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इंदौर

महिलाओं ने परंपरा अनुसार गोमाता का शृंगार करकेपूजा अर्चना की

गोपाष्टमी के पावन मौके पर बृजमोहन रामकली गो-संरक्षण केंद्र हलाली डैम भोपाल में सोमवार को गोपाष्टमी पर्व परंपरागत तरीके से मनाया गया। महिलाओं ने परंपरा के अनुसार गो माता का शृंगार किया तथा पूजा अर्चना की। गोपाष्टमी पर्व पर महिलाओं ने व्रत रखकर ईश्वर से अमन चैन की कामना की। लोगों ने गौ माता को गुड़ चना और हरा चारा खिलाया। केंद्र के अध्यक्ष प्रहलाद दास मंगल एवं प्रमोद नेमा ने बताया कि इस अवसर पर गौशाला में कार्यरत सभी ग्वालों और कर्मचारियों का तिलक कर उन्हें भी गर्म कपड़े बांटे गए। इस अवसर पर दीपिका महेश्वरी, राधिका महेश्वरी, प्रदीप गोल्डन सहित अन्य गोभक्त कार्यक्रम में शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि यह गोशाला भोपाल संभाग की मॉडल गोशाला है। जिसमें लगभग 1500 वृद्ध, अपाहिज एवं बिना दूध देने वाली गायों की सेवा की जाती हैे।

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पानी में डूबते लोगों को बचाएगा विश्व का पहला अक इनेबल ड्रोन

इंदौर के स्टार्टअप ने एक ऐसा ड्रोन तैयार किया है, जो पानी में डूबते हुए पर्यटकों को न केवल डिटेक्ट करेगा, बल्कि उनकी जान भी बचाएगा। इसका उपयोग गोवा के सभी 52 बीच, उप्र के घाटों, उत्तराखण्ड और इंडियन नैवी में किया जा सकेगा। मप्र में भी अब चुनाव के बाद नई सरकार बनने के बाद चर्चा की जाएगी और इसका प्रेजेंटेशन दिया जाएगा। प्रदेश में भी इसका उपयोग हनुवंतिया सहित सभी बड़ी नदियों, तालाबों में आसानी से किया जा सकेगा।
नव-रक्षक नाम का यह ड्रोन इंदौर की पिसार्व टेक्नोलॉजीस कंपनी ने तैयार किया है। कंपनी के फाउण्डर और चीफ टेक्निकल आॅफिसर अभिषेक मिश्रा व चीफ पीपुल आॅफिसर (उढड) रोशनी शुक्ला (मिश्रा) का दावा है कि यह भारत ही नहीं, बल्कि वर्ल्ड का सबसे पहला आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस इनेबल ड्रोन है। आमतौर पर दूसरे ड्रोन उड़ते हैं, लेकिन इस ड्रोन के साथ आॅन बोर्ड कम्प्यूटर भी है, जो साथ में उड़ता है। यह ड्रोन समुद्र में, नदी में, तालाब आदि में कोई डूब रहा है तो आॅटोमैटिक उसे डिटेक्ट कर लेगा। इस दौरान वहां बेस्ड स्टेशन पर अलार्म बजेगा। डिटेक्ट करने के अलावा इसमें एक और सुविधा है कि जब कोई डूबता है तो यह संबंधित के ऊपर जाकर लाइफ सेविंग जैकेट गिरा देगा। ऐसे में डूबता हुआ व्यक्ति उस जैकेट की मदद से करीब एक घंटे तक पानी में आराम से तैर सकता है और उसकी जान बच जाएगी।
न्यूज में नाव पलटते देखी तो क्लिक हुआ आइडिया – रोशनी शुक्ला (मिश्रा) ने बताया कि कुछ माह पहले टीवी पर एक न्यूज देखी जिसमें उप्र में नदी में नाव को पलटते दिखाया गया था। तब इसमें सवार लोगों को मशक्कत के बाद बचा लिया गया था। इसके बाद से दिमाग में ऐसा ड्रोन तैयार करने का आइडिया आया। इसके साथ ही और स्टडी की तो पता चला कि देश में हर साल 40 हजार लोगों की डूबने के कारण मौत हो जाती है, जो चौंकाने वाला आंकड़ा है। न्यूज में भी आए दिन ऐसे हादसे देखने-सुनने को मिलते हैं। इसके बाद तो ड्रोन तैयार करने का फैसला ले लिया।
कुंभ मेले में रहेगा उपयोगी – कंपनी के (उळड) अभिषेक मिश्रा ने बताया कि उक्त ड्रोन का उपयोग गोवा के बीचेस के लिए काफी उपयोगी है। इसके लिए वहां की सरकार से बात हुई है जिस पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। वहां सभी 52 बीचेस पर इसका इंस्टालेशन किया जाएगा। इसी तरह गुजरात के कोस्टल एरिया, उत्तराखण्ड, उप्र में भी खासकर वाराणसी में जितने भी घाट हैं, उन्हें कवर किया जाना है, जिसके लिए चर्चा चल रही है। प्रारंभिक रूप से यहां भी सहमति बन चुकी है।

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मप्र सिविल सर्विसेज शतरंज चयन प्रतियोगिता

हिन्दुस्तान मेल, इंदौर। मप्र सिविल सर्विसेज शतरंज चयन प्रतियोगिता में इंदौर पुलिस कमिश्नर मकरंद देउस्कर ने टॉप सीड डॉ. बीके चौरसिया को हराकर उलटफेर किया। चित्र में देउस्कर और स्मार्ट सिटी के सीईओ अपनी चाल चलते हुए। (विस्तृत समाचार खेल पेज पर)

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करीब 4 करोड़ के ventilator मशीन सुपर speciality में हो रहे खराब

पीएम केयर फ़ंड से कोरोना के समय आए करोड़ों के ventilator मशीन का सुपर specialty अस्पताल नहीं हो रहा कोई उपयोग………..

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महाकाल क्षेत्र के मलबे से कॉलोनी तक कैसे पहुंचीं प्राचीन मूर्तियां?

करीब डेढ़ महीने पहले महाकाल मंदिर से कुछ ही दूर एक कॉलोनी में निर्माण के दौरान खुदाई में प्राचीन खंडित नंदी की प्रतिमा और प्राचीन मंदिर की स्थापत्य कला मंजरी मिली थी। सूचना के बाद यहां पर काम रोक कर पुरातत्व विभाग को निरीक्षण कर रिपोर्ट देने को कहा गया था।
विभाग की रिपोर्ट में महाकाल क्षेत्र से आने वाले मलबे को यहां डालने का संदेह बताने के बाद अब सवाल महाकाल मंदिर से मलबा फेंकने पर उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि मलबे के साथ संरक्षित रखी जाने वाली प्राचीन प्रतिमाएं कॉलोनी तक कैसे पहुंच गईं? श्री महाकालेश्वर मंदिर विस्तारीकरण योजना के तहत मंदिर परिसर में खुदाई होने के बाद निर्माण कार्य किया जाना था। 24 सितंबर को थाना नानाखेड़ा क्षेत्र अंतर्गत इंदौर मार्ग पर स्थित तिरुपति प्राइड-30 कॉलोनी में खुदाई के दौरान करीब 10वीं-11वीं शताब्दी की खंडित नंदी प्रतिमा, मंदिर के शिखर का भाग मिला था। पुरातत्व की प्राचीन सामग्री मिलने के बाद यहां का काम रोककर प्रशासन के अधिकारी को सूचना दी थी। प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा बनाया था। प्रतिमाओं को विश्वविद्यालय के पुरातत्व संग्रहालय में सुरक्षित रखवा दिया गया था। प्रशासन ने पुरातत्व विभाग को प्रतिमाओं की जांच के बाद रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था। पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट में महाकाल क्षेत्र से मलबा आने के संकेत के बाद अब कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।

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