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तीसरा टी-20 आज : सेंचुरियन में 6 साल बाद भिड़ेंगी भारत और साउथ अफ्रीका

सेंचुरियन, एजेंसी

भारत और साउथ अफ्रीका के बीच
टी-20 सीरीज का तीसरा मैच आज सेंचुरियन में खेला जाएगा। सुपरस्पोर्ट पार्क स्टेडियम में मैच रात 8:30 बजे शुरू होगा, टॉस रात 8 बजे होगा। भारत यहां 6 साल बाद टी-20 मैच खेलेगी, 2018 में टीम को होम टीम से हार मिली थी। 4 टी-20 की सीरीज फिलहाल 1-1 से बराबर है। भारत ने पहला मैच 61 रन और साउथ अफ्रीका ने दूसरा मैच 3 विकेट से जीता था। सीरीज का आखिरी मैच 15 नवंबर को जोहान्सबर्ग में खेला जाएगा।
हेड टु हेड में भारत आगे
भारत और साउथ अफ्रीका के बीच अब तक 29 टी-20 खेले गए। 16 में भारत और 12 में साउथ अफ्रीका को जीत मिली। दोनों के बीच एक मैच बेनतीजा भी रहा। दोनों के बीच इस साल के टी-20 वर्ल्ड कप का फाइनल भी हुआ था, जिसमें भारत को जीत मिली थी। सेंचुरियन में दोनों के बीच पिछला मुकाबला 2018 में हुआ था, तब होम टीम को 6 विकेट से जीत मिली थी। साउथ अफ्रीका में दोनों ने 22 टी-20 खेले, 12 में भारत और 9 में होम टीम को जीत मिली। दूसरे टी-20 में टीम इंडिया की बैटिंग कमजोर नजर आई थी। 6 विकेट गिरने के बाद अर्शदीप सिंह को बैटिंग करने आना पड़ा, जो आम तौर पर 8 या 9 विकेट गिरने के बाद बैटिंग करते हैं। ऐसे में टीम आज बैटिंग बढ़ाने के लिए आउट आॅफ फॉर्म अभिषेक शर्मा की जगह रमनदीप सिंह को प्लेइंग-11 में शामिल कर सकती है।

2 मैचों में भारत के लिए वरुण चक्रवर्ती 8 विकेट झटक चुके हैं। उन्होंने दूसरे मुकाबले में भी 5 विकेट लेकर भारत की झोली में मैच डाल दिया था। वहीं संजू सैमसन सीरीज के टॉप रन स्कोरर हैं, उन्होंने पहले मैच में सेंचुरी लगाई थी।
स्टब्स ने जिताया था
होम टीम को दूसरा मैच
ट्रिस्टन स्टब्स ने दूसरे मैच में 47 रन बनाकर साउथ अफ्रीका को जीत दिलाई थी। वह टीम के टॉप रन स्कोरर हैं। जेराल्ड कूट्जी टीम के टॉप विकेट टेकर हैं, जिनके नाम 4 विकेट हैं। उन्होंने पहले मैच में 3 विकेट लिए थे। टीम अपनी प्लेइंग-11 नहीं बदलेगी।
वेदर कंडीशन : सेंचुरियन में बुधवार को बारिश की कोई संभावना नहीं है। टेम्परेचर 16 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। पिछले 2 टी-20 में भी बारिश की वजह से कोई परेशानी नहीं हुई थी।
पिच रिपोर्ट : सेंचुरियन में अब तक 14 टी-20 खेले गए, 7 बार पहले बैटिंग और 7 ही बार पहले बॉलिंग करने वाली टीमों को जीत मिली। 258 रन यहां का बेस्ट स्कोर है और पिछले कुछ सालों में यहां चेज करना आसान हुआ है। इसलिए टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी चुन सकती है।
दोनों टीमों की पॉसिबल प्लेइंग-11
भारत: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), संजू सैमसन (विकेटकीपर), अभिषेक शर्मा/रमनदीप सिंह, तिलक वर्मा, रिंकू सिंह, हार्दिक पंड्या, अक्षर पटेल, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, अर्शदीप सिंह और आवेश खान।
साउथ अफ्रीका: ऐडन मार्करम (कप्तान), रीजा हेंड्रिक्स, रायन रिकेलटन, ट्रिस्टन स्टब्स, हेनरिक क्लासन (विकेटकीपर), डेविड मिलर, एंडिले सिमेलाने, मार्को यानसन, जेराल्ड कूट्जी, एन पीटर और केशव महाराज।

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आईएसबीटी का काम 95% पूरा, जल्द होगा प्रारंभ…

कुमेडी में इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। भवन का काम लगभग 95 फीसदी हो चुका है। बसों को पार्क करने के लिए 3 करोड़ रुपए खर्च कर 40 हजार वर्गफीट का शेड तैयार करने का काम दिन जारी है। आईएसबीटी को नए साल के पहले शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
एमआर-10 ब्रिज के पास ग्राम कुमेडी में इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा बनाए जा रहे अंतर प्रांतीय बस टर्मिनल का निर्माण फाइनल स्टेप पर है। बिल्डिंग का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो गया है। भवन सहित अन्य स्थानों पर फिनिशिंग का काम भी अंतिम चरण में है। 100 करोड़ से ज्यादा की लागत से बन रहे इस बस टर्मिनल में यात्री सहित अन्य सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। आईएसबीटी में बसों के खड़े करने के लिए शेड बनाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। इसके निर्माण पर 3 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे है। इस बस अड्डे में 40 हजार वर्गफीट क्षेत्र में शेड लगाए जाएंगे। इसमें से 20 हजार वर्ग फुट क्षेत्र में शेड लगाने के लिए फ्रेम लगाने का काम हो गया है। गौरतलब है कि इस बस टर्मिनल से 1500 बसों का संचालन किया जाएगा। बस टर्मिनल को दिसम्बर यानी नए साल के पहले शुरू करने का टॉरगेट रखा गया है। स्थिति यह है कि एक दिन में तीन शिफ्ट में काम किया जा रहा है। दरअसल में आईडीए का पूरा फोकस आईएसबीटी के काम को आकार देने में लगा हुआ है। आईडीए के सीईओ आरपी अहिरवार ने मंगलवार को अफसरों के साथ मौका मुआयना किया और बचे हुए कार्य को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान वरिष्ट अभियंता अनिल जोशी और दिनेश गोयल सहित अन्य सम्बंधित मौजूद थे।

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शगुन आर्केड बिल्डिंग अग्निकांड आने-जाने का एक ही रास्ता लिफ्ट भी एक ही

कल रात विजय नगर क्षेत्र में स्थित शगुन आर्केड बिल्डिंग में भीषण आग लग गई थी। घटना के बाद पूरी इमारत में धुआं भर गया था और करीब 25 लोग अंदर फंस गए थे। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची दमकल विभाग की कई टीमों ने बड़ी मुश्किल से आग पर काबू पाया और लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस प्रशासन और फायरकर्मियों ने दो घंटे तक रेस्क्यु कर युवक-युवतियों निकाला। दूसरी मंजिल पर लगी आग का धुंआ तीसरी और चौथी मंजिल पर पहुंच गया और लोगों की हालत खराब होने लगी, हालांकि घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है। कलेक्टर आशीषसिंह ने आग के कारणों की जांच के आदेश दिए है।
मेदांता अस्पताल के अग्निशमन यंत्रों ने काम नहीं किया
इमारत से लगी बिल्डिंग में मेदांता अस्पताल है। तीन लोगों की दम घुटने के अस्पताल भेजना पड़ा। अस्पताल के अग्निशमनय यंत्रों ने काम नहीं किया और गार्ड व प्रबंधन गायब हो गए। आग की शुरूआत शाम इमारत की दूसरी(212) मंजिल स्थित संकल्प रीयलिटीज के आॅफिस से हुई थी। संचालक संजय चौकसे आफिस बंद कर चुके थे। इसके बाद तीसरी और चौथी मंजिल पर धुआं भर गया था।

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गलियों में पैर पसार रहा अपराध…………….

चौराहों पर चैकिंग और अवैध वसूली में व्यस्त पुलिस…….

शहर में आपराधियों के हौसले बुलंद होते जा रहा है। नए कमिश्नर संतोष सिंह ने जब पद संभाला था तो लगा था कि अब शहर में बढ़ते अपराधों पर लगाम लगेगी और अपराधियों में कानून और पुलिस का खौफ कायम होगा, लेकिन ऐसा फिलहाल तो होता नजर नहीं आ रहा है। पिछले दिनों शहर में एक रात में तीन अलग-अलग स्थानों पर लूट के साथ ही पॉश इलाके में सुबह-सुबह 15 लाख की लूट ने कानून व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी। इन घटनाओं से ही पता चलता है कि पुलिस अपराधियों के सामने कितनी लाचार और बेबस है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में चौराहों पर रात एक बजे तक वाहनों की चेकिंग के नाम पर दिखती पुलिस एक बजे बाद पूरे शहर से नदारद हो जाती है और आम जनता को बदमाशों और लूटेरों के हवाले छोड़ देती है।
शहर में रात की गश्त तो जैसे समाप्त ही हो गई है। जो थोड़ी बहुत गश्त होती भी है तो वह मुख्य मार्गों पर ही होती है। गलियों और कॉलोनियों के अंदर तो पुलिस झांकती भी नहीं है। जबकि गलियों में ही नशाखोरों का जमावड़ा लगा रहता है। गलियों के अंदर कई स्थानों पर रात को बदमाश और असमाजिक तत्व उत्पात मचाते हैं। खुलेआम नशाखोरी करते हैं और हुड़दंग करते है। इससे रहवासी परेशान है और कई बार इसकी शिकायत की जा चुकी है लेकिन पुलिस मौके पर पहुंचती ही नहीं। वहीं शिकायत करने के बाद शिकायतकर्ता को बदमाश अलग परेशान करने लगते हैं और बदला लेने की नियत से ज्यादा हुड़दंग करने लगते हैं। पुलिस के नहीं आने से या कोई कार्रवाई नहीं करने से असमाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हो जाते हैं और वह गंभीर अपराध करने से हिचकिचाते नहीं है क्योंकि उनमें पुलिस का डर ही नहीं रहता। शहर में प्रतिदिन बढ़ता अपराध इसका स्पष्ट उदाहरण है। और पुलिस की यह निष्क्रियता सामान्य युवकों को अपराध जगत में प्रवेश करने में सहायक भी साबित हो रही है। पुलिस प्रशासन को इस मामले में बेहद गंभीरता से सोचना होगा और गलियों के साथ ही कॉलोनियों के अंदर तक रात में दो से तीन बार गश्त करना होगी तभी अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाया जा सकेगा।

सीएम की साख की भी चिंता नहीं

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं इंदौर जिले के प्रभारी है, पुलिस को सीएम की साख की भी कोई चिंता नहीं है। जबकि सीएम यादव का सपना है कि इंदौर का विकास मुंबई की तर्ज पर हो और यहां लोग रात में भी निडर होकर अपने घर जाएं। शहर में कई आॅफिस और डिलेवरी बाय रात में भी काम करते हैं। शहर के अलग-अलग हिस्सों में उनके आना जाना रहता है और यही लोग लुटेरों और बदमाशों का आसान शिकार हो रहे हैं।

अवैध वसूली में लगे रहते हैं
रात में लगातार चोरी, लूट, मारपीट की घटनाएं हो रही हैं। पूरे शहर में अराजकता फैली है। बावजूद इसके पुलिस सिर्फ चौराहों पर चैकिंग करने में मस्त है वहीं रात्रिकालीन गश्त करने में पिछड़ गई है। पुलिस कमिश्नर के आदेश के बाद पुलिस चौराहों पर चेकिंग करते हुए तो दिखाई देती है। लेकिन वहां भी अवैध वसूली में जुटी रहती है। सूत्र बताते हैं कि चौराहों पर चेकिंग के नाम पर नशे में धूत कार सवार रईसजादों को पकड़ कर वसूली में लगी हुई है।

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डिजिटल अरेस्ट या अन्य साइबर क्राइम की स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचित करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव………

हिन्दुस्तान मेल, भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि डिजिटल अरेस्ट या अन्य साइबर क्राइम की स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचित किया जाए। उन्होंने कहा कि हमारी जागरूकता, साइबर जालसाजों का साहस के साथ सामना और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से इन अपराधों से बचा जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भी लोगों को इस दिशा में जागरूक करने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में डिजिटल अरेस्ट से बचाने के उपाय बताते हुए कहा था कि डिजिटल अरेस्ट से डरे नहीं, रुकें, सोचें तथा एक्शन लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय में मीडिया को संवाद कर रहे थे।
उल्लेखनीय है कि साइबर पुलिस द्वारा 9 नवम्बर को अरेरा कॉलोनी भोपाल निवासी व्यक्ति के डिजिटल अरेस्ट में त्वरित कार्रवाई कर लाइव रेड करते हुए उन्हें मुक्त कराकर करोड़ों रूपए के साइबर फ्राड से बचाने की कार्यवाही की गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश की साइबर पुलिस को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय पहुंचे थे। संभवत: डिजिटल अरेस्ट में लाईव रेड का देश-दुनिया का यह पहला ऐसा प्रकरण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने साइबर पुलिस की दक्षता और त्वरित कार्यवाही की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस महानिदेशक सुधीर सक्सेना, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक योगेश देशमुख, डीआईजी साइबर सेल युसुफ कुरैशी और त्वरित रूप से घटना स्थल पहुंचने वाले उप निरीक्षक साइबर सचिन यादव की प्रशंसा की।
डिजिटल अरेस्ट से डरें नहीं
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने साइबर अपराध में पुलिस टीम द्वारा दिखाई गई तत्परता की सराहना करते हुए इसे अनुकरणीय और प्रेरणादायक बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनसामान्य प्राय: सीबीआई, ईडी आदि की कार्यवाही से अनभिज्ञ रहता है और चालाक अपराधी ऐसे लोगों को अपने जाल में फंसा लेते हैं। मध्यप्रदेश पुलिस सूचना प्राप्त होते ही एक्शन में आई और ठोस कार्रवाई करते हुए डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से साइबर फ्रॉड के इस प्रकरण में देश-दुनिया के सामने यह उदाहरण प्रस्तुत किया कि डिजिटल अरेस्ट से डरने की जरूरत नहीं है। समय पर पुलिस को सूचना दी जाए और त्वरित कार्रवाई की जाए तो अपराध से बचा जा सकता है और ऐसे अपराधियों को पकड़ा भी जाया जा सकता है। पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों पर हमें गर्व है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस को सूचना देने वाले श्री राजीव ओबेराय से मोबाइल पर बातचीत भी की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि साइबर अपराध और शिकायतों में प्रतिवर्ष वृद्धि हो रही है। वर्ष 2019 में लगभग चार हजार शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जबकि वर्ष 2024 में अब तक लगभग पांच लाख शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए पिछले पांच वर्षों में लगभग 259 प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 24 हजार पुलिस अधिकारियों, न्यायिक अधिकारियों और लोक अभियोजन अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया। गत पांच वर्ष में साइबर जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से छात्र-छात्राओं सहित लगभग 31 लाख नागरिकों को जागरूक किया गया। साइबर पुलिस द्वारा बिजली बिल भुगतान व कस्टम ड्यूटी के नाम पर ठगी, पेंशन फ्रॉड, आॅनलाइन टेलीग्राम टॉस्क और डिजिटल अरेस्ट संबंधी एडवाइजरी नियमित रूप से जारी की जाती रही है। राज्य शासन को साइबर अपराधों से बचाव संबंधी जागरूकता के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया अरेरा कॉलोनी में हुई डिजिटल अरेस्ट संबंधी घटना के बारे में बताया कि 9 नवम्बर को एक व्यक्ति के डिजिटल अरेस्ट की सूचना उनके परिचित राजीव ओबेरॉय ने साइबर पुलिस को दी। पुलिस टीम बिना एक पल गंवाए अरेरा कॉलोनी स्थित पीड़ित विवेक ओबेरॉय (जो कि दुबई में कॉपोर्रेट सेक्टर उद्यमी हैं) के घर पहुंची। टीम ने पाया कि पीड़ित को अज्ञात साइबर जालसाजों द्वारा ईडी, सीबीआई आॅफीसर बनकर दुबई और सीरिया के वर्चुअल नंबर से कॉल कर डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया है। दोपहर एक बजे से उनके ही घर के कमरे में छह घंटे तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया। साइबर जालसाजों द्वारा पीड़ित और उनके परिवार की निजी जानकारियां, बैंकिंग डिटेल्स ले ली गईं और न बताने पर उन्हें गिरफ्तार करने और परिवार के सदस्यों को नुकसान पहुंचाने की धमकियां दी गईं। साथ ही यह भी कहा गया कि डिजिटल अरेस्ट के संबंध में किसी को न बताया जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि साइबर पुलिस द्वारा रेड करने पर जालसाजों द्वारा तत्काल वीडियो कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया गया। टीम द्वारा पीड़ित को समुचित तरीके से समझाइश देते हुए उन्हें फोन और लैपटॉप की डिजिटल अरेस्ट की वर्चुअल दुनिया से बाहर निकाला गया। रियल टाइम पर उनके साथ होने वाले करोड़ों की ठगी को रोका गया। पीड़ित ने स्वयं कहा कि यदि पुलिस टीम आज त्वरित रूप से उनके पास नहीं पहुंचती तो वे जालसाजों को करोड़ों रूपए ट्रांसफर कर देते और लंबे समय तक अपने ही घर में डिजिटल अरेस्ट की प्रताड़ना सहते। पीड़ित और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा मध्यप्रदेश पुलिस और राज्य साइबर पुलिस को धन्यवाद दिया गया।
प्रदेश में पिछले 5 वर्षों में लगभग 259 प्रशिक्षण कार्यक्रमों में लगभग 24,000 पुलिस अधिकारी, न्यायिक अधिकारी, लोक अभियोजन अधिकारी प्रशिक्षित किये गये हैं। लगभग 4700 हजार साइबर जागरुकता कार्यक्रम आयोजित कर लगभग 31 लाख नागरिकों (छात्र-छात्राओं, महिलाओं, वृद्धों आदि) को जागरुक किया गया। नियमित रूप से नवीन साइबर अपराधों (डिजिटल अरेस्ट, बिजली बिल भुगतान, कस्टम ड्यूटी के नाम पर, पेंशन फ्रॉड, आॅनलाइन टेलीग्राम टास्क आदि) से संबंधित एडवाइजरी जारी की जाती रही है।

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