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ढाई किमी के फ्लाईओवर से बदल जाएगी अरेरा हिल्स की पूरी यातायात व्यवस्था….

गणेश मंदिर से गायत्री मंदिर तक बन रहे लगभग ढाई किमी लंबे फ्लाईओवर के निर्माण के बाद आरकेएमपी स्टेशन, एमपी नगर और अरेरा हिल्स सहित आसपास के इलाके की पूरी ट्रैफिक व्यवस्था बदल जाएगी। मौजूदा वल्लभ भवन रोटरी पर फ्लाईओवर की एक आर्म आएगी। साथ में यहां एक नई सड़क बन रही है और फ्लाईओवर की दोनों तरफ सर्विस रोड भी बन रही है।
तीन भाग में बंट जाएगा ट्रैफिक
फ्लाईओवर, सर्विस रोड और नई सड़क के बन जाने से इस पूरे इलाके का ट्रैफिक तीन भाग में बंट जाएगा। एक फ्लाईओवर के ऊपर से चलेगा, दूसरा उसके नीचे और तीसरा सर्विस रोड पर। आरकेएमपी से एमपी नगर, डीबी सिटी मॉल, अरेरा हिल्स और वल्लभ भवन जाने वाले वाहनों को मैन रोड पर नहीं आना पड़ेगा। कुल मिलाकर जिन वाहनों को एमपी नगर, डीबी मॉल और अरेरा हिल्स नहीं आना है वे फ्लाईओवर का इस्तेमाल करेंगे। जिन्हें एमपी नगर, डीबी मॉल, अरेरा हिल्स या जेल रोड पर किसी एक स्थान पर जाना है वे नीचे की सड़क उपयोग करेंगे। और जिन्हें इस इलाके में ही एक जगह से दूसरी जगह जाना है।

वल्लभ भवन रोटरी की
भूल-भुलैया दूर होगी
वल्लभ भवन रोटरी पर अभी पांच रास्ते मिलते हैं। यहां एक और सड़क बनने, फ्लाईओवर की आर्म उतरने और सर्विस रोड भी बनने से इस रोटरी को नए सिरे से डिजाइन किया जा रहा है। सिग्नल की लोकेशन बदली जाएगी और ट्रैफिक को अलग-अलग करने के लिए आईलैंड बनाए जाएंगे।
25 मिनट का यह रास्ता
7 मिनट में हो जाएगा तय
फ्लाईओवर का एक सिरा सावरकर सेतु के पास और दूसरा सुभाष नगर आरओबी के पास होगा। होशंगाबाद रोड पर सावरकर सेतु से शुरू होकर गणेश मंदिर पर जीजी फ्लाईओवर पर आकर गायत्री मंदिर के पास से सुभाष नगर आरओबी से प्रभात चौराहा तक पहुंचा जा सकेगा। 5 किमी की यह दूरी 25 नहीं, 7 मिनट में पूरी होगी।

बोर्ड आॅफिस चौराहा पर 40 मीटर के गर्डर की लॉन्चिंग
बोर्ड चौराहे पर चौराहे के एक सिरे से दूसरे सिरे तक 40 मीटर के गर्डर की लॉन्चिंग बीती रात शुरू हुई। रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक ट्रैफिक को डायवर्ट करके दो गर्डर लॉन्च किए गए। पीडब्ल्यूडी के एसडीओ आरके शुक्ला ने कहा कि 30 जून तक हर हाल में फ्लाईओवर को तैयार करने का टारगेट है।
एजेंसियों में समन्वय की कमी के कारण निर्माण में हो रही देरी
फ्लाईओवर को इस साल मई तक पूरा हो जाना था, लेकिन एजेंसियों में समन्वय की कमी के कारण इसमें देरी हो रही है। बोर्ड आॅफिस चौराहा, गुरुदेव गुप्त चौराहा और वल्लभ भवन रोटरी पर ट्रैफिक डायवर्जन की अनुमति मिलने में देरी हो रही है। यहां कोलार लाइन की शिफ्टिंग होना है। पीडब्ल्यूडी निगम को एक करोड़ रुपए जमा कर चुका है, लेकिन शिफ्टिंग का काम अटका है।

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मप्र में आएंगे विदेशी जिराफ-जेब्रा, प्रोजेक्ट के लिए डेढ़ करोड़ रुपए मांगे

मध्यप्रदेश की धरती पर विदेशी चीता आने के बाद अब जिराफ और जेब्रा भी आएंगे। भोपाल के वन विहार के मास्टर ले-आउट प्लान को जू अथॉरिटी आॅफ इंडिया से हरी झंडी मिल गई है। वहीं, वन विहार मैनेजमेंट ने सरकार से प्रोजेक्ट के लिए डेढ़ करोड़ रुपए भी मांगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जू अथॉरिटी और सरकार से प्रोसेस पूरी होने के बाद जिराफ और जेब्रा लाने के प्रोजेक्ट में और तेजी आएगी।
वन विहार मैनेजमेंट ने करीब 8 महीने पहले जू अथॉरिटी आॅफ इंडिया को प्रस्ताव भेजा था। वहीं, वन मंत्री डॉ. विजय शाह भी अफ्रीका से जिराफ-जेब्रा लाने की बात कह चुके हैं, इसलिए प्रोजेक्ट में और तेजी आई। वन विहार की डायरेक्टर पद्मप्रिया बालकृष्णन ने बताया कि मास्टर ले-आउट प्लान को अप्रूवल मिल गया है। वहीं, प्रोजेक्ट के लिए सरकार भी राशि मांगी गई है। जू अथॉरिटी के निदेर्शानुसार आगे की प्रोसेस की जा रही है।
इसलिए बेहतर है वन विहार
वन विहार देश का इकलौता ऐसा नेशनल पार्क है, जो किसी राजधानी के बीचों-बीच है। 26 जनवरी 1983 को इसे नेशनल पार्क का दर्जा मिला था। वन विहार बड़े तालाब के पास पहाड़ी और आसपास के 445.21 हेक्टेयर क्षेत्र को मिलाकर बना है। हर साल यहां डेढ़ से दो लाख पर्यटक आते हैं, इसलिए जिराफ और जेब्रा के लिए इसे बेहतर माना जा रहा है। वन विहार में बबूल की प्रजातियों की पत्तियां, फल और फूल के पेड़-पौधे भी हैं, इसलिए यह जिराफ-जेब्रा के लिए अनुकूल माना गया है।
एमपी में दो शिफ्ट में आ चुके 20 चीते- टाइगर और लेपर्ड स्टेट मध्यप्रदेश चीता स्टेट भी बन चुका है। पिछले साल 18 सितंबर को कूनो नेशनल पार्क में 8 चीते छोड़े गए थे। इसके बाद 12 चीते और आए थे। इस तरह 20 चीते यहां आ चुके हैं। इनमें से दो की मौत हो गई है। अब शेष 18 चीते हैं। वहीं, एक मादा चीता ने चार शावकों को भी जन्म दिया है।

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खुल गए स्वर्ग के द्वार….

महाद्रिपार्श्वे च तटे रमन्तं सम्पूज्यमानं सततं मुनीन्द्रे:
सुरासुरैर्यक्षमहोरगाद्यै: केदारमीशं शिवमेकमीडे…..

भगवान शिव शंकर, जो पर्वतराज हिमालय के नजदीक पवित्र मन्दाकिनी के तट पर स्थित केदारखण्ड नामक श्रृंग में निवास करते हंैं और हमेशा ऋषि-मुनियों द्वारा पूजे जाते हैं। जिनकी यक्ष-किन्नर, नाग व देवता-असुर आदि भी हमेशा पूजा करते हैं, उन अद्वितीय कल्याणकारी केदारनाथ नामक शिव शंकर की मैं स्तुति करता हूं।

देहरादून। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम के कपाट मंगलवार को पूरे विधि विधान के साथ खोले गए, इस दौरान मंदिर को करीब 20 क्विंटल फूलों से सजाया गया था। मंदिर के कपाट जिस वक्त खोले गए, उस समय वहां करीब आठ हजार श्रद्धालु पहुंचे थे। हालांकि, मौसम खराब रहने की आशंका के मद्देनजर सोमवार को श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। अगले छह महीने तक श्रद्धालु मंदिरों के दर्शन कर सकेंगे। वहीं मौसम विभाग द्वारा 29 अप्रैल तक बर्फबारी और बारिश का पूवार्नुमान व्यक्त किए जाने की वजह से राज्य सरकार ने रविवार को केदारनाथ के लिए श्रद्धालुओं का पंजीकरण 30 तारीख तक के लिए बंद कर दिया, जबकि ऋषिकेश, गौरीकुंड, गुप्तकाशी और सोनप्रयाग सहित कई जगहों पर यात्रियों को फिलहाल वहीं ठहरने को कहा जा रहा है।

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तारिक फतेह का निधन दिल में ही रह गई आम हिंदुस्‍तानी नागरिक बनने की चाहत

जाने-माने लेखक तारिक फतेह का सोमवार को निधन हो गया। वह 73 साल के थे। पाकिस्‍तान में वह पैदा जरूर हुए, लेकिन हिंदुस्‍तान उनके दिल में बसता था। सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया के दूसरे हिस्‍सों में भी चर्चा के दौरान तारिक हिंदुस्‍तान का पक्ष रखते थे। ऐसा नहीं है कि तारिक भारत की खामियां नहीं गिनाते थे। लेकिन, जब वह ऐसा करते थे तो वाकई लगता था कि कोई अपना ही बिल्‍कुल सही बात कह रहा है। तारिक खुलकर कहते थे कि वह पाकिस्‍तान में पैदा हुए भारतीय हैं। हिंदुस्‍तान में तारिक के प्रशंसकों की बड़ी संख्‍या थी। हर मुद्दे पर वह खुलकर राय रखते थे। इसमें किसी तरह की मिलावट नहीं होती थी। जिस तरह तारिक अपनी बातों को कहते थे, उसमें यह दिखता था।
उनकी बेटी नताशा ने पिता के निधन की जानकारी दी। नताशा ने लिखा, ‘पंजाब के शेर, हिंदुस्‍तान के बेटे, कनाडा के प्रेमी, सच बोलने वाले, न्याय के लिए लड़ने वाले, शोषितों की आवाज तारिक फतेह अब हमारे बीच नहीं रहे। उनका काम और उनकी क्रांति उन सभी के साथ जारी रहेगी, जो उन्हें जानते और प्यार करते थे।’

खुद का परिचय इस तरह देते थे तारिक
वह अपना परिचय पाकिस्‍तान में पैदा हुए भारतीय के तौर पर देते थे। वह कहते थे, मैं पाकिस्तान में पैदा हुआ भारतीय हूं। इस्लाम में जन्मा पंजाबी हूं। एक मुस्लिम चेतना के साथ कनाडा में एक अप्रवासी हूं। एक मार्क्सवादी मार्गदर्शित युवा हूं। हालांकि, तारिक फतेह की भारतीय नागरिक बनने की चाहत अधूरी रह गई। वह भारतीय नागरिक नहीं बन सके। यह और बात है कि उनका काफी समय भारत में बीतता था। भारतीय न्‍यूज चैनलों पर चर्चाओं में वह अक्‍सर दिखते थे। भारत में उनके चाहने वालों की कमी नहीं थी। अब उन्‍हें वह बेबाक आवाज नहीं सुनाई देगी।
अगर तारिक फतेह खुद को पाकिस्‍तान में पैदा हुआ भारतीय कहते थे तो उसकी एक वजह थी। उनका परिवार मुंबई का रहने वाला था। 1947 में भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद उनका परिवार कराची में जाकर बस गया। 20 नवंबर, 1949 को कराची में तारिक का जन्म हुआ था।

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अब तक 35 हजार बैग मुफ्त बांटे

बीते कई सालों से मधुकांता भट्ट फटे-पुराने कपड़ों को इको-फ्रेंडली बैग में बदल रही हैं। इसका मकसद प्‍लास्टिक बैग का विकल्‍प देना है। इससे इन फटे-पुराने कपड़ों का भी इस्‍तेमाल हो जाता है। मधुकांता की उम्र 93 साल हो चुकी है। उन्‍हें सिलाई करना बहुत पसंद है। वह अब तक 35,000 से ज्‍यादा कपड़ों के बैग मुफ्ट बांट चुकी हैं। 2015 से एक दिन भी ऐसा नहीं गया जब उन्‍होंने बैग न सिला हो। सुबह नहाकर पूजा और फिर ब्रेकफास्‍ट करने के बाद वह सीधे अपनी सिलाई मशीन पर बैठ जाती हैं। वह चाहती हैं कि धरती से प्‍लास्टिक का बोझ जितना कम हो सकता है हो।

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