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ग्राहकों को ऋण उत्पादों व शासकीय योजनाओं से कराया अवगत

गत दिवस पंजाब एण्ड सिंध बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्वरूपकुमार साहा द्वारा शहर का प्रवास कर बैंक द्वारा आयोजित विभिन्न गतिविधियों का नेतृत्व किया गया। दिवस् ा के पूर्वार्द्ध में उनके द्वारा महानगर के नजदीकी शहर देवास में बैंक की 1779वीं शाखा का उद्घाटन किया गया, तदुपरान्त इंदौर पहुंचकर ‘ग्राहक आउटरीच’ कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। बैंक द्वारा स्टॉल लगाकर ग्राहकों को अपने जमा एवं ऋण उत्पादों व शासकीय योजनाओं, यथा- प्रधानमंत्री रोजगार योजना, स्टैंडअप इंडिया योजना आदि के बारे में बताया गया। ग्राहक आउटरीच कार्यक्रम की मुख्य थीम ‘जनधन से जनसुरक्षा’ रखी गई थी, अत: बैंक द्वारा ग्राहकों को प्रधानमंत्री जन बीमा योजनाओं एवं पेंशन योजना से लाभावन्वित होने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में फील्ड महाप्रबंधक प्रवीण कुमार मोंगिया भी उपस्थित रहे। बैंक के आंचलिक प्रबंधक अवधेश नरायन सिंह द्वारा आम जनमानस को ऋण प्राप्ति के लिए मार्गदर्शन दिया गया।

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समोसा बना तस्करों का कोडवर्ड…खेरची चावल के नाम से करवा रहेसमोसा बना तस्करों का कोडवर्ड…अहिल्या नगरी में नशाखोरी…

इंदौर। शहर में नशाखोरी का बोलबाला जोरों पर है। पेडलर, पब, अवैध रूप से शराब परोसने वालों ने अहिल्या नगरी की हवा को धू्मिल किया हुआ है… और पुलिस विभाग की कार्रवाई जीरो दिखाई दे रही है। शहर के विजयनगर थाने में रहे पूर्व में थाना प्रभारी तहजीब काजी ने लगातार नशे पर वार करते हुए कई तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की थी। हाल ही में देर रात संचालित होने वाले पबों पर 7 दिन के लाइसेंस निलंबन की कलेक्टर के आदेश पर कार्रवाई हुई, वहीं पावडर बाज, चरसी, अवैध शराब के सौदागरों के खिलाफ पुलिस मेहरबान नजर आ रही है! अहाते बंद होने से ढाबा संचालक भी धड़ल्ले से नशा परोस रहे हैं, जिससे शहर में सबसे ज्यादा ढाबे लसूड़िया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। ढाबों पर देर रात तक जोरों से शराबखोरी होती देखी गई है, वहीं शहर में जब से कमिश्नर देउस्कर ने कमाल संभाली… नशे के खिलाफ अफसर और नेताओं की सिर्फ बैठकें ही हो रही हैं, जिसका नतीजा शून्य साबित हो रहा है।

मालामाल खुफिया सिपाही
इंदौर से प्रतापगढ़ तक बाइकर्स पूरे खेल में लिप्त हैं। लगभग 10 से ज्यादा बाइकर्स प्रतापगढ़ से इंदौर तक ड्रग लाने का काम कर रहे हैं। ड्रग तस्करों का कोडवर्ड समोसा और चावल है। तस्कर ड्रग को कोडवर्ड में समोसा कहकर लाते हंै और इंदौर में खेरची चावल के कोडवर्ड में सप्लाय करते हैं। सूत्रों की मानें तो कई थाने के खुफिया सिपाहियों के पास इन पैडलरों की पूरी कुंडली है… कब कहां कैसे माल आता है, सिपाहियों को भी मोटी रकम दी जाती है, जिससे इनहें अनदेखा किया जाता है।
ये बाइकर्स ड्रग्स गाड़ी की टंकी, डिक्की, सीट कवर और कार्बोरेटर में रखकर लाते हैं। बॉर्डर से लेकर शहर की पुलिस को इनकी पूरी जानकरी होती है, लेकिन कोई इन पर हाथ नहीं डालता। सूत्रों पर यकीन करें तो काफी बड़े स्तर पर अफसरों के पास इसका एक हिस्सा पहुंचता है!

पूर्व में कार्रवाई के बाद … अब ठंडी पड़ी पुलिस
मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध इंदौर पुलिस के पूर्व कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र द्वारा आॅपरेशन चलाया गया था, लेकिन अब लगातार कार्रवाई के बावजूद तस्करी के नए प्रकरण सामने आ रहे हैं। मादक पदार्थों की तस्करी में अलग-अलग आयु वर्ग के लोग शामिल हो रहे हैं। नशा और अपराध का गठजोड़ है, अपराध के लिए नशा करने वाला व्यक्ति ही नशे के लिए अपराध करता है। खासकर आर्थिक राजधानी इंदौर में युवाओं में नशे का प्रचलन काफी बढ़ रहा है और यही कारण है कि विभिन्न राज्यों के तस्करों की पहली पसंद इंदौर बनता जा रहा है। पुलिस भी एनडीपीएस की कार्रवाई से अपने हाथ खिंचती है… वजह- जो गिरफ्त में आरोपी पेडलर दो से तीन टोकन खरीदकर लाते हैं और दो टोकन बेच देते हैं और एक टोकन का नशा कर लेते हैं। जैसे ही नशे का असर कम होता है, इन्हें मिर्गी जैसा दौरा पड़ने लगता है। इसे देख अधिकारी भी इन्हें छोड़ देते हैं, जिसका फायदा यह अपराधी उठाते हैं।

प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह का निर्देश जीरो…
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने हाल ही में नशे के खिलाफ निर्देश दिए हैं। अवैध दरू बिकी, अवैध उत्खनन करता देखा गया तो डंडा मार-मारकर सीधा कर दो… अगर कोई नेता भी गड़बड़ा करता दिखे तो उसे भी सीधा कर दो… मुख्यमंत्री कह रहे हैं… डरने की क्या बात है! यहां देवी अहिल्या की पवित्र नगरी में नशे के सौदागर लगातार गांजा, चरस और शराब की तस्करी कर मुख्यमंत्री के आदेश की अवेहलना कर रहे हैं। ये बहुत चिंताजनक स्थिति है… जब प्रदेश के मुखिया के आदेश ही ‘हवा’ हो रहे हैं तो आप समझ सकते हैं आम आदमी की क्या बिसात…! उसकी कहीं कोई सुनवाई नहीं होते देख… गुंडे-बदमाशों की बन बैठती है। कुछ ले-दे लो… ‘वो’ भी खुश और अपनी जेब भी गरम! ऐसे में ये गुंडे-बदमाश अपराध पर अपराध करते जाते हैं… पर कार्रवाई के नाम पर मामा के आदेश भी ‘हवा’, जो काफी चिंताजनक है।

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ऐशबाग थाना क्षेत्र में दहशत….लेनदेन के विवाद में फायर… दो गिरफ्तार

ऐशबाग थाना क्षेत्र में सोनिया पुलिया के पास अचानक हुए दनादन तीन फायर से इलाके में दहशत फैल गई। ये फायर एक एसी मैकेनिक ने अपने दोस्तों के पक्ष में जाकर एक कारपेंटर पर किए थे। ऐशबाग पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जो आपस में भाई हैं। पुलिस को फायर करने वाले की फिलहाल तलाश है। इस मामले में हत्या की कोशिश का केस दर्ज किया गया है।
एसआई अभिमन्यु सिंह ने बताया कि इस मामले में सोनिया गांधी कॉलोनी के पास रहने वाले आफताब की शिकायत पर दर्ज की गई है। आफताब एक कारपेंटर है। उसका बेकरी की दुकान चलाने वाले भाइयों फैसल और अरबाज से पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा है। इस बात पर दोनों पक्षों में एक दिन पहले बहस भी हुई थी। बात इतनी बढ़ी कि दोनों भाइयों ने इस बारे में अपने दोस्त गुरान को बताया। गुरान एसी मैकेनिक है। गुरुवार रात करीब दस बजे आफताब सोनिया गांधी कॉलोनी स्थित पुलिया के पास खड़ा था, तभी तीनों आरोपी वहां आए और गुरान ने अचानक दनादन तीन फायर कर दिए। गोली की आवाज सुनकर इलाके में दहशत फैल गई। गनीमत ये रही कि गोली आफताब को नहीं लगी। पुलिस ने इस मामले में हत्या की कोशिश का केस दर्ज कर दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल गुरान की तलाश जारी है।

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प्रियंका गांधी महाकौशल से करेंगी कांग्रेस के चुनाव अभियान की शुरुआत…….

मध्यप्रदेश में कांग्रेस चुनाव अभियान की शुरुआत महाकौशल से करेगी। 12 जून को पार्टी नेता प्रियंका गांधी वाड्रा जबलपुर आएंगी। वहां वे जनसभा, रोड-शो और कार्यकर्ता सम्मेलन में भाग लेंगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने उनसे चर्चा के बाद प्रदेश कांग्रेस और जिला इकाई को तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद विंध्य, बुंदेलखंड, ग्वालियर-चंबल और मालवा-निमाड़ क्षेत्र में जनसभाएं होंगी। इनमें पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित अन्य वरिष्ठ नेता हिस्सा लेंगे। कांग्रेस ने प्रदेश के सभी अंचलों में एक-एक बड़ी जनसभा करने की कार्ययोजना बनाई है।
महाकौशल : 2018 के चुनाव
में अच्छा रहा था प्रदर्शन
प्रियंका वाड्रा के चुनाव अभियान की शुरुआत महाकौशल से की जाएगी। यहां पार्टी का प्रदर्शन 2018 के चुनाव में अच्छा रहा था। छिंदवाड़ा जिले की सभी सातों सीटें कांग्रेस ने जीती थीं। यही स्थिति डिंडौरी में भी थी। बालाघाट जिले की छह सीटों में से कांग्रेस ने तीन जीती थीं और एक वारासिवनी से निर्दलीय प्रदीप जायसवाल विजयी रहे थे। जायसवाल पूर्व में कांग्रेस पार्टी में रहे हैं। सिवनी जिले की चार में से दो सीटें कांग्रेस और दो भाजपा के पास हैं।
जबलपुर जिले की बात करें तो यहां की आठ सीटों में चार कांग्रेस और चार भाजपा के पास हैं। अनूपपुर जिले की सभी तीनों सीटें कांग्रेस ने जीती थीं, लेकिन बाद में अनूपपुर से विधायक बिसाहूलाल सिंह ने विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर भाजपा की सदस्यता ले ली। वे अभी खाद्य, नागरिक आपूर्ति मंत्री हैं। यही कारण है कि पार्टी ने चुनाव अभियान का शुभारंभ जबलपुर से करने का निर्णय लिया है। प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष विभा पटेल और पूर्व मंत्री तरुण भनोत ने बताया कि प्रियंका गांधी वाड्रा के आने का कार्यक्रम है। इसको लेकर तैयारी प्रारंभ कर दी गई है।
आधी आबादी के लिए महिला वचन-पत्र हो सकता है जारी
सूत्रों का कहना है कि महिलाओं के लिए प्रदेश कांग्रेस द्वारा पहली बार अलग से तैयार किए जा रहे वचन-पत्र को प्रियंका गांधी वाड्रा से जारी करवाया जा सकता है। इसमें महिलाओं को डेढ़ हजार रुपए प्रतिमाह देने नारी सम्मान योजना लागू करने और पांच सौ रुपए में रसोई गैस सिलिंडर देने की योजना का प्रमुखता से उल्लेख रहेगा।

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ये दाग भी देव दुर्लभ है भाजपा के लिए…

शिवराजसिंह चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद सर्वाधिक लंबे समय सीएम रहने का यदि कीर्तिमान बना चुके हैं तो चौथे कार्यकाल की यह कालिख भी उनकी ही बंडी पर लग गई है कि राजनीति के संत कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी को कमलनाथ की शरण में जाने से नहीं रोक पाए। एमपी गजब है की टैग लाइन प्रदेश की राजनीति में चलने वाली उठापटक पर भी लागू होती है।
इन पांच साल का घटनाक्रम ही देख लीजिए… दिसंबर-18 में कमलनाथ मुख्यमंत्री बने तो अपना मान-सम्मान न होने से कुपित ज्योतिरादित्य मार्च-20 में इस कमल को श्रीविहीन कर उस कमल के पोस्टर बॉय बन गए। मार्च-2020 में चौथी बार सीएम बने शिवराज के पोलिटिकल रिकॉर्ड में ही यह भी दर्ज होगा कि दीपक की मद्दिम होती लौ की जान-बूझकर अनदेखी नहीं की होती तो कांग्रेस को दीपक का उजाला नसीब नहीं होता।
इन पांच साल में मध्यप्रदेश की राजनीति भी बेमौसम होने वाली बारिश जैसी ही हो गई है। सिंधिया कांग्रेस को सड़क पर ले आए थे। भाजपा ने दीपक जोशी को उनके सम्मान लायक काम नहीं दिया तो उन्होंने भी भाजपा के काम डालने के साथ ही पिता के अपमान की आग में तमाम भाई साबों की घुड़की और अनुशासन के डंडे को जला डाला है। सिंधिया और उनके विधायकों का जाना यदि कांग्रेस स्वार्थ प्रेरित कहती रही है तो अब भाजपा का आम कार्यकर्ता दीपक जोशी के फैसले को सम्मान की रक्षा वाला मान रहा है तो क्या गलत है।
नवंबर में होने वाले चुनाव में दीपक जोशी फैक्टर का कांग्रेस को कितना लाभ मिलेगा, चुनाव नहीं लड़ने की अनिच्छा जाहिर कर रहे जोशी को कमलनाथ कैसे भुनाएंगे… इसका इंतजार करना चाहिए। यदि बुधनी से चुनाव लड़ने की उनकी इच्छा का सम्मान करने का कांग्रेस सम्मान दिखा दे तो ये चुनाव कांटा पकड़ तो हो ही जाएगा। पार्टी की लगाम अपने हाथों में रखने वाले संघ के खुर्राट नेताओं से लेकर प्रदेश में चाहे जब बैठक, समीक्षा के नाम पर आम कार्यकर्ता को तलने वाले प्रभारियों की भी इस बगावत से पुंगी बज गई है। आज तक मनुहार करने वाले बहुत संभव है… कल से गद्दार, निकृष्ट आदि भी कहने लगें, लेकिन ऐसे बयानवीरों को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि उनकी नजर में दीपक जोशी की कोई हैसियत नहीं हो, लेकिन संघ के शब्द कोष वाला जो देव दुर्लभ शब्द पार्टी बैठकों में बार-बार दोहराया जाने लगा है… उस शब्द के हकदार दीपक जोशी जैसे कार्यकर्ता भी हैं। जनसंघ के वक्त से सक्रिय रहे कैलाश जोशी ने तो अपने पुत्र का नाम ही पार्टी के चुनाव चिह्न दीपक के नाम पर रखा था।
आपातकाल के बाद 1977 में जब जनता पार्टी की सरकार बनी कैलाश जोशी मप्र के पहले गैरकांग्रेसी सीएम रहे। नौंवे सीएम के रूप में उनका सात महीने का ही कार्यकाल रहा। उनके बाद ही वीरेंद्रकुमार सखलेचा, सुंदरलाल पटवा सीएम बने। राजनीति के संत के रूप में पहचाने जाने वाले कैलाश जोशी का लंबा राजनीतिक जीवन रहा। वे 8 बार विधायक, 2 बार लोकसभा सदस्य और एक बार राज्यसभा सदस्य भी रहे थे। प्रदेश के मुख्यमंत्री की हैसियत से कमलनाथ ने ही उनके निधन के वक्त स्मारक निर्माण के लिए हाथोंहाथ जमीन आवंटन की घोषणा की थी। अपमान का लावा तो बहुत पहले से बह रहा था, ज्वालामुखी अब बना है। दीपक जोशी ने इन पांच सालों में अपनी उपेक्षा, पिता की स्मृति में स्मारक या अन्य किसी संस्थान के लिए शिवराज सरकार के साथ ही संगठन पदाधिकारियों से अपने ‘मन की बात’ न कही हो… यह संभव ही नहीं। भाजपा में दिक्कत यह हो गई है कि प्रधान सेवकजी की बात के लिए तो इवेंट हो जाता है, लेकिन देव दुर्लभ कार्यकर्ताओं के ‘मन की बात’ सुनी नहीं जाती और चुनाव नजदीक आते ही अनुशासन के कंटीले डंडे से धमकाया जाने लगता है।
सत्यनारायण सत्तन के बेटे को पार्षद का टिकट नहीं मिल पाया… यह कारण गिनाकर उनकी पार्टी हित वाली सलाह की अनदेखी करना, भंवरसिंह शेखावत बदनावर से टिकट नहीं देने से पार्टी विरोधी बयान पांच साल से दे रहे हैं… यह प्रचारित करने वाले संगठन प्रमुख यह क्यों भूल जाते हैं कि रघुनंदन शर्मा की भी ऐसी ही भाषा क्यों है, बचते-बचाते कैलाश विजयवर्गीय को भी यह क्यों कहना पड़ता है कि भाजपा, भाजपा के कारण ही हारेगी। दीपक जोशी की यह बगावत और कितनों के साहस का कारण बनेगी… यह अगले कुछ दिनों में देखने को मिल सकता है। इतनी बड़ी पार्टी को एक व्यक्ति के जाने से फर्क नहीं पड़ता, रुदालियों का ये रुदन कुछ दिन चलेगा। संघ भाजपा या उसकी राजनीति में दखल नहीं देता यह हर बार दोहराने वाले तमाम भाईसाब डेमेज कंट्रोल के लिए अब गुजरात, त्रिपुरा वाला फार्मूला अपनाने का अनुरोध जरूर मोदी-शाह से कर सकते हैं। भांजियों का प्यार, लाड़ली बहना का आशीर्वाद काम आ जाए तो ठीक, वर्ना किसी आदिवासी नेता के नाम लॉटरी खुल जाए तो बड़ी बात नहीं!

ये दाग भी देव दुर्लभ है भाजपा के लिए… Read More »

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