Hindustanmailnews

Author name: Hindustanmailnews

ऋषभ आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान होंगे

नई दिल्ली, एजेंसी। आईपीएल 2024 से ऋषभ पंत क्रिकेट में वापसी करेंगे। वे दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान भी होंगे। ऊउ के चेयरमैन पार्थ जिंदल ने इसकी घोषणा की। पंत 14 महीने बाद प्रोफेशनल क्रिकेट में वापसी कर रहे हैं। 31 दिसंबर 2022 को दिल्ली से रुड़की जाते वक्त पंत का एक्सीडेंट हो गया था। इसके बाद उनकी सर्जरी हुई थी। इस कारण वे 2023 सीजन भी नहीं खेल सके थे। ऋषभ की जगह 2023 सीजन में आॅस्ट्रेलिया के बल्लेबाज डेविड वॉर्नर ने कप्तानी की थी। पिछले हफ्ते ही पंत को ठउअ से फिटनेस क्लियरेंस मिला है। पार्थ जिंदल ने कहा- हमें अपने कप्तान के रूप में ऋषभ का वापस स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। धैर्य और निडरता ने हमेशा उनके क्रिकेट ब्रांड को स्थापित किया है। मैं एक बार फिर हमारी टीम के लिए उनकी वापसी का इंतजार नहीं कर सकता क्योंकि हम नए जोश और उत्साह के साथ नए सीजन का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि पंत के विकेटकीपिंग करने पर संशय अभी बना हुआ है। पार्थ जिंदल या टीम मैनेजमेंट में से किसी ने भी पंत के विकेटकीपिंग करने पर कोई बात नहीं की है।

ऋषभ आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान होंगे Read More »

ग्लेन मैक्ग्रा बोले- जसप्रीत हर बॉल पर पूरा एफर्ट लगाते हैं, उन्हें ब्रेक की जरूरत

आॅस्ट्रेलिया के महान तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा का मानना है कि भारतीय पेसर जसप्रीत बुमराह का बॉलिंग एक्शन उनके ज्यादा चोटिल होने की वजह है। मैक्ग्रा बोले, बुमराह को आॅफ-सीजन की जरूरत है क्योंकि उनके बॉलिंग एक्शन की वजह से उन्हें ज्यादा चोट लग सकती है।
मार्च 2023 में अपनी पीठ की सर्जरी के कारण बुमराह लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रहें। वह आॅस्ट्रेलिया में 2022 टी-20 वर्ल्ड कप के साथ-साथ कढछ 2023 से भी चूक गए थे।
टफऋ पेस फाउंडेशन में मीडिया से बातचीत के दौरान मैक्ग्रा ने कहा, बुमराह को आॅफ सीजन की जरूरत है क्योंकि वह हर गेंद में पूरा एफर्ट लगाते हैं। उन्हें एक ब्रेक की जरूरत है। अगर वह खेलना जारी रखते है, तो उसके गेंदबाजी एक्शन को देखते हुए जितना दबाव बनता है, उसे चोट लगना तय है, जैसा कि वह पहले भी कर चुके हैं।
मैक्ग्रा बोले, बॉलिंग एक्शन के दौरान आखिरी दो कदम लेते हुए जब बुमराह क्रीज में आते है, तब उनकी गति बढ़ जाती है, और यहीं से उनकी बॉल स्पीड बढ़ती है। मैक्ग्रा ने कहा कि दाएं हाथ के तेज गेंदबाजों की मौजूदगी के कारण भारत को बाएं हाथ के गेंदबाज की तलाश करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ा। वे बोले, भारतीय तेज गेंदबाजी लंबे समय से सेट है और इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। जिस तरह से मोहम्मद शमी, बुमराह, मोहम्मद सिराज और उमेश यादव ने अच्छा प्रदर्शन किया है। वे जब रिटायर हो जाएंगे, तब भारतीय टीम तेज गेंदबाजी के बारे में सोचेगी। इतने सारे अच्छे दाएं हाथ के गेंदबाज होने के कारण हमने हाल ही में बाएं हाथ के भारतीय तेज गेंदबाज को नहीं देखा है। मैक स्टार्क ने निजी कारणों से आईपीएल में नहीं आने का फैसला किया। लेकिन वह वापस आए और रिकॉर्ड कीमत लेकर गए।वे इसका इंतजार कर रहे होंगे। अपने दिन पर, अगर वह गेंद को स्विंग करा रहे हैं, तो वह किसी भी अन्य तेज गेंदबाज जितना ही अच्छा होगा। उन्हें जो पैसा मिला है वह अविश्वसनीय है। लेकिन कमिंस और स्टार्क दोनों बहुत अनुभवी खिलाड़ी हैं और खेल को अच्छी तरह जानते हैं। मैक्ग्रा ने कहा, मुझे नहीं लगता कि कीमत का उन पर एक प्रतिशत भी प्रभाव पड़ेगा।
इस सीजन के लिए कमिंस और स्टार्क की बोली 20 करोड़ से भी ज्यादा गई। स्टार्क 24.75 करोड़ में ङङफ और कमिंस 20.50 करोड़ रुपए में रफऌ के साथ शामिल हुए थे।

ग्लेन मैक्ग्रा बोले- जसप्रीत हर बॉल पर पूरा एफर्ट लगाते हैं, उन्हें ब्रेक की जरूरत Read More »

कोचिंग के नाम से फर्जी मैसेज भेजे गए पिता को इंदौर के एक लड़के पर शक

कोटा में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की किडनैपिंग केस में पुलिस के हाथ अब तक खाली है। वहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से फोन पर बात की है। उन्होंने जल्द से जल्द छात्रा को सुरक्षित घर पहुंचाने की बात कही है। लड़की मध्य प्रदेश के शिवपुरी की रहने वाली है।
इधर, छात्रा की तलाश और आरोपियों को पकड़ने के लिए अलग-अलग पुलिस टीमों का गठन किया गया है। दिल्ली और इंदौर भी टीम को भेजा गया है। किडनैपर ने छात्रा के पिता से 30 लाख रुपए फिरौती मांगी है। रुपए नहीं देने पर छात्रा को जान से मारने की धमकी दी है। हालांकि केस में कई चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं।
जानिए क्या
है पूरा मामला
दरअसल, कोटा में नीट की तैयारी कर रही काव्या धाकड़ (20) के अपहरण का मामला सोमवार को सामने आया था। वह मूल रूप से शिवपुरी (टढ) के बैराड़ की रहने वाली है। किडनैपर ने छात्रा के पिता रघुवीर धाकड़ को मैसेज कर फोटो भेजा था। फोटो में छात्रा को रस्सी से बांधा हुआ था।
मैसेज के जरिए 30 लाख रुपए की फिरौती मांगी। फिरौती की रकम नहीं देने पर छात्रा को जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पिता कोटा आए और पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई। छात्रा की मां भी कोटा आई। पुलिस ने दोनों के बयान लेकर जांच शुरू की, जिसके बाद हर सवाल पर एक सवाल खड़ा हो गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राजस्थान के मुख्यमंत्री से बात की और कहा कि पुलिस जल्द से जल्द तहकीकात कर हमारी बेटी को वापस लाए।
घटना की जानकारी मिलने के बाद केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राजस्थान के मुख्यमंत्री से बात की और कहा कि पुलिस जल्द से जल्द तहकीकात कर हमारी बेटी को वापस लाए।

मामले की जांच कर रहे कोटा के विज्ञान नगर थाने के सीआई सतीश कुमार से बात की। सीआई ने बताया कि शिवपुरी से छात्रा के माता-पिता कोटा आए हैं। पिता ने बताया कि बेटी 2019-20 में भी कोटा में भी नीट की तैयारी के लिए आई थी, लेकिन उसका सिलेक्शन नहीं हुआ था। नए सेशन के लिए अगस्त 2023 में अपनी मां के साथ कोटा आई थी। माता-पिता ने छात्रा की कोचिंग (फिजिक्सवाला) और हॉस्टल (पारस) बताया था। इस पर दोनों को कोचिंग और हॉस्टल लेकर गए। चौंकाने वाली बात सामने आई कि दोनों ही जगह छात्रा का एडमिशन नहीं था। सीआई ने कहा कि आरोपियों को पकड़ने और लड़की की तलाश की जा रही है। फिलहाल मामले में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा।
कोचिंग के नाम पर प्राइवेट नंबर से मैसेज
पिता रघुवीर धाकड़ ने बताया था कि बेटी का मां पीडब्लू कोचिंग में एडमिशन करवाकर गई थी। मामले में कोचिंग के कोटा कैंपस हेड दिनेश जैन ने बताया कि छात्रा का कोचिंग में एडमिशन नहीं हुआ। अगर एडमिशन होता तो हमारे रिकॉर्ड में होता। वह कोर्स की जानकारी लेकर भी जाते तो हमारे पास डिटेल होती।

कोचिंग के नाम से फर्जी मैसेज भेजे गए पिता को इंदौर के एक लड़के पर शक Read More »

सड़कों का जाल बिछने के बाद देश के प्रमुख शहरों से जुड़ जाएगा इंदौर

सांसद और इंदौर लोकसभा क्षेत्र के भाजपा प्रत्याशी शंकर लालवानी ने कहा कि उम्मीदों के शहर इंदौर की आने वाले समय में तस्वीर बदल जाएगी। इंदौर को महानगर बनाने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। शहर की कनेक्टिविटी बढ़ाने में कोई कसर नही छोड़ी जा रही है। इंदौर और आसपास के इलाकों में सडकों का जाल बिछ रहा है, शहर दो तीन साल में देश के प्रमुख शहरों से जुड़ जाएगा। लालवानी ने यह बात प्रेस क्लब में चाय पर चर्चा के दौरान मीडिया से कही।
लालवानी ने कहा कि इंदौर का भविष्य बेहतर है। 40-50 साल को ध्यान में रखकर कार्य योजना तैयार कर कार्य किए जा रहे है। केंद सरकार की योजना के तहत प्लान बनाए गए है। उन्होंने कहा कि शहर को नेशनल कनेक्टिविटी से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर विकास कार्य चल रहा है। दो तीन सालों में इंदौर सम्पूर्ण सड़क मार्ग से देश के प्रमुख शहर हैदराबाद और कोलकाता सहित अन्य शहरों से जुड़ जाएगा। शंकर लालवानी अपनी जीत को लेकर निश्चिंत है। उन्होंने कहा कि हम चुनाव गम्भीर से लड़ रहे है और रिकॉर्ड मतों से जीतेंगे। प्रारंभ में इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी और महासचिव हेमंत शर्मा ने उनका स्वागत किया। संचालन प्रदीप जोशी द्वारा किया गया।

लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा में बैठकों का दौर जारी है। जावरा कंपाउंड स्थित बीजेपी कार्यालय पर चुनाव प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में सांसद शंकर लालवानी, भाजपा नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे, लोकसभा अध्यक्ष रवि रावलिया, सह संयोजक गोपाल गोयल, गोपाल सिंह चौधरी, संभागीय कार्यालय मंत्री विष्णु प्रसाद शुक्ला और घनश्याम शेर की सहित अन्य नेता मौजूद रहे। बैठक को संबोधित करते हुए नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे ने कहा कि हम बूथ स्तर पर जितनी अच्छी योजना बनाएंगे रिजल्ट उतना ही अच्छा मिलेगा। हमारे पास 54 दिन बचे हैं जिसमें से हमें 24 दिन कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित करने हैं। जिसमें प्रत्येक पोलिंग बूथ से कम से कम 25 कार्यकर्ता शामिल होना है। बूथ विजय संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रत्येक पदाधिकारी को 10 दिन कम से कम 2 घंटे बूथ पर रहकर बूथ को मजबूत करने का कार्य करना है। साथ ही मंडल से लेकर बूथ तक सूचना तंत्र को भी ओर मजबूत बनाना है।

सड़कों का जाल बिछने के बाद देश के प्रमुख शहरों से जुड़ जाएगा इंदौर Read More »

विपक्ष के नकारात्मक प्रचार पर क्या मोदी के सकारात्मक प्रचार को मिलेगी जीत?

लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और चुनाव का माहौल गरमा रहा है। चुनावों की तारीखें घोषित किए जाने के साथ ही जैसी कि उम्मीद थी, सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी और तेज हो गई। कौरव रूपी विपक्षी दल एवं पाण्डव रूपी भाजपा के बीच इस चुनाव में असली जंग सत्य और असत्य के बीच है। सत्ता पक्ष और विपक्ष की यह नोक-झोंक ही तो लोकतंत्र की खूबसूरती है, यह जितनी शालीन एवं उग्र होगी, लोकतंत्र का यह महापर्व कुंभ उतना ही ऐतिहासिक एवं खास होगा। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतन्त्र है और उदार बहुदलीय राजनैतिक प्रणाली का जीवन्त उदाहरण है जिसकी वजह से चुनावों का समय एवं प्रचार विविधतापूर्ण, आक्रामक व रंग-रंगीला होना ही है मगर इसमें कहीं भी कड़वापन, उच्छृंखलता और आपसी रंजिश का पुट नहीं आना चाहिए।
इस बार के चुनाव में जहां भाजपा नेतृत्व अगले 20 वर्षों का विजन पेश कर रहा है, वहीं कांग्रेस नेतृत्व इसे लोकतंत्र बचाने का आखिरी मौका करार दे रहा है। यानी इन चुनावों का फलक पांच साल के काम के आधार पर अगले पांच साल के लिए जनादेश के सामान्य ट्रेंड तक सीमित नहीं रहा। यह चुनाव असल में आजादी के अमृतकाल यानी वर्ष 2047 के लक्ष्य को सुनिश्चित करने वाला है। इस चुनाव में सर्वाधिक चर्चा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं उनके भावी देश-निर्माण के संकल्प की है। असल में तो इन चुनाव में भाजपा की जीत तो निश्चित मानी जा रही है, लेकिन वह अपने 400 के लक्ष्य को हासिल कर पाती है या नहीं? भाजपा इसके इर्द-गिर्द अपना अभियान चला रही हैं। जबकि विपक्ष जीत का दावा करते हुए भाजपा के इस बड़े लक्ष्य को हास्यास्पद बता रहा है, उनके प्रति अपनी नापसंदगी से परेशान है। भाजपा के पास बड़ा उद्देश्य है, जबकि विपक्ष भाजपा की काट करने के लिये भी प्रभावी मुद्दे नहीं तलाश पा रही है। भाजपा प्रचार में शामिल हैं- आर्थिक विकास, देश और विदेश में सशक्त राष्ट्रवाद, हिंदुत्व, सांस्कृतिक पुनरुत्थान, नया भारत-सशक्त भारत, औद्योगिक क्रांति, दुनिया की महाशक्ति बनना, स्थिरता, शांति। विपक्ष इन ही बड़े उद्देश्यों की आलोचना कर रहा है। मोदी इन चुनावों के महानायक है, परिवर्तनकारी व्यक्ति हैं जो स्थिरता का वादा करते हुए वोट मांग रहे हैं। अपने आलोचकों के लिए, वह एक अत्यंत ध्रुवीकरण करने वाले व्यक्ति हैं।
इस बार का आम चुनाव रोमांचक होने के साथ देश में बड़े परिवर्तन का कारण बनेगा। इस चुनाव में सभी पार्टियां सरकार बनाने का दावा पेश कर रही हैं और अपने को ही विकल्प बता रही हैं तथा मतदाता सोच रहा है कि देश में नेतृत्व का निर्णय मेरे मत से ही होगा। इस वक्त मतदाता मालिक बन जाता है और मालिक याचक। बस केवल इसी से लोकतंत्र परिलक्षित है। बाकी सभी मयार्दाएं, प्रक्रियाएं हम तोड़ने में लगे हुए हैं। जो नेतृत्व स्वतंत्रता प्राप्ति का शस्त्र बना था, वही नेतृत्व जब तक पुन: प्रतिष्ठित नहीं होगी तब तक मत, मतदाता और मतपेटियां सही परिणाम नहीं दे सकेंगी। आज देश को एक सफल एवं सक्षम नेतृत्व की अपेक्षा है, जो राष्ट्रहित को सर्वोपरि माने। आज देश को एक अर्जुन चाहिए, जो मछली की आंख पर निशाने की भांति भ्रष्टाचार, राजनीतिक अपराध, महंगाई, बेरोजगारी, बढ़ती आबादी, सरकारी खजाने का गलत इस्तेमाल, देश की सीमा-रक्षा आदि समस्याओं पर ही अपनी आंख गड़ाए रखें। इस दृष्टि से सबकी नजरे मोदी पर ही लगी हैं।
मोदी ही अर्जुन की मुद्रा में हैं जो मछली की आंख पर निशाना लगा सके। वे ही युधिष्ठिर है, जो धर्म का पालन करते हुए दिख रहे हैं। जो स्वयं को संस्कारों में ढाल, मजदूरों की तरह श्रम कर रहे हैं। वे आदर्शों एवं मूल्यों के साथ चुनावों में उतरे हैं, राजनीति की चकाचौंध में धृतराष्ट्र बने नेताओं के लिये वे एक चुनौती है। सभी विपक्षी दलों में आंतरिक लोकतंत्र का अभाव है और परिवारवाद तथा व्यक्तिवाद की छाया है। कोई अपने बेटे को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती है तो कोई अपने बेटे को मुख्यमंत्री के रूप में। किसी का पूरा परिवार ही राजनीति में है, इसलिए विरासत संभालने की जंग भी जारी है। ऐसे में मोदी ही सबसे प्रभावी नेता बन कर सामने आ रहे हैं। महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे पुराने मुद्दे भी उठाए ही जा रहे हैं, लेकिन वोटर के फैसले में इनकी कितनी भूमिका रहेगी यह अभी स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दो-दो यात्राओं से उपजे प्रभाव की परीक्षा भी इन्हीं चुनावों में होनी है। कुल मिलाकर, विपक्ष और सत्ता पक्ष कुछ भी कहे देशवासियों की जागरूक चेतना को देखते हुए यह तय माना जा सकता है कि आम चुनाव का यह लोकतांत्रिक पर्व एक बार फिर देश में लोकतंत्र की जड़ों को गहरा ही करेगा।
विपक्षी दलों ने देश-सेवा के स्थान पर स्व-सेवा में ही एक सुख मान रखा है। आधुनिक युग में नैतिकता जितनी जरूरी मूल्य हो गई है उसके चरितार्थ होने की सम्भावनाओं को इन विपक्षी दलों ने उतना ही कठिन कर दिया गया है। ऐसा लगता है मानो ऐसे तत्व पूरी तरह छा गए हैं। खाओ, पीओ, मौज करो। सब कुछ हमारा है। हम ही सभी चीजों के मापदण्ड हैं। हमें लूटपाट करने का पूरा अधिकार है। हम समाज में, राष्ट्र में, संतुलन व संयम नहीं रहने देंगे। यही आधुनिक चुनावों का घोषणा पत्र है, जिस पर लगता है कि सभी विपक्षी दलों ने हस्ताक्षर किये हैं। भला इन स्थितियों के बीच उन्हें वास्तविक जीत कैसे हासिल हो? आखिर जीत तो हमेशा सत्य की ही होती है और सत्य इन तथाकथित राजनीतिक दलों के पास नहीं है। महाभारत युद्ध में भी तो ऐसा ही परिदृश्य था। कौरवों की तरफ से सेनापति की बागडोर आचार्य द्रोण ने संभाल ली थी।
एक दिन दुर्योधन आचार्य पर बड़े क्रोधित होकर बोले-ह्यह्यगुरुवर कहां गया आपका शौर्य और तेज? अर्जुन तो हमें लगता है समूल नष्ट कर देगा। आप के तीरों में जंग क्यों लग गई। बात क्या है? आज लगभग हर राजनीतिक दल और उनके नेतृत्व के सम्मुख यही प्रश्न खड़ा है और इस प्रश्न का उत्तर भी और कहीं नहीं, उन्हीं के पास है। राजनीति की दूषित हवाओं ने हर राजनीतिक दल और उसकी चेतना को दूषित कर दिया है। सत्ता और स्वार्थ ने अपनी आकांक्षी योजनाओं को पूर्णता देने में नैतिक कायरता दिखाई है। इसकी वजह से लोगों में विपक्षी दलों के प्रति विश्वास इस कदर उठ गया है कि चौराहे पर खड़े आदमी को सही रास्ता दिखाने वाला भी झूठा-सा लगता है। आंखें उस चेहरे पर सच्चाई की साक्षी ढूंढ़ती हैं। यही कारण है कि दुर्योधन की बात पर आचार्य द्रोण को कहना पड़ा, दुर्योधन मेरी बात ध्यान से सुनो। हमारा जीवन इधर ऐश्वर्य में गुजरा है। मैंने गुरुकुल के चलते स्वयं ह्यगुरु की मयार्दा का हनन किया है। हम सब राग रंग में व्यस्त रहे हैं। सुविधाभोगी हो गए हैं, पर अर्जुन के साथ वह बात नहीं। उसे लाक्षागृह में जलना पड़ा है, उसकी आंखों के सामने द्रौपदी को नग्न करने का दु:साहस किया गया है, उसे दर-दर भटकना पड़ा है, उसके बेटे को सारे महारथियों ने घेर कर मार डाला है, विराट नगर में उसे नपुंसकों की तरह दिन गुजारने को मजबूर होना पड़ा। अत: उसके वाणों में तेज होगा कि तुम्हारे वाणों में, यह निर्णय तुम स्वयं कर लो। लगभग यही स्थिति आज के राजनीतिक दलों के सम्मुख खड़ी है। किसी भी राजनीतिक दल के पास आदर्श चेहरा नहीं है, कोई पवित्र एजेंडा नहीं है, किसी के पास बांटने को रोशनी के टुकड़े नहीं हैं, जो नया आलोक दे सकें। जो मोदी रूपी अर्जुन के देश-विकास के बाणों का मुकाबला कर सके।
यह वक्त विपक्षी दलों और उनके उम्मीदवारों को कोसने की बजाय मतदाताओं के जागने का है। आज मतदाता विवेक से कम, सहज वृति से ज्यादा परिचालित हो रहा है। इसका अभिप्राय: यह है कि मतदाता को लोकतंत्र का प्रशिक्षण बिल्कुल नहीं हुआ। सबसे बड़ी जरूरत है कि मतदाता जागे, उसे लोकतंत्र का प्रशिक्षण मिले।
हमें किसी पार्टी विशेष का विकल्प नहीं खोजना है। किसी व्यक्ति विशेष का भी विकल्प नहीं खोजना है। विकल्प तो खोजना है भ्रष्टाचार का, अकुशलता का, प्रदूषण का, भीड़तंत्र का, गरीबी के सन्नाटे का, महंगाई का, राजनीतिक अपराधों का। यह सब लम्बे समय तक त्याग, परिश्रम और संघर्ष से ही सम्भव है। धृतराष्ट्र रूपी दलों की आंखों में झांक कर देखने का प्रयास करेंगे तो वहां शून्य के सिवा कुछ भी नजर नहीं आयेगा। इसलिए हे मतदाता प्रभु! जागो!

विपक्ष के नकारात्मक प्रचार पर क्या मोदी के सकारात्मक प्रचार को मिलेगी जीत? Read More »

Scroll to Top
Verified by MonsterInsights