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धधकती बस में 26 यात्री जिंदा जले

महाराष्ट्र के बुलढाणा में शुक्रवार देर रात एक बस हादसा हो गया। नागपुर से पुणे जा रही बस खंभे से टकराकर डिवाइडर पर चढ़ गई और पलट गई, जिससे उसमें आग लग गई। बस में 33 लोग सवार थे, जिसमें 26 की जलने से मौके पर मौत हो गई।
आठ लोगों ने बस की खिड़की का शीशा तोड़कर जान बचाई। हादसा रात करीब 1.30 बजे बुलढाणा जिले के सिंदखेड़ाराजा के पास पिंपलखूंटा गांव के पास समृद्धि महामार्ग एक्सप्रेस-वे पर हुआ। बुलढाणा एसपी सुनील कड़ासेन ने बताया- हादसे में बस का ड्राइवर बच गया है। उसने बताया कि टायर फटने की वजह से बस पलटी। प्रत्यक्षदर्क्षियों के मुताबिक ड्राइवर ने बस पर संतुलन खो दिया था। बस पहले एक लोहे के खंभे से टकराई। फिर सड़क के बीच बने कांक्रीट के डिवाइडर से टकराकर पलट गई। बस बायीं तरफ पलटी, जिससे बस का दरवाजा नीचे आ गया। ऐसे में लोगों के पास बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था। पुलिस ने बस से 25 शवों को निकाला है। बुरी तरह जलने से शवों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि पलटने से बस का डीजल टैंक फट गया। इससे डीजल सड़क पर फैल गया। इससे आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। कुछ लोगों को छोड़ सभी जल गए।

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146 दिन तक विवाह की शहनाई नहीं गूंजेगी

देवशयनी एकादशी के साथ ही अब 146 दिन तक मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे। विवाह की शहनाईयां नहीं गूंजेंगी। अब पांच महीने तक चातुर्मास में धर्मगंगा की वर्षा होगी। इस अवधि में भगवान विष्णु निद्रा में रहेंगे और भगवान शिव सृष्टि का संचालन करेंगे। इस बार चार नहीं, बल्कि 5 माह चातुर्मास के तहत धर्म की गंगा बहेगी। शहर में बड़ी संख्या में संत पहुंच चुके हैं।
मंदिरों, मठों-आश्रमों में प्रवचनों का सिलसिला शुरू हो गया है। भक्ति और साधना का पर्व चातुर्मास इस बार आषाढ़ शुक्ल देवशयनी एकादशी पर 29 जून से शुरू हुआ। चातुर्मास चार के बजाय पांच महीने का इसलिए है कि यह अधिकमास वाला साल है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह हर तीन साल में एक बार आता है। पिछले साल चातुर्मास 117 दिन का था, जबकि इस बार 147 दिन का होगा। इसका समापन 23 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर हो जाएगा। पौराणिक मान्यता है कि देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु सृष्टि के संचालन का भार भगवान शिव को सौंपकर योग निद्रा में जाएंगे।

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अमरनाथ यात्रा कल से, 62 दिन चलेगी, हेलमेट भी साथ ले जाएं

बाबा अमरनाथ यात्रा शनिवार से शुरू हो रही है। पवित्र गुफा की ओर अमरनाथ यात्रियों का पहला जत्था शुक्रवार सुबह जम्मू से रवाना किया गया। तड़के करीब सवा चार बजे पूजा-अर्चना के बाद उप राज्यपाल और अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज सिह्ना ने पहले जत्थे को रवाना किया।
इस दौरान जम्मू बेस कैंप में पूरा माहौल भोले के रंग में रंग गया। भक्तों ने भोले के जयकारे लगाकर यात्रा की शुरुआत की। इस बार यह यात्रा 62 दिन चलेगी। दरअसल, इस बार सावन दो महीने हैं। पहले दिन कुल 2189 श्रद्धालुओं को बालटाल रूट के लिए टोकन जारी किया गया।
बालटाल वाला छोटा रास्ता इस बार काफी डेवलप हो चुका है। 16 किमी के रूट पर 11 किमी रोड बनने से राह आसान हो चुकी है। हालांकि 5 किमी रास्ता अब भी संकरा है। श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर यह है कि बालटाल में ही 350 से 550 रुपए में एक महीने की वैलिडिटी के साथ सिम खरीद सकते हैं। यह हाथों-हाथ चालू भी हो जाती है। लंगर के आसपास ही गर्म कपड़े और ट्रैकिंग के सामान के साथ रेनकोट, छाता सब उपलब्ध हैं। रुकने के लिए टेंट भी 500 रुपए रोज में मिल सकेगा। यात्रा मार्ग पर लंगर-टेंट का काम 10 जून से शुरू हो चुका था। लंगर वालों ने बताया कि तब 3 मीटर ऊंची बर्फ जमी थी। बर्फ हटाने के बाद ही लंगर लगा पाए।
श्राइन बोर्ड श्रद्धालुओं को मुफ्त हेलमेट देगा
पिछले साल पवित्र‌ गुफा के पास बादल फटने से बाढ़ आ गई थी। इसे देखते हुए इस बार सावधानी बरती जा रही है। श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के सीईओ मनदीप कुमार भंडारी के मुताबिक लैंडस्लाइड और पत्थर गिरने की घटनाओं को देखते हुए इस बार हाई रिस्क जोन वाले ढाई किमी के रास्ते में यात्रियों को हेलमेट अनिवार्य किया गया है।
इतना ही नहीं, जो लोग खच्चर से जाएंगे, उनके लिए भी हेलमेट जरूरी होगा। हेलमेट श्राइन बोर्ड की तरफ से मुफ्त मुहैया कराए जाएंगे, साथ ही पहाड़ी इलाकों में 30 से ज्यादा ट्रेंड माउंटेन रेस्क्यू टीमों को तैनात किया है। श्राइन बोर्ड ने 1700 डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों की तैनाती की गई है। 4000 सफाई कर्मचारी और यात्रा के दोनों मार्गों पर 5100 टॉयलेट्स बनाए गए हैं। पाकिस्तान की ओर से लगातार हो रही घुसपैठ की कोशिशों और अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा को देखते हुए सांबा में इंटरनेशनल बॉर्डर से एक किमी एरिया में धारा 144 लगाई गई है, यानि पूछताछ के दौरान स्थानीय ग्रामीणों व दूसरे लोगों को आइडेंटिटी बतानी होगी।

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अगस्त से 66 रु. लीटर वाले फ्यूल पर दौड़ेंगी गाड़ियां

नई दिल्ली, एजेंसी। भारत में 100% एथेनॉल फ्यूल पर चलने वाले वाहन अगस्त में लॉन्च किए जाएंगे। ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे मिनिस्टर नितिन गडकरी ने एक इंटरव्यू में कहा कि यह देश में एक क्रांतिकारी पहल होगी, जो इम्पोर्ट-आॅप्शन, कॉस्ट इफेक्टिव, पॉल्यूशन फ्री और पूरी तरह स्वदेशी होगी। वर्तमान में भारतीय बाजार में एथेनॉल की कीमत लगभग 66 रुपए लीटर के आसपास है और पेट्रोल की कीमत 108 रुपए के आसपास चल रही है। अगर ऐसा होता है तो जल्द ही भारतीय सड़कों पर सस्ते फ्यूल पर टू-व्हीलर और कारें दौड़ती नजर आएंगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा- अगस्त से मैं 100% एथेनॉल पर चलने वाले वाहन लॉन्च करूंगा। बजाज, टीवीएस और हीरो ने 100% एथेनॉल पर चलने वाली मोटरसाइकिलें बनाई हैं। उन्होंने कहा कि टोयोटा कंपनी की 60% पेट्रोल और 40% बिजली से चलने वाली कैमरी कार की तरह ही अब देश में ऐसे वाहन लॉन्च किए जाएंगे, जो 60% एथेनॉल और 40% बिजली से चलेंगे।

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Avika Gor Interview: ‘बालिका वधू’ से पहले यहां मिला मुझे पहला ब्रेक, साउथ सिनेमा ने दिखाई बड़े पर्दे की राह

कलर्स चैनल के पहले सुपरहिट धारावाहिक ‘बालिका वधू’ की आनंदी यानी अविका गौर ने प्रिंट विज्ञापन से शुरुआत करके वाया साउथ सिनेमा अब हिंदी सिनेमा में कदम रखा है। उनकी पहली हिंदी फिल्म ‘1920 हॉरर्स ऑफ द हार्ट’ को बॉक्स ऑफिस पर संतोषजनक प्रतिसाद मिला है। एक कम बजट की फिल्म के हिसाब से इसका कलेक्शन भी इसके निर्माता अच्छा मान रहे हैं। 30 जून 1997 को मुंबई में जन्मी अविका गौर ने अपने जन्मदिन पर ‘अमर उजाला’ से ये खास बातचीत की।  

हॉरर फिल्मों को लेकर विक्रम भट्ट का एक अलग ही नजरिया रहा है। अपनी पहली हिंदी फिल्म के लिए ये फिल्म चुनने की वजह क्या रही?  
इस फिल्म के लिए मुझे विक्रम भट्ट जी का फोन आया। फोन पर ही उन्होंने कहानी सुनाई और कहा कि आपके साथ यह फिल्म करनी है। मुझे इतना बड़ा मौका बिना फिल्मी पृष्ठभूमि के। मेरा उनसे यही सवाल था कि मैं ही क्यों? उन्होंने कहा कि मुझे पता कि तुम ही यह रोल कर सकती हो। फिल्म को अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। मैं खुद भी थियेटर में जाकर रिस्पांस देख रही हूं। कुछ बड़ी फिल्में आगे पीछे थी, फिर भी मेरी फिल्म को लोग पसंद कर रहे हैं। कोविड के बाद ऐसा रिस्पॉन्स मिलना बहुत बड़ी बात है। 

आपने चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर करियर की शुरुआत की, पहला मौका कब मिला? 
एक बार मैं मुलुंड (मुंबई के पास का उपनगर) में अपने डांस क्लास के तरफ से परफॉर्म करने गई थी वहां मुझे एक कास्टिंग एजेंट ने देखा और मेरे पापा समीर गौर से बात की। अगले दिन मेरी फोटो मांगी गई और अगले दिन ही मुझे फोटोशूट पर बुला लिया गया। शूट पर जाने के बाद पता चला था कि सचिन पिलगांवकर और सुप्रिया पिलगांवकर के साथ एक बैंक के विज्ञापन के लिए प्रिंट ऐड शूट करना है। 

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