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बड़े नेताओं को संदेश : मुझे आडवानी-जोशी की तरह आउटडेटेड समझने की भूल ना करें…………

आगबबूला क्यों हैं भाजपा की हठयोगिनी?

नक्सली इलाकों में कहां बारुदी सुरंग बिछी है, पांव रखते ही कब, कहां धमाका हो जाए… इसकी जानकारी आसानी से नहीं लग पाती! भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में कुछ ऐसा ही मिजाज पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का माना जाता है। भाजपा में यह दौर जब राग जैजैवंती गाया जा रहा है, तब उमा भारती ने पंचम स्वर में आलाप छेड़ दिया है। भारतीय संस्कृति में तीन हठ का अकसर जिक्र किया जाता है- राजहठ, बालहठ और स्त्री हठ। आज की राजनीति में ये तीनों हठ एक साथ किसी राजनेता में देखना हो तो पहली पायदान पर उमा भारती का ही नाम लिया जा सकता है! राजनीति की इस हठयोगिनी ने पार्टी की उठापटक में इसका खामियाजा भी भुगता है, लेकिन धारा के विपरीत नहीं चले तो फिर साध्वी ही क्या? आज की भाजपा में अमित शाह को चाणक्य कहा जाता है, लेकिन उनके जैसे घाघ नेता भी यह दावा नहीं कर सकते कि उन्होंने साध्वी उमा भारती के मन को पढ़ लिया है!

कहा जाता है कि भाजपा में सुनने की जितनी स्वतंत्रता है, उतनी बोलने की आजादी नहीं, लेकिन उमा भारती ऐसे किसी अनुशासन से सदैव खुद को ऊपर मानती रही हैं। मप्र से दिग्विजयसिंह सरकार की रवानगी का श्रेय यदि उमा भारती के खाते में दर्ज है तो 1994 के हुबली मामले में गैर जमानती वारंट जारी हुए तो भाजपा नेतृत्व ने उन्हें सीएम की कुर्सी छोड़ने के निर्देश दिए थे। राम मंदिर आंदोलन के वक्त से भाजपा में फायरब्रांड नेता कहा जाता है तो इसलिए कि हाईकमान के इस फैसले के खिलाफ आगबबूला उमा भारती दिल्ली स्थित भाजपा कार्यालय में चल रही बैठक में मीडिया के सामने ही लालकृष्ण आडवाणी को खरी-खोटी सुनाकर आ गई थीं। बोलने की इस आजादी का परिणाम भी उन्हें भुगतना पड़ा था। पार्टी ने निष्कासित कर दिया तो खुद ने भारतीय जनशक्ति दल गठित कर अपने समर्थकों को चुनाव भी लड़ाया, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में पार्टी ने उन्हें वापस भाजपा में ले लिया था।
मप्र और यूपी में उनके प्रभाव का ही नतीजा रहा कि यदि यहां वे मुख्यमंत्री बनीं तो यूपी के झांसी से लोकसभा चुनाव जीतकर केंद्रीय मंत्री भी बनीं। यह बात अलग है कि गाय, गंगा, गीता की दुहाई देते रहने वाली उमा भारती केंद्रीय मंत्री रहते नमामी गंगे प्रोजेक्ट में उतना उल्लेखनीय काम करके नहीं दिखा पाईं।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मध्यप्रदेश में भाजपा को पुन: सत्ता में लाने के लिए कमान अपने हाथ में ले रखी है और एक-एक सीट पर सर्वे और अपने जासूसों की रिपोर्ट के आधार पर प्रत्याशी फाइनल कर रहे हैं… ऐसे में उमा भारती ने मुख्यमंत्री के क्षेत्र सीहोर, वीडी शर्मा के जबलपुर के साथ ही अपने प्रभाव वाले बुंदेलखंड क्षेत्र से अपने 19 समर्थक प्रत्याशियों को टिकट देने का बम फोड़ दिया है। इन प्रत्याशियों के नामों की सूची भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को सौंपने के साथ मीडिया में वायरल भी कर दी है। एक तरह से इस लेटर के जरिए उन्होंने उन नेताओं को मैसेज भी दे दिया है, जो उन्हें मप्र की पोलिटिक्स में आउटडेटेड मानने का भ्रम पाल चुके थे! बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को 25 अगस्त को उनके द्वारा लिखे गए इस लेटर में 19 सीटों पर तो टिकट मांगने के साथ ही कहा है कि कुछ और नाम मैं अगली सूची में भेजूंगी। जैसा कि उनका मिजाज रहा है… भाजपा नेतृत्व के दबाव के चलते वह यह बयान भी जारी कर सकती हैं कि उक्त क्षेत्रों से पार्टी जिन्हें भी प्रत्याशी बनाएगी, उनका समर्थन करेंगी। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने जिन 19 सीटों पर टिकट मांगे हैं, उनमें सीहोर विधानसभा से गौरव सन्नी महाजन, सागर देवी से दीवान अर्जुन सिंह, छतरपुर जिले की बिजावर या राजनगर से बाला पटेल, निवाड़ी से अखिलेश अयाची, पोहरी से नरेन्द्र बिरथरे, भोपाल दक्षिण-पश्चिम से शैलेन्द्र शर्मा, सिलवानी से ठा. भगवानसिंह लोधी, खरगोन-कसरावद से वीरेन्द्र पाटीदार, बहोरीबंद से राकेश पटेल, जबलपुर उत्तर-मध्य से शरद अग्रवाल, भिण्ड मेहगांव से देवेन्द्रसिंह नरवरिया, सतना से ममता पाण्डे, इछावर से डॉ. अजयसिंह पटेल, सांची से मुदित शेजवार, गंजबसौदा से हरिसिंह कक्काजी, लहार से रसाल सिंह, उज्जैन बड़नगर से संजय पटेल (चीकली वाले), बैतूल शहर से योगी खण्डेलवाल, डिंडोरी से दुलीचंद उरैती शामिल हैं। भाजपा प्रत्याशियों की दूसरी अधिकृत सूची आना बाकी है। बहुत संभव है कि इस सूची से पहले उमा भारती अपने समर्थक प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी कर दें! भाजपा नेतृत्व के खिलाफ अपने समर्थकों को टिकट देने का दबाव सार्वजनिक करके उमा भारती ने भाजपा शासित राज्यों के नेताओं को यह संदेश भी दे दिया है कि पार्टी तब से है, जब अमित शाह कुछ नहीं थे। अमित शाह का इतना भी आतंक नहीं मानें कि ‘मन की बात’ कहने का अधिकार भी भूल जाएं! एक तरफ भाजपा नेतृत्व सारे नाराज क्षत्रपों को एक जाजम पर लाने की कवायद में लगा है… ऐसे में उमा भारती के ये तेवर भाजपा में भूकंप लाने जैसे ही हैं! ऐसा नहीं कि उनकी नाराजी को दूर करने के प्रयास मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने नहीं किए। शराब नीति में बदलाव और हाते बंद करने का निर्णय उनके ही दबाव में लिया गया… यह बात अलग है कि अब कलालियों के बाहर सड़कें ही हाता बन गई हैं। साध्वी के करीबी प्रीतम लोधी को विधानसभा चुनाव का टिकट और भतीजे राहुल लोधी को शिवराज मंत्रिमंडल में हाल ही में शामिल किया गया है, लेकिन उनकी नाराजी है… कि कम नहीं हुई है! बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने रविवार को चित्रकूट में ‘जन-आशीर्वाद यात्रा’ को हरी झंडी दिखाकर मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव का शंखनाद किया। उमा भारती को बीजेपी ने ‘जन-आशीर्वाद यात्रा’ के कार्यक्रम में नहीं बुलाया तो इस पर उन्होंने अपनी नाराजगी जताई। उमा भारती ने कहा है कि मुझे ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ में बीजेपी ने निमंत्रण देने की औपचारिकता भी नहीं निभाई। हो सकता है कि वे (बीजेपी नेता) घबरा गए हों कि अगर मैं वहां रहूंगी तो पूरी जनता का ध्यान मुझ पर होगा। इसी के चलते नहीं बुलाया होगा! उमा भारती ने आरोप लगाते हुए कहा कि मुझे तो डर है कि सरकार बनने के बाद मुझे पूछेंगे या नहीं! उन्होंने पार्टी नेताओं को याद भी दिलाया कि अगर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2020 में सरकार बनाने में मदद की तो उन्होंने भी 2003 में बड़ी बहुमत वाली सरकार बनवाई है।

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Aditya L1: सूरज की ऊपरी परत कोरोना सबसे गर्म क्यों…इस रहस्य को सुलझाना आदित्य के लिए चुनौती, वैज्ञानिक अनजान

अगले चार महीने में भारत का आदित्य एल1 अपने निर्धारित बिंदु पर पहुंचने के बाद यह रहस्य सुलझाने में मदद कर सकता है। आदित्य से मिली जानकारियां व डाटा कोरोना के मुख्य सतह से कई गुना ज्यादा गर्म होने का अबूझ रहस्य सुलझाने में पूरे विश्व की मदद कर सकती हैं।

सूर्य के ऊपरी वातावरण को मुख्यत: तीन परतों फोटोस्फीयर, क्रोमोस्फीयर और कोरोना में बांटा गया है। इसके भीतर से आने वाली ऊर्जा इन तीनों परतों में ही प्रकाश व अन्य तत्वों में बदलती है, लेकिन सबसे बाहरी परत होने के बावजूद कोरोना का तापमान बाकी दो परतों से क्रमश : 500 व 200 गुना तक अधिक पाया गया है। इसकी वजह वैज्ञानिकों को नहीं पता है।\

अगले चार महीने में भारत का आदित्य एल1 अपने निर्धारित बिंदु पर पहुंचने के बाद यह रहस्य सुलझाने में मदद कर सकता है। आदित्य से मिली जानकारियां व डाटा कोरोना के मुख्य सतह से कई गुना ज्यादा गर्म होने का अबूझ रहस्य सुलझाने में पूरे विश्व की मदद कर सकती हैं।

फोटोस्फीयर
यहीं से निकला उजाला हम तक आठ मिनट में पहुंचता है : फोटोस्फीयर यानी… प्रकाश का गोला। सूर्य के वातावरण की यह पहली परत 500 किमी मोटी है। यहीं से सबसे ज्यादा ऊर्जा, हजारों किमी लंबी लपटें, एक्स-रे, यूवी रे, चुंबकीय विकिरण, रेडियो तरंगें बाहर आती हैं और यहीं से निकली किरणें हमारी पृथ्वी तक आठ मिनट में पहुंचती हैं। इसका तापमान 4,125 से 6,125 डिग्री सेल्सियस माना जाता है, जो सूर्य के केंद्र के मुकाबले कहीं कम है।

क्रोमोस्फीयर
सूर्य के ताप को बाहर निकालती परत: क्रोमोस्फीयर फोटोस्फीयर के ऊपर की परत होती है और तीन हजार किमी मोटी मानी जाती है। यह परत लाल दिखती है, जैसा हाइड्रोजन को जलाने पर होता है। वैज्ञानिक अनुमानों के अनुसार इसका तापमान सात हजार से 14 हजार डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है। इस परत में सौर तरंगें नजर आती हैं, जिन पर वैज्ञानिक निगरानी रखते हैं। यही तरंगें ऊपर की ओर बढ़कर कोरोना में जाती हैं।

कोरोना
जहां आवेशित गैसों की पताकाएं लहराती हैं: कोरोना सूर्य की तीसरी और सबसे ऊपरी परत है। इसे केवल ग्रहण के दौरान देखा जाता है। वैज्ञानिक इसकी मोटाई आठ से 10 हजार किमी तक मानते हैं। कोरोना का तापमान 10 लाख से 20 लाख डिग्री सेल्सियस तक माना गया है। इससे निकल रहीं आवेशित गैसों का तापमान जब जरा भी कम होने लगता है, तो वे कोरोना को छोड़ कर हमारे सौरमंडल की ओर बढ़ती हैं। इससे सौर-तूफान बनते हैं।

दुनियाभर के वैज्ञानिकों को परिणामों का इंतजार 
गैस का गोला कहे जाने वाले हमारे तारे के कोर यानी केंद्र में तापमान डेढ़ करोड़ डिग्री सेल्सियस माना गया है, लेकिन फोटोस्फीयर चार हजार से छह हजार डिग्री सेल्सियस ही गर्म है। यह रहस्य और गहराता है, जब वैज्ञानिक कोरोना का तापमान 20 लाख डिग्री बताते हैं। सूर्य के केंद्र और कोरोना में हजारों किमी का फासला है और बीच कम कम तापमान वाली परतें हैं, फिर भी कोरोना इतनी गर्म कैसे हो जाती है? क्या ऐसा सूर्य पर आने वाले तूफानों से होता है? या हर सेकंड होने वाले करोड़ों सूक्ष्म लपटों के विस्फोट से? यह सूक्ष्म लपटें सूर्य की सामान्य लपटों से अरबों गुना छोटी होती हैं, लेकिन ऐसी हर लपट एक करोड़ टन हाइड्रोजन बम जितनी ऊर्जा पैदा करती है। तापमान में बदलाव के इसी रहस्य को समझने में भारत का आदित्य एल1 मदद कर सकता है। कई प्रमुख देशों के वैज्ञानिक इससे मिलने वाले डाटा और जानकारियां का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

चंद्रयान-3 की सफलता को फिर मिली चीन से तारीफ
वहीं, भारत के चंद्रयान-3 की सफलता पर चीन से एक बार फिर सराहना के शब्द आए हैं। भारत के खिलाफ हमेशा जहर उगलने वाले ग्लोबल टाइम्स ने मिशन की सफलता के तुरंत बाद इस सफलता की तारीफ करते हुए इसरो को चीनी अंतरिक्ष एजेंसी के साथ मिलकर काम करने का सुझाव दिया था। दूसरी ओर अब ग्लोबल टाइम्स के पूर्व प्रधान संपादक और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव हू शी जिन ने लिखा है कि अंतरिक्ष में भारत की सफलता प्रभावशाली है। शी जिन ने एक्स पर इस बारे में पोस्ट लिखा और इसमें इसरो को टैग किया है।

दिलचस्प तथ्य यह है कि हू शी जिन भारत के कट्टर विरोधी रहे हैं। गलवां संघर्ष के दौरान उन्होंने भारत के खिलाफ कई लेख लिखे थे। उन्हें चीनी कप्युनिस्ट पार्टी का राजनीतिक प्रचारक माना जाता है। भारत ने दो महीने में अंतरिक्ष में शानदार कामयाबी हासिल की है। जिसकी पूरी दुनिया में तारीफ हो रही है। 

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BRICS: जयशंकर ने याद किया चंद्रयान-3 के लैंडिंग वाला पल, बताया- ‘हम दक्षिण अफ्रीका में थे, पर मानसिक रूप से..’

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि जब दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन हो रहा था, तब मैं वहां मौजूद था। उस दौरान भारत में चंद्रयान-3 चांद पर लैंड करने वाला था। उस दिन सभी के मन में चंद्रयान-3 का ही विचार था। 

विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर ने चंद्रयान-3 को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि जिस दिन चंद्रयान चांद पर लैंड करने वाला था, उस समय भला हम दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शारीरिक रूप से मौजूद थे। हालांकि, मानसिक रूप से हम बंगलूरू में थे। 

चंद्रयान-3 का ही विचार

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि कार्यक्रम शुरू होने से पहले मैं कुछ अनुभव साझा करना चाहता हूं। जब दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन हो रहा था, तब मैं वहां मौजूद था। उस दौरान भारत में चंद्रयान-3 चांद पर लैंड करने वाला था। उन्होंने कहा कि उस दिन प्रधानमंत्री मोदी यहां तक कि हमारे मन में चंद्रयान-3 का ही विचार था। उस शाम वहां सिर्फ एक ही विषय पर चर्चा हो रही थी। वह विषय था चंद्रयान-3 का चांद पर सफलतापूर्वक उतरना। 

गर्व महसूस हो रहा
उन्होंने कहा कि मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा था। मेरे लिए सबसे बड़ी संतुष्टि यह थी कि दक्षिण अफ्रीका में उपस्थित सभी नेताओं का मानना था कि भारत ने कर दिखाया। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से इसकी तारीफ की थी।  


भारत का महत्व बढ़ता जा रहा
उन्होंने कहा कि हमारी G20 की अध्यक्षता अलग क्यों है? क्योंकि कई देशों ने पहले भी G20 की अध्यक्षता की है, इसका पहला कारण दरअसल कुर्सी है। सच तो यह है कि भारत ने ऐसे समय में G20 की अध्यक्षता संभाली है जब दुनिया के लिए भारत का महत्व बढ़ता जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि यह दुनिया के लिए आंशिक रूप से हमारी आर्थिक उपलब्धियों के कारण अधिक मायने रखता है क्योंकि अब हम पांचवें नंबर की अर्थव्यवस्था बन गए हैं। चंद्रयान भी इसका एक उदाहरण है। 

विदेश मंत्री ने कहा कि आज हमें वैश्विक कार्यस्थल, वैश्विक प्रतिभा पूल के लिए आवश्यक माना जाता है। यह मायने रखता है क्योंकि हमने भी आज एक क्षमता का प्रदर्शन किया है। हमने अन्य देशों की मदद करने की क्षमता प्रदर्शित की है। इसलिए G20 की भारत की अध्यक्षता से अपेक्षाएं और जिम्मेदारियां बहुत असाधारण हैं।

उन्होंने कहा कि हमने इंटरनेशनल सोलर अलायंस के माध्यम से सौर ऊर्जा को लेकर दुनिया की सोच बदल दी है। आज हम इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स के माध्यम से दुनिया की खान-पान की आदतों को बदलने का प्रयास कर रहे हैं। हमने आपदा प्रतिक्रिया के गठबंधन के माध्यम से आपदाओं का जवाब देने का एक सामूहिक तरीका बनाया है। 

जयशंकर ने कहा कि यह एक जगह है, एक देश है, जिसे आज जिम्मेदार के रूप में देखा जाता है, जिसे नवोन्वेषी के रूप में देखा जाता है, जिसे वास्तव में वैश्विक प्रगति को आगे बढ़ाने वाले के रूप में देखा जाता है। इसलिए मुझे पूरा विश्वास है कि जब एक दिन आप सभी पीछे मुड़कर देखेंगे तो आप ऐसा करेंगे। सभी लोग 2023 को भारत के लिए एक बड़े वर्ष के रूप में याद करेंगे। एक ऐसे वर्ष के रूप में जब हमारी G20 की अध्यक्षता ने हमें दुनिया के मानचित्र पर एक अलग स्थान पर खड़ा किया।

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China: भारत में होने वाली जी-20 बैठक से किनारा कर सकते हैं शी जिनपिंग, रिपोर्ट में दावा…

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत में 9-10 सितंबर को होने वाली जी20 बैठक से किनारा कर सकते हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले यह दावा किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो भारतीय अधिकारियों, चीन में एक राजनयिक और जी-20 में शामिल एक और देश के सरकारी अधिकारी ने कहा कि शी जिनपिंग की जगह जी-20 की बैठक में इस बार चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग आ सकते हैं। 

हालांकि, इसे लेकर चीन और भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से कोई बयान नहीं जारी किया गया है। गौरतलब है कि पहले भारत में होने वाली जी-20 बैठक को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और शी जिनपिंग के बीच बातचीत के अहम मौके के तौर पर देखा जा रहा था। माना जा रहा था कि जी-20 में बैठक के बाद अमेरिका-चीन के बीच तनाव को कम करने की कोशिश की जाएगी। 

अभी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत न आने का कारण साफ नहीं है। चीन के आधिकारिक सूत्रों ने भी इस बारे में जानकारी से इनकार किया। उधर भारत में सरकारी अफसरों ने पुष्टि की कि उन्हें जिनपिंग की जगह चीनी प्रधानमंत्री के आने की जानकारी है।

इससे पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही पीएम मोदी के साथ फोन पर बातचीत में भारत आने में असमर्थता जता चुके हैं। रूस की तरफ से जी-20 बैठक में विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव हिस्सा लेंगे। 

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Aditya-L1 Launch Date: सूर्य मिशन के लॉन्च की तारीख आई सामने, इसरो ने किया बड़ा एलान

Aditya L1 mission launch Date चंद्रयान-3 की सफलता के बाद अब इसरो सूर्य का अध्ययन करने को तैयार है। इसरो चीफ एस सोमनाथ पहले ही इसको लेकर जानकारी दे चुके हैं। अब इसरो ने सूर्य मिशन के लिए सैटेलाइट आदित्य-एल1 को लेकर बड़ा एलान कर दिया है। इसरो ने बताया कि श्रीहरिकोटा से सूर्य का अध्ययन करने वाली पहली भारतीय सैटेलाइट कब लॉन्च होगी।

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान एवं शोध संस्थान (एरीज) नैनीताल के निदेशक प्रो. दीपांकर बनर्जी चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग से काफी उत्साहित हैं और इस बात से पूरी तरह आश्वस्त हैं अब बारी सूरज की है। बहुत जल्द पूरी दुनिया भारत की एक और बड़ी उपलब्धि की साक्षी बनेगी। दीपांकर बनर्जी मिशन आदित्य एल-1 के वर्किंग साइंस ग्रुप व आउटरीच कमेटी के सह अध्यक्ष हैं। वह कहते हैं कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का यह महत्वाकांक्षी प्रयास सूर्य के रहस्यों को तो खोलेगा ही, अंतरिक्ष में विचर रहे कृत्रिम उपग्रहों की सुरक्षा के लिए भी वरदान साबित होगा। वह यह भी कहते हैं इस मिशन से संबंधित सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इसरो कभी भी आदित्य एल-1 की लांचिंग की तिथि घोषित कर सकता है………

आदित्य-एल1 मिशन को इसरो के पीएसएलवी एक्सएल रॉकेट द्वारा सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र एसएचएआर (एसडीएससी-एसएचएआर), श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा। प्रारंभ में, अंतरिक्ष यान को निम्न पृथ्वी कक्षा में रखा जाएगा। इसके बाद, कक्षा को अधिक अण्डाकार बनाया जाएगा और बाद में अंतरिक्ष यान को ऑनबोर्ड प्रणोदन का उपयोग करके लैग्रेंज बिंदु (एल1) की ओर प्रक्षेपित किया जाएगा।

जैसे ही अंतरिक्ष यान L1 की ओर यात्रा करेगा, यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र (SOI) से बाहर निकल जाएगा। एसओआई से बाहर निकलने के बाद, क्रूज़ चरण शुरू हो जाएगा और बाद में अंतरिक्ष यान को एल1 के चारों ओर एक बड़ी प्रभामंडल कक्षा में स्थापित किया जाएगा। लॉन्च से एल1 तक की कुल यात्रा में आदित्य-एल1 को लगभग चार महीने लगेंगे।


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