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पर्यावरण जागरूकता अभियान कार्यक्रम में बोलीं पद्मश्री जनक पलटा

नौलखा, मंगलमूर्ति नगर में रहवासी संघ एवं पर्यावरण संरक्षण अनुसंधान एवं विकास केंद्र (सीपीईआरडी) के संयुक्त तत्वावधान में पर्यावरण जागरूकता अभियान कार्यक्रम का आयोजन पद्मश्री जनक पलटा के मुख्य आतिथ्य एवं समाजसेवी अनिल भंडारी, डॉ. सुषमा रावत, रमेश मंगल एवं अश्विन लखोटिया के विशेष आतिथ्य में किया गया।
जनक पलटा ने कहा कि प्रदूषण फैलाने वाली वस्तुओं का अनिवार्यत: बहिष्कार करना चाहिए। इसके बिना पर्यावरण संरक्षण संभव नहीं हो सकता। अनिल भंडारी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को इस दिशा में पहल करने की बात कही। संयोजक एसएन गोयल समाधान ने बताया कि अतिथियों एवं मंगलमूर्ति धाम, शिव मोती नगर एवं वनश्री कॉलोनी सहित चारों कॉलोनियों के रहवासियों ने पौधे रोपकर उनकी देखभाल एवं पेड़ बनने तक सुरक्षा करने का संकल्प लिया।

नियमित रूप से चलेगा कार्यक्रम
संस्था सचिव प्रो. रमेश मंगल ने सीपीईआरडी की पर्यावरण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का ब्योरा दिया। पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम कॉलोनी की पिंकी गोयल, अंशुल अग्रवाल, नेहा अग्रवाल एवं प्रियंका गोयल द्वारा नियमित रूप से चलाया जाएगा। इस अवसर पर आयोजित चित्रकला स्पर्धा में राजकुमार सुहाने, गोपाल गोयल एवं अनिल कुमार चौधरी की ओर से विजेता बच्चों को पुरस्कृत किया गया। पर्यावरण संरक्षण में उपयोगी वस्तुओं का उत्पादन करने वाले तीनों उद्योगपतियों की दिलचस्पी के लिए उन्हें भी सम्मानित किया। इस अवसर पर समाजसेवी बालकृष्ण छाबछरिया, रिटायर्ड न्यायाधीश नरेंद्र सतसंगी, विजय पंचायती, एनडी बंसल, रमेश बंसल आदि उपस्थित थे।

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क्या यही है स्वच्छता…? वार्ड 30 गंदगी का गढ़…

हिन्दुस्तान मेल, इंदौर। विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 2 के वार्ड 30 में कृष्णबाग कॉलोनी में गंदगी का अंबार लगा है। यहां ड्रेनेज का पानी सड़कों पर बहता रहता है। इसी गंदगी के बीच रहवासियों को गुजरना होता है। पार्षद और उनके पति से रहवासियों ने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई हल नहीं निकला। बता दें कि वार्ड में ड्रेनेज का कार्य भी चल रहा है, इसके बावजूद यहां कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उधर, मालवीय नगर में जहां से ड्रेनेज का कार्य शुरू हुआ था, वहां अभी तक सड़क की मरम्मत नहीं हुई। कृष्णबाग कॉलोनी में कई बार पार्षद को ड्रेनेज की सफाई का कहा गया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। नगर निगम में भी शिकायत की गई, लेकिन कोई हल नहीं निकला।

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क्या लक्ष्य की ओर है अर्थव्यवस्था?

हाल ही में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने भारत के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के आंकड़े जारी किए हैं। कहा जा रहा है कि यह अनुमान से काफी बेहतर रहे हैं। भारत ने पिछली तिमाही में 4.4 प्रतिशत की तुलना में 6.1 प्रतिशत की जीडीपी बढ़त दर्ज की है। चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर ने अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। आरबीआई ने पहली तिमाही के दौरान 5.1 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया था, वहीं पूरे वित्त वर्ष 2022-23 के लिए जीडीपी की बढ़त 7.2 प्रतिशत रही है। जीडीपी की यह बढ़त आरबीआई के 7 प्रतिशत के अनुमान से भी अधिक है। जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद किसी एक वर्ष में देश में पैदा होने वाले सभी सामानों और सेवाओं की कुल वैल्यू के बराबर होता है। जीडीपी आर्थिक गतिविधियों के स्तर को दिखाता है और इससे यह पता चलता है कि किन क्षेत्रों की वजह से इसमें तेजी या गिरावट आई है। जीडीपी के आंकड़े अगर कम या सुस्त हैं तो पता चलता है कि देश की इकोनॉमी सुस्त पड़ रही है। भारत एक विकासशील देश होने के कारण हर साल अधिक जीडीपी विकास दर हासिल करे, यह जरूरी है, क्योंकि हमारी आबादी दुनिया में सबसे अधिक है और इनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त उत्पादन भी बहुत जरूरी है। जीडीपी में कृषि सेक्टर का योगदान इस बार बढ़ा है और इस क्षेत्र में तेज बढ़त दर्ज हुई है। पिछली तिमाही में कृषि क्षेत्र की विकास दर 4.7 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गई है।
भारत में कृषि क्षेत्र का जीडीपी में योगदान 20 फीसदी के करीब है और लगभग 40 फीसदी जनसंख्या इससे जुड़ी हुई है। सरकार ने 8 मुख्य क्षेत्रों के विकास का डाटा भी जारी कर दिया है। कोर सेक्टर अप्रैल 2023 में 3.5 फीसदी की दर से बढ़ा है, जो पिछले माह के 3.6 प्रतिशत की तुलना में थोड़ा कम है। आठ कोर सेक्टर्स में कृषि क्षेत्र 5.5 प्रतिशत, माइनिंग सेक्टर 4.3 फीसदी, निर्माण क्षेत्र 10.4 प्रतिशत, बिजली 6.9 फीसदी, तो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 4.5 फीसदी और वित्तीय क्षेत्र 7.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। वहीं व्यापार और होटल 9.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। लगातर दो तिमाहियों में गिरावट के बाद इस बार तिमाही को जीडीपी विकास दर में वृद्धि हुई है। यह एक सुखद अनुभव है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नए सिरे से उछाल के संकेत हैं, जबकि बेहतर दक्षता को अपनाने से सेवा क्षेत्र के प्रदर्शन में भी सुधार हुआ है। भारत में घरेलू खपत और निवेश को कृषि और उससे संबंधित गतिविधियों की मजबूत संभावनाओं और उपभोक्ता आत्मविश्वास में मजबूती का लाभ मिल रहा है। वहीं वर्ष 2022-23 में रियल जीडीपी (2011-12 की कीमतों पर) 160.06 लाख करोड़ रुपए रही है। सांख्यिकी मंत्रालय ने कहा है कि 2022-23 के दौरान वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि 2021-22 में 9.1 प्रतिशत की तुलना में इस बार 7.2 प्रतिशत रही है। जीएसटी संग्रह, बिजली खपत जैसे आंकड़े अप्रैल में आर्थिक गतिविधियां बने रहने के संकेत दे रहे हैं। हालांकि निर्यात और आयात कम हुआ है। इससे कुछ जोखिम उत्पन्न हुआ है। मानसून और वैश्विक स्तर पर राजनीतिक जोखिम को छोड़कर देश की आर्थिक वृद्धि दर 2023-24 में 6.5 फीसदी के अनुमान से ऊपर रह सकती है। फिलहाल भारत आर्थिक, वित्तीय और राजकोषीय स्थिरता के साथ सतत आर्थिक वृद्धि की कहानी पेश करने में सक्षम है। इस समय विनिर्माण क्षेत्र में तेजी स्थिति को और सुखद बना रही है, हालांकि उद्योगों की वृद्धि की रफ्तार अप्रैल 2023 में सुस्त पड़कर छह महीने के निचले स्तर 3.5 फीसदी रह गई। मुख्य रूप से कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद और बिजली के उत्पादन में कमी से बुनियादी उद्योग की वृद्धि की रफ्तार धीमी हुई है। वहीं कोयला, उर्वरक और बिजली क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन से पूरे वित्त वर्ष 2022-23 में बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर 7.7 फीसदी रही। वैसे वित्त वर्ष 2022-23 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 6.4 फीसदी रहा, जो लक्ष्य के अनुरूप है।
कर और गैर-कर राजस्व संग्रह बेहतर रहने से राजकोषीय घाटे को थामने में मदद मिली। इसके साथ कुछ आर्थिक चुनौतियां भी हैं। इनमें सबसे बड़ी चिंता निर्यात की है। हालांकि हमारा आयात भी घटा है, लेकिन निर्यात उस स्तर पर नहीं आया है, जिसे देखकर उत्साहित हुआ जा सके। रूस-यूक्रेन युद्ध तथा जर्मनी जैसे कुछ देशों में मंदी का आना भी एक कारण है। हमारे निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिका को जाता है, लेकिन वहां की आर्थिक स्थिति चरमराई हुई है और मंदी की आहट सुनाई देती रहती है। इसके अलावा एक बड़ी समस्या जो हमारी अर्थव्यवस्था को खाए जा रही है, वह है बेरोजगारी। देश में रोजगार उस हिसाब से नहीं बढ़ रहे हैं जिसकी जरूरत है। आंकड़े हैरान करने वाले हैं और बेरोजगारी की दर जो जनवरी में 7.14 फीसदी थी, वह अप्रैल में 8.11 फीसदी तक जा पहुंची है यानी विकास के बावजूद नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं। यह संख्या बहुत बड़ी है। सिर्फ इतना ही नहीं, करोड़ों लोग अब रोजगार की तलाश से बाहर हो चुके हैं, क्योंकि उन्हें रोजगार मिलने की कोई संभावना नहीं दिखती। बेरोजगारी के आंकड़े जीडीपी में अच्छी प्रगति के बावजूद अगर बढ़ रहे हैं तो आने वाले समय के लिए यह और चिंता का विषय है। एक बड़ी बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों तथा कम इनकम ग्रुप के लोगों की मांग में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। यह वर्ग बहुत बड़ा है। यहां देखने लायक बात है कि भारतीय अर्थव्यवस्था खपत पर आधारित है और जितनी खपत बढ़ेगी उतना ही ग्रोथ होगा और इस बार ऐसा ही हुआ। खपत बढ़ने से ही कारखानों के पहिए तेजी से दौड़ने लगे हैं, लेकिन अभी जो आंकड़े आ रहे हैं वे बता रहे हैं कि कम इनकम ग्रुप वाले लोग कम खरीददारी कर रहे हैं।
इसका उदाहरण यह है कि कम कीमत वाली कारों और बाइकों की बिक्री में अभी भी तेजी नहीं आई है, जबकि महंगी कारों तथा महंगी बाइकों की बिक्री तेजी से बढ़ी है। अगर हम कोरोना आने के पहले यानी 2018-19 के आंकड़े देखें तो पाएंगे कि अभी तक इनकी बिक्री उस स्तर पर नहीं पहुंची। उदाहरण के लिए इंट्री लेवल स्कूटरों की बिक्री अभी 2018-19 की तुलना में 28 फीसदी कम है। इसी तरह मोटरसाइकिलों की बिक्री में 38 फीसदी गिरावट आई है। इस तरह की गिरावट सस्ती कारों की बिक्री में भी आई है। यह सांकेतिक है कि कम आय वर्ग के लोगों की क्रय शक्ति घटी है। हालांकि देश में महंगाई की दर कुछ घटी है, लेकिन कई जरूरी चीजों के दाम बढ़े भी हैं। उनके कारण भी कम इनकम ग्रुप के लोगों की क्रय शक्ति घटी है। स्कूलों में फीस का बढ़ना आम बात है। इसका भी असर मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास की क्रय शक्ति पर पड़ रहा है। इस समय जब पूरी दुनिया मंदी के खतरे से जूझ रही है, तो भारत में जीडीपी की वृद्धि दर दिखाती है कि हम सही लक्ष्य की ओर जा रहे हैं। फिर भी देश को एक मजबूत विश्व आर्थिक शक्ति बनने के लिए संभावित आर्थिक चुनौतियों का समाधान तलाशना और तराशना होगा।

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निगमकर्मियों ने पहले 500, 1000, फिर मांगे थे 10 हजार……..

रविवार देर रात पटेल ब्रिज पर कचरा फेंकने को लेकर हुए विवाद और सरेराह मारपीट के तीन और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। ये वीडियो युवकों की पिटाई के ठीक पहले के बताए जा रहे हैं। वीडियो में नगर निगम कर्मी ब्रिज पर खड़े युवकों के पास आते ही कचरा फैलाने के नाम पर बदसलूकी करते दिख रहे हैं। युवकों द्वारा जब यह बताया गया कि कचरा कहां है तो निगमकर्मी नहीं बता पाए, लेकिन पहले 500, फिर 1000 और फिर 10 हजार रुपए का चालान बनाने के नाम पर विवाद करने लगे। इसके बाद विवाद बढ़ा तो निगम के दूसरे कर्मचारी भी वहां पहुंचे और युवकों की पिटाई कर दी।

वीडियो में विवाद की शुरुआत
16 सेकंड के एक वीडियो में निगमकर्मी कह रहा है कि तुम कचरा फैला रहे हो। इस पर युवक कह रहे हैं कि कचरा कहां है बताओ। युवकों ने निगमकर्मी से पूछा कि आप कौन से जोन से हैं। इस पर निगमकर्मी ने कोई जवाब नहीं दिया।
दूसरे वीडियो में निगमकर्मी पर पैसे मांगने का आरोप
47 सेकंड के दूसरे वीडियो में युवक राहगीरों से कह रहे हैं कि निगमकर्मी हमसे पैसे मांग रहे हैं। इस पर एक निगमकर्मी कहते नजर आ रहा है कि 80 हजार कमाता हूं, ऐसी बात मत करो। युवकों ने कहा कि कितने पैसे चाहिए बताओ तो निगमकर्मी ने साथी से कहा कि पीसीआर बुलाओ। 1.14 मिनट के तीसरे वीडियो में निगमकर्मी तीन युवकों सुनील यादव, दीपक जाट व मोनू को अलग-अलग पकड़कर पीटते नजर आ रहे हैंं। इसमें ये खुद को छुड़ाकर दूसरे साथी को बचाने की कोशिश करते हैं।
55 सेकंड के एक अन्य वीडियो में निगमकर्मी सुनील यादव, दीपक जाट व मोनू पर टूट पड़ते हैं और लगातार डंडे बरसा रहे हैं।

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सड़क पर बह गया हजारों लीटर नर्मदा जल

हिन्दुस्तान मेल, इंदौर। इस भीषण गर्मी में कई रहवासी क्षेत्र जल संकट से जूझ रहे हैं। वे पानी के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। दूसरी ओर, नगर निगम की अनदेखी के कारण हजारों लीटर नर्मदा का पानी पानी सड़क पर बह गया। स्कीम 140 स्थित पासपोर्ट आॅफिस के सामने मंगलवार रात नर्मदा की पाइप लाइन फूटने से हजारों लीटर पानी सड़क पर बह गया। इस दौरान लोग परेशान होते रहे। सूचना के बावजूद कोई भी निगम अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

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