देवशयनी एकादशी के साथ ही अब 146 दिन तक मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे। विवाह की शहनाईयां नहीं गूंजेंगी। अब पांच महीने तक चातुर्मास में धर्मगंगा की वर्षा होगी। इस अवधि में भगवान विष्णु निद्रा में रहेंगे और भगवान शिव सृष्टि का संचालन करेंगे। इस बार चार नहीं, बल्कि 5 माह चातुर्मास के तहत धर्म की गंगा बहेगी। शहर में बड़ी संख्या में संत पहुंच चुके हैं।
मंदिरों, मठों-आश्रमों में प्रवचनों का सिलसिला शुरू हो गया है। भक्ति और साधना का पर्व चातुर्मास इस बार आषाढ़ शुक्ल देवशयनी एकादशी पर 29 जून से शुरू हुआ। चातुर्मास चार के बजाय पांच महीने का इसलिए है कि यह अधिकमास वाला साल है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह हर तीन साल में एक बार आता है। पिछले साल चातुर्मास 117 दिन का था, जबकि इस बार 147 दिन का होगा। इसका समापन 23 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर हो जाएगा। पौराणिक मान्यता है कि देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु सृष्टि के संचालन का भार भगवान शिव को सौंपकर योग निद्रा में जाएंगे।