Hindustanmailnews

Author name: Hindustanmailnews

SC Guidelines on Bulldozer Action:सरकारें जज नहीं बन सकतीं’ प्वाइंट में समझें बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन

सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारें न्यायाधीश नहीं बन सकतीं। किसी भी कानून व्यवस्था के तहत कार्रवाई करने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

बुलडोजर कार्रवाई पर रोक: कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अवैध निर्माणों को तोड़ने की कार्रवाई राज्य सरकारों द्वारा बिना न्यायिक आदेश के नहीं की जा सकती।

प्राकृतिक न्याय का पालन: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी संपत्ति तोड़े जाने से पहले सुनवाई का अधिकार मिलना चाहिए। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है, अगर बिना सुनवाई के कार्रवाई की जाती है।

प्रशासनिक फैसले न्यायिक तरीके से किए जाएं: अदालत ने यह भी कहा कि प्रशासन को अपने फैसले लेने में स्वतंत्रता है, लेकिन उसे न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना होगा।

अवैध निर्माणों पर कार्रवाई: सुप्रीम कोर्ट ने माना कि अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जरूरत है, लेकिन यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए, न कि मनमाने तरीके से।

राज्य सरकारों को दी सलाह: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को यह सलाह दी कि वे अवैध निर्माणों को हटाने के लिए उचित प्रक्रिया अपनाएं और इसे न्यायिक समीक्षा से बचाने के लिए कार्रवाई करें।

दूसरे राज्य की कार्रवाई पर भी ध्यान: कोर्ट ने कहा कि बुलडोजर कार्रवाई से पहले संबंधित व्यक्ति को उचित समय और मौका देना जरूरी है, ताकि वे अपने पक्ष को रख सकें।

सुनवाई का अधिकार: कोर्ट ने यह भी कहा कि जो लोग प्रभावित हो रहे हैं, उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलना चाहिए।

संविधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट ने संविधानिक सिद्धांतों और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने से बचने की आवश्यकता पर बल दिया।

कानूनी प्रक्रिया का पालन: अंत में, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बुलडोजर जैसी कार्रवाइयों में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए और इसे न्यायिक आदेश से ही संचालित किया जाना चाहिए।

SC Guidelines on Bulldozer Action:सरकारें जज नहीं बन सकतीं’ प्वाइंट में समझें बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन Read More »

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब ……शराब की दुकानों और पबों में उम्र जांचने की क्या है व्यवस्था?

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र से उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें शराब की दुकानों और अन्य विक्रय स्थलों पर उम्र की अनिवार्य नियमावली है। कोर्ट ने उम्र की प्रभावी नियमावली और सुदृढ़ नीति बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। याचिका में कहा गया है कि विभिन्न राज्यों की आबकारी नीति में उम्र संबंधी कानून है, जिसके तहत एक निश्चित उम्र से कम उम्र के व्यक्ति के लिए शराब पीना या रखना अवैध है। इसके बावजूद शराब की बिक्री या सेवन के स्थानों पर उपभोक्ताओं या खरीदारों की उम्र की जांच करने के लिए कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है।
घर पर शराब की आपूर्ति का विरोध- याचिका में शराब की घर पर ही आपूर्ति करने की नीति का विरोध किया गया है। साथ ही दलील दी गई कि इससे कम उम्र के लोगों में शराब पीने की लत तेजी से बढ़ेगी। यह याचिका न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई।
देश में शराब पीने की न्यूनतम
उम्र 18 से 25 साल
मालूम हो कि देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शराब पीने की न्यूनतम कानूनी उम्र 18 से 25 साल के बीच तय की गई है। इसके बावजूद कई जगहों पर 18 से कम उम्र के लोग भी शराब पीते हुए दिख जाते हैं।
उम्र जांचने की नहीं है कोई व्यवस्था
गैर सरकारी संगठन (ठॠड) कम्यूनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग ने यह याचिका दाखिल की है। उसके वकील विपिन नायर ने सुनवाई के लिए दलील दी कि शराब की दुकानों, बार, पब आदि में उपभोक्ताओं या खरीदारों की उम्र जांचने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। इसमें कहा गया है कि इस संबंध में एक ठोस नीति से शराब पीकर गाड़ी चलाने की समस्या को कम करने और रोकने में मदद मिलेगी तथा कम उम्र में शराब पीने पर भी अंकुश लगेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब ……शराब की दुकानों और पबों में उम्र जांचने की क्या है व्यवस्था? Read More »

केंद्र सरकार की नौेकरी के लिए 2.57 करोड़ से ज्यादा आवेदन, 1.41 लाख की भर्ती की गई

नौकरी एक ऐसा मुद्दा है, जो शायद कभी खत्म नहीं होगा। इसमें भी सरकारी नौकरी। अब केंद्र सरकार की नौकरियों पर एक रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि 2023-24 में केंद्र सरकार की नौकरियों के लिए ढाई करोड़ से ज्यादा आवेदन आए थे। इनमें से डेढ़ लाख लोगों को भी नौकरी नहीं मिली।
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट में बताया गया है कि 2023-24 में केंद्र सरकार की नौकरियों में भर्ती के लिए होने वाले एग्जाम में 2.57 करोड़ से ज्यादा उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था। इन उम्मीदवारों में से 1.41 लाख की भर्ती की गई थी। ये भर्तियां ग्रुप-बी और सी में हुई थीं।
सबसे ज्यादा 46,554 भर्तियां उअढऋ में कॉन्स्टेबल, असम राइफल में राइफलमैन और एनसीबी में सिपाही पद पर हुई थीं।
आंकड़ों से पता चलता है कि 2023-24 में 2022-23 की तुलना में लगभग दोगुना भर्तियां हुई हैं। 2022-23 में 73,721 भर्तियां हुई थीं। इससे पहले 2021-22 में 29,173 भर्तियां ही हुई थीं।
एसएससी और यूपीएससी
की 32 परीक्षाएं
केंद्र सरकार के पदों पर भर्तियां करने वाली दो बड़ी एजेंसियां- स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (एसएससी) और यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) हैं।
एसएससी की सालाना रिपोर्ट बताती है कि 2022-23 में कमीशन ने देशभर में 32 परीक्षाएं करवाई थीं, लेकिन तब तक 14 परीक्षाओं का ही फाइनल रिजल्ट आया था। इन परीक्षाओं में 1.32 करोड़ से ज्यादा उम्मीदवार शामिल हुए थे। इन परीक्षाओं के जरिए केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के 1,276 पदों पर 72,445 उम्मीदवारों को भर्ती किया गया था। इन उम्मीदवारों में 44,400 से ज्यादा एससी, एसटी और ओबीसी से थे।
इसी तरह से यूपीएससी ने 2022-23 में 15 एग्जाम करवाए थे। इनके लिए साढ़े 33 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने आवेदन दिया था। इन परीक्षाओं में चुने गए लगभग 28 हजार उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया गया था। इंटरव्यू के बाद 4,195 उम्मीदवारों को भर्ती किया गया था। इनमें से 2,721 उम्मीदवारों को सिविल सर्विस और 1,474 को डिफेंस सर्विस के लिए भर्ती किया गया गया था।
यूपीए बनाम एनडीए: भर्तियों
में कौन आगे?
पिछले साल जून में केंद्र सरकार ने भर्तियों की जानकारी संसद में दी थी। इसमें बताया गया था कि मोदी सरकार में 2014 से 2023 के बीच 8,82,189 भर्तियां की गई हैं। ये भर्तियां एसएसी, यूपीएससी और आरआरबी के जरिए हुई थीं। जबकि, 2004 से 2014 के बीच यूपीए सरकार में 6,02,045 भर्तियां हुई थीं। मोदी सरकार में यूपीएससी के जरिए 50,906 भर्तियां हुई थीं। जबकि, एसएससी के जरिए 4,00,691 उम्मीदवारों को भर्ती किया गया था। वहीं, आरआरबी के जरिए 4,30,592 पदों पर भर्तियां हुई थीं।

केंद्र सरकार की नौेकरी के लिए 2.57 करोड़ से ज्यादा आवेदन, 1.41 लाख की भर्ती की गई Read More »

आईसीसी टूर्नामेंट से नाम वापस ले सकती है पाकिस्तान टीम

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने रविवार को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ढउइ) को लेटर लिखकर बता दिया की टीम इंडिया अगले साल मार्च में प्रस्तावित चैंपियंस ट्रॉफी में हिस्सा लेने पाकिस्तान नहीं जाएगी। आईसीसी ने
ई-मेल पाकिस्तान सरकार को भी फॉरवर्ड कर दिया है और अब इस मुद्दे पर सरकार कड़ा फैसला ले सकती है।
पाकिस्तान के अग्रणी अखबर डॉन के अनुसार, पाकिस्तान खुद को चैंपियंस ट्रॉफी से अलग कर सकता है। पीसीबी प्रमुख मोहसिन नकवी ने पहले से ही इनकार कर दिया है कि वह टूर्नामेंट के हाइब्रिड मॉडल नहीं अपनाएगा। और अब रिपोर्ट यह दावा करती है कि पाकिस्तान सरकार अपनी टीम के इस प्रतियोगिता से नाम वापस लेने पर भी विचार कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में एक विकल्प यह है कि सरकार इस बात पर विचार कर रही है पीसीबी यह सुनिश्चत करे कि पाकिस्तान टीम चैंपियंस ट्रॉफी में भाग न ले।
डॉन के अनुसार,आईसीसी ने पीसीबी को आश्वस्त किया है कि अगर पीसीबी टूर्नामेंट के लिए हाइब्रिड मॉडल को अपनाता है, तो उसे मेजबानी की पूरी फीस और ज्यादातर मैचों की मेजबानी मिलेगी। वहीं,सूत्र के अनुसार अगर पाकिस्तान टूनार्मेंट के आयोजन से इनकार करता है, तो आईसीसी पूरे टूर्नामेंट की मेजबानी दक्षिण अफ्रीका को दे सकती है। वैसे पाकिस्तान मीडिया में यह भी चर्चा चल रही है कि उसकी सरकार ने आईसीसी और एसीसी टूर्नामेंटों में भारत के खिलाफ न खेलने की भी सलाह दी है। साथ ही, पीसीबी आईसीसी और बीसीसीआई के खिलाफ खेल पंचाट में भी जा सकता है।

आईसीसी टूर्नामेंट से नाम वापस ले सकती है पाकिस्तान टीम Read More »

डबल डेकर का ट्रायल सफल संशय… एक आएगी या चार

हिन्दुस्तान मेल, इंदौर
इंदौर में चलने वाली डबल-डेकर बस का रास्ता तो साफ हो गया है। शहर की सड़कों पर बस का सफल ट्रायल रन हो गया है। अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (एआईसीटीएसएल) द्वारा शहर के मेजर रूट पर बस का ट्रायल रन किया गया, जो पूरी तरह से सफल रहा है। अब इसी माह में कंपनी बस खरीदी को लेकर टेंडर जारी करेगी। यह तो तय हो गया कि शहर में डबल डेकर बस चलेगी लेकिन बस की संख्या पर संशय बरकरार है। एआईसीटीएसएल के अधिकारियों का कहना है कि एक बस तो शहर में चलाई जाएगी। जो पर्यटन के इस्तेमाल में होगी। वहीं महापौर पुष्यमित्र भार्गव का कहना है कि शहर में शुरूआती दौर में चार डबल डेकर बस का संचालन किया जाएगा। वहीं निगम सूत्रों का कहना है कि शहर में कितनी डबल डेकर बसें संचालित होंगी। इसका निर्णय बोर्ड बैठक में लिया जाएगा।
नए साल में मिलेगी सौगात
एआईसीटीएसएल के अधिकारी ने बताया कि नवंबर में बस की खरीदी के लिए टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बसें किन रूट पर कैसे संचालित होंगी इसकी रूप रेखा भी तैयार की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि नए साल में शहर को नई सौगात मिल सकती है। बस की लागत करीब दो करोड़ रुपए है। डबल डेकर बस सेवा शुरू होने से शहर में ट्रैफिक की स्थिति सुधरेगी और लोगों को भारी जाम से राहत भी मिलेगी।

एआईसीटीएसएल अधिकारी ने बताया कि बस के ट्रायल में दो मेजर परेशानियां सामने आईं। पहली यह कि सड़क को क्रॉस करते हुए टेलीकॉम और वाईफाई की केबल गुजर रही थी और दूसरी यह कि सड़क किनारे पेड़ों की टहनियां आड़े आ रही थीं। वहीं कुछ हिस्सों में जहां टहनियां थी वहां वैकल्पिक रूप से बस को थोड़ा रॉन्ग साइड चलाया गया था, लेकिन बाद में टहनियों को छांट कर रूट क्लियर कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि जिस रूट पर भी अगले दिन ट्रायल रन होता था, हम नगर निगम को जानकारी दे देते थे। ट्रायल रन के पहले ही निगम की टीम केबल और टहनियां को हटा देती थी। इसके अलावा कहीं भी टर्न, क्रासिंग आदि को लेकर दिक्कत नहीं आई है।

डबल डेकर का ट्रायल सफल संशय… एक आएगी या चार Read More »

Scroll to Top
Verified by MonsterInsights