खूंटी (झारखंड), एजेंसी झारखंड के खूंटी जिले में कसाई का काम करने वाले एक युवक ने अपनी लिव-इन पार्टनर की हत्या कर के उसके शव को 40 से ज्यादा टुकड़ों में काटकर फेंक दिया। खुलासा किया आवारा कुत्तों ने। जो मानव शरीर के हिस्से लेकर भटक रहे थे। पुलिस ने तफ्तीश शुरू की। बुधवार को आरोपी पकड़ा गया। प्रारंभिक पूछताछ में उसने हत्या कबूली। पुलिस के मुताबिक नरेश भेंगरा (25) खूंटी में रहता है। प्रेरणा (24, बदला नाम) रांची की रहने वाली थी। पास ही नरेश का ननिहाल था। जहां आने-जाने के कारण दोनों में प्यार हो गया था। फिर प्रेरणा भी उसके साथ खूंटी के जोजोदाग आकर लिव इन में रहने लगी। डेढ़ साल साथ रहने के बाद प्रेरणा तमिलनाडु के त्रिपुर चली गई जबकि नरेश बेंगलुरू में काम करने लगा। जहां उसे एक अन्य युवती से प्रेम हुआ। दोनों ने शादी कर ली। एक बेटा भी हुआ। प्रेरणा को जानकारी लगी। वह बेंगलुरू पहुंच गई। समझाकर 6 नवंबर को नरेश उसे झारखंड के हटिया ले आया। 8 नवंबर को जोजोदाग के लिए लेकर निकला। बीच में भगवान पांज टोंगरी गांव ले गया। जो वन ग्राम है। वहां शारीरिक संबंध बनाए। प्रेरणा ने कहा मुझे जाने दो। मेरे घर मालगो पहुंचा दो। जो पैसे दिए मैंने वह लौटा दो। इसी बात को लेकर दोनों में झगड़ा हो गया। गुस्से में नरेश ने दुपट्टे से प्रेरणा का गला घोंटकर हत्या कर दी। बाद में उसने टांगी और और अन्य हथियार से शव के कई टुकड़े कर डाले। फिर आधे हिस्से जंगल में फेंके। आधे दफना दिए। बाद में नरेश तालाब में नहा-धोकर घर चला गया।
रांची, एजेंसी। हेमंत सोरेन आज 28 नवंबर को शाम 4 बजे झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। सोरेन चौथी बार मुख्यमंत्री के पद की शपथ लेने वाले हैं। शपथ लेने के बाद झारखंड के 14 वें मुख्यमंत्री बन जाएंगे। राजधानी के मोरहाबादी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह की भव्य तैयारी की जा रही है। शपथ समारोह में क.ठ.ऊ.क.अ. अपनी ताकत दिखाएगा। हेमंत सोरेन के साथ कांग्रेस और राजद कोटे से एक-एक मंत्री के शपथ लेने की चर्चा भी देर शाम तक चलती रही. हालांकि, इसको लेकर क.ठ.ऊ.क.अ. में कोई फैसला नहीं हुआ था। फिलहाल हेमंत अकेले ही शपथ लेंगे। समारोह में देशभर से क.ठ.ऊ.क.अ. के आला नेता और गठबंधन शासित राज्यों के मुख्यमंत्री पहुंचेंगे। इन्हें सरकार ने राजकीय अतिथि का दर्जा दिया है।
शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने कहा कि महाराष्ट्र में महायुति को बहुमत मिला है और मैं जनता का धन्यवाद करता हूं। जनता ने महायुति पर विश्वास जताया है। मुझे यह समझ है कि आम आदमी को कहां-कहां परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मैंने कभी खुद को मुख्यमंत्री नहीं समझा, बल्कि हमेशा एक सामान्य नागरिक की तरह काम किया।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना शिंदे गुट के प्रमुख एकनाथ शिंदे ने बुधवार को मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगा दिया। उन्होंने कहा कि मेरे मन में मुख्यमंत्री बनने की कोई इच्छा नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह जो भी निर्णय लेंगे, मैं उसे स्वीकार करूंगा। सरकार बनाने में मेरी तरफ से कोई अड़चन नहीं आएगी। मैं भाजपा के निर्णय का सम्मान करता हूं और भाजपा के किसी भी मुख्यमंत्री को मैं स्वीकार करता हूं।
एकनाथ शिंदे ने आगे कहा कि पिछले ढाई साल में प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने मेरा पूरा समर्थन किया। उन्होंने बालासाहेब ठाकरे के एक साधारण शिवसैनिक को मुख्यमंत्री बनाने का सपना पूरा किया। वे हमेशा मेरे साथ खड़े रहे हैं और मुझ पर विश्वास किया। मुझे मुख्यमंत्री बनाया और बड़ी जिम्मेदारी दी। मैं कभी भी रोने या लड़ने वाला व्यक्ति नहीं हूं, बल्कि मैं समस्याओं का समाधान करने वाला व्यक्ति हूं। हम मिलकर काम करने वाले लोग हैं। ढाई साल में हमने बहुत काम किया और महाराष्ट्र में विकास की गति बढ़ाई है। हमने हर वर्ग के कल्याण के लिए काम किया।
उन्होंने कहा कि महायुति को महाराष्ट्र में बहुमत मिला है, और मैं जनता का आभार व्यक्त करता हूं। जनता ने महायुति की विकास योजनाओं को समर्थन दिया है। मुझे यह समझ है कि आम आदमी को कहां-कहां कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मैंने खुद को कभी मुख्यमंत्री नहीं समझा, बल्कि मैंने हमेशा एक आम आदमी की तरह काम किया और महाराष्ट्र की समस्याओं को दूर करने की कोशिश की है। हमारे काम के परिणाम अब दिख रहे हैं। हमने लाडली बहन योजना शुरू की है और मैं लाडली बहनों का लाडला भाई हूं।
एकनाथ शिंदे ने यह भी कहा कि यदि मेरी वजह से महाराष्ट्र में सरकार बनाने में कोई समस्या उत्पन्न होती है, तो प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह बिना किसी संकोच के जो भी निर्णय लेंगे, वह मुझे स्वीकार होगा। आप हमारे परिवार के मुखिया हैं, और जिस तरह से भाजपा के लोग आपके निर्णय को मानते हैं, हम भी उसी तरह से आपके निर्णय को स्वीकार करेंगे। मैंने पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को फोन कर यह भरोसा दिलाया है कि मेरी वजह से सरकार बनाने में कोई अड़चन नहीं आएगी।
कांग्रेस का बयान:
महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले ने कहा कि महाराष्ट्र के कार्यवाहक मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे यह नहीं समझ पा रहे हैं कि भाजपा नेतृत्व क्या करना चाहता है। मुख्यमंत्री के चेहरे की घोषणा में देरी का एक बड़ा कारण यही है। ईवीएम और बैलेट पेपर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने यह घोषणा की है कि हम बैलेट पेपर से मतदान बहाल करने के लिए अपनी आवाज उठाएंगे। महाराष्ट्र में इस संबंध में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा।
विपक्ष की आपत्तियां:
महाराष्ट्र में नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर महायुति में निर्णय लेने में हो रही देरी पर विपक्ष ने सवाल उठाए थे। यह दावा किया गया था कि भाजपा नेतृत्व जातीय समीकरण और एनडीए के सहयोगी दलों के साथ मिलकर कोई निर्णय लेना चाहता है। यह भी कयास लगाए गए थे कि यदि देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बनते हैं, तो एकनाथ शिंदे सरकार का हिस्सा नहीं रहेंगे। इन सभी कयासों पर एकनाथ शिंदे ने बुधवार को स्पष्ट किया कि यह सही नहीं है।
चुनावी परिणाम:
पिछले हफ्ते आए चुनावी परिणामों में शिवसेना, भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के महायुति गठबंधन ने भारी बहुमत के साथ सत्ता बरकरार रखी। महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा में महायुति गठबंधन को 230 सीटें मिलीं, जबकि एमवीए को केवल 46 सीटें प्राप्त हुईं। भाजपा को 132, शिवसेना को 57 और एनसीपी को 41 सीटें मिलीं। इसके अलावा, अन्य के खाते में 4 सीटें गईं। शिवसेना (यूबीटी) ने 20 सीटों के साथ विपक्ष में सबसे बड़ी पार्टी बनने का दावा किया, जबकि कांग्रेस ने 16 सीटें जीतीं और राकांपा (शरद पवार गुट) को 10 सीटें मिलीं।
झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में हुए अग्निकांड में 18 शिशुओं की मौत के मामले में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बड़ी कार्रवाई की है। डिप्टी सीएम के निर्देश पर गठित चार सदस्यीय कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज के प्रधानाचार्य को हटा दिया गया है, साथ ही कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को आरोप पत्र जारी किया गया है और तीन अन्य को निलंबित किया गया है।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि झांसी मेडिकल कॉलेज में हुई इस दिल दहला देने वाली घटना को लेकर सरकार बेहद संवेदनशील है। पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद दी जा रही है। उन्होंने बताया कि इस मामले में चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक किंजल सिंह के नेतृत्व में चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज के कार्यवाहक प्रधानाचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह सेंगर को उनके पद से हटा दिया गया है और उन्हें चिकित्सा शिक्षा विभाग के महानिदेशालय से संबद्ध किया गया है। इसके अलावा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सचिन माहुर को आरोप पत्र दिया गया है, और कॉलेज के अवर अभियंता (विद्युत) संजीत कुमार, एनआईसीयू वार्ड की नर्सिंग सिस्टर इंचार्ज संध्या राय और मेडिकल कॉलेज की प्रमुख अधीक्षक डॉ. सुनीता राठौर को तत्काल निलंबित कर आरोप पत्र जारी किया गया है।
इसके साथ ही, कमिश्नर स्तर से भी जांच के आदेश दिए गए हैं। कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओम शंकर चौरसिया, सर्जरी विभाग के सह-आचार्य डॉ. कुलदीप चंदेल और विद्युत प्रभारी अधिकारी को आरोप पत्र जारी कर उनकी भूमिका की जांच के लिए मण्डलायुक्त झांसी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
यह घटना 15 नवंबर को झांसी स्थित महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के एनआईसीयू वार्ड में हुई थी, जिसमें आग लगने से 18 बच्चों की मृत्यु हो गई थी। हादसे के बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक घटनास्थल पर पहुंचे थे और पीड़ित परिवारों को सांत्वना दी थी, साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
संभल हिंसा में डीआईजी, डीएम और एसपी पर महिलाओं और अन्य उपद्रवियों द्वारा सुनियोजित तरीके से पथराव किया गया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और ड्रोन वीडियो के जरिए हमलावरों के चेहरे की पहचान करना शुरू कर दिया है। बवाल से पहले सीसीटीवी कैमरे तोड़े जाने से घटना की योजनाबद्धता का संकेत मिल रहा है।
संभल हिंसा के बाद जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। पीआरओ और दो अन्य सिपाहियों पर हमले की सूचना पर पहुंचे डीआईजी, डीएम और एसपी पर पहले महिलाओं ने पथराव किया था, उसके बाद अन्य लोगों ने भी पत्थर फेंके थे।
अधिकारियों ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि जब वे हिंदूपुरा खेड़ा में अपनी फोर्स के साथ पहुंचे, तो तीन महिलाओं ने छतों से पुलिस पर पथराव किया। इसके अलावा अन्य लोग भी छतों से पत्थर फेंक रहे थे, जिसके कारण तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। एसपी ने यह भी बताया कि कई स्थानों पर लगे सीसीटीवी के डीवीआर भी गायब थे।
एसपी ने आगे कहा कि उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। पुलिस प्रशासन ने 11 वीडियो जारी किए हैं, जिनमें से पांच ड्रोन कैमरे, तीन अन्य कैमरे और तीन सीसीटीवी कैमरे के वीडियो हैं। इन वीडियोज में उपद्रवी सीसीटीवी कैमरे तोड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। इन कैमरों में कैद कुछ उपद्रवियों के चेहरे साफ दिख रहे हैं, जबकि कुछ ने मास्क पहन रखे हैं। ये उपद्रवी पहले कैमरों को तोड़ते हैं और फिर बवाल मचाते हैं। ड्रोन कैमरे को भी तोड़ने के लिए पथराव किया गया, लेकिन पत्थर कैमरे तक नहीं पहुंचे। अलग-अलग वीडियो में अलग-अलग चेहरे दिखाई दे रहे हैं, और ये वीडियो जामा मस्जिद के आसपास के इलाके के हैं।