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रामानंद सागर वाली ‘रामायण’ का अगले माह से फिर प्रसारण

नई दिल्ली, एजेंसी। रामानंद सागर का फेमस टीवी सीरियल ‘रामायण’ फैंस के लिए एक बार फिर से टीवी पर लौट रहा है। शेमारू टीवी ने अनाउंस किया है कि पौराणिक शो 3 जुलाई से टेलीकॉस्ट होना शुरू होगा। 80 के दशक के टीवी शो में अरुण गोविल और दीपिका चिखलिया ने राम और सीता का किरदार निभाकर जनता के दिलों पर राज किया था। सुनील लहरी ने लक्ष्मण का किरदार निभाया था। ‘रामायण’ को दोबारा टेलीकॉस्ट करने की अनाउंसमेंट ऐसे समय में हुई है, जब रामानंद सागर की ‘रामायण’ की तुलना नई फिल्म ‘आदिपुरुष’ से की जा रही है। हिंदू महाकाव्य ‘रामायण’ पर आधारित बताई जाने वाली ‘आदिपुरुष’ की जमकर आलोचना हो रही है। कहा जा रहा है कि फिल्म में राम, सीता, हनुमान और रावण को गलत तरीके से चित्रित किया गया है।

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दतिया की बुहारा नदी में ट्रक गिरा शादी में जा रहे पांच मजदूर मृत

दतिया में एक मिनी ट्रक नदी में गिर गया। मिनी ट्रक में करीब 50 मजदूर सवार थे। नदी से पांच के शव निकाल लिए गए हैं। इनमें 3 शव बच्चों के हैं। मृतकों की संख्या बढ़ भी सकती है। कई लोग लापता हैं। इसके अलावा 30 से 35 लोग घायल भी बताए जा रहे हैं।
हादसा दुरसड़ा थाना अंतर्गत गांव बुहारा में मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात करीब 3 बजे हुआ। ट्रक पुल पार कर रहा था, तभी बेकाबू होकर पलट गया। एनडीआरएफ और एसडीईआरएफ के 12 लोगों की टीम रेस्क्यू में जुटी है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक ट्रक में सवार होकर मजदूर ग्वालियर के भेलेटी गांव से टीकमगढ़ के जतारा गांव में शादी में जा रहे थे। निकाले गए शवों को जिला अस्पताल ले जाया गया है। बताया जा रहा है कि पुल निर्माणाधीन है। कलेक्टर संजय कुमार, एसपी प्रदीप मिश्रा, एसडीएम मौके पर मौजूद हैं।
गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने घटना पर दु:ख जताया। उन्होंने कहा- खटीक समाज के लोग बलेहरी के रहने वाले हैं। बेटी की शादी करने जतारा (टीकमगढ़) मिनी ट्रक से जा रहे थे। बुहारा नदी में रपटे में ट्रक का पहिया उतर गया। ट्रक नदी में चला गया।
मृतकों के परिजन को चार-चार लाख रुपए की सहायता दी जाएगी। घायलों को 50-50 हजार रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। कांग्रेस सांसद अरुण यादव ने हादसे को लेकर दु:ख जताया है।

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जाते-जाते प्रधानमंत्री चुनाव का मुद्दा दे गए

नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भोपाल में कॉमन सिविल कोड की जोरदार पैरवी की। इससे विपक्षी दलों के साथ-साथ मुस्लिम संगठनों में भी खलबली मच गई है। आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने आनन-फानन में देर रात इमर्जेंसी मीटिंग की। करीब 3 घंटे चली बैठक में तय किया गया कि इस मुद्दे पर लॉ कमिशन को एक ड्रॉफ्ट तैयार करके भेजा जाएगा। आॅनलाइन हुई मीटिंग में प्रस्तावित कानून का विरोध करने की रणनीति पर चर्चा हुई। वर्चुअल मीटिंग में आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष सैफुल्लाह रहमानी, मौलाना खालिद राशिद फिरंगी महली समेत एआईएमपीएलबी के कई सदस्य और वकील शामिल हुए।

समान नागरिक संहिता क्या है
समान नागरिक संहिता का जिक्र संविधान के अनुच्छेद 44 में है। अनुच्छेद 36 से 51 तक राज्यों को कई सुझाव दिए गए हैं। इसी में से एक है समान नागरिक संहिता। यह देश के हर नागरिक को विवाह, तलाक, गोद और उत्तराधिकार जैसे मामलों में समान अधिकार देता है… चाहे व्यक्ति किसी भी धर्म या समुदाय से हो, देश का कानून सभी पर समान रूप से लागू होगा। वर्तमान में अलग-अलग धर्म और समुदायों के व्यक्तिगत कानून हैं। यह कानून सभी धर्म-समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों को एकरूपता प्रदान करने का सुझाव देता है। इसे लागू करने की जिम्मेदारी राज्यों की होगी।

मप्र में चुनावी मायने
सीएसडीएस के संस्थापक प्रो. संजय कुमार कहते हैं कि अगर समान नागरिक संहिता लागू होती है तो ये व्यापक तौर पर मुसलमानों को ही प्रभावित करेगी, क्योंकि यह मुख्य रूप से शरीयत को चुनौती देगी। आंशिक रूप से ईसाइयों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा। इससे हिंदुओं की बहुसंख्यक आबादी का झुकाव भाजपा की तरफ होगा। इस सवाल पर कि केंद्र खुद सामने ना आकर राज्यों को आगे क्यों कर रही है? जबकि स्पष्ट है कि राज्यों के पास इसे लागू कर पाने का अधिकार नहीं है।

महिलाओं को भी पैतृक संपत्ति में हिस्सा
महिलाओं को भी पैतृक संपत्ति में हिस्सा मिलना शुरू हो जाएगा। कोई भी पारसी महिला अगर दूसरे धर्म में शादी करती है तो उनके व्यक्तिगत कानून के हिसाब से उन्हें पैतृक संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलता।
शरीयत को मिलेगी चुनौती
बहुविवाह करने वाले मुसलमानों (7% आबादी) और आदिवासियों (21% आबादी) पर इसका ज्यादा प्रभाव पड़ेगा। तलाक और उत्तराधिकार को लेकर इनके व्यक्तिगत कानून बहुसंख्यक हिंदुओं से अलग हैं।
लिव इन रिलेशनशिप होगा प्रभावित
यूसीसी के ड्रॉफ्ट में लिव इन रिलेशनशिप को लेकर भी कुछ कानूनी प्रक्रियाएं होंगी, लेकिन यूसीसी आ जाने के बाद डिक्लेरेशन अनिवार्य होगा।

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हिंदू राष्ट्र का आह्वान और भक्ति दिवस पर उत्तम ज्ञान………………

प्रदेश की चुनावी राजनीति में दोनों दलों के लिए आदिवासी मतदाता बेहद प्रिय हो जाते हैं। एक सप्ताह के बीच दो चर्चित संत पश्चिम निमाड़ क्षेत्र में थे। धर्म और राजनीति का घालमेल समझने वाले लोगों में दोनों ही संतों को लेकर आम धारणा है कि आरएसएस के अधिक समीप हैं। इनमें एक तो हैं महामंडलेश्वर ईश्वरानंद (उत्तम स्वामी) जी। वो कांग्रेस शासन नेताओं के जितने प्रिय थे, उससे अधिक संघ-भाजपा के नजदीक और मार्गदर्शक हैं। बाकी दलों में भी उनके प्रति आस्था रखने वाले कम नहीं हैं। दूसरे हैं, बागेश्वर धाम वाले पं. धीरेंद्र शास्त्री, जो बीते एक दशक से भी कम समय में अपने पर्चों के कारण प्रसिद्धि के शिखर पर जा पहुंचे हैं। हिंदू राष्ट्र को लेकर उनकी आक्रामक शैली ने एक तरह से उन्हें संघ विचारों का ब्रांड एंबेसडर ही बना दिया है।
बात जब हिंदू राष्ट्र की चल रही हो और दोनों एक-दूसरे से सहमत नहीं हों, तो पश्चिम निमाड़ के लोगों को आश्चर्य ही तो होगा। बड़वानी में पं. शास्त्री का दरबार लगा था, बाकी जगहों की तरह यहां भी उन्होंने दो बार हिंदू राष्ट्र बनाने की बात दोहराते हुए कहा कि तुम सब हमारा साथ दो, हम सब मिलकर हिंदू राष्ट्र बनाएंगे। उनका आह्वान यहां के लोग भूले भी नहीं थे कि समीपस्थ खरगोन जिले में कांग्रेस नेता अरुण, सचिन यादव ने उपमुख्यमंत्री रहे पिता सुभाष यादव की पुण्यतिथि को भक्ति दिवस के रूप में मनाया। इस समारोह में संत-महात्मा तो खूब थे, लेकिन महामंडलेश्वर ईश्वरानंद (उत्तम स्वामी) मुख्य आकर्षण थे। उन्होंने पं. धीरेंद्र शास्त्री के हिंदू राष्ट्र वाले आह्वान को एक तरह से नासमझी करार देते हुए कह दिया कि उनको पता नहीं है, हिंदू राष्ट्र समाप्त नहीं हुआ है। दुनिया में हिंदुस्तान था और रहेगा। वे (पं. धीरेंद्र शास्त्री) कुछ लोगों को संतुष्ट करने के लिए इस तरह की बातें कर रहे हैं।
यादव बंधुओं द्वारा हर वर्ष भक्ति दिवस मनाने की घोषणा भी की गई है। इस आयोजन में जिस तरह से संघ विचारों के नजदीकी संतों की मौजूदगी रही है, उसे देख कर कांग्रेस चौकन्नी हो गई है कि कहीं यादव बंधुओं की भक्ति भाजपा के रंग में एकाकार होने के लिए तो नहीं मचल रही है। वैसे भी एक पखवाड़े से मुख्यमंत्री, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, गृहमंत्री अरुण यादव पर डोरे डालने में लगे हुए हैं।

चुनाव मैदान में निपटने की धमकी
इंदौर के गोम्मटगिरि तीर्थ जमीन से अपने मंदिर के लिए रास्ता मांग रहे गुर्जर समाज वाला विवाद हल नहीं होने से अब जैन समाज चुनाव मैदान में सरकार को सबक सिखाने का दंभ भर रहा है। संतों के वीडियो संदेश, ज्ञापन आदि का सरकार पर असर ना होने के बाद जैन मतदाता बहुल क्षेत्रों से समाज द्वारा पचास प्रत्याशी उतारे जाएंगे। महावीर जयंती पर हर साल अलग-अलग जुलूस निकालने वाले दोनों समाज प्रत्याशियों को जिताने में कितनी एकजुटता दिखाएंगे, ये तो वक्त बताएगा।
साहित्यकारों की भी चिंता है
प्रदेश सरकार को चुनावी साल में साहित्यकारों-कलाकारों की भी चिंता हो गई है। अब दैवीय विपत्ति, बीमारी दुर्घटना का शिकार होने पर उन्हें भी 50 हजार तक की वित्तीय सहायता मिलेगी। सरकार ने कलाकार-साहित्यकार कल्याण कोष तो पहले से गठित कर रखा है, अब उसमें इस प्रावधान को जोड़ने के साथ दिव्यांगता के उपचार या मौत पर परिवार को हर माह एक हजार की सहायता भी मिलेगी।

सेटिंग वाली सीटों
पर अब शाह की नजर
भाजपा नेतृत्व ने प्रदेश की हर सीट की समीक्षा में पाया है कि कुछ सीटें ऐसी हैं, जहां प्रदेश भाजपा के नेता कमजोर प्रत्याशी उतार कर कांग्रेस प्रत्याशी की जीत में अदृश्य मदद करते रहे हैं। राघोगढ़ में दिग्विजय या जयवर्धन सिंह, लहार में डॉ. गोविंद सिंह, पिछोर में केपी सिंह, भीतरवार (ग्वालियर) में लाखन सिंह यादव, डबरा में सुरेश राजे हर चुनाव में कैसे जीत जाते हैं? समीक्षा में सारे तथ्य सामने आने के बाद इन सीटों पर प्रत्याशी चयन का अंतिम फैसला अमित शाह की मर्जी से होगा। इसके साथ कमलनाथ का छिंदवाड़ा। इस संसदीय क्षेत्र से लंबे समय से कमलनाथ जीते हैं। अभी जब कमलनाथ सीएम बने थे, तब यहां से नकुलनाथ सांसद बने थे। वैसे, कमलनाथ एक बार 1997 में हुए उपचुनाव में भाजपा के सुंदरलाल पटवा से हार गए थे, लेकिन अगले साल (1998 में) फिर हुए चुनाव में पटवा भी कमलनाथ से हार गए थे।

जयकारा लगाइए आ रही हैं शौर्य यात्राएं
धर्मांतरण के मुद्दे पर तो विहिप और बजरंग दल बोलते ही रहे हैं। केंद्रीय प्रबंध समिति की रायपुर में हुई बैठक में शौर्य यात्राओं का निर्णय लिया गया है। चुनाव से एक-दो महीने पहले पूरे देश में शौर्य यात्राएं निकालने का निर्णय किया है, तो आश्चर्य क्यों होना चाहिए। जहां-जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां तो ऐतिहासिक स्वागत होगा ही, ताज्जुब तो तब होना चाहिए, जब बजरंग दल पर प्रतिबंध की मानसिकता वाले कांग्रेस नेता और कर्नाटक में भी धर्मांतरण और परिवारों में विघटन का कारण बन रहे ओटीटी प्लेटफार्म के विरुद्ध इन शौर्य यात्राओं के लिए पलक-पांवड़े बिछाए जाएं।

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जारी हुआ अपकमिंग फिल्म का पोस्टरअब ‘बस्तर’ का सच दिखाएंगे सुदीप्तो सेन……….

जाने-माने डायरेक्टर सुदीप्तो सेन की डायरेक्ट की गई फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ ने धमाल मचा दिया। फिल्म बॉक्स आॅफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई। केरल की अनकही कहानी को दिखाती इस फिल्म को बैन तक कर दिया गया, लेकिन मेकर्स ने हार न मानते हुए अपनी रिसर्च के सच को सबके सामने रखा। ‘द केरल स्टोरी’ के बाद सुदीप्तो सेन एक और सच लोगों के सामने लाने के लिए तैयार हैं, जिसका नाम ‘बस्तर’ होगा।
सोमवार को विपुल अमृतलाल शाह की प्रोडक्शन कंपनी सनशाइन पिक्चर्स के बैनर तले ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी गई। विपुल अमृतलाल शाह ने ही ‘द केरल स्टोरी’ को प्रोड्यूस किया था। अब एक बार फिर सुदीप्तो सेन के साथ वह सिल्वर स्क्रीन पर अपना जादू चलाने के लिए तैयार हैं। मेकर्स ने ‘बस्तर’ फिल्म के साथ अपना सेकेंड कोलैबोरेशन अनाउंस किया है।

‘बस्तर’ में दिखेगा
अनकहा सच
फिल्म का पोस्टर जारी कर दिया गया है। इस अपकमिंग मूवी के बारे में ज्यादा कुछ तो नहीं बताया गया, लेकिन यह पक्का है यह मूवी रियल इंसीडेंट पर आधारित होगी। फिल्म के पोस्टर पर ही लिखा गया है, छुपा सच जो नेशन को हिला कर रख देगा। फिल्म अगले साल 5 अप्रैल को रिलीज होगी। ‘बस्तर’ फिल्म का निर्माण लास्ट मॉन्क मीडिया के सहयोग से सनशाइन पिक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। मूवी की स्टार कास्ट को लेकर भी कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
इन फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं शाह
विपुल शाह प्रोड्यूसर होने के साथ-साथ डायरेक्टर भी हैं। उन्होंने ‘आंखें’, ‘नमस्ते लंदन’, ‘लंदन ड्रीम्स’, ‘एक्शन रीप्ले’ जैसी फिल्मों को डायरेक्ट किया है। इसके अलावा शाह ने टीवी शो ‘भाई, भैया और ब्रदर’ और ‘हम परदेसी हो गए’ का भी निर्देशन किया है।

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