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वोट डालने पहुंचे अक्षय से बुजुर्ग ने की शिकायत- ‘टॉयलेट सड़ गया’

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के लिए मंगलवार को बड़ी संख्या में मतदाताओं ने वोट डाले। सिने जगत की हस्तियां भी इसमें पीछे नहीं रहीं। सिनेमा जगत के कई सितारों ने सुबह-सुबह आकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया और वोट डाले। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार भी मतदान करने पहुंचे। वह मतदान करने के लिए पहुंचने वाले पहले सेलिब्रिटीज में से एक थे। उन्होंने सुबह करीब साढ़े सात बजे मतदान किया। उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। जैसे ही अक्षय मतदान केंद्र में दाखिल हुए, पैपराजी उनकी तस्वीरें और वीडियो लेने के लिए इकट्ठा हो गए।


बता दें कि अक्षय के पास पिछले कई सालों से कनाडा की नागरिकता थी। लेकिन अब भारत की नागरिकता लेने के बाद उन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने मतदान भी किया था। यह भी कहा जाता है कि वह बुधवार को मतदान केंद्र पर पहले मतदाता थे। मतदान के बाद उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत की। उन्होंने मतदाताओं के लिए की गई योजना की सराहना की। इसके बाद एक बुजुर्ग शख्स अक्षय से बात करते नजर आए। ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
बुजुर्ग व्यक्ति ने अक्षय को रोका और अभिनेता ने उसे नजरअंदाज किए बिना उनकी बात सुनी। बुजुर्ग व्यक्ति ने अक्षय कुमार से कहा- सर, आपने जो टॉयलेट बनवाया था, वह अंदर से सड़ चुका है। अब हमारे लिए नया बना दीजिए। मैं पिछले तीन साल से इसकी मरम्मत करा रहा हूं।
इस पर अक्षय ने पूछा, क्या आप रिपेयरिंग कर रहे हैं? ठीक है, मैं आपका काम कर दूंगा। मैं बीएमसी से बात करता हूं।” बुजुर्ग ने आगे कहा कि यह लोहे का बना है, इसलिए रोज सड़ता है और हर दिन पैसे देने पड़ते हैं। इस पर अक्षय ने कहा कि ठीक है, मैं उनसे बात करूंगा। ये बीएमसी का काम है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि दोनों की ये बातचीत सुनकर अक्षय के बॉडीगार्ड और बाकी लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाते हैं।

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अगले माह तक बनेगा सबसे बड़े ब्लैक स्पॉट गणपति घाट का बाइपास

हिन्दुस्तान मेल, इंदौर मध्य प्रदेश के सबसे बड़े ब्लैक स्पॉट गणपति घाट का बाईपास तैयार हो रहा है। अगले माह तक यह ट्रैफिक के लिए खोल दिला जाएगा। आठ किलोमीटर लंबे बाइपास से होकर वाहन इंदौर से सेंधवा की तरफ जा सकेंगे। फिलहाल जिस मार्ग से वाहन गुजरते है, वहां ढलान ज्यादा होने से भारी वाहनों के ब्रेक फेल हो जाते थे और वे दूसरे वाहनों को अपनी चपेट में ले लेत थे।
बीते दस सालों में गणपति घाट पर गलत ढलान के कारण 300 से ज्यादा मौतें हो चुकी है। ज्यादातर हादसों में वाहनों में आग लग जाती है और उसमें सवार लोग बचकर निकल भी नहीं पाते थे। मुबंई आगरा राजमार्ग पर यह घाट मानपुर से आगे आता है। फोरलेन मार्ग का निर्माण वर्ष 2009 में किया गया था।
तब यहां पहाड़ों को काट कर रास्ता बनाया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अफसरों ने बताया कि 20 दिसंबर तक बाइपास पर ट्रैफिक शुरू करने की तैयारी है। नए बाइपास को बनाने में दो साल का समय लगा।

घर्षण के कारण लग
जाती है आग
इस घाट पर ज्यादातर वे भारी वाहन हादसों का शिकार हुए है, जो काफी पुराने होते है। ज्यादातर फर्शी, लोहे के रोल ले जाने वाले हादसे का शिकार होते है,क्योकि ढलान पर उनका लोड आगे की तरफ आ जाता है और स्पीड कंट्रोल करने के लिए जब ड्रायवर ब्रेक लगाते है तो ब्रेक फेल हो जाते है।भारी वाहन आगे चल रहे वाहनों को अपनी चपेट में ले लेते है। टक्कर के बाद भी वाहन नहीं रुकता और घर्षण के कारण उसमें आग लग जाती है।

150 करोड़ में बन
रहा नया घाट
हादसे वाले घाट पर अगले माह से भारी वाहनों की आवाजाही बंद हो जाएगी। नया बाइपास ढाल गांव से नीमगढ़ तक बन रहा है। इसके निर्माण पर डेढ़ सौ करोड़ रुपये की लागत आई है। चार साल पहले इसका प्रोेजेक्ट तैयार हुआ था, लेकिन वन भूमि मिलने व निजी भूमि के अधिगृहण में देरी होने से निर्माण समय पर शुरू नहीं हो सका। नए बाइपास के समीप छोटे जलस्त्रोत भी रखे गए है,ताकि हरियाली बनी रहे।

चार माह पहले जले थे एक साथ छह वाहन
गणपति घाट पर अगस्त माह में एक कंटेनर के ब्रेक फेल हो गए थे। कंटेनर ने आगे चल रहे ट्रक को जोरदार टक्कर मार दी। ट्रक दूसरी लेन में चल रही कारों से टकरा गया। इस दौरान उसमे आग भी लग गई। इस हादसे में छह वाहन आपस में टकरा गए थे और उनमे आग भी लग गई थी। कई लोग तो वाहन से कूद कर अपनी जान बचाकर भागे थे, लेकिन छह लोग घायल हो गऐ। चार साल पहले इंदौर से कार में महाराष्ट्र जा रहा एक परिवार हादसे का शिकार हो गया था।

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विरोध के डर से पटवारी ने चुनाव परिणाम से पहले रख ली बैठक

हिन्दुस्तान मेल, इंदौर
पार्टी सूत्रों का कहना है कि इसी के चलते पटवारी ने अपनी नवगठित प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी की पहली बैठक मप्र में हुए उपचुनाव (बुधनी और विजयपुर) के परिणाम के पहले रखी है। आज और कल यह बैठक आयोजित की गई है। क्योंकि पटवारी को अमास है कि अगर यह बैठक उपचुनाव परिणाम के बाद रखी जाती तो बैठक के दौरान ही विरोध के स्वर उठ सकते थे। सूत्रों का कहना है कि तभी यह बैठक 21 और 22 नवंर को रखी गई है, जबकि 23 नवंबर को उपचुनाव के परिणाम आना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दोनों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस की राजनीतिक स्थित बेहतर नहीं है। अगर बात करें विजयपुर विधानसभा की तो यह सीट कांग्रेस के रामनिवास रावत के विधानसभा सदस्यता से इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। रावत लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे तो वहां उपचुनाव हुए। वहीं बुधनी विधानसभा सीट केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफा देने के बाद खाली हुई थी। बुधनी से शिवराज सिंह चौहान लगातार कई बार विधायक रहे है।
कांग्रेसियों को जीत की उम्मीद कम
राजनीतिक गलियारों से जिस तरह की खबरें आ रही है, उससे यह प्रतीत हो रहा है कि प्रदेश की दोनों विधानसभा सीटों में कांग्रेस की जीतने की संभावना नाममात्र की है। कांग्रेसियों को भी ऐसी कोई उम्मीद नहीं है। इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि बुधनी में कांग्रेस का जनाधार नहीं है। हालांकि कांग्रेस ने यहां से पुराने नेता राजकुमार पटेल को मैदान में उतारकर चुनाव को रोचक बनाने की कोशिश की थी, किन्तु प्रचार में ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला। बुधनी का पूरा चुनाव भाजपा ने शिवराज सिहं चौहान के नाम पर लड़ा है और प्रचार करने के लिए वे यहां पर आए भी थे। रमाकांत भार्गव तो नाम मात्र के प्रत्याशी भर थे। जहां तक रही बात विजयपुर विधानसभा सीट की। तो इस सीट के बारे में एक कांग्रेसी का कहना है कि शुरूआती दौर में विजयपुर विधानसभा सीट में कांग्रेस की स्थिति बेहतर थी। अगर पीसीसी अध्यक्ष सही रणनीति बनाकर चलते तो कांग्रेस यहां पर फिर जीत सकती थी। लेकिन वे नेताओं से आपसी समन्वय नहीं बैठा पाए। इसलिए अंतिम समय में यहं सीट भी कांग्रेस के हाथ से निकल गई।

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हरियाली के बीच बेधड़क जलाया जा रहा कचरा

हिन्दुस्तान मेल, भोपाल
झीलों की नगरी और चारों तरफ से हरियाली से घिरी राजधानी भोपाल की हवा भी प्रदूषित हो चुकी है। यहां के लोग भी 19 दिनों से जहरीली हो चुकी हवा में सांस लेने को विवश हैं। नवंबर यह सातवीं बार है, जब भोपाल का एक्यूआई 300 के पार हुआ है। हैरत की बात तो यह है कि वायु प्रदूषण की इतनी गंभीर स्थिति होने के बावजूद अब तक प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी नहीं जागे हैं, जबकि दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर कई तरह की सख्तियां और पाबंदियां लगा दी गई हैं। स्कूलों में छुट्टी कर दी गई है, वर्क फार होम शुरू कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट खुद इस मामले को लेकर गंभीर दिख रहा है।
राजधानी भोपाल में जिम्मेदारों की लापरवाही शहर की लगभग 23 लाख आबादी परेशान हो रही है। यहां एक्यूआई खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है, इसके बाद भी शहर में अब तक न तो किसी तरह की सख्ती की गई है और न ही कोई पाबंदी लगाई गई है। शहर की हवा में इस वक्त पीएम 2.5 की मात्रा भी अधिक है, जो कमजोर इम्यूनिटी के लोगों को बीमार करने के लिए काफी है।
मंगलवार शाम को भोपाल के कलेक्ट्रेट परिसर में सर्वाधिक एक्यूआई 316 दर्ज किया गया। पर्यावरण परिसर का एक्यूआई 312 और टीटी नगर का एक्यूआई 309 दर्ज हुआ है। बता दें कि जहां कभी एक्यूआई 60 तक पहुंचने पर ही हलचल मच जाती थी, वहां आज वायु प्रदूषण इतना अधिक बढ़ जाने पर भी किसी स्तर पर सतर्कता नहीं बरती जा रही है।
एक्सपर्ट व्यू
सुयश कुलश्रेष्ठ, रजिस्टर्ड, टाउन प्लानर एंड स्ट्रक्चर के अनुसार निर्माण स्थल पर उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए ग्रीन नेट का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा। इसका इस्तेमाल किया जाएगा तो धूल कम उड़ेगी। ठोस कचरे का व्यवस्थापन नहीं हो रहा। यदि कचरे का व्यवस्थापन सही तरीके से होगा तो कचरा जलाने की नौबत नहीं आएगी। निर्माण कार्य के उपयोग में आने सामग्री (रेत, सीमेंट) को खुले में रखी जा रही है, जबकि इसे बंद स्थान पर रखना चाहिए। गाड़ियों में पीयूसी चेक के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। बिना चेक किए ही सर्टिफिकेट दिया जा रहा है। इसकी सही तरीके से चेकिंग होनी चाहिए। रेस्टोरेंट में खुले में चल रहे तंदूर और पेड़ों की कटाई लगातार चल रही है। इस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।
पीक आॅवर में ज्यादा
क्षेत्रीय अधिकारी, पीसीबी, भोपाल ब्रजेश शर्मा के अनुसार पीसीबी की वेबसाइट में लाइव एयर क्वालिटी डाटा में जो एक्यूआई दिखाया जाता है, वह लाइव होता है। इसलिए पीक आॅवर में एक्यूआई ज्यादा दिखता है, लेकिन पीसीबी दिनभर का औसत एक्यूआई 24 घंटे की मॉनिटरिंग के आधार पर निकलता है, जो फिलहाल 200-250 के आसपास है। ज्यादा धूल और धुआं होता है, उस दिन एवरेज एक्यूआई 300 के पार हुआ है।
क्या कहते हैं नागरिक
शहर में जगह-जगह कचरा जलाया जा रहा है। इस पर रोक लगनी चाहिए, लेकिन इस तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जा रहा।

  • आरती चौरे, सुभाष नगर
    पेड़ों की कटाई की वजह से शहर का पर्यावरण खराब हो रहा है। पेड़ों से वायु शुद्ध होती है, लेकिन अनियोजित विकास पेड़ों का दुश्मन बन गया है।
    -अमन साकल्ले, रहवासी, कोलार

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कृषिमंत्री के संसदीय क्षेत्र में डीएपी के लिए हाहाकारघंटों में लाइन लगे रहने के बाद कहते हैं कल आना

विदिशा, एजेंसी
प्रदेश में डीएपी खाद की किल्लत की लगातार खबरें आ रही हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराजसिंह चौहान का संसदीय क्षेत्र विदिशा भी इससे अछूता नहीं है। यहां किसानों को डीएपी के लिए लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है। इसके बाद भी खाद नहीं मिल पा रही है। जिला प्रशासन ने टोकन व्यवस्था लागू की है। इसके बावजूद हालात नियंत्रण से बाहर नजर आ रहे हैं। कई जगह तो धक्का-मुक्की और मारपीट की भी घटनाएं सामने आई हैं।
जिले के खाद वितरण केन्द्रों पर सुबह से ही किसानों की भीड़ जमा होना शुरू हो जाती है। किसान खाद लेने के लिए सुबह 6 बजे से ही लाइन में लग जाते हैं। इसमें से कुछ को ही टोकन मिल पाता है, बाकी को निराश होकर घर लौटना पड़ता है। ग्यारसपुर और सिरोंज में बुधवार को टोकन वितरण के दौरान हालात् बहुत खराब हो गए। टोकन के लिए किसानों में धक्का-मुक्की और मारपीट भी हो गई। ग्यारसपुर में बड़ी मुश्किल से 200 टोकन मिल पाए, जबकि यहां 400 से अधिक किसान पहुंचे थे। किसानों का कहना है- 15 दिन से यहां आ रहे हैं, पर हर बार कहा जाता है अगले दिन आओ। रबी का सीजन सिर पर है, अब बोवनी लेट हो रही है। किसानों ने स्थानीय सांसद और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराजसिंह चौहान से भी गुहार लगाते हुए कहा- वे ही हमारी बात सुन लें। किसानों का कहना है कि उन्हें जितनी खाद की जरूरत है, उसका आधा भी नहीं मिल रही है। प्राइवेट दुकानों में डीएपी खाद मिल रही है, लेकिन कीमत 2 हजार रुपए प्रति बोरी है।

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