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मध्य प्रदेश

सीधी पेशाबकांड : पीड़ित का घर बना फिर भी दुखी: आरोपी जमानत पर बाहर… कॅरियर खत्म

सरकार ने जो सहायता राशि दी थी उससे मकान और शौचालय बना लिया। अब मैं फिर गरीबी की हालत में पहुंच गया हूं। सरकारी नौकरी देने का वादा भी पूरा नहीं हुआ। अब मैं किससे मदद मांगने जाऊं। अब मुझे कोई पूछ नहीं रहा है।
सीधी पेशाबकांड का पीड़ित दशमत रावत कुछ इस तरह से अपने मौजूदा हालात को बयां करता है। इसी साल जुलाई के महीने में हुए सीधी पेशाबकांड ने प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया था। इस मामले पर इस कदर सियासत हुई कि प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीड़ित को सीएम हाउस बुलाकर उसके पैर धोए थे। सरकार ने पीड़ित दशमत को 5 लाख की आर्थिक सहायता और पक्का घर बनाने के लिए भी मदद की थी। साथ ही उसे सरकारी नौकरी, बच्चों को सेंट्रल स्कूल में पढ़ाने का भी भरोसा दिया था।
इधर, घटना के बाद कांग्रेस ने आदिवासियों के अत्याचार का मुद्दा उठाया था। इस मामले के आरोपी और भाजपा विधायक केदारनाथ शुक्ला के प्रतिनिधि प्रवेश शुक्ला के खिलाफ रासुका की कार्रवाई की गई थी। उसके घर का एक हिस्सा भी बुलडोजर से गिरा दिया गया था। इस मामले के बाद तत्कालीन भाजपा विधायक केदारनाथ शुक्ला का टिकट काट दिया।

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झोपड़ी में रहने वाले कमलेश्वर के विधायक बनने की कहानी:मुकाम तक पहुंचने के लिए किया काफी संघर्ष …ओबामा से हुए प्रेरित

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे का दिन। सैलाना सीट पर पहले राउंड में वोट की गिनती के बाद भारत आदिवासी पार्टी (इअढ) के प्रत्याशी कमलेश्वर डोडियार, बीजेपी और कांग्रेस प्रत्याशियों से आगे थे। दूसरे राउंड से लेकर चौथे राउंड तक कमलेश्वर, कांग्रेस और बीजेपी प्रत्याशियों से पीछे हो गए। 5वें राउंड से फिर तस्वीर बदली। डोडियार ने बढ़त बनाई। बीजेपी प्रत्याशी संगीता चारेल काफी पीछे रह गईं। कांग्रेस के हर्ष विजय गेहलोत और भारत आदिवासी पार्टी के डोडियार के बीच आखिर तक मुकाबला हुआ। नतीजा आया तो कमलेश्वर डोडियार ने इतिहास बना दिया। 4 हजार 618 वोट से जीतकर वे विधायक बन गए।
2023 में एमपी की राजनीति में यह बड़ा टर्निंग प्वॉइंट था, क्योंकि तीसरी ताकत के तौर पर अब तक अपनी मौजूदगी दर्ज कराते रहे बसपा, सपा जीत को तरस गए और जय युवा आदिवासी संगठन (खअर) ने अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी। जयस के नेता अलग-अलग दलों से चुनावी मैदान में उतरे थे। उसमें कमलेश्वर ने इअढ के टिकट पर चुनाव लड़ा।
जयस के दूसरे गुट के नेता हीरा अलावा और मोंटू सोलंकी ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा। तीनों चुनाव जीते, मगर हीरा अलावा और मोंटू सोलंकी से ज्यादा चर्चा कमलेश्वर की रही। क्योंकि उनके प्रचार में न तो कोई बड़ा नेता आया न ही बैनर-पोस्टर लगे। कमलेश्वर ने चुनाव का खर्च भी चंदे से जुटाया था। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कमलेश्वर ने काफी संघर्ष भी किया। उन पर 16 मुकदमे अभी भी दर्ज है।
कुछ करने की थी धुन… – कमलेश्वर में मन में राजनीति में कुछ करने की धुन तो सवार हो गई थी, लेकिन परिवार की भी जिम्मेदारी थी। माता-पिता दोनों मजदूर थे। घर में छह भाई, तीन बहनें। परिवार के पास सवा बीघा जमीन। जो आजीविका के लिए बेहद नाकाफी थी। बाकी आदिवासियों की तरह पूरा परिवार राजस्थान-गुजरात मजदूरी करने जाता था।

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न्यू ईयर पर शराब के लेने होंगे अस्थाई लाइसेंस

हिन्दुस्तान मेल, भोपाल
प्रदेश 2023 को विदा कर नए साल के स्वागत के लिए तैयार है और राजधानी भोपाल में इस बार जश्न में किसी भी प्रकार की रोक नहीं रहेगी लेकिन किसी भी प्रकार की कार्यवाई से बचने के लिए शराब पार्टी का अस्थाई लाइसेंस लेना होगा साथ ही लाउड स्पीकर के नियमों का पालन करना जरूरी होगा तथा शहर के बार रात 12 बजे तक ही खुले रह सकेंगे। नए साल के जश्न के रंग में भंग न डले इसीलिए आबकारी विभाग को भी मुश्तेदी के साथ निगरानी करने के आदेश दिए गए हैं साथ ही रेस्टोरेंट और होटलों में शराब नहीं परोसी जाएगी। आबकारी विभाग द्वारा अलग अलग टीमें बना कर विशेष निगरानी की जाएगी।
नए साल के जश्न में तेज आवाज में लाउड स्पीकर बजाने पर पाबंदी
शहर में नए साल के जश्न में लाउड स्पीकर बजाने को लेकर सख्त दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। शहर के रहवासी इलाकों में लाउड स्पीकरों द्वारा तेज आवाज में गाने बजाने पर पाबंदी रहेगी साथ ही लाउड स्पीकरों की आवाज को तय सीमा भी 40 से 50 डेसिबल तक ही सीमित रहेगी।
आदेश के उलंघन पर पड़ सकते हैं लेने के देने
शहर में नए साल के जश्न के दौरान आम जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए प्रशासन द्वारा सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।भोपाल कलेक्टर आशीष सिंह ने ध्वनि प्रदूषण के नियंत्रण के लिए दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के तथा आदेश जारी किए हैं जिसके उलंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
निगरानी रखने के लिए अलग अलग टीमों का गठन
नए साल के जश्न मनाने वालों पर नजर रखने के लिए अलग अलग टीमों का गठन किया गया है। यह टीमें अलग अलग होटलों, रेस्टोरेंट और बार में निगरानी रखेंगी साथ ही शहर में ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए जारी आदेश का उलंघन करने वालो पर भी सख्त कार्रवाई करेगी।

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25 लाख वाहनों की जांच के लिए प्रदेश के 53 जिलों में सिर्फ 56 लोग, जिले में टीम क्यों नहीं?

हिन्दुस्तान मेल, भोपाल/गुना
गुना हादसे के बाद गुरुवार को परिजन अपनों के निशान ढूंढ़ते रहे। 13 में से सिर्फ दो यात्रियों की ही शिनाख्त हो पाई। इनमें से एक आरएसएस से जुड़े मनोहर शर्मा और दूसरा डंपर ड्राइवर वीरेंद्र है। बाकी शवों की शिनाख्त के लिए डीएनए टेस्ट होगा। इधर, हादसे के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव ने तुरंत एक्शन लेते हुए तमाम अफसरों को हटा दिया। व्यवस्थापकों को बदलने का कदम अच्छा है, पर ऐसे हादसे न हों, यह सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था बदलने की जरूरत है।
दरअसल, प्रदेश में परिवहन विभाग के पास न पर्याप्त स्टाफ है न संसाधन। कमर्शियल वाहनों की जांच का जिम्मा संभाग स्तर पर गठित कुल 10 उड़न दस्तों पर है। इन उड़नदस्तों में सिर्फ 56 लोगों का स्टाफ है और इन्हीं पर प्रदेश के 25 लाख कमर्शियल वाहनों की जांच का जिम्मा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अभी प्रदेश में सख्ती से चैकिंग हो जाए तो एक लाख से ज्यादा अनफिट, बिना परमिट और बिना इंश्योरेंस वाले कमर्शियल वाहन मिल जाएंगे।
इधर, बदले गए अफसरों में गुना कलेक्टर का अतिरिक्त प्रभार सीईओ जिला पंचायत प्रथम कुमार कौशिक को सौंपा गया है। इधर, शासन ने पीडब्ल्यूडी डिपार्टमेंट के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह से परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव का अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया है और अपर मुख्य सचिव गृह राजेश राजौरा को एसीएस परिवहन विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में पदस्थ राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अरुण कुमार सिंह की सेवाएं वापस ले ली हैं, सिंह को जीएडी पूल में डिप्टी सेक्रेटरी बनाया गया है। बेंगलुरू में वाहनों की जांच के लिए 40 इंस्पेक्टर स्तर के अफसर हैं।
राजस्थान में आरटीओ के 13 रीजन में 194 उड़नदस्ते हैं। हर उड़नदस्ते में इंचार्ज इंस्पेक्टर और दूसरे नंबर पर टीएसआई है। वहां 400 इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी हैं।

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मंत्रियों के विभागों की सूची लेने दिल्ली गए मुख्यमंत्री

हिन्दुस्तान मेल, भोपाल। मध्यप्रदेश में आज मंत्रियों को विभागों का बंटवारा हो सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दिल्ली दौरे पर हैं। वे यहां बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व से मिलकर विभाग बंटवारे पर फाइनल चर्चा कर सकते हैं। मुख्यमंत्री गुरुवार रात करीब सवा 9 बजे प्राइवेट विमान से दिल्ली के लिए रवाना हुए। दिल्ली रवाना होने से पहले उन्होंने बीजेपी के प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा से उनके घर पहुंचकर मुलाकात की। ये मुलाकात करीब आधे घंटे तक चली। सीएम शुक्रवार दोपहर 12:30 बजे के बाद दिल्ली से वापस लौटेंगे। ऐसा माना जा रहा है कि उनके भोपाल लौटने के बाद कभी भी मंत्रियों को विभाग बंटवारे का ऐलान हो सकता है।

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