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अब विधानसभा लड़ने का भी सपना

चुनाव जीतने में जुटी भाजपा के कार्यकर्ताओं को जाने क्यों लग रहा है कि उनकी उपयोगिता सम्मेलनों में भीड़ बढ़ाने और ज्ञान बांटने वाले भाईसाबों के बौद्धिक सुनने जितनी ही रह गई है। सम्मेलन चाहे भोपाल में हो, या किसी खास अवसर पर पीएम का या गृहमंत्री का आगमन हो, हर बार मंच पर खास चेहरों के लिए ही कुर्सियां आरक्षित रहती हैं। सम्मेलनों में जीत का मंत्र देने आए सारे नेता अपनी बात कह कर कार्यकर्ताओं में जान फूंकने के बाद टाटा-बाय बाय करते हुए अगले सम्मेलन के लिए रवाना हो जाते हैं।
भाजपा के हर बड़े नेता ने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए दावेदारी के घुंघरू बांध लिए हैं। वजह यह कि नेता आश्वस्त हैं कि फिर से सरकार बन रही है। भले ही मध्य प्रदेश में चुनाव की कमान अमित शाह के हाथों में हो, लेकिन उनके जिन विश्वस्तों नरेंद्र सिंह तोमर, भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव द्वारा रणनीति को अंजाम दिया जा रहा है, तो इन्हीं से अपनी निकटता के चलते दावेदारों को टिकट की मंजिल आसान लग रही है। गुजरात की तर्ज पर भले ही अमित शाह ने मप्र में नए चेहरों को उतारने के संकेत दे दिए हैं, ऐसे में इंदौर में पुरानों में से कितनों को टिकट मिलेगा तय नहीं है। अभी जो पार्टी पदाधिकारी या लाभ के अन्य पदों पर हैं, उन्हें चुनाव लड़ने का भी मौका मिल ही जाएगा, यह इन तमाम दावेदारों को भी आभास नहीं है, किंतु जिस तरह से ये सब वरिष्ठ नेताओं से निकटता के कारण यकायक सक्रिय हुए हैं, तो पार्टी के आम कार्यकर्ताओं को एक बार फिर लगने लगा है कि उनकी उपयोगिता पार्टी में नेताओं की सभा में भीड़ बढ़ाने या भंडारे में साग-पूरी परोसने से अधिक नहीं है।
जिन कई नेताओं को पार्टी पहले ही विभिन्न पदों पर स्थापित कर चुकी है, उन सभी को लग रहा है विधानसभा चुनाव में उनसे उपयुक्त कोई और नहीं। महापौर, सांसद, नगर अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, निगम अध्यक्ष, प्राधिकरण अध्यक्ष, युवा आयोग अध्यक्ष सभी ने चुनाव लड़ने के घुंघरू बांध लिए हैं। विकास प्राधिकरण अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा भी आशान्वित हैं कि देपालपुर से टिकट मिलेगा और जीत भी जाएंगे। गोलू शुक्ला को इंदौर विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष का दायित्व देकर मुख्यमंत्री ने एक नंबर से उनकी दावेदारी पर विराम लगा दिया हो, किंतु गोलू को लग रहा है कि उपाध्यक्ष के साथ इस सीट से चुनाव क्यों नहीं लड़ सकते।
इंदौर महापौर की दौड़ में पराजित होने पर हताश डॉ. निशांत खरे को सीएम युवा आयोग अध्यक्ष बना कर प्रोत्साहित कर चुके हैं। आदिवासी क्षेत्र में सक्रिय डॉ. खरे को भी जाने कब से लग रहा है कि उनकी योग्यता का बेहतर उपयोग विधायक के रूप में हो सकता है। वे भी राऊ, महू या अन्य किसी भी सामान्य क्षेत्र से जीतने का विश्वास रख रहे हैं। भाजपा नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे के समर्थकों को जाने क्यों लग रहा है, जैसे (स्व) उमेश शर्मा की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए अचानक उन्हें अध्यक्ष पद मिल गया था, वैसे ही पांच नंबर से टिकट भी मिल जाएगा। मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम का अध्यक्ष बना कर सावन सोनकर को भले ही उपकृत कर दिया हो, लेकिन ग्रामीण जिला अध्यक्ष डॉ. राजेश सोनकर की ही तरह उनकी भी इच्छा इस बार सांवेर से चुनाव लड़ने की है।
पार्टी ने इंदौर में भी विधायक मालिनी गौड़ को महापौर का चुनाव लड़वाया था, इसलिए अब महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी चार नंबर से विधायक का चुनाव लड़ने का सपना देख रहे हैं, तो गलत क्या है। अपने ‘एक साल बेमिसाल’ कार्यकाल को लेकर मीडिया से चर्चा में वो विधायक टिकट की दावेदारी जैसे प्रश्नों को तो टाल गए, लेकिन मजबूती से यह दावा जरूर किया कि मप्र में फिर से भाजपा की ही सरकार बनेगी। उनके अपने तर्क भी थे कि इस बार शासकीय कर्मचारियों, अधिकारियों में नाराजी नहीं है। सरकार ने लाड़ली बहनों के खातों में हर माह जो राशि डालना शुरू की है तो बड़े पैमाने पर यह वोटर भाजपा के साथ हो गया है। पिछले चुनाव में किसानों की नाराजी के चाहे जो कारण रहे हों, लेकिन केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं के साथ किसानों के हित में राज्य सरकार ने जितने निर्णय लिए हैं, उनसे किसानों का पार्टी के प्रति विश्वास और मजबूत हो गया है।
सांसद लालवानी क्यों चार नंबर से विधायक का चुनाव लड़ना चाहते हैं, इसका ठोस कारण तो उनके खास लोग भी नहीं बता सकते, लेकिन तय माना जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव में पार्टी इंदौर से किसी अन्य को मौका देगी, ऐसी स्थिति का सामना करना पड़े, इससे पहले वे चार नंबर से विधायक का चुनाव लड़ने का मायाजाल बुन रहे हैं। इस क्षेत्र में सिंधी वोटर्स की अधिकता और वर्तमान विधायक परिवार और महापौर के बीच चलने वाली स्पर्धा में उन्हें निर्णय अपने पक्ष में होने की उम्मीद बनी हुई है। इस बार मालिनी गौड़ को टिकट नहीं मिला तो किसी अन्य को भी नहीं मिले, इसलिए गौड़ परिवार एकलव्य का नाम आगे बढ़ा रहा है लेकिन उनके विरुद्ध जिस तरह प्रकरण होते जा रहे हैं वह बाधा बन सकते हैं।

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एशियन चैंपियंस ट्रॉफी : फाइनल के लिए जापान को हराना जरूरी

भारतीय मेंस हॉकी टीम आज यानी शुक्रवार को जापान के खिलाफ एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2023 का सेमीफाइनल मुकाबला खेलेगी। यह मुकाबला चेन्नई के मेयर राधाकृष्णन स्टेडियम में रात 8:30 बजे से होगा। भारतीय टीम इसे जीतकर 5वीं बार ट्रॉफी के फाइनल में प्रवेश करना चाहेगी। पिछले 4 मौकों में से भारत ने 3 खिताब जीते हैं। टीम ने पिछला खिताब 2016 में जीता था। टीम 2018 में पाकिस्तान के साथ संयुक्त विजेता भी रही थी।
6 टीमों के ग्रुप में टॉप पर रहा भारत
भारत और जापान ने अपने ग्रुप के आखिरी मुकाबले जीते। भारत ने पाकिस्तान को 4-0 से हराकर टेबल टॉप पर फिनिश किया, जबकि जापान ने चीन को 2-1 से हराकर चौथे स्थान की टीम के रूप में सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की की। भारत-जापान पहले भी टूर्नामेंट में भिड़ चुके हैं। दोनों ने 1-1 से ड्रॉ खेला था। भारत अब तक टूर्नामेंट में अजेय है। जापान और भारत हॉकी के इतिहास में 35वीं बार आमने-सामने होंगे। पिछले 34 मुकाबलों में भारत ने जापान को 27 बार हराया। जापान को 3 जीत ही मिली जबकि 4 मैच ड्रॉ रहे हैं।
हरमनप्रीत सिंह टॉप स्कोरर
टेबल-टॉपर भारत राउंड-रॉबिन ग्रुप स्टेज में अजेय रहा। टीम ने 4 मैच जीते और एक ड्रॉ रहा। एकमात्र ड्रॉ जापान के खिलाफ आया। जापान चौथे स्थान पर रहा। जापानी टीम ने एक मैच जीता, दो ड्रॉ खेले और 2 हारे भी। भारत के कप्तान हरमनप्रीत सिंह शानदार फॉर्म में हैं। पांच मैच में कुल 7 गोल कर वह टूर्नामेंट के टॉप गोल स्कोरर हैं। सेमीफाइनल मुकाबले में भारत को फील्ड गोल भी करने होंगे। अब तक भारतीय टीम ने अपनी विपक्षी टीम पर 20 गोल दागे हैं। इनमें से 14 गोल पेनल्टी कॉर्नर के सहारे आए हैं, शेष 6 मैदानी गोल हुए हैं। भले ही ड्रैग फ्लिकिंग टीम इंडिया का मजबूत पक्ष हैं, लेकिन हरमनप्रीत की टीम को फील्ड गोल भी करने होंगे। इसके अलावा, टीम को डिफेंड पर भी काम करना होगा, क्योंकि एशिया की अन्य टीमों ने भारतीय टीम के गोल पोस्ट पर 5 गोल दागे हैं।

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सिस्टम का भयंकर क्रेज! एल्विश यादव के लाखों फैंस ने दिल्ली में किया ट्रैफिक जाम

बिग बॉस ओटीटी-2 के एल्विश यादव के फैंस जोर-शोर से घर के बाहर से उनका सपोर्ट कर रहे हैं। एल्विश को लेकर फैंस में बहुत एक्साइटमेंट हैं। वो बस उन्हें ही विनर बनाना चाहते हैं… और ये बात हर दिन ट्विटर पर दिखाई देती है। एल्विश को लेकर जिस तरह का प्यार उनके फैंस में है, वो बहुत ज्यादा है और अब ऐसी ही एक तस्वीर आई है, जो आप सबको दिखाएगी कि आखिर किस हद तक एल्विश के फैंस उनका सपोर्ट करने के लिए जा सकते हैं।
फैंस ने एल्विश यादव के सपोर्ट में सड़कों पर आकर दिल्ली में ट्रैफिक जाम कर दिया। लोगों ने दिल्ली में एल्विश के लिए कार रैली निकालने का फैसला किया था। मैदान पर जुटी भीड़ में 1 लाख से ज्यादा लोग थे। सड़कों पर लोग अपनी कारों और बाइक के साथ भारी भीड़ में थे। वीडियो में हम देख सकते हैं कि कैसे भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को सड़कों और जमीन पर आना पड़ा, क्योंकि हर तरफ से लोग इकट्ठा हो रहे थे।
एक यूजर ने कहा- पागल भीड़ को संभालने के लिए पुलिस को नियंत्रण अपने हाथ में लेने की जरूरत है, जिससे आसपास बड़ा ट्रैफिक जाम भी होता है। अंत में, टीम को कार्यक्रम रद्द करना पड़ता है। यह दूसरी बार है, जब हाल के दिनों में बिग बॉस कंटेस्टेंट के लिए बड़े पैमाने पर फैंस देखने को मिले। इससे पहले एमसी स्टेन और शिव ठाकरे के फैंस अपने फेवरेट्स के समर्थन में सामने आए थे। बिग बॉस-16 में शिव ठाकरे के लिए उनके सपोर्ट में अमरावती में बड़े पैमाने पर सड़क रैलियां हुईं।
हाल ही में, राजीव अदातिया ने भी अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एल्विश यादव के फैनबेस के बारे में बात की थी। उन्होंने अपनी इंस्टा स्टोरी शेयर करते हुए कहा- एल्विश के सिस्टम ने एक बड़ा असर छोड़ा है। मैं बीबी फिनाले पर भी बाहर नहीं जाऊंगा। एल्विश के फैंस भारी संख्या में बाहर आएंगे और मुंबई में ट्रैफिक जाम बढ़ जाएगा। घर के अंदर भी एल्विश का वर्ड ‘सिस्टम’ वायरल हो गया है और फैंस एल्विश के लिए वोट की अपील बढ़-चढ़कर कर रहे हैं।

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‘इंदौर हमें जी जान से प्यारा है… सर्वश्रेष्ठ मास्टर प्लान बने यह संकल्प हमारा है’

हिन्दुस्तान मेल, इंदौर
इंदौर हमें जी जान से प्यारा है और देश का सर्वश्रेष्ठ मास्टर प्लान बने यह संकल्प हमारा है… हम यह भी संकल्प लेते हैं कि सर्वश्रेष्ठ मास्टर प्लान से कम हम कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे। यह संकल्प इंदौर उत्थान अभियान द्वारा आयोजित राजवाड़ा स्थित माता देवी अहिल्या की प्रतिमा के समक्ष समाजसेवियों और प्रबुद्धजन ने लिया।
इतनी शक्ति हमें देना दाता मन का विश्वास कमजोर ना हो… गीत से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। तत्पश्चात आज से 125 वर्ष पूर्व होलकर राज्य के तत्कालीन महाराजा तुकोजी राव तृतीय, तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री सर सिरेमल बाफना तथा विश्व के जाने-माने प्लानिंग विशेषज्ञ पैट्रिक गिडीज के प्रति कृतज्ञता प्रकट की गई, जिनके वृहद दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप आज इतने वर्षों पश्चात भी आबादी की दृष्टि के हिसाब से इंदौर देश का सबसे बेहतरीन शहर है।
इस अवसर पर मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा- मैं इस पवित्र अभियान से प्रारम्भ से ही जुड़ा हुआ हूं और आश्वस्त करता हूं कि इंदौर का सर्वश्रेष्ठ मास्टर प्लान बने। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मार्च-2023 को देश के जाने-माने अर्बन प्लानर्स को संबोधित करते हुए वीडियो भई दिखाया गया, जिसमें प्रधानमंत्री ने कहा था कि सुव्यवस्थित रूप से विकसित शहर ही भविष्य के भारत के भाग्य का निर्धारण करेंगे।
शहर केलिए करना पड़ेगी चिंता – इस अवसर पर इंदौर उत्थान अभियान के अध्यक्ष अजीतसिंह नारंग ने भी आबोहवा और मास्टर प्लान पर अपनी बात रखी। नारंग ने कहा कि हम शासन से बार-बार निवेदन कर रहे हैं कि इंदौर का मास्टर प्लान बनाए जाने के पूर्व संविधान के 74वें संशोधन के अनुसार वृहद दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए इंदौर महानगर का महानगरीय क्षेत्रफल घोषित किया जाए और और उसमें अनुशंसित सभी महानगरीय व्यवस्थाएं कायम की जाएं, ताकि आने वाले कल में जब इंदौर मेगा सिटी के रूप को धारण कर लेगा, तब आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर को जमीन पर मूर्त रूप देने हेतु अरबों-खरबों रुपए की तोड़फोड़ नहीं करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा- इंदौर दम-घोंटू शहर के रूप में कहीं परिवर्तित नहीं हो जाए… यह भी चिंता नहीं करना पड़ेगी। कार्यक्रम का संचालन प्रो. रमेश मंगल द्वारा किया गया। प्रार्थना गीत सुरेश हरियानी ने प्रस्तुत किया। आभार प्रसिद्ध सेवाभावी समाजसेवी श्रीकृष्ण कुमार अष्ठाना ने माना।

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आउटर रिंगरोड पर जल्द होगा फैसला, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर से दो जगह जुड़ेगा इंदौर

इंदौर में नए बायपास पर जल्द ही निर्णय होगा। सांसद शंकर लालवानी ने राजमार्ग परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर इस पर जल्द निर्णय लेने का अनुरोध किया है। साथ ही दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर इंदौर की कनेक्टिविटी दो जगह से होगी। सांसद लालवानी और गडकरी की मुलाकात में इस पर भी विस्तार से चर्चा हुई है।
इंदौर में आउटर रिंगरोड यानी नया बायपास बनाने के लिए एनएचएआई के अधिकारियों ने 140 किलोमीटर के नए मार्ग का प्रस्ताव भेजा है, जिस पर सांसद लालवानी ने नितिन गडकरी से जल्द ही निर्णय लेने का अनुरोध किया है। इस बायपास को अगर मंजूरी मिलती है तो यह देश का दूसरा सबसे बड़ा बायपास होगा।
इसके अलावा इस मुलाकात में एक महत्वपूर्ण बात यह निकलकर आई कि इंदौर को अब दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दो जगह से जोड़ा जाएगा। सांसद लालवानी ने इस विषय में पत्र कुछ वर्ष पूर्व दिया था। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर वाया गरोठ इंदौर को जोड़ने की तैयारी हो चुकी है। साथ ही एक और नया रास्ता बनाया जाएगा जो सीधे गोधरा के पास इंदौर को जोड़ेगा यानी अगर इंदौर से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पकड़कर दिल्ली तक पहुंचना है तो वाया गरोठ जाना होगा और सूरत, वडोदरा होते हुए मुंबई जाने के लिए वाया गोधरा एक नया रास्ता बनाया जाएगा। सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि दो विषयों पर नितिन गडकरी से मुलाकात हुई है और इंदौर के आउटर बायपास पर उन्होंने जल्द फैसला लेने का आश्वासन दिया है। साथ ही, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से गोधरा के पास इंदौर को एक और कनेक्टिविटी मिलेगी।

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