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विश्व रेडक्रॉस दिवस : उत्साह के साथ निकाली वाहन रैली…..

विश्व रेडक्रॉस दिवस के मौके पर दिव्यांगों द्वारा उत्साह के साथ वाहन रैली निकाली गई। दिव्यांगजन उन दो पहिया रेट्रोफिटिंग वाहनों को लेकर कलेक्टोरेट पहुंचे, जिसे जिला प्रशासन द्वारा रेडक्रॉस की राशि से उपलब्ध कराया।
जिले मे सोमवार को विश्व रेडक्रॉस दिवस मनाया गया। इस मौके पर विभिन्न कार्यक्रम किए गए। कार्यक्रम के तहत दिव्यांगजन द्वारा वाहन रैली भी निकाली गई। कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी के विशेष प्रयासों से दिव्यांगजन को सशक्त बनाने और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए रेडक्रॉस की राशि से रेट्रोफिटिंग दो पहिया वाहन दिए जा रहे हैं। जिले में अभी तक सौ दिव्यांगजन को रेट्रोफिटिंग दो पहिया वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। इन्हीं में से लाभान्वित दिव्यांगों ने विश्व रेडक्रॉस दिवस पर कलेक्टोरेट पहुंचकर रैली निकाली। इस रैली को कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर अपर कलेक्टर अभय बेड़ेकर, सामाजिक न्याय विभाग की संयुक्त संचालक सुचिता बेक तिर्की आदि उपस्थित थे। इस मौके पर पांच और नए दिव्यांगों को रेट्रोफिटिंग दो पहिया वाहन उपलब्ध कराया गया। इनमें इद्रिश नगर मूसाखेड़ी निवासी राखी जाटव, भूरी टेकरी निवासी भूरेलाल देवले, सुखदेव नगर निवासी सुशील शर्मा, खातीपुरा निवासी राजेश मालाकार तथा खंडवा रोड निवासी कविता चौहान शामिल हैं।

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‘आनंद’ से जुड़ आनंदित हैं मूक-बधिर… संवार रे अपना भविष्य

इंदौर। 25 वर्षों में मूक-बधिर बच्चों को उनका हक और उनकी देखरेख को लेकर शासन-प्रशासन की मदद से काम किया जा रहा है और इसी के तहत अब मूक-बधिर युवाओं को अच्छी शिक्षा के साथ ही आर्थिक रूप से मजबूत करने और समाज में अपना स्थान स्थापित करने में मदद की जा रही है… और ये काम कर रहा है आनंद मूक-बधिर संस्थान, जहां बच्चे अब दु:खी नहीं, आनंदित हो… अपना भविष्य संवार रहे हैं।
संस्थान संचालक ज्ञानेंद्र पुरोहित का कहना है- मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में स्थित यह संस्थान द्वारा प्रदेश के 1000 से अधिक बच्चों को कम्प्यूटर डी एग्जाम की तैयारी आॅन लाइन और आॅफ लाइन तरीके से कराई जा रही है, ताकि मूक-बधिर और अशक्त युवा आर्थिक रूप से मजबूत बनकर समाज में अपना स्थान स्थापित कर सकें।
पुरोहित ने कहा- प्रदेश में सरकार द्वारा आसक्त और मूक-बधिर बच्चों और युवाओं के लिए कई तरह की योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन आनंद मूक-बधिर संस्थान द्वारा कई ऐसे कार्य किए गए हैं, जो कि एक मिसाल बनकर समाज के बीच में पेश हुए हैं… और इसी के तहत यह संस्थान मूक-बधिर बच्चों के लिए लगातार काम करत्े आ रहा है। 25 वर्षों में इस क्षेत्र में यह संस्थान लगा हुआ है।
समस्या पर मिलती हैै मदद
पुरोहित ने कहा- प्रदेश स्तर पर आॅन लाइन और आॅफ लाइन कॉम्पीटिटिव एग्जाम के लिए क्लास का संचालन प्रतिदिन किया जा रहा है, जिसमें 1000 से अधिक बच्चे सम्मिलित होते हैं और उन्हें विभिन्न विषयों का ज्ञान देने के साथ ही यदि उन्हें कम्प्यूटर की एग्जाम में किसी तरह की कोई समस्या आती है तो उन्हें मदद की जाती है। इन मूक-बधिर बच्चों के लिए राज्य से लेकर केंद्र सरकार तक 10% का आरक्षण प्राप्त है और उसी आरक्षण के तहत इन्हें कॉम्पीटिटिव एक्जाम में फॉर्म भरवाए जाते हैं। फिलहाल कई बच्चे ऐसे हैं, जो कि तैयारी कर रहे हैं।

‘खास’ के लिए आगे
आए दंपति
संस्थान द्वारा 25 वर्षों से लगातार मूक-बधिरों के लिए काम किया जा रहा है। दोनों ही दंपति (पति-पत्नी) साथ में मिलकर इस संस्था को संचालित कर रहे हैं। इन बच्चों को बैंक, पटवारी सहित एमपीपीएससी और यूपीपीएससी की भी एग्जाम दिलवाई जा रही है। साइन लैंग्वेज में पढ़ाई कराई जा रही है। 6 का आरक्षण मध्यप्रदेश, 4 का आरक्षण भारत सरकार से इन बच्चों को मिलता है। देखा जाए तो नॉर्मल बच्चों के लिए काफी सारी कोचिंग संचालित होती हैं, लेकिन ‘खास’ के लिए नहीं… और इसी कारण से इस संस्था द्वारा यह कोचिंग संचालित की जा रही है। बुलबुल पांजरे नामक युवती आज नर्स की नौकरी कर रही हैं। हम चाहते हैं कि वह भी एक सरकारी नौकरी में आए और इसीलिए उसे भी इस कोचिंग से जोड़ा गया है। आने वाले समय में यह बच्चे प्रदेश सहित देश की विभिन्न संस्थाओं में अच्छे पदों पर नौकरी करेंगे और अपना जीवनयापन आगे बढ़ाते हुए समाज की मुख्यधारा से जोड़ना ही केवल एकमात्र इस संस्था का उद्देश्य है।

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कूनो नेशनल पार्क में तीसरे चीते की मौत, आपसी लड़ाई में धीरा ने तोड़ा दम ….

दक्षिण अफ्रीका से आए चीता धीरा का कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अंदर एक अन्य चीता से लड़ाई हो गई थी जिसमें उसकी जान चली गई. दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से लाए गए ये तीसरे चीते की मौत है. ..

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में विदेश से लाए गए एक और चीते की मौत हो गई है. मादा चीता धीरा ने दम तोड़ दिया. हालांकि उसकी मौत का कारण बीमारी नहीं बल्कि एक अन्य चीते से लड़ाई है…..

दक्षिण अफ्रीका से आए चीता धीरा का कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अंदर एक अन्य चीता से लड़ाई हो गई थी जिसमें उसकी जान चली गई. दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से लाए गए ये तीसरे चीते की मौत है.

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सही पाए गए थे 2 करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोप, 10 महीने बाद भी कार्रवाई नहीं…..

राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के कुलपति डॉ. सुनील कुमार और रजिस्ट्रार डॉ. आरएस राजपूत पर 10 माह पहले दो करोड़ रुपए से ज्यादा की आर्थिक अनियमितताओं के आरोपों की जांच हुई थी। रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि के बावजूद राज्य शासन स्तर से दोनों के संबंध में अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है।
शिकायत में वीसी और रजिस्ट्रार पर आरोप लगे कि इंटीग्रेटेड यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट सिस्टम, हॉस्टलर्स की भोजन व्यवस्था, कम्प्यूटर खरीदी, आॅनलाइन परीक्षा, लाइब्रेरी की फर्नीचर खरीदी, स्मार्ट क्लास रूम बनाने आदि को लेकर आर्थिक अनियमितता की गई हैं। आरोपों की जांच तकनीकी शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक डॉ. मोहन सेन, डॉ. पीके झींगे और जितेंद्र सिंह ने की। जून 2022 में आई रिपोर्ट में अलग-अलग मामले में लिखा कि नियमों का पालन नहीं हुआ। पारदर्शिता नहीं अपनाई गई। विभाग के एसीएस मनु श्रीवास्तव का कहना है कि इस बारे में जानकारी लेकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
जिस दिन की एंट्री है, सामान
वहां पहुंचा ही नहीं
डेस्कटॉप खरीदी के लिए जेम पोर्टल से 60 कम्प्यूटर खरीदी का निर्णय कार्यपरिषद में लिया गया। इसके आधार पर 55 कम्प्यूटर 83 हजार 350 रुपए प्रति नग की दर पर दो अलग-अलग आॅर्डर जारी हुए। रजिस्टर में जिस दिन की एंट्री है, उस दिन ये सामान वहां पहुंचा ही नहीं था। जांच कमेटी ने लिखा कि यह स्थिति वित्तीय नियमों के अनुरूप प्रतीत नहीं होती है।

आईयूएमएस में गड़बड़ी
अंतर विवि महासंघ का गठन न होने के बाद भी इंटीग्रेटेड यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट सिस्टम (आईयूएमएस) से कार्य कराने का आरोप लगा। जांच कमेटी ने लिखा कि रिकॉर्ड में दिसंबर 2019 को हुई समन्वय समिति की बैठक में यह कार्य आरजीपीवी को सौंपे जाने का उल्लेख नहीं है। बैठक की कार्यवाही का विवरण भी नहीं है। प्रति कार्य दिवस 5 हजार की दर पर आईटी कंसल्टेंट को रखने में पारदर्शिता नहीं दिखी।

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105 करोड़ का घोटाला….असम से फरार हुई आईएएस सेवाली शर्मा अजमेर में गिरफ्तार……

करोड़ों के घोटाले से जुड़े एक केस में आज अजमेर कोतवाली थाना पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी। पुलिस ने सोमवार को अजमेर से असम की निलंबित आईएएस अधिकारी सेवाली देवी शर्मा और उनके सहयोगियों को अरेस्ट किया। ये पूरा आॅपरेशन असम पुलिस के साथ मिलकर किया गया। निलंबित आईएएस अधिकारी सेवाली देवी शर्मा असम में हुए 105 करोड़ रुपए के स्टेट काउंसिल आॅफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग घोटाले की आरोपी है। साथ ही वो लंबे समय से असम से फरार थी। लेकिन 8 मई को वो राजस्थान से पकड़ी गई। यहां पुलिस ने निलंबित आईएएस सेवाली देवी शर्मा और उनके दामाद सहित तीन को गिरफ्तार किया गया है।
असम पुलिस टीम ने कोतवाली थाना पुलिस के साथ मिलकर होटल क्रॉस लेन में छापा मारा था। यहां से ही तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। मिली जानकारी के अनुसार अब असम की विजिलेंस पुलिस न्यायालय से ट्रांजिट वारंट लेकर के आरोपियों को असम लेकर रवाना होगी। बताया जा रहा है कि आईएएस सेवाली देवी शर्मा ने असम में एससीईआरटी के डायरेक्टर पद पर रहते हुए यहां घोटाला किया था। आईएएस शर्मा पर 105 करोड़ रुपए की राशि के ठेके बिना वर्क आॅर्डर के अपने दामाद ठेकेदार अजीत पाल सिंह और ससुराल पक्ष के लोगों को देने का आरोप है। इसके चलते सेवाली देवी शर्मा को पूर्व में निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद से सेवाली देवी शर्मा और उनके दामाद अजीत पाल सिंह व अन्य फरार चल रहे थे। जबकि इस मामले में कांग्रेस के नेता राजेश जोशी सहित 5 लोगों को पुलिस ने पहले गिरफ्तार भी कर लिया गया है। बता दे सेवाली देवी शर्मा 1992 कैडर की अधिकारी है। उनका रिक्रूटमेंट एससीएस-2010 के तहत हुआ है।

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