किए।

भारतीय जनता युवा मोर्चा की बैठक के बाद शनिवार को मोर्चा के दो गुट आपस में भिड़ गए थे। शहर अध्यक्ष सौगात मिश्रा ने मोर्चा के प्रदेश मंत्री शुभेंद्र गौड़ के पिता को लेकर अनर्गल टिप्पणी कर दी थी। इससे नाराज गौड़ और उनके गुट के कार्यकर्ताओं ने मिश्रा की बुरी तरह पिटाई कर दी। इस दौरान वहां मौजूद मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वैभव पंवार का कुर्ता भी फाड़ दिया। विवाद की खबर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा तक भी पहुंची है। गौड़ भाजपा विधायक मालिनी गौड़ के भतीजे हैं।

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भू-माफियाओं पर शिकंजा

साढ़े 8 करोड़ की सरकारी जमीन कराई मुक्त, एक दर्जन
आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज, दो गिरफ्तार………

शासकीय और अन्य जमीनों पर अवैध कब्जा करने वाले भू-माफियाओं के विरुद्ध जिला प्रशासन व पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके चंगुल से साढ़े आठ करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत की जमीन मुक्त कराई गई है। माफियाओं ने सरकारी जमीन को अपनी बताकर प्लॉट भी बेचना शुरू दिए थे। मामले में एक दर्जन आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है।
इंदौर जिले की शासकीय और अन्य जमीनों पर अवैध कब्जा करने वाले भू-माफिया और दबंगों पर नकेल कसते हुए कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी के निर्देशन में प्रशासन द्वारा प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में बड़ी कार्रवाई की गई है। शासकीय भूमि ग्राम बांगड़दा सर्वे नंबर 332 रकबा 4.440 हेक्टेयर एवं अन्य शासकीय भूमि को अवैध रूप से विक्रय करने के मामले में जांच के बाद थाना एरोड्रम में 12 आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई।
कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी के निर्देशन में जिला प्रशासन, नगर निगम एवं डीसीपी आदित्य मिश्रा के निर्देश पर पुलिस विभाग द्वारा 29 सितंबर 2022 तथा 8 जून 2023 से लगातार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान लगभग 18 मकान, निर्माणाधीन मकान एवं शासकीय भूमि पर काटे गए प्लॉट का अतिक्रमण हटाया गया। इस कार्रवाई के बाद शासन की लगभग एक हेक्टेयर भूमि, जिसका मूल्य लगभग 8 करोड़ 60 लाख रुपए हैं, भू-माफियाओं से मुक्त कराई गई है। प्रशासन ने करोड़ों की जमीन मुक्त कराने के साथ भूमाफिया व अवैध रूप से शासकीय भूमि विक्रय करने के मामले में दलालों, विक्रेताओं एवं षड्यंत्र में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी पुलिस थाना एरोड्रम में अपराध क्रमांक 389/2023 धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी भारतीय दण्ड विधान की धाराओं के तहत कुल 12 आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है।

इनके खिलाफ केस दर्ज
जिन आरोपियों के विरुद्ध केस दर्ज किया गया है, उनमें जफर पिता अब्दुल, नितिन पिता मनोहरलाल जायसवाल, हासम पिता कासम खां, अजमेरी खान पिता कासम खान, पुरषोत्तम पिता छोटेलाल शर्मा, माधव पिता गिरधारीलाल, केशव उर्फ मामा तिवारी, रूपेश कुमार पिता सुरेशचंद पिंगले, मनोज जायसवाल, पूजा जाट, विशाल उर्फ काकू तथा अनिल खेची आदि शामिल हैं।

सूचना मिटाकर
किया कब्जा
बताया गया कि शासकीय भूमियों को सुरक्षित करने के लिए पूर्व में नगर निगम द्वारा दीवारों पर सूचना लिखकर पेंटिंग करवाई गई थी कि यह शासकीय भूमि है इसकी खरीदी-बिक्री नहीं की जाए। भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो गए कि उन्होंने दीवारों पर लिखी सूचना मिटा दी गई। प्रशासन ने अब भूमि के चारों तरफ तथा गलियों में पेंटिंग करके अनेक स्थानों पर शासकीय भूमि की सूचना लिखवाई गई है।

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लैब तैयार : एमडीएमए सैंपल की जांच अब स्थानीय स्तर पर होगी

केमिकल ड्रग्स को पकड़ने के बाद पुलिस मादक पदार्थ की तस्करी करने वालों पर तुरंत और सख्त कार्रवाई कर सके इसलिए मध्यप्रदेश की फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) में एनडीपीएस की नई लैब बनकर तैयार हो गई है। लैब में एमडीएमए जैसे खतरनाक ड्रग्स के सैंपल हो सकेंगे। नए ड्रग्स की संख्या 100 से अधिक है। सैंपल मिलान के लिए एफएसएल को नारकोटिक्स से एमडीएमए के सैंपल चाहिए, इसके लिए प्रस्ताव भेजा गया है। सैंपल आते ही लैब काम करना शुरू कर देगी।
शशिकांत शुक्ला, डायरेक्टर, एफएसएल के अनुसार एनडीपीएस के नए ड्रग्स के सैंपल के लिए लैब में जीसीएमएसएमएस और एफटीआईआर मशीन लग चुकी हैं। नए ड्रग्स के सैंपल के लिए नारकोटिक्स को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। दरअसल, युवा गांजा और भांग जैसे नशे को छोड़कर एमडीएमए जैसे खतरनाक केमिकल ड्रग्स का इस्तेमाल करने लगे हैं। लेकिन इनके पकड़े जाने के बाद सैंपल सीएफएसएल भेजना पड़ते थे। अब नए ड्रग्स के सैंपल के लिए एफएसएल मुख्यालय में एनडीपीएस की लैब में एमडीएमए जैसे खतरनाक 100 से ज्यादा नए केमिकल ड्रग्स का सैंपल शुरू हो जाएंगे।
पहली लैब भोपाल एफएसएल में बनकर तैयार हो गई है। नए प्रकार के ड्रग्स सैंपल के लिए लैब में जीसीएमएसएमएस और एफटीआईआर मशीन की लग चुकी हैं। लैब में यूवी मशीन पहले से ही उपलब्ध है। एक लैब में जीसीएमएसएमएस और एफटीआईआर मशीन लगाने का खर्च लगभग ढाई करोड़ रुपए है। प्रदेश की चार लैब सागर, भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में मादक पदार्थ के सैंपल होते हैं। नई तकनीक की जीसीएमएसएमएस और एफटीआईआर में नए ड्रग्स का सैंपल मिलाने करने में केवल 15 मिनट का समय लगेगा।

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सीखो कमाओ योजना : निजी संस्थाओं में प्रशिक्षण पर 75% राशि देगी सरकार

मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना के तहत निजी संस्थाओं में प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को राज्य सरकार 75 प्रतिशत राशि देगी। शेष 25 प्रतिशत राशि संबंधित निजी संस्थान देगा। राज्य सरकार ने निजी क्षेत्र में मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना के पोर्टल में भी इसके प्रावधान कर दिए हैं। इसके तहत 18 से 29 साल के युवाओं को निजी क्षेत्र में देश-प्रदेश के ऐसे औद्योगिक प्रतिष्ठान एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठान जिनके पास पैन और जीएसटी नंबर हैं, उनके द्वारा ही प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। योजना प्रोपराइटरशिप, कंपनी, पार्टनरशिप, ट्रस्ट, समिति आदि समस्त श्रेणी के निजी संस्थानों पर लागू होगी। प्रतिष्ठान अपने कुल कार्य-बल के 15 प्रतिशत की संख्या तक प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दे सकते हैं। जिन प्रतिष्ठानों में कम से कम 20 लोग नियमित रूप से कार्यरत हों, उनके कुल कार्य-बल की गणना ईपीएफ जमा करने के आधार पर की जाएगी। युवाओं को स्टायपेंड एक वर्ष तक दिया जाएगा।

बैंक में जमा करनी
होगी राशि
प्रतिष्ठान को स्टायपेंड की 25 प्रतिशत राशि चयनित युवा के बैंक खाते में जमा करनी होगी तथा शेष 75 प्रतिशत राशि राज्य सरकार डीबीटी के तहत युवा के बैंक खाते में जमा करेगी। प्रतिष्ठान अपनी ओर से निर्धारित राशि से अधिक स्टायपेंड देने के लिए स्वतंत्र होंगे। प्रशिक्षण की निर्धारित अवधि तक यह स्टायपेंड दिया जाएगा।

15 जून से पंजीयन और जुलाई से शुरू होंगे युवाओं के प्लेसमेंट
मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश के युवाओं के लिए लर्न एंड अर्न की तर्ज पर रोजगार दिलाने के साथ ही कौशल सिखाया जाएगा। योजना में प्रशिक्षण देने वाली संस्थाओं का पंजीयन सात जून से शुरू हो चुका है और युवाओं का पंजीयन 15 जून से शुरू होगा। युवाओं का प्लेसमेंट 15 जुलाई से होगा। राज्य शासन और ट्रेनिंग देने वाली संस्थाओं के मध्य 31 जुलाई को अनुबंध होगा। योजना में युवाओं को एक अगस्त से प्रशिक्षण दिया जाना शुरू हो जाएगा।
किसे, कितना स्टायपेंड
12वीं या उससे कम कक्षा में उत्तीर्ण युवा को आठ हजार रुपये, आइटीआई उत्तीर्ण युवा को आठ हजार 500 रुपये, डिप्लोमा उत्तीर्ण को नौ हजार रुपये एवं स्नातक उत्तीर्ण या इससे उच्च को 10 हजार रुपये प्रतिमाह स्टायपेंड दिया जाएगा।

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आइंस्टीन से ज्यादा IQ वाले क्रिमिनल की मौत, FBI 20 साल तलाशती रही

अमेरिका के बर्कले यूनिवर्सिटी में महज 25 साल की उम्र में एक नौजवान असिस्टेंट प्रोफेसर बना। इसका कद स्कोर 167 था, जो मशहूर साइंटिस्ट अल्बर्ट आइंस्टीन से भी 7 पॉइंट ज्यादा था। एक रोज अचानक ये प्रोफेसर अपनी नौकरी छोड़कर गायब हो गया।
अगले 17 साल तक ये शख्स अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों में छोटे-बड़े धमाके करता है। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी ऋइक को इसे पकड़ने के लिए सबसे खर्चीला आॅपरेशन चलाना पड़ा। 20 साल की मशक्कत के बाद ये प्रोफेसर जंगल में एक झोपड़ी से पकड़ा गया और तब से जेल में सजा काट रहा था।
शनिवार यानी 10 जून को नॉर्थ कैरोलिना की जेल में 81 साल के इस शख्स की मौत हो गई।
अमेरिका के शिकागो शहर में थियोडोर रिचर्ड कजिंस्की नाम के एक बिजनेसमैन थे। 22 मई 1942 को उनकी पत्नी वांडा कजिंस्की ने एक बच्चे को जन्म दिया। इस बच्चे का नाम रखा गया- टेड कजिंस्की।
टेड ने हाई स्कूल तक की पढ़ाई शिकागो से की। वह बचपन से ही लोगों से कम बातचीत करता था और खुद में ही मस्त रहता था। एक बार टेड से पिता ने पूछा कि इतने दिनों बाद तुमसे मिलने तुम्हारी चाची आई है। तुम अपनी चाची से बातचीत क्यों नहीं करते हो? इस पर टेड ने जवाब दिया- चाची मेरी बातों को और मुझे समझ ही नहीं पाएंगी तो मैं उनसे क्या बात करूं।
महज 16 साल की उम्र में टेड कजिंस्की को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप मिल गई। यहां से बैचलर करने के बाद टेड ने आगे की पढ़ाई मिशिगन यूनिवर्सिटी से पूरी की। ऐसा कहा जाता है कि टेड से पीएचडी की परीक्षा में जो सवाल पूछे गए थे, वो उसके लिए बेहद आसान थे।
उसने ऐसा रिसर्च पेपर लिखा कि उसके कई प्रोफेसर भी नहीं समझ पाए। पूरे अमेरिका में उसके रिसर्च को समझने वाले सिर्फ 10 से 12 लोग ही थे। टेड कजिंस्की ने 1969 में कैलिफोर्निया के बर्कले यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर नौकरी शुरू की। तब उसकी उम्र महज 25 साल थी। कुछ समय तक नौकरी करने के बाद एक रोज अचानक टेड ने इस्तीफा दे दिया। 1971 में नौकरी छोड़ने के बाद टेड कजिंस्की, लिंकन शहर के एक जंगल में झोपड़ी बनाकर रहने लगा। उसके इस फैसले से न सिर्फ उसका परिवार, बल्कि हर कोई दंग रह गया। टेड ने ऐसा फैसला क्यों लिया, ये किसी को पता नहीं था। अमेरिका की टॉप यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाला प्रोफेसर अब अच्छी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर ऐसे जंगल में रह रहा था, जहां बिजली-पानी कुछ भी नहीं था।

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