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अमेरिकी बैंकिंग में मुसीबतों का दखल…..

अमेरिकी बैंकों पर आए संकट का असर भारत के आईटी सेक्टर पर भी पड़ेगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बैंकिंग क्राइसिस से भारत का 20 लाख करोड़ रुपए से अधिक का आईटी बिजनेस मुश्किल में है। बड़े बैंकों के डूबने से इस सेक्टर की कमाई पर असर पड़ेगा। वित्तीय संकट के दृष्टिगत देश के वित्त मंत्रालय को भारतीय बैंकिंग सेक्टर में आम आदमी का विश्वास बनाए रखना होगा।
अमेरिका के बैंकिंग सेक्टर में मुसीबतों का दखल जारी है। यहां एक के बाद एक नामी बैंक खलास होते जा रहे हैं। हाल ही में अमेरिका में एक और नामचीन प्राइवेट बैंक डूब गया। अमीर लोगों की जरूरतों को पूरा करने वाला अमेरिका का मशहूर बैंक फर्स्ट रिपब्लिक बैंक भी बिक गया है। इस बैंक को जेपी मॉर्गन ग्रुप ने खरीद लिया है। बीते कुछ महीनों में अमेरिका में तीन बड़े बैंक डूबे हैं। इन बैंकों के डूबने से दुनियाभर में हलचल मची है। ग्लोबल अर्थजगत में भी चिंता की लहर है। अमेरिकी आर्थिक संकट का असर पूरी दुनिया पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। भारत का बैंकिंग सेक्टर इसको हल्के से नहीं ले सकता है। अमेरिका के बैंकिंग इतिहास में दूसरी बार बैंकों में इस तरह की स्थिति सामने आई है। इससे पहले साल 2008 में अमेरिका ने सबसे बड़ा बैंकिंग सेक्टर का बुरा हाल देखा था। उस समय बैंकिंग फर्म लेहमन ब्रदर्स ने खुद को डिफॉल्टर घोषित कर दिया था, जिसके बाद अमेरिका के साथ पूरी दुनिया में मंदी छा गई थी।
इस दौरान अमेरिका की इकोनॉमी की कमर टूट गई थी। यह जानना जरूरी है कि आखिर अमेरिका में ऐसा क्या हुआ कि यहां एक के बाद एक बैंक खाक होते जा रहे हैं। आइए… इस आर्थिक मुद्दे की गहराई में जाएं। सबसे पहले नकदी संकट से जूझ रहा अमेरिका का फर्स्ट रिपब्लिक बैंक बंद हो गया है। इस बैंक को खरीदने वाले जेपी मॉर्गन ग्रुप के अनुसार उसने एफआरबी के एसेट्स का बड़ा हिस्सा खरीद लिया है। इसके पास बैंक की कुछ देनदारियां भी आ गई हैं। बंद हुए अमेरिका के फर्स्ट रिपब्लिक बैंक की शाखाएं 8 राज्यों में फैली थीं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार फर्स्ट रिपब्लिक बैंक की अमेरिका के 8 राज्यों में 84 ब्रांचें थीं। जेपी मॉर्गन ग्रुप द्वारा खरीदे जाने के बाद अब इन सभी राज्यों में फर्स्ट रिपब्लिक बैंक के बदले जेपी मॉर्गन चेस बैंक की शाखाएं दोबारा खुलेंगी। फर्स्ट रिपब्लिक बैंक अमेरिका के अमीर लोगों की जरूरतों को पूरा करने वाला फेमस प्राइवेट बैंक था। यह वेंचर कैपिटल फर्म्स पर फोकस्ड सिलिकॉन वैली बैंक की तरह ही था, जो मार्च में गिर गया था। अमेरिका में मार्च-2023 से अभी तक तीन बैंक डूबे हैं। फर्स्ट रिपब्लिक बैंक से पहले मार्च में सिलिकॉन वैली बैंक और सिग्नेचर बैंक डूब गए थे। इन तीनों बैंकों के डूबने के पीछे नकदी संकट को कारण बताया जा रहा है। फर्स्ट रिपब्लिक बैंक को बीते वर्षों में कई बार बेचा और खरीदा गया। साल-2007 में मेरिल लिंच एंड कंपनी ने 1.8 अरब डॉलर में फर्स्ट रिपब्लिक बैंक को खरीदा था। इसके बाद 2009 में इसे बैंक आॅफ अमेरिका ने खरीदा। इसके बाद साल-2010 में इन्वेस्टमेंट फर्म जनरल अटलांटिक और कॉलोनी कैपिटल ने इसे 1.86 अरब डॉलर में खरीदा। इसके बाद इसे पब्लिक कर दिया गया था। अमेरिकी बैंकिंग सेक्टर में आए संकट को समझने के लिए सिलिकॉन वैली बैंक का उदाहरण सटीक है। इस संकट के कारण तबाह होने वाला सिलिकॉन वैली बैंक अमेरिका का पहला बैंक था। बैंकिंग सेक्टर को समझने वाले एक्सपर्ट बताते हंै कि सिलिकॉन वैली बैंक के डूबने की वजह बैंक के कुछ गलत फैसले थे।
दरअसल, सिलिकॉन वैली बैंक उन स्टार्टअप को भी कर्ज देता था, जिन्हें कोई दूसरा बैंक हाथ तक नहीं लगाता था। 2021 में शेयर बाजारों में तगड़ा बूम आया और ब्याज दरें लगभग जीरो हो गईं। शेयर बाजार में आए बूम के बाद टेक स्टार्टअप्स के पास बहुत सारा पैसा आया, जिसे कई स्टार्टअप ने सिलिकॉन वैली बैंक में जमा कर दिया। बैंक ने भी उन पैसों को लंबी अवधि के बॉण्ड में निवेश किया। पिछले साल जब ब्याज दरें बढ़ीं तो बॉण्ड्स अपनी वैल्यू गंवाने लगे, जिसके बाद टेक स्टार्टअप्स अपने पैसे निकालने लगे। इससे बैंक को अपने बॉण्ड्स को नुकसान में बेचना पड़ा। नुकसान बढ़ने लगा तो कंपनी के शेयर की कीमत गिरने लगी। इस सिलसिले के कुछ ही दिनों बाद सिलिकॉन वैली बैंक दिवालिया हो गया। सिलिकॉन वैली बैंक का बंद होना अमेरिकी इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा दिवाला है। इससे पहले 2008 में वॉशिंगटन म्यूचुअल को अमेरिका का पहला सबसे बड़ा बैंक दिवाला माना जाता है। आगे की कहानी जानें तो सिलिकॉन वैली बैंक के कुछ ही दिन बाद न्यूयॉर्क के सिग्नेचर बैंक की हालत खराब होने लगी। सिग्नेचर एफटीएक्स बैंक क्रिप्टो एक्सचेंज के पतन के साथ चर्चा में आया था। एफटीएक्स के सिग्नेचर बैंक में खाते थे। साल-2018 में ही ये बैंक क्रिप्टो असेट्स के डिपोजिट के बिजनेस में उतरा था। बैंक के लिए यही फैसला डुबोने वाला साबित हुआ। क्रिप्टोकरंसी में डील करने वाला एक अन्य बैंक सिल्वर गेट हाल ही में डूबा है।
अमेरिकी बैंकिंग सेक्टर के संकट का दुनिया पर क्या असर पड़ेगा? एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर अमेरिकी शेयर बाजार में कोई हलचल होती है तो उसका असर दुनिया के अन्य देशों पर भी पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मंदी की आहट नहीं है, लेकिन अगर अमेरिकी सरकार सिलिकॉन वैली को जल्द रिवाइव नहीं करती है तो स्टार्टअप की दुनिया में बड़ी उठापटक देखने को मिल सकती है। स्टार्टअप्स के पास पैसों का संकट आएगा, जिससे छंटनी का दौर शुरू हो सकता है। अमेरिकी बैंकिंग सेक्टर की मंदी का भारतीय बाजारों पर कुछ समय के लिए असर देखा जा सकता है, लेकिन इसका असर ऐसा नहीं होगा कि अमेरिका जैसे भारत में बैंक डूबने लगें। इसका कारण बताते हुए एक्सपर्ट ने कहा कि भारत के बैंकों का सिलिकॉन वैली बैंक से कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नाता नहीं है। भारतीय बैंकिंग सेक्टर में घरेलू निवेश है, जिन्हें सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश किया गया है। यह मजबूत है, साथ ही भारतीय बैंकिंग सिस्टम को भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से रेगुलेट किया जाता है… ऐसे में सिलिकॉन वैली बैंक जैसी हालत भारत के किसी बैंक की नहीं होगी। भारतीय बैंकों के पास पर्याप्त असेट्स भी हैं, जिसकी वजह से यहां के बैंकिंग सिस्टम पर सिलिकॉन वैली बैंक के दिवालिया होने का असर नहीं होगा। दरअसल अमेरिकी फेडरल रिजर्व लगातार देश में बैंकिंग सेक्टर की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर रहा है… ऐसे में जिन सेक्टरों में इन बैंकों का निवेश है, उन पर असर पड़ा है। इसके साथ ही निवेशकों ने इन बैंकों में निवेश से दूरी बना ली है। इसके साथ ही कई ऐसी कंपनियां भी हैं, जिन्हें इन बैंकों ने कर्ज दिया था।
इन कंपनियों ने कर्ज वापस नहीं किया। ऐसे में इन बैंकों की स्थिति बिगड़ती जा रही है। ऐसा दूसरी बार हो रहा है, जब अमेरिका का बैंकिंग सेक्टर पूरी तरह से ध्वस्त होने जा रहा है। ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में दुनियाभर की इकोनॉमी आपस में जुड़ी है, जहां इसके फायदे हैं तो साइड इफेक्ट भी दिखते रहे हैं। अमेरिका में उठा बैंकिंग का बवंडर भारत को भी थोड़ा प्रभाव देगा। आरबीआई पर भी ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बनेगा। अमेरिकी बैंकों पर आए संकट का असर भारत के आईटी सेक्टर पर भी पड़ेगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बैंकिंग क्राइसिस से भारत का 20 लाख करोड़ रुपए से अधिक का आईटी बिजनेस मुश्किल में है। बड़े बैंकों के डूबने से इस सेक्टर की कमाई पर असर पड़ेगा। कुल मिलाकर अमेरिकी बैंकिंग सेक्टर में आए इस वित्तीय संकट के दृष्टिगत देश के वित्त मंत्रालय को भारतीय बैंकिंग सेक्टर में आम आदमी का विश्वास बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम मजबूत करने होंगे।

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उज्जैन में एमबीए पास 25 साल की युवती बनीं साध्वी……सुख त्यागकर संयम् की राह चलीं सलोनी….

ज्वेलर विमल भंडारी और पूजा भंडारी की 25 साल की एमबीए पास बेटी सलोनी जैन साध्वी बन गईं। आज सलोनी ने दीक्षा ग्रहण की। इसके लिए पांच दिवसीय उत्सव हुआ। अरविंद नगर स्थित मनोरमा-महाकाल परिसर में विरती मंडप सजाया गया। इसमें पांच दिन धार्मिक आयोजन हुए। मंगलवार सुबह 8:30 बजे खाराकुआ स्थित श्री हीर विजय सूरी बड़ा उपाश्रय मंदिर से वर्षी दान वरघोड़ा निकला, जिसमें सलोनी ने हाथी पर बैठकर सांसारिक वस्तुओं के त्याग स्वरूप विभिन्न सामग्री लुटाईं। सलोनी आज दीक्षा लेने उपरांत सभी सांसारिक रीति रिवाज से दूर हो जाएगी। सलोनी ने एमबीए किया है।
सोमवार सुबह वस्त्र रंगोत्सव विधि हुई तो दोपहर में महिला सांझी कार्यक्रम के दौरान शहर के विभिन्न महिला मंडलों ने धार्मिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। शाम को वधावणा कार्यक्रम हुआ। महोत्सव समिति के संजय भंडारी और डॉ. राहुल कटारिया के अनुसार आचार्य मतिचंद्र सागर सुरीश्वरजी मसा, अध्यात्म योगी गणिवर्य आदर्श रत्न सागरजी मसा, युवा मुनि अक्षत रत्न सागर जी मसा व साध्वी मुक्ति दर्शना श्रीजी मसा की निश्रा में कार्यक्रम हुआ।
मंगलवार सुबह शहर में विराजित सभी साधु-साध्वी की निश्रा में भव्य वर्षीदान-वरघोड़ा नगर के प्रमुख मार्गों से होकर अरविंद नगर विरती मंडप पहुंचा था।

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AI बनाकर पछता रहा हूं…

दुनिया में जैसे-जैसे एआई की भूमिका बड़ी हो रही है, वैसे-वैसे इसके खतरे भी सामने आ रहे हैं और विशेषज्ञों ने इन पर खुलकर बात करना शुरू कर दिया है। ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के गॉडफादर’ के रूप में मशहूर ज्योफ्री हिंटन ने पिछले हफ्ते गूगल से इस्तीफा दे दिया। इसकी पुष्टि उन्होंने खुद की है। हिंटन ने एआई के खतरों के बारे में बात करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी जिसे विकसित करने में उन्होंने भी मदद की थी।
न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक बयान में हिंटन ने गूगल से अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि उन्हें ‘अब अपने काम पर पछतावा है’। हिंटन ने ट्वीट किया कि उन्होंने गूगल में अपनी नौकरी छोड़ दी है ताकि वह एआई के जोखिमों के बारे में खुलकर बात कर सकें। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, ‘मैंने नौकरी इसलिए छोड़ी ताकि मैं एआई के खतरों के बारे में बात कर सकूं और इसका असर गूगल पर भी न पड़े। गूगल ने बहुत जिम्मेदारी से काम लिया है। हाल ही में बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, मैं अब इस बारे में खुलकर बोल सकता हूं कि मुझे क्या खतरे नजर आ रहे हैं और उनमें से कुछ काफी डरावने हैं।
उन्होंने कहा, अभी, जहां तक मैं कह सकता हूं, वे हमसे ज्यादा बुद्धिमान नहीं हैं। लेकिन मुझे लगता है कि वे जल्द ही हो सकते हैं। हिंटन ने एक दशक से अधिक समय तक गूगल के लिए काम किया और इस क्षेत्र में सबसे सम्मानित आवाजों में से एक थे। 2012 में टोरंटो में दो ग्रेजुएट छात्रों के साथ काम करते हुए उन्हें एआई में प्रमुख सफलता मिली थी।

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बोहरा धर्मगुरु का चार साल बाद कल इंदौर आगमन……….

हिन्दुस्तान मेल, इंदौर। दाऊदी बोहरा समाज के 53वें धर्मगुरु आली कदर डॉ. सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन (त.ऊ.श) साहब का चार साल बाद गुरुवार को विमान से सुबह 10 बजे मुंबई से इंदौर आगमन होगा। वे सुपर कॉरिडोर के नजदीक बने डोम में समाजजन को दीदार देंगे और समाजजन को संबोधित करेंगे। सैयदना साहब इंदौर एयरपोर्ट से बेटमा रवाना होंगे और वहां नवनिर्मित मस्जिद का शुभारंभ करेंगे। समाज के प्रवक्ता फिरोज आरिफ बेटमावाला ने बताया कि डॉ. सैयदना करीब 11:30 बजे बेटमा में बोहरा मोहल्ला स्थित नवनिर्मित बोहरा मस्जिद का शुभारंभ और समाजजन को संबोधित करेंगे। शिया दाऊदी बोहरा समाज के प्रवक्ता जौहर मानपुरवाला ने बताया कि डॉ. सैयदना बेटमा से कुक्षी जाएंगे।

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जिसने भी देखा दिल दहल गया…..

शहर लगातार हादसों का दंश झेल रहा है। अभी कुछ दिनों पहले बावड़ी हादसे ने सभी को रुला दिया था। वहीं, अब क्रेन हादसा एक बार फिर शहर को दर्द दे गया। एक माह बाद ही यह दूसरा बड़ा हादसा है, जिसमें तीन मासूम सहित चार लोगों की जान चली गई है। बाणगंगा थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम बेकाबू क्रेन यमदूत बनकर दौड़ी। बाणगंगा ब्रिज से उतरते समय पहले आॅटो रिक्शा को टक्कर मारी, फिर दो बाइक सवारों को रौंद डाला। इसमें तीन मासूम समेत चार लोगों की मौत हो गई। एक महिला घायल है। क्रेन इसके बाद  एक बस के पिछले हिस्से से टकराई। बस नहीं होती तो और भी वाहन चालक चपेट में आ जाते। हादसे से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सड़क पर पड़े क्षत-विक्षत शवों को देख राहगीर सिहर उठे। लोगों ने उन पर तत्काल कपड़े डाले और पुलिस को सूचना दी। क्रेन ड्राइवर को लोगों ने मौके पर ही दबोच लिया।  घटना के बाद उज्जैन, लवकुश चौराहा से शहर में आने वाला ट्रैफिक ठप हो गया। कई किमी लंबा जाम लग गया। पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हुई है।
पुलिस के मुताबिक, मंगलवार शाम करीब 6.15 बजे बाणगंगा ब्रिज से मरीमाता की ओर जा रही क्रेन (एचआर-38 बी 2002) ने कई वाहनों को टक्कर मार दी। मौके पर पहुंचे डीसीपी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया, एसीपी धैर्यशील येवले, टीआइ राजेंद्र सोनी टीम के साथ व्यवस्था संभालने में जुटे। ताबड़तोड़ सड़क से क्षत-विक्षत शवों को उठाया गया। घायल महिला को अरबिंदो अस्पताल भेजा गया। जानकारी के मुताबिक, हादसे में शारदा (40) पति दिनेश निवासी कावेरी नगर, एरोड्रम के दोनों पैर में गंभीर चोट आई है। शारदा के बेटे रितेश व शरद (6) की मौत हो गई। उनकी बहन के बेटे राज (13) ने भी मौके पर दम तोड़ दिया। सभी एक बाइक पर सवार थे। संभवत: बाइक रितेश चला रहा था। एक अन्य बाइक सवार सुनील परमार (45) निवासी सुदामा नगर वे फार्मा कंपनी से घर जाते वक्त वे क्रेन की चपेट में आ गए। उनकी भी मौके पर जान चली गई।

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