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क्या लक्ष्य की ओर है अर्थव्यवस्था?

हाल ही में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने भारत के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के आंकड़े जारी किए हैं। कहा जा रहा है कि यह अनुमान से काफी बेहतर रहे हैं। भारत ने पिछली तिमाही में 4.4 प्रतिशत की तुलना में 6.1 प्रतिशत की जीडीपी बढ़त दर्ज की है। चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर ने अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। आरबीआई ने पहली तिमाही के दौरान 5.1 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया था, वहीं पूरे वित्त वर्ष 2022-23 के लिए जीडीपी की बढ़त 7.2 प्रतिशत रही है। जीडीपी की यह बढ़त आरबीआई के 7 प्रतिशत के अनुमान से भी अधिक है। जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद किसी एक वर्ष में देश में पैदा होने वाले सभी सामानों और सेवाओं की कुल वैल्यू के बराबर होता है। जीडीपी आर्थिक गतिविधियों के स्तर को दिखाता है और इससे यह पता चलता है कि किन क्षेत्रों की वजह से इसमें तेजी या गिरावट आई है। जीडीपी के आंकड़े अगर कम या सुस्त हैं तो पता चलता है कि देश की इकोनॉमी सुस्त पड़ रही है। भारत एक विकासशील देश होने के कारण हर साल अधिक जीडीपी विकास दर हासिल करे, यह जरूरी है, क्योंकि हमारी आबादी दुनिया में सबसे अधिक है और इनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त उत्पादन भी बहुत जरूरी है। जीडीपी में कृषि सेक्टर का योगदान इस बार बढ़ा है और इस क्षेत्र में तेज बढ़त दर्ज हुई है। पिछली तिमाही में कृषि क्षेत्र की विकास दर 4.7 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गई है।
भारत में कृषि क्षेत्र का जीडीपी में योगदान 20 फीसदी के करीब है और लगभग 40 फीसदी जनसंख्या इससे जुड़ी हुई है। सरकार ने 8 मुख्य क्षेत्रों के विकास का डाटा भी जारी कर दिया है। कोर सेक्टर अप्रैल 2023 में 3.5 फीसदी की दर से बढ़ा है, जो पिछले माह के 3.6 प्रतिशत की तुलना में थोड़ा कम है। आठ कोर सेक्टर्स में कृषि क्षेत्र 5.5 प्रतिशत, माइनिंग सेक्टर 4.3 फीसदी, निर्माण क्षेत्र 10.4 प्रतिशत, बिजली 6.9 फीसदी, तो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 4.5 फीसदी और वित्तीय क्षेत्र 7.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। वहीं व्यापार और होटल 9.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। लगातर दो तिमाहियों में गिरावट के बाद इस बार तिमाही को जीडीपी विकास दर में वृद्धि हुई है। यह एक सुखद अनुभव है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नए सिरे से उछाल के संकेत हैं, जबकि बेहतर दक्षता को अपनाने से सेवा क्षेत्र के प्रदर्शन में भी सुधार हुआ है। भारत में घरेलू खपत और निवेश को कृषि और उससे संबंधित गतिविधियों की मजबूत संभावनाओं और उपभोक्ता आत्मविश्वास में मजबूती का लाभ मिल रहा है। वहीं वर्ष 2022-23 में रियल जीडीपी (2011-12 की कीमतों पर) 160.06 लाख करोड़ रुपए रही है। सांख्यिकी मंत्रालय ने कहा है कि 2022-23 के दौरान वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि 2021-22 में 9.1 प्रतिशत की तुलना में इस बार 7.2 प्रतिशत रही है। जीएसटी संग्रह, बिजली खपत जैसे आंकड़े अप्रैल में आर्थिक गतिविधियां बने रहने के संकेत दे रहे हैं। हालांकि निर्यात और आयात कम हुआ है। इससे कुछ जोखिम उत्पन्न हुआ है। मानसून और वैश्विक स्तर पर राजनीतिक जोखिम को छोड़कर देश की आर्थिक वृद्धि दर 2023-24 में 6.5 फीसदी के अनुमान से ऊपर रह सकती है। फिलहाल भारत आर्थिक, वित्तीय और राजकोषीय स्थिरता के साथ सतत आर्थिक वृद्धि की कहानी पेश करने में सक्षम है। इस समय विनिर्माण क्षेत्र में तेजी स्थिति को और सुखद बना रही है, हालांकि उद्योगों की वृद्धि की रफ्तार अप्रैल 2023 में सुस्त पड़कर छह महीने के निचले स्तर 3.5 फीसदी रह गई। मुख्य रूप से कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद और बिजली के उत्पादन में कमी से बुनियादी उद्योग की वृद्धि की रफ्तार धीमी हुई है। वहीं कोयला, उर्वरक और बिजली क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन से पूरे वित्त वर्ष 2022-23 में बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर 7.7 फीसदी रही। वैसे वित्त वर्ष 2022-23 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 6.4 फीसदी रहा, जो लक्ष्य के अनुरूप है।
कर और गैर-कर राजस्व संग्रह बेहतर रहने से राजकोषीय घाटे को थामने में मदद मिली। इसके साथ कुछ आर्थिक चुनौतियां भी हैं। इनमें सबसे बड़ी चिंता निर्यात की है। हालांकि हमारा आयात भी घटा है, लेकिन निर्यात उस स्तर पर नहीं आया है, जिसे देखकर उत्साहित हुआ जा सके। रूस-यूक्रेन युद्ध तथा जर्मनी जैसे कुछ देशों में मंदी का आना भी एक कारण है। हमारे निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिका को जाता है, लेकिन वहां की आर्थिक स्थिति चरमराई हुई है और मंदी की आहट सुनाई देती रहती है। इसके अलावा एक बड़ी समस्या जो हमारी अर्थव्यवस्था को खाए जा रही है, वह है बेरोजगारी। देश में रोजगार उस हिसाब से नहीं बढ़ रहे हैं जिसकी जरूरत है। आंकड़े हैरान करने वाले हैं और बेरोजगारी की दर जो जनवरी में 7.14 फीसदी थी, वह अप्रैल में 8.11 फीसदी तक जा पहुंची है यानी विकास के बावजूद नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं। यह संख्या बहुत बड़ी है। सिर्फ इतना ही नहीं, करोड़ों लोग अब रोजगार की तलाश से बाहर हो चुके हैं, क्योंकि उन्हें रोजगार मिलने की कोई संभावना नहीं दिखती। बेरोजगारी के आंकड़े जीडीपी में अच्छी प्रगति के बावजूद अगर बढ़ रहे हैं तो आने वाले समय के लिए यह और चिंता का विषय है। एक बड़ी बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों तथा कम इनकम ग्रुप के लोगों की मांग में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। यह वर्ग बहुत बड़ा है। यहां देखने लायक बात है कि भारतीय अर्थव्यवस्था खपत पर आधारित है और जितनी खपत बढ़ेगी उतना ही ग्रोथ होगा और इस बार ऐसा ही हुआ। खपत बढ़ने से ही कारखानों के पहिए तेजी से दौड़ने लगे हैं, लेकिन अभी जो आंकड़े आ रहे हैं वे बता रहे हैं कि कम इनकम ग्रुप वाले लोग कम खरीददारी कर रहे हैं।
इसका उदाहरण यह है कि कम कीमत वाली कारों और बाइकों की बिक्री में अभी भी तेजी नहीं आई है, जबकि महंगी कारों तथा महंगी बाइकों की बिक्री तेजी से बढ़ी है। अगर हम कोरोना आने के पहले यानी 2018-19 के आंकड़े देखें तो पाएंगे कि अभी तक इनकी बिक्री उस स्तर पर नहीं पहुंची। उदाहरण के लिए इंट्री लेवल स्कूटरों की बिक्री अभी 2018-19 की तुलना में 28 फीसदी कम है। इसी तरह मोटरसाइकिलों की बिक्री में 38 फीसदी गिरावट आई है। इस तरह की गिरावट सस्ती कारों की बिक्री में भी आई है। यह सांकेतिक है कि कम आय वर्ग के लोगों की क्रय शक्ति घटी है। हालांकि देश में महंगाई की दर कुछ घटी है, लेकिन कई जरूरी चीजों के दाम बढ़े भी हैं। उनके कारण भी कम इनकम ग्रुप के लोगों की क्रय शक्ति घटी है। स्कूलों में फीस का बढ़ना आम बात है। इसका भी असर मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास की क्रय शक्ति पर पड़ रहा है। इस समय जब पूरी दुनिया मंदी के खतरे से जूझ रही है, तो भारत में जीडीपी की वृद्धि दर दिखाती है कि हम सही लक्ष्य की ओर जा रहे हैं। फिर भी देश को एक मजबूत विश्व आर्थिक शक्ति बनने के लिए संभावित आर्थिक चुनौतियों का समाधान तलाशना और तराशना होगा।

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निगमकर्मियों ने पहले 500, 1000, फिर मांगे थे 10 हजार……..

रविवार देर रात पटेल ब्रिज पर कचरा फेंकने को लेकर हुए विवाद और सरेराह मारपीट के तीन और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। ये वीडियो युवकों की पिटाई के ठीक पहले के बताए जा रहे हैं। वीडियो में नगर निगम कर्मी ब्रिज पर खड़े युवकों के पास आते ही कचरा फैलाने के नाम पर बदसलूकी करते दिख रहे हैं। युवकों द्वारा जब यह बताया गया कि कचरा कहां है तो निगमकर्मी नहीं बता पाए, लेकिन पहले 500, फिर 1000 और फिर 10 हजार रुपए का चालान बनाने के नाम पर विवाद करने लगे। इसके बाद विवाद बढ़ा तो निगम के दूसरे कर्मचारी भी वहां पहुंचे और युवकों की पिटाई कर दी।

वीडियो में विवाद की शुरुआत
16 सेकंड के एक वीडियो में निगमकर्मी कह रहा है कि तुम कचरा फैला रहे हो। इस पर युवक कह रहे हैं कि कचरा कहां है बताओ। युवकों ने निगमकर्मी से पूछा कि आप कौन से जोन से हैं। इस पर निगमकर्मी ने कोई जवाब नहीं दिया।
दूसरे वीडियो में निगमकर्मी पर पैसे मांगने का आरोप
47 सेकंड के दूसरे वीडियो में युवक राहगीरों से कह रहे हैं कि निगमकर्मी हमसे पैसे मांग रहे हैं। इस पर एक निगमकर्मी कहते नजर आ रहा है कि 80 हजार कमाता हूं, ऐसी बात मत करो। युवकों ने कहा कि कितने पैसे चाहिए बताओ तो निगमकर्मी ने साथी से कहा कि पीसीआर बुलाओ। 1.14 मिनट के तीसरे वीडियो में निगमकर्मी तीन युवकों सुनील यादव, दीपक जाट व मोनू को अलग-अलग पकड़कर पीटते नजर आ रहे हैंं। इसमें ये खुद को छुड़ाकर दूसरे साथी को बचाने की कोशिश करते हैं।
55 सेकंड के एक अन्य वीडियो में निगमकर्मी सुनील यादव, दीपक जाट व मोनू पर टूट पड़ते हैं और लगातार डंडे बरसा रहे हैं।

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सड़क पर बह गया हजारों लीटर नर्मदा जल

हिन्दुस्तान मेल, इंदौर। इस भीषण गर्मी में कई रहवासी क्षेत्र जल संकट से जूझ रहे हैं। वे पानी के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। दूसरी ओर, नगर निगम की अनदेखी के कारण हजारों लीटर नर्मदा का पानी पानी सड़क पर बह गया। स्कीम 140 स्थित पासपोर्ट आॅफिस के सामने मंगलवार रात नर्मदा की पाइप लाइन फूटने से हजारों लीटर पानी सड़क पर बह गया। इस दौरान लोग परेशान होते रहे। सूचना के बावजूद कोई भी निगम अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

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हेल्थ डायरेक्टोरेट के कर्मचारी तीन दफ्तरों में होंगे शिफ्ट

सतपुड़ा भवन में अग्निकांड के बाद आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजना और स्वास्थ्य संचालनालय का दफ्तर खाक हो गया। घटना के बाद मंगलवार को सामान्य प्रशासन विभाग ने सतपुड़ा भवन में लगने वाले सभी विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों की छुट्टी घोषित कर दी थी। अब आज (बुधवार को) भी इन सभी विभागों के अफसरों की छुट्‌टी रही। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके आदेश भी जारी कर दिए हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को बैठने के लिए अलग-अलग दफ्तरों में व्यवस्था की गई है।
अधिकारियों की इस तरह होगी बैठक व्यवस्था
ल्ल स्वास्थ्य संचालक दिनेश श्रीवास्तव
4 कर्मचारियों सहित बैठेंगे। ल्ल एडिशनल डायरेक्टर मल्लिका निगम नगर भोपाल अविज्ञप्त शाखा के 16 कर्मचारियों के साथ कामकाज करेंगी। ल्ल अपर संचालक अजीजा सर शाह जफर विज्ञप्त शाखा के 20 कर्मचारियों
के साथ बैठेंगी। ल्ल वरिष्ठ संयुक्त संचालक वंदना खरे परिवार कल्याण और निवेश शाखा के 8 कर्मचारियों के साथ
अपना कामकाज करेंगी। ल्ल वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. अभय खरे कार्यालय स्थापना और सामान्य शाखा के 20 कर्मचारियों के
साथ बैठेंगे। ल्ल संयुक्त संचालक डॉ. राजीव बजाज नर्सिंग शाखा के 14 कर्मचारियों के साथ में बैठेंगे। ल्ल संयुक्त संचालक डॉ. प्रज्ञा तिवारी लोक सेवा गारंटी, जन स्वास्थ्य शाखा के कर्मचारियों के साथ बैठेंगी। ल्ल संयुक्त संचालक डॉ. एमएस सागर शिकायत शाखा के 13 कर्मचारियों के साथ बैठेंगे। ल्ल उपसंचालक दिव्या पटेल लीगल सेल के 8 कर्मचारियों के साथ बैठेंगी। ल्ल डायरेक्टर डॉ. राधिका गुप्ता भंडार शाखा के चार कर्मचारियों के साथ अपना कामकाज करेंगी। वे यहीं से आरटीआई, परिवहन शाखा के कर्मचारियों के साथ अपना कामकाज संचालित करेंगी। ल्ल डिप्टी डायरेक्टर डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह चौहान आईडीएसपी, आयोग शाखा का काम संचालित करेंगे। ल्ल उप संचालक डॉ. हिमांशु जायसवार विधानसभा, समन्वय, जन शिकायत शाखा के 13 कर्मचारियों के साथ सीएमएचओ भोपाल के आॅफिस और आयुष्मान भारत के कार्यालय में अपना कामकाज करेंगे। ल्ल एनएचएम आॅफिस में बैठने वाले अधिकारियों की बैठक व्यवस्था में बदलाव करते हुए स्वास्थ्य संचालनालय के अफसरों के बैठने की व्यवस्था बनाते हुए कक्ष आवंटन किया गया है। ल्ल एनएचएम आॅफिस में बैठने वाले अधिकारियों की बैठक व्यवस्था में बदलाव करते हुए स्वास्थ्य संचालनालय के अफसरों के बैठने की व्यवस्था बनाते हुए कक्ष आवंटन किया गया है।

ये अधिकारी इन
दफ्तरों में बैठेंगे
8अस्पताल प्रशासन के संचालक डॉ. पंकज जैन हेल्थ कॉपोर्रेशन के दफ्तर में अस्पताल प्रशासन शाखा के 20 कर्मचारियों के साथ कामकाज संचालित करेंगे।
8अतिरिक्त संचालक शैलेंद्र कुमार सिंह एनएचएम आॅफिस में वित्त और भुगतान शाखा के 27 कर्मचारियों के साथ बैठेंगे।
8मुख्य अभियंता केसी यादव भवन शाखा के 15 कर्मचारियों के साथ एनएचएम आॅफिस में बैठेंगे।
8डिप्टी डायरेक्टर डॉ. रूबी खान राज्य रक्ताधान परिषद, लैब और ब्लड सर्विसेज शाखा के साथ कर्मचारियों के साथ एनएचएम आॅफिस में बैठेंगी।
8डिप्टी डायरेक्टर डॉ. योगेश कौरव आईटी सेल के कर्मचारियों के साथ हेल्थ कॉपोर्रेशन में काम संभालेंगे।
8डिस्पेंसरी शाखा के डॉ. प्रांजल चतुवेर्दी सतपुड़ा भवन के सेकंड फ्लोर पर बैठ कर कामकाज संचालित रखेंगे।

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नीट-यूजी का परिणाम घोषितप्रबंजन- बोरा वरुण टॉपर

नई दिल्ली,एजेंसी। देश के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए होने वाले नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट यूजी-2023) का परिणाम मंगलवार को जारी कर दिया गया। परीक्षा में तमिलनाडु के प्रबंजन जे और आंध्र प्रदेश के बोरा वरुण चक्रवर्ती ने 99.99 पर्सेंटाइल के साथ नीट परीक्षा में टॉप किया है। परीक्षा में सबसे अधिक 1.39 लाख विद्यार्थी उत्तर प्रदेश से सफल रहे हैं। वहीं, जबलपुर की श्रद्धा बडलामानी राव ने प्रदेश में टॉप किया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से 7 मई को आयोजित परीक्षा में 20.38 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। 11.45 लाख उत्तीर्ण हुए हैं। पिछले साल 9.93 लाख अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए थे। इस बार परीक्षा में सभी श्रेणी के अभ्यर्थियों की कट-आॅफ में भी बढ़ोतरी हुई है। जनरल में कटआॅफ 137 रही। यह 2022 में 117 थी। एससी, एसटी और ओबीसी का कटआॅफ 107 रही, यह 2022 में 93 थी। देश में 695 मेडिकल कॉलेजों में 106333 सीटें हैं। काउंसलिंग से पहले सीटें घटने का भी डर है। एनएमसी ने जांच में 40 कॉलेजों में खामियां मिली। बाद में 20 की मान्यता जारी रखी, शेष 20 कॉलेजों के मामले लंबित हैं।

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