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हार्ट सर्जरी के बाद सुष्मिता सेन की तलवारबाजी

मुबंई। बॉलीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन ने हिट वेब सीरीज ‘आर्या-3’ की शूटिंग शुरू कर दी है। इसी शो की शूटिंग के दौरान सेट पर उन्हें हार्ट अटैक आया था। इसके बाद उनकी सर्जरी हुई। सर्जरी के बाद अब वो पूरी तरह से रिकवर हो चुकी हैं। मुश्किल घड़ी के दौरान उनकी बेटियों और एक्स-बॉयफ्रेंड रोहमन शॉल ने भी उनका खूब साथ दिया। अब उन्होंने ‘आर्या’ के सेट से तलवारबाजी करते हुए अपना धाकड़ वीडियो शेयर किया है। सुष्मिता सेन इस समय जयपुर में ‘आर्या-3’ की शूटिंग कर रही हैं। पिछले महीने उन्होंने शूटिंग से तब ब्रेक लिया था, जब उन्हें हार्ट अटैक पड़ा था। सुष्मिता सेन को इसी साल फरवरी महीने में हार्ट अटैक आया था। उन्होंने मार्च में इस खबर को फैंस के साथ शेयर किया था और बताया था कि उनकी एंजियोप्लास्टी हो गई है।

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विदेशी बैंको में जमा 2 करोड़ से अधिक की राशि का कैसे इस्तेमाल करें….

एलआरएस में 180 दिन की सख्ती से भारतीय अमीरों का टेंशन बढ़ा

नई दिल्ली, एजेंसी
भारतीय अमीरों के बीच उनके विदेश में रखे पैसों लेकर परेशानी बढ़ गई है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि इस पैसों का कैसे इस्तेमाल किया जाए। मामला एलआरएस स्कीम को लेकर है, जिसके जरिए उन्हें हर साल विदेश में 2.5 लाख डॉलर (मौजूदा रेट के अनुसार 2 करोड़ रुपए) भेजने की इजाजत है। अब जिन भारतीयों ने विदेशी बैंकों में अपने खाते खोल रखे हैं, वह नए नियम को लेकर कंफ्यूज हैं। इसकी वजह से उनके लिए विदेश में रखे पैसे को कानूनी रूप से इस्तेमाल करने में परेशानी खड़ी हो गई है।
क्या है एलआरएस
भारतीय रिजर्व बैंक के एलआरएस स्कीम के तहत कोई भी भारतीय एक वित्त वर्ष में चालू खाता या पूंजी खाते या दोनों में किसी भी तरह से विदेश में 2.5 लाख डॉलर का निवेश या कर्ज दे सकता है। ईटी की खबर के अनुसार भारतीय अमीर विदेश में शेयर बाजार, करंसी आदि में निवेश करते हैं। अब इसमें पेंच यह है कि एलआरएस के तहत बैंक में केवल 180 दिन ही पैसा रखा जा सकता है। उसके बाद खाताधारक को पैसा किसी रूप में भारत भेजना होता है। भारतीय अमीरों को इस बात का कंफ्यूजन है कि क्या वह यह पैसा 180 दिन बाद भी बैंक एफडी के रूप में रख सकते हैं या नहीं।
इसके पहले आरबीआई ने 2018 में एलआरएस के तहत यूज होने वाले पैसे को लेकर सख्ती की थी। नए नियम में 25,000/- हजार डॉलर से कम राशि पर भी पैन कार्ड को अनिवार्य कर दिया गया था। इसके पहले तहत 25 हजार डॉलर से ज्यादा की रकम के लिए ही पैन कार्ड अनिवार्य था, यानि अब सभी रकम के लेन-देन के लिए पैन कार्ज एलआरएस स्कीम में अनिवार्य कर दिया गया है।

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सुबह हिन्दुस्तान मेलने चेताया शाम तकसरकार भी जाग गई

व्यापार करने पर लागू नया टैक्स स्थगित…..

व्यापारियों के बढ़ते विरोध के बाद अंतत: राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश नगर पालिका व्यापार अनुज्ञापन नियम 2023 को मंगलवार को स्थगित कर दिया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 21 अप्रैल को इस नियम की अधिसूचना जारी की थी। पांचवें दिन ही इसे स्थगित करना पड़ा। हालांकि इन नियमों के लागू होने के पहले जिन नगरीय निकायों द्वारा मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम-1956 अथवा मप्र नगर पालिका अधिनयम-1961 के प्रविधानों के अनुसार निकाय स्तर पर व्यापार विनियमन के लिए व्यापार अनुज्ञप्ति (ट्रेड लाइसेंस) जारी करने के लिए शुल्क निर्धारित करके नियम लागू किए हैं, वह पूर्वानुसार लागू रहेंगे। उल्लेखनीय है कि नवीन नियमों के प्रकाशित होने के बाद विभिन्न नगरों संबद्ध व्यवसायियों, व्यापार समूहों एवं निकायों के स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा नियमों में विसंगतियों की ओर ध्यान आकृष्ट किया था, साथ ही इसका जमकर विरोध भी किया जा रहा था। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने बताया है कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के निर्देश के बाद इस नियम के क्रियान्वयन को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है।

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Chhattisgarh Maoist attack: आमने-सामने की लड़ाई से भाग रहे हैं नक्सली, आईईडी ब्लास्ट पर इस वजह से कर रहे फोकस

Chhattisgarh Maoist attack: देश में करीब छह सौ से अधिक ब्लास्ट मामलों की जांच कर चुके एक अनुभवी बैलिस्टिक एक्सपर्ट कहते हैं कि आजकल नौसिखिये आतंकी और नक्सली ‘आईईडी/टिफिन’ बम का इस्तेमाल करने लगे हैं। कश्मीर, पंजाब, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों या उत्तर पूर्व में जितने भी राष्ट्र विरोधी समूह सक्रिय हैं, अब वे सीधे तौर पर सुरक्षा बलों के साथ टकराने से बचने लगे हैं…

देश में नक्सलियों के सामने नई भर्ती का संकट खड़ा हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से लेकर छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल तक कह चुके हैं कि अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अंतिम लड़ाई है। माओवादी गतिविधियां, आखिरी चरण में हैं। इस वजह से नक्सली बौखलाहट में हैं। वे किसी भी तरह से अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं। पिछले कुछ समय से नक्सली दस्ते आमने-सामने की लड़ाई से भाग रहे हैं। उन्हें मालूम है कि सुरक्षा बलों के साथ सीधी लड़ाई में वे बच नहीं सकेंगे। इसी वजह से माओवादियों ने अब ‘आईईडी’ ब्लास्ट पर फोकस किया है। इसे किसी भी जगह पर दबा दिया जाता है। कोई भी दूर बैठा व्यक्ति इसे संचालित कर सकता है। सीआरपीएफ द्वारा गत वर्षों में हजारों ‘आईईडी/टिफिन’ बम बरामद किए गए हैं।

आईईडी विस्फोट तकनीक का इस्तेमाल

देश में करीब छह सौ से अधिक ब्लास्ट मामलों की जांच कर चुके एक अनुभवी बैलिस्टिक एक्सपर्ट कहते हैं कि आजकल नौसिखिये आतंकी और नक्सली ‘आईईडी/टिफिन’ बम का इस्तेमाल करने लगे हैं। कश्मीर, पंजाब, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों या उत्तर पूर्व में जितने भी राष्ट्र विरोधी समूह सक्रिय हैं, अब वे सीधे तौर पर सुरक्षा बलों के साथ टकराने से बचने लगे हैं। अगर कहीं पर एंबुश (घात लगाकर हमला करना) होता है, तो भी उसमें विस्फोटकों का ही अधिक इस्तेमाल होता है। सीधी मुठभेड़ में उन्हें सुरक्षा बलों के हाथों भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसके चलते अब माओवादी संगठन, आईईडी विस्फोट तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भारी संख्या में ऐसे विस्फोटक तैयार कराए जा रहे हैं।

सौ मील दूर बैठकर किया जा सकता है विस्फोट

छत्तीसगढ़ में तैनात सुरक्षा बलों के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि अब सीधी मुठभेड़ का दौर खत्म हो चला है। आईईडी तकनीक के द्वारा लगभग सौ मील दूर बैठकर विस्फोट किया जा सकता है। ऐसे में नक्सली, सुरक्षा बलों के सामने मरने के लिए क्यों आएंगे। आईईडी विस्फोट करने में टाइमिंग बहुत अहम पॉइंट है। एक्सपर्ट व्यक्ति ही इसे सुरक्षित तरीके से ब्लास्ट कर सकता है। भले ही देश में उच्च विस्फोटक जैसे आरडीएक्स/पीईटीएन आसानी से नहीं मिलते हैं, लेकिन कम क्षमता वाले विस्फोटक पोटाशियम, चारकोल, आर्गेनिक सल्फाइड, नाइट्रेट और ब्लैक पाउडर आदि से आईईडी और टिफिन बम तैयार कर लिए जाते हैं। छत्तीसगढ़ में तो पीडब्ल्यूडी एवं माइनिंग विभाग, कई तरह के विकास कार्यों में जिलेटिन स्टिक का इस्तेमाल करते हैं। इसकी मदद से इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस ‘आईईडी’, टिफिन बम और दूसरे तरह के प्रेशर बमों को तैयार किया जा सकता है।

इन तरीकों से संचालित होती है आईईडी

आईईडी को रिमोट कंट्रोल, इंफ्रारेड, मैग्नेटिक ट्रिगर्स, प्रेशर-सेंसिटिव बार्स या ट्रिप वायर की मदद से संचालित किया जा सकता है। कम आयु के नक्सलियों को रिमोट कंट्रोल से ही आईईडी विस्फोट करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। प्रेशर कूकर बम कैसे तैयार होता है, ये भी उन्हें सिखाया गया है। आतंकी व नक्सली, यही तरीका प्रयोग में ला रहे हैं। बैलिस्टिक एक्सपर्ट के मुताबिक, आजकल टिफिन बम बड़े स्तर पर इस्तेमाल हो रहे हैं। रिमोट या टाइमर के द्वारा आसानी से यह ब्लास्ट हो जाता है। ऐसे ब्लास्ट तैयार करने के लिए नक्सलियों के पास कंटेनर, केमिकल, डेटोनेटर, इनिशिएटर और वायर सब कुछ होता है। डेटोनेटर को पावर देने के लिए माओवादी, ड्राई बैटरी सेल का इस्तेमाल कर रहे हैं। स्पेशल डेटोनेटर भी आने लगा है।

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HINDUSTAN MAIL BREAKING Prakash Singh Badal Passed Away: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का न‍िधन, मोहाली के अस्‍पताल में ली अंत‍िम सांस

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को मंगलवार को न‍िधन हो गया। प्रकाश स‍िंह बादल काफी समय से मोहाली के अस्‍पताल में भर्ती थे। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के वरिष्ठ नेता को सांस लेने में परेशानी होने की शिकायत के बाद एक हफ्ते पहले मोहाली में फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को मंगलवार को न‍िधन हो गया। प्रकाश स‍िंह बादल काफी समय से मोहाली के अस्‍पताल में भर्ती थे। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के वरिष्ठ नेता को सांस लेने में परेशानी होने की शिकायत के बाद एक हफ्ते पहले मोहाली में फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

95 साल के प्रकाश सिंह बादल के स्वास्थ्य में सोमवार को हल्का सुधार हुआ था। लेक‍िन मंगलवार रात उनकी सांसे थम गईं। पंजाब के पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके बादल को ‘गैस्ट्राइटिस’ और सांस लेने में परेशानी होने के चलते पिछले साल जून में भी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।कोविड बाद की स्वास्थ्य जांच के लिए फरवरी 2022 में उन्हें मोहाली के एक निजी अस्पताल ले जाया गया था। बादल पिछले साल जनवरी में कोरोना वायरस से संक्रमित हो गये थे और उन्हें लुधियाना के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

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