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तिरुपति मंदिर में गैर हिंदू कर्मचारियों को निर्देश वीआरएस लो या ट्रांसफर……..

नवगठित तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने प्रस्ताव पास किया है, जिसके तहत मंदिर बोर्ड में काम करने वाले गैर-हिंदू कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने या आंध्रप्रदेश के अन्य सरकारी विभागों में ट्रांसफर लेने में किसी एक विकल्प को चुनना होगा। मंदिर बीते कई महीनों से चर्चा में बना हुआ है। कुछ ही समय पहले मंदिर के पवित्र प्रसाद में मिलावट की खबर को लेकर काफी बवाल हुआ था।
टीओआई के मुताबिक टीटीडी के नए अध्यक्ष बीआर नायडू ने फैसले की पुष्टि की है। हालांकि, उन्होंने मंदिर बोर्ड में काम करने वाले गैर-हिंदू कर्मचारियों की सही संख्या बताने से इनकार कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक फैसले से बोर्ड के 7000 स्थायी कर्मचारियों में से लगभग 300 कर्मचारी प्रभावित होंगे। बता दें कि टीटीडी में 14,000 संविदा कर्मचारी भी काम करते हैं।

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फर्जी डॉक्टरों ने खोला ‘जनसेवा’, पुलिस ने कर दिया इलाज…

सूरत के पांच झोलाछाप डॉक्टरों ने मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बना दिया। हॉस्पिटल के उद्घाटन को लेकर छापे गए निमंत्रण कार्ड में पुलिस कमिश्नर और नगर निगम कमिश्नर के नाम बिना सहमति के ही छाप दिए, इसीलिए इनॉगरेशन में कोई अफसर नहीं पहुंचा, बल्कि उद्घाटन के अगले दिन गुजरात के हेल्थ डिपार्टमेंट ने कार्रवाई करके अस्पताल सील कर दिया। मामले में पुलिस ने फर्जी डिग्री को लेकर डॉक्टरों का कानूनी इलाज कर दिया।
डीसीपी विजयसिंह गुर्जर ने बताया-पांडेसरा में जनसेवा मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का उद्घाटन था। आमंत्रण-पत्र पर पुलिस कमिश्नर अनुपमसिंह गहलोत, सूरत महानगर पालिका कमिश्नर शालिनी अग्रवाल और ज्वॉइंट पुलिस कमिश्नर राघवेंद्र वत्स का नाम भी बिना पूछे ही छपवा दिए थे, जो उद्घाटन में गए नहीं। दूसरे दिन पुलिस-प्रशासन ने छानबीन की। पता चला कि आमंत्रण-पत्र पर पांच डॉक्टरों के नाम लिखे हैं। उनमें से दो डॉ. बबलू रामआसरे शुक्ला और डॉ. राजाराम दुबे हैं, जो नाम के आगे बीईएमएस की डिग्री लिखते हैं। दोनों के खिलाफ गुजरात मेडिकल एक्ट के तहत पांडेसरा थाने में मामले दर्ज हंै। दोनों फर्जी डॉक्टर हैं। डिग्री फर्जी है। सूरत पुलिस फर्जी डिग्री के नाम पर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले जालसाजों का अब इलाज कर रही है। पांच आरोपियों में से दो की फर्जी डिग्री का खुलासा होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है, जबकि बाकी आरोपियों की डिग्री की जांच की जा रही है।

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बिना अर्थिंग करंट नहीं पकड़ते अफसर…………

इंदौर। बप्पा सीताराम रिनूवल एनर्जी में कार्यरत दीपक हार्डिया की शिकायत पर लोकायुक्त ने वेस्ड डिस्कॉम के बाबू जगदीश बरौनिया को 2000 रुपए की रिश्वत के साथ रंगेहाथ पकड़ा है। सोलर प्लांट के नेट मीटर की स्वीकृति के लिए फाइल को विद्युत विभाग से आगे बढ़ाने ये पैसा मांगा था। इस तरह से डिमांड करने वाले बरौनिया अकेले नहीं है। मप्र पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी में ऐसे बाबुओं की भरमार है। हालांकि बाबू सीढ़ी है, जिससे होकर पैसा डिवीजनल इंजीनियर तक पहुंचता है।
बिजली कंपनी भ्रष्टाचार का बड़ा अड्‌डा है। मैदान से लेकर मुख्यालय तक भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं। ऊपर वाले प्रोजेक्ट इम्पलीमेंट के नाम पर खेल दिखाते हैं, वहीं मैदानी अमला उपभोक्ताओं की जेब निचोड़ने से पीछे नहीं हटता। नए कनेक्शन और सोलर मीटर के नाम पर अनावश्यक वसूली की सबसे ज्यादा शिकायतें मालवा मिल, सुखलिया, लोहामंडी, महालक्ष्मीनगर जैसे इलाकों में आती हैं, जहां बिना अर्थ के बिजली अधिकारी करंट नहीं पकड़ते।
सोमवार को लोकायुक्त दस्ते ने कंपनी में सहायक ग्रेड प्रथम पद पर कार्यरत जगदीश बरौनिया को पकड़ा। दीपक की शिकायत के सत्यापन के बाद सोमवार को लोकायुक्त ने बरौनिया को रंगे हाथ पकड़ा। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम-2018 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
ट्रेप कार्रवाई में प्रमुख सदस्य
इस कार्रवाई में लोकायुक्त इंदौर के ट्रेप दल के सदस्य डीएसपी आरडी मिश्रा, निरीक्षक प्रतिभा तोमर, आदित्य भदौरिया, रहीम खान, चेतन परिहार, विजय कुमार, आशीष नायडू और शिव प्रकाश पराशर ने अहम् भूमिका निभाई।
ऐसे काम करता है सिस्टम
जब भी कोई उपभोक्ता बिजली मीटर के लिए आवेदन करता है तो पहले उससे लोड की जानकारी ली जाती है। मान लो यदि 3 किलोवॉट का सामान्य कनेक्शन लेना है तो आपके आवेदन पर असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर नक्शा बनाते हैं। सर्वे रिपोर्ट लगाकर फाइल आगे बढ़ाते हैं। 100 एचपी तक की फाइल करने का अधिकार डिवीजन इंजीनियर को है और हर क्षमता के कनेक्शन की अपनी अलग कीमत है, जो तय करने का अधिकार डिवीजन इंजीनियरों ने अपने बाबुओं को सौंप रखा है। बाबू एई-जेई से मिली फाइल पर पैसा वसूलते हैं।
बिना पैसे के काम नहीं होता
मीटर बदलने के लिए ठेकेदार को कंपनी प्रतिमीटर 125 रुपए देती है, जबकि ठेकेदार के लोग उपभोक्ताओं से 200 रुपए वसूलते हैं। बिजली कंपनी की ओर से कहीं सार्वजनिक सूचना नहीं की जाती कि मीटर बदलने के पैसे नहीं लगते। लेन-देन के खेल में स्थायी बाबुओं के साथ ही संविदा पर लगे या आउट सोर्स कर्मचारियों ने भी धीरे-धीरे महारथ हासिल कर ली है। इंदौर में चार डिवीजन कार्यालय हैं… पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण। एक डिवीजन के अंडर में 5-6 सब डिवीजन आॅफिस हैं। हर एक में दो-तीन फाइल रोज आती हैं। यदि एक फाइल पर औसत 2500 रुपए भी मिलते हैं और एक-एक सब डिवीजन में एक-एक फाइल भी होती है तो डीई साहब को महीने के 3.75 लाख का न्यूनतम चढ़ावा मिल जाता है।
एक लाख की रिश्वत के
साथ जेई पकड़ाया
25 अक्टूबर को ही लोकायुक्त पुलिस ने कंपनी के जूनियर इंजीनियर पुष्पेंद्र साहू और आउटसोर्स कर्मचारी अजरूद्दीन को 1 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी सुभाष चौक स्थित कार्यालय में हुई है, जिसमें आरोपी जूनियर इंजीनियर और आउटसोर्स कर्मचारी ने फरियादी चाणक्य शर्मा के घर पर कमर्शियल कनेक्शन से घरेलू कनेक्शन देने के एवज में 2 लाख रुपए की डिमांड की थी।
लोकायुक्त पुलिस ने फरवरी-2024 में देपालपुर निवासी प्रेमसिंह जाट की शिकायत पर लाइनमैन बंटी परमार को 40 हजार रुपए की रिश्वत के साथ पकड़ा था। जाट के खेत में डीपी लगाई थी। 95 हजार रुपए जमा कराए थे। रसीद नहीं दी। रसीद मांगी तो 40 हजार मांगे। न देने पर डीपी दूसरे जगह शिफ्ट करने की धमकी दी थी।
मुख्यालय में भी भ्रष्टाचार
बिजली कंपनी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए वर्ष 2004 से 2024 के बीच केंद्र सरकार आधा दर्जन से अधिक योजनाएं लेकर आई थी, जो तकरीबन 10 हजार करोड़ से ज्यादा की थीं। इन योजनाओं के क्रियान्वयन में मुख्यालय में बैठे अफसरों ने खूब चांदी काटी। ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त से लेकर भोपाल तक सैकड़ों शिकायतें पेंडिंग हैं। केस दर्ज नहीं हुए, क्योंकि कंपनी के अफसर अर्थिंग मिलने के बाद पॉवर में हैं।

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PoK नहीं जाएगी चैम्पियंस ट्रॉफी! टूर्नामेंट से पहले पाकिस्तान को लगा तगड़ा झटका, ICC ने मानी भारत की बात…

चैंपियंस ट्रॉफी 2025 एक बार फिर विवादों में घिर गई है। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने स्कार्दू, मुरी और मुजफ्फराबाद में चैंपियंस ट्रॉफी के नियोजित ट्रॉफी दौरे को रद्द कर दिया है, ये क्षेत्र पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आते हैं। यह निर्णय पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) द्वारा इन शहरों को दौरे के कार्यक्रम में शामिल करने की घोषणा के तुरंत बाद आया, जिस पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने तत्काल आपत्ति जताई थी। “पीसीबी ने अब अपनाया नया पैंतरा, भारत द्वारा खेलने से मना करने पर उठाया यह कदम” उल्लेखनीय है कि PCB ने 16 से 24 नवंबर तक चैंपियंस ट्रॉफी के राष्ट्रव्यापी ट्रॉफी दौरे की घोषणा की थी। आठ टीमों का यह टूर्नामेंट फरवरी-मार्च 2025 में पाकिस्तान में आयोजित किया जाना है और क्रिकेट के इस महाकुंभ की तैयारी के लिए PCB ने ट्रॉफी दौरे का आयोजन किया था। विवादित भूमि पर आने वाले शहरों के दौरे को किया रद्द हालांकि, इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक पता चला है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) की विवादित भूमि के अंतर्गत आने वाले शहरों में ट्रॉफी दौरे को रद्द कर दिया गया है। दूसरी ओर भारत ने इस क्रिकेट इवेंट के लिए पाकिस्तान जाने से मना कर दिया है।
चैंपियंस ट्रॉफी 2025 एक बार फिर विवादों के घेरे में है। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थित स्कार्दू, मुरी और मुजफ्फराबाद में नियोजित ट्रॉफी दौरे को रद्द कर दिया है। यह कदम तब उठाया गया जब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने इन शहरों को ट्रॉफी दौरे के कार्यक्रम में शामिल करने की घोषणा की थी, जिस पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने कड़ी आपत्ति जताई।

“भारत द्वारा खेलने से इनकार के बाद PCB ने उठाया नया कदम,” इस संदर्भ में उल्लेखनीय है कि PCB ने 16 से 24 नवंबर तक चैंपियंस ट्रॉफी के लिए राष्ट्रव्यापी ट्रॉफी दौरे की योजना बनाई थी। फरवरी-मार्च 2025 में पाकिस्तान में आयोजित होने वाले इस आठ टीमों के टूर्नामेंट की तैयारी के तहत यह दौरा आयोजित किया जा रहा था।

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अमित शाह बैग जांच: महाराष्ट्र में गृह मंत्री शाह के बैग की तलाशी, चुनाव आयोग के फ्लाइंग स्क्वॉड द्वारा कार्रवाई..

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024: हिंगोली में अमित शाह के हेलीकॉप्टर और बैग की तलाशी

महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हेलीकॉप्टर और बैग की तलाशी का मामला सामने आया है। यह कार्रवाई चुनाव आयोग की फ्लाइंग स्क्वॉड टीम ने हिंगोली में की। इस बारे में गृह मंत्री अमित शाह ने खुद जानकारी दी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने लिखा, “आज महाराष्ट्र के हिंगोली विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान चुनाव आयोग के अधिकारियों ने मेरे हेलीकॉप्टर की जांच की। भाजपा निष्पक्ष चुनाव और स्वस्थ चुनाव प्रणाली में विश्वास करती है और माननीय चुनाव आयोग द्वारा बनाए गए सभी नियमों का पालन करती है।”

निष्पक्ष चुनाव प्रणाली की अहमियत पर जोर

गृह मंत्री शाह ने आगे कहा कि हमें सभी को निष्पक्ष चुनाव प्रणाली में योगदान देना चाहिए और भारत को दुनिया का सबसे मजबूत लोकतंत्र बनाए रखने में अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।

लोकसभा चुनाव में भी हुई थी तलाशी

यह पहला मौका नहीं है जब अमित शाह के हेलीकॉप्टर की तलाशी ली गई हो। इससे पहले 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी शाह के हेलीकॉप्टर की तलाशी ली गई थी। चुनाव आयोग ने यह कार्रवाई बिहार के कटिहार में की थी। इस बीच, 12 नवंबर को उद्धव ठाकरे के हेलीकॉप्टर की दूसरी बार तलाशी लेने को लेकर विवाद उठ चुका था, जिसके बाद निर्वाचन आयोग ने अपनी नीतियों को स्पष्ट किया था।

चुनाव आयोग का बयान

चुनाव आयोग के सूत्रों ने 12 नवंबर को उद्धव ठाकरे के बैग की तलाशी को लेकर बयान जारी किया था। चुनाव आयोग ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं के हेलीकॉप्टरों और विमानों की जांच मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत की जाती है। आयोग के अनुसार, पिछले चुनावों में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और अमित शाह के विमानों और हेलीकॉप्टरों की भी जांच की गई थी।

समान अवसर की दिशा में चुनाव आयोग की कार्रवाई

चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशियों को समान अवसर प्रदान करने के लिए एसओपी का पालन किया जाता है। आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि बिहार में 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान नड्डा और शाह के हेलीकॉप्टरों की जांच की गई थी। आयोग ने सभी प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश दिया है कि सभी प्रत्याशियों के हेलीकॉप्टरों की जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी पक्ष को विशेष लाभ न मिले।

महाराष्ट्र में कई नेताओं की तलाशी

महाराष्ट्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग की टीम ने कई नेताओं के बैग की तलाशी ली है। इनमें मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे जैसे प्रमुख नेता शामिल हैं।

महाराष्ट्र में सियासी समीकरण

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में सियासी समीकरण काफी दिलचस्प होने वाले हैं। महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार के गिरने के बाद भाजपा समर्थित सरकार बन चुकी है, और अब राज्य में पहले बार विधानसभा चुनाव होंगे। वर्तमान में राज्य की 288 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए सरकार के पास 202 विधायक हैं। भाजपा के पास 102 विधायक हैं, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना के पास 38 विधायक और अजीत पवार की नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के पास 40 विधायक हैं।

विपक्षी खेमे की स्थिति

विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) में कुल 71 विधायक हैं। कांग्रेस 37 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि शिवसेना (उद्धव गुट) के पास 16 विधायक और शरद पवार की NCP-SP के पास 12 विधायक हैं। विपक्षी खेमे में अन्य छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी शामिल है।

खाली सीटें
महाराष्ट्र विधानसभा में इस बार 15 सीटें खाली हैं, जो चुनावी समीकरण को और भी दिलचस्प बना देती हैं।

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