Hindustanmailnews

Author name: Hindustanmailnews

निगम ने बना रखा है सड़क किनारे कबाड़खाना…

अधिकारियों का तर्क:निगम का गोदाम फुल है इसलिए वहां रखा सामान

हिन्दुस्तान मेल, इंदौर
देश के सबसे स्व्च्छ शहर इंदौर को नगर निगम द्वारा ही गंदा किया जा रहा है। दरसअल शहर में अवैध अतिक्रमण के नाम पर नगर निगम की टीम द्वारा जो ठेले, गुमटियों, बैनर-पोस्टर, होर्डिंग आदि को जब्त किया जाता है उसे बजाय सही स्थान पर रखने के निगम द्वारा स्नेहलतागंज क्षेत्र में न्यू सियागंज से आगे राजकुमार ब्रिज के पास पटक दिया जाता है। इससे ना सिर्फ शहर की सुंदरता समाप्त हो रही है बल्कि गंदगी भी फैल रही है। वहीं सड़क का अधिकांश हिस्सा ठेले और गुमटियों ने घेर रखा है जिसके चलते यातायात भी प्रभावित होता है। इन सामनों के कारण यह जगह कबाड़खाना जैसी लगती है।
बहरहाल अब इन जब्त सामानों को नीलाम करने की तैयारी निगम द्वारा की जा रही है। जो सामान वहां पड़े हैं उनकी सूची तैयार की जा रही है। निगम अधिकारियों का कहना है कि नीलामी के बाद वहां पड़ा सामान हट जाएगा।

नया गोदाम बनाना है

8000 करोड़ से अधिक के बजट वाला इंदौर नगर निगम अनेक कामों पर करोड़ों रुपए पानी की तरह खर्च कर देता है। लेकिन विडंबना है कि निगम के पास पैसों की कमी नहीं होने के बावजूद वह इन जब्त गुमटियों, ठेलों और होर्डिंग पोस्टरों के लिए गोदम तक नहीं बना पा रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों का तर्क है कि वर्तमान में जो गोदाम है वह पूरा भरा हुआ है। नया सामान वहां नहीं रखा जा सकता। अधिकारियों का कहना है कि निगम इन सामनों को रखने के लिए नया गोदाम बनाने की तैयारी कर रहा है लेकिन यह बात काफी लंबे समय से कही जा रही है और लगता है कि गोदाम बनाने की बात सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। शहर को साफ-स्वच्छ रखने के चक्कर में नगर निगम का यह दोहरा रवैया है। कर्मचारी जगह-जगह लगे अवैध बैनर, पोस्टर, होर्डिंग को निकाल तो देते हैं, लेकिन इनके निपटारे का ठीक से इंतजाम नहीं करते। ऐसे कई सारे बैनर पोस्टर, होर्डिंग की स्नेहलतागंज क्षेत्र में न्यू सियागंज से आगे राजकुमार ब्रिज के पास पटक दिया जाता है। निगम अफसरों का कहना है कि उसके गोदाम में जगह नहीं बची। इसलिए जब्त सामान सड़क किनारे रखना पड़ता है।

रहवासी बोले- यह निगम का अतिक्रमण


यहां रहने वाले लोागों का निगम के प्रति काफी आक्रोश है। रहवासियों का कहना है कि एक तरफ तो निगम शहर में अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर वाह-वाही लूटता हैं वहीं दूसरी तरफ निगम खुद यहां अतिक्रमण कर रहा है। रहवासियों का कहना है कि शहरभर से जब्त सामान को यहां पटकने से यह क्षेत्र कबाड़खाना जैसा लगता है। इससे गंदगी भी फैलती है। इस संबंध में कई बार शिकायत की लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया।

निगम ने बना रखा है सड़क किनारे कबाड़खाना… Read More »

गया था मेला देखने, वहां से 5 करोड़ साल पुराना जीवश्म चुरा लाया

नोएडा, एजेंसी
उत्तर प्रदेश के नोएडा से एक शख्स को भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के स्टॉल से पांच करोड़ साल पुराना जीवाश्म चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। दरअसल, राजधानी दिल्ली में भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला 2024 में जीएसआई ने भी स्टॉल लगाया था। यहां भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के स्टॉल पर पांच करोड़ साल पुराना गैस्ट्रोपॉड जीवाश्म भी रखा था, जो कि चोरी हो गया था।

पुलिस के मुताबिक 21 नवंबर को मंत्रालय के माइंस पैवेलियन के हॉल नंबर चार में जीवाश्म चोरी की घटना हुई थी। पुलिस ने बताया 5 करोड़ साल पुराने जीवाश्म चोरी करने के आरोपी की पहचान के लिए घटनास्थल और आसपास के स्टॉल, मंडप और हॉल के 100 से भी ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए थे। इसके बाद आरोपी की पहचान की गई। फिर सूचना के सहारे पुलिस की टीम ने छापेमारी कर के नोएडा के सेक्टर 22 में आरोपी को अरेस्ट किया। आरोपी की पहचान 49 वर्षीय मनोज कुमार मिश्रा के तौर पर हुई है।

आरोपी के पास से जीवाश्म बरामद
पूछताछ में आरोपी मनोज कुमार मिश्रा ने चोरी की बात कबूल कर ली। पुलिस ने आरोपी के पास से चोरी किया गया गैस्ट्रोपॉड जीवाश्म बरामद भी कर लिया है। आरोपी नोएडा के एक फाइव स्टार होटल का कर्मचारी है। आरोपी विभिन्न कला रूपों में गहरी रुचि रखता है। इसी कारण मेले में आता रहता है।

गया था मेला देखने, वहां से 5 करोड़ साल पुराना जीवश्म चुरा लाया Read More »

मोहन ने मोहा ब्रिटेन करीबियों का मन..

इंदौर। मुख्यमंत्री मोहन यादव इन दिनों अपने प्रशासनिक नवरत्नों के साथ यूके यात्रा पर हैं। किसी मल्टीनेशनल कंपनी के सीईओ की तरह वे वहां कारोबारियों के बीच मप्र की ब्रांडिंग-मार्केटिंग कर रहे हैं, ताकि वहां के पूंजीपति मप्र में निवेश करें। प्रदेश का औद्योगिक विकास हो। युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलें। उन्होंने अपनी गारंटी देते हुए कहा कि आप एक बार मप्र आकर देखें, आपका मन स्वयं ही कहेगा, यहां पैसा लगाना है।
2007 में जिस ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की परम्परा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने रखी थी। उसे 2019-20 में सिर्फ 15 महीने सरकार चलाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी कायम रखा था। हालांकि उन्होंने नाम बदला था, मकसद नहीं। अब उसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए मप्र के औद्योगिक विस्तार के सपने आंखों में संजोकर डॉ. मोहन यादव यूके पहुंचे। कुर्ता-पायजामा और जैकेट जैसे परम्परागत राजनीतिक परिधान को छोड़कर डॉ. यादव युके में भारतीयों के बीच सूटबूट और गले में मफलर डाले कॉर्पोरेट लूक में नजर आए। उन्होंने वहां एग्रीकल्चर, रेडीमेड, गार्मेंट, आॅटोमोबाइल, हेल्थ, सोया इंडस्ट्री, हैंडलूम, टूरिज्म, आयरन, रिनुएबल एनर्जी, सीमेंट, लॉजिस्टिक, होटल्स और आईटी के साथ ही खनीज के क्षेत्र में मप्र की बढ़ती धाक बताई। बोले कि मप्र ऐसा राज्य है, जहां बड़े कारोबारी समूहों का विश्वास बढ़ा है। इसीलिए अब मप्र की गिनती पिछड़े राज्यों में नहीं होती, बल्कि देश के तेजी से संपन्न होते राज्यों में से एक है मप्र।
उनका कहना है कि मप्र जैसी लैंडबैंक भारत के दूसरे राज्य में नहीं है। प्रदेश का आर्थिक और औद्योगिक विकास तूफानी रफ्तार पकड़ चुका है। फिर चाहे किसी भी सेक्टर की बात कर लें। कृषि से लेकर इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी तक में मप्र ने दूसरे राज्यों को अपना लोहा मनवाया है।
सरकार देगी आपका साथ
डॉ. यादव ने उद्योग नीति के साथ ही मप्र सरकार द्वारा उद्योगों को मुहैया कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी दी। बताया कि गार्मेंट सेक्टर में हर लेबर पर 5 हजार रुपए महीना सरकार इंसेंटिव देगी। चार-छह महीने नहीं, 10 साल का कमिटमेंट होगा। अन्य सेक्टर्स की सुविधा-सहूलियत का भी ध्यान रखा जा रहा है।
यादगार होगी जीआईएस-2025
ब्रिटेन के बाद अब मुख्यमंत्री जर्मनी जाएंगे। ब्रिटेन के अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और विदेशों के कई निवेशक (विशेष रूप से ब्रिटेन और जर्मनी) हमारे राज्य में निवेश करने के इच्छुक हैं। मैं दावे से कहता हूं कि फरवरी में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट यादगार होगी।
संविधान में विश्वास…
डॉ. मोहन यादव की गिनती फायर ब्रांड हिंदू नेता के रूप में होती है, लेकिन वे संविधान में विश्वास रखते हैं। संविधान दिवस पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके उन्होंने दोनों के गुणों को आत्मसात करने की अपील की।
भरोसेमंद टीम के साथ हैं यादव
मुख्यमंत्री अकेले यूके नहीं गए हैं। उनके साथ सीनियर आईएएस और सीएस लेवल के अधिकारी राजेश राजौरा, राघवेंद्र सिंह, संजय दुबे के साथ ही चंद्रमौली शुक्ला जैसे भरोसेमंद अफसर हैं।

मोहन ने मोहा ब्रिटेन करीबियों का मन.. Read More »

हिंदुओं पर जारी हमलों के बीच आईपीएल 2025 से बांग्लादेशियों की छुट्‌टी

नई दिल्ली, एजेंसी
बांग्लादेश में हिंदू और उनके धार्मिक स्थलों पर चौबीसों घंटे हमले किए जा रहे हैं। इन हमलों के वीडियो लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में बांग्लादेशी क्रिकेटरों के लिए आईपीएल से बुरी खबर आई है। अब पाकिस्तान के साथ बांग्लादेश दूसरा देश है, जहां के क्रिकेटरों की आईपीएल से पूरी तरह छुट्‌टी हो चुकी है। इसकी वजह है दो दिन तक चले आईपीएल 2025 मेगा आॅक्शन। जहां एक भी बांग्लादेशी खिलाड़ी को किसी फ्रेंचाइजी ने नहीं खरीदा।
आईपीएल 2024 में मुस्तफिजुर रहमान को चेन्नई सुपर किंग्स की तरफ से खेलते हुए देखा गया था। उनका प्रदर्शन भी अच्छा था। इस बार ये खिलाड़ी भी आईपीएल 2025 से बाहर है। बांग्लादेशी क्रिकेटरों से परहेज की कई वजह है। इनमें बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले के साथ ही भारत सरकार की समझाइश को नजर अंदाज किया जाना भी शामिल है। दूसरी वजह बांग्लादेश के खिलाड़ियों का पिछले कुछ समय से टी20 क्रिकेट में प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा है। माना जा रहा है कि उनके पास टैलेंट की कमी दिख रही है। उनके पास फ्रेंचाइजी क्रिकेट खेलने का भी ज्यादा अनुभव नहीं है। बांग्लादेश के 12 खिलाड़ी इस बार मेगा आॅक्शन में थे, लेकिन किसी भी आईपीएल फ्रेंचाइजी उनके ऊपर बोली लगाने की हिम्मत नहीं दिखाई।
आईपीएल बीच में छोड़कर चले जाना
एक बड़ा कारण है उनका बीच टूर्नामेंट से वापस लौटना। दरअसल, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड अपने खिलाड़ियों को एनओसी देने में आनाकानी करता है। ऐसे में खिलाड़ी आईपीएल खेलने भारत आते हैं और दूसरी तरफ बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड कोई सीरीज रख लेता है, जिसके कारण बांग्लादेशी खिलाड़ियों को आईपीएल बीच में छोड़कर वापस लौटना पड़ता है।

हिंदुओं पर जारी हमलों के बीच आईपीएल 2025 से बांग्लादेशियों की छुट्‌टी Read More »

हारे तो ईवीएम गलत, जीत पर कुछ न कहना, इसे कैसे देखा जाए : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली, एजेंसी
सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कई चुनावी सुधारों के साथ बैलेट पेपर मतदान प्रणाली फिर शुरू करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की इस दलील पर कि आंध्रप्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू और पूर्व सीएम वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने भी ईवीएम से छेड़छाड़ पर सवाल उठाए थे, जस्टिस विक्रम नाथ और पी.बी. वराले की पीठ ने कहा, जब नायडू या रेड्डी हारते हैं तो कहते हैं कि ईवीएम से छेड़छाड़ की गई। जीतने पर कुछ नहीं कहते। इसे कैसे देखा जाए?
पीठ ने कहा कि यह वह जगह नहीं है, जहां आप इस तरह की बहस करें। याचिकाकर्ता डॉ. के.ए. पॉल ने सुझाव दिया कि भारत को अमेरिका जैसे देशों की प्रथा का पालन करना चाहिए। जो मतपत्रों का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि ईवीएम लोकतंत्र के लिए खतरा है। एलन मस्क ने भी ईवीएम से छेड़छाड़ पर चिंता व्यक्त की है। पॉल ने यह भी मांग की थी कि पैसे या शराब बांटते हुए पकड़े जाने पर उम्मीदवारों को पांच साल के लिए अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। इससे निपटने के लिए व्यापक नीति होनी चाहिए। चुनावी भागीदारी बढ़ाने के लिए मतदाता शिक्षा कार्यक्रम, राजनीतिक दलों के वित्तपोषण की जांच के लिए तंत्र और चुनावी हिंसा को रोकने के लिए नीतिगत ढांचा होना चाहिए।

हारे तो ईवीएम गलत, जीत पर कुछ न कहना, इसे कैसे देखा जाए : सुप्रीम कोर्ट Read More »

Scroll to Top
Verified by MonsterInsights