इंदौर में जुलाई की बारिश ने दस साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 2013 के बाद पहली बार इतना पानी बरसा है। इस बार जुलाई में 18 इंच से ज्यादा पानी बरसा, जबकि मानसून लेट था। देखा जाए तो इस बार मानसून का ट्रेंड 2014 जैसा है। तब भी मानसून लेट था और जुलाई में 16 इंच पानी गिरा था। 2013 में ही सबसे ज्यादा 22 इंच पानी गिरा था, लेकिन तब मानसून समय पर था। जुलाई के 31 दिनों में से 27 दिन बारिश होना भी अपने आप में चौंकाने वाला है।
जुलाई इस बार उम्मीद से काफी बेहतर बीता है। बीते 24 घंटे में ही 23 मिलीमीटर यानी 1 इंच के करीब पानी बरस गया। इसे मिलाकर अब तक 18 इंच के करीब बारिश हो चुकी है। 10 साल में यह दूसरा मौका है, जब जुलाई इतना पानीदार रहा है।
मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो 5 अगस्त के बाद फिर तेज बारिश हो सकती है। दरअसल, इस बार पानी तो रोज गिर रहा है, लेकिन मूसलधार बारिश एक या दो बार ही हुई है। जिस तरह की बारिश हो रही है, उससे जमीन में पानी रिसने से ग्राउंड वाटर लेवल में सुधार हुआ है। मूसलधार या तेज बारिश कम होने से अभी तक यशवंत सागर डेम सहित अन्य डेम ओवरफ्लो नहीं हुए हैं। यशवंत सागर का एक गेट एक ही बार खुल सका है।
मौसम वैज्ञानिक वेद प्रकाश सिंह के मुताबिक इंदौर में जुलाई माह में बारिश का जो रुख रहा है, उसके लिए मानसून का लेट होना कारण नहीं है। अकसर स्थानीय क्षेत्रों में ही इस तरह के अंतर देखने को मिलते हैं। इंदौर और देपालपुर में जहां जुलाई में अच्छी बारिश हुई वहीं आसपास के 10-15 किमी के इसी जिले के अन्य क्षेत्रों में कम बारिश हुई। इंदौर में जुलाई में सिर्फ दो बार ही भारी बारिश हुई है। इस बार पश्चिम मप्र के इंदौर, उज्जैन, भोपाल, होशंगाबाद, ग्वालियर व चम्बल संभाग में ऐसे वैरिएशन आए हैं। इन संभागों के जिलों में हर 10-15 किमी पर ऐसा अंतर मिलेगा। इंदौर संभाग में इस बार जुलाई में खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन में कम बारिश हुई है, जबकि बड़वानी, आलीराजपुर व धार में सामान्य बारिश हुई। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक यह इस बात पर निर्भर करता है कि कहां बादल स्ट्रॉन्ग बने और कहां पर कम बने। पिछले साल इंदौर में जुलाई माह में कम बारिश हुई थी, जबकि महू और सांवेर में ज्यादा बारिश हुई थी। अगर पूरे इंदौर जिले की बात करें, तो वह तब भी सामान्य से ज्यादा ही था और इस बार भी है। रेनफॉल में ऐसी असमानता होती ही है, जबकि तापमान में इतनी असमानता नहीं होती। वह नियमित रूप से घटता-बढ़ता है। बारिश में आर्द्रता में यह परिवर्तन जरूर देखने को मिलता है। अगर थोड़ा-थोड़ा पानी भी बरसता रहा तो कोई नुकसान नहीं है।
इंदौर में सामान्यत: बारिश के सीजन का कोटा 38 इंच है। उस लिहाज से जुलाई माह में कुल कोटे की 47% से ज्यादा बारिश हो चुकी है जबकि अभी अगस्त और सितम्बर बाकी हैं।