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Indigo: पायलट ने किया विमान की उड़ान में देरी का एलान तो यात्री ने कर दिया हमला, वीडियो वायरल, बिठाई गई जांच

खराब मौसम के कारण दिल्ली में एक विमान के उड़ान भरने में देरी को लेकर एक यात्री इतना नाराज हो गया कि उसने फ्लाइट के कैप्टन पर ही हमला बोल दिया। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।

खराब मौसम के चलते फ्लाइट के लेट होने का सिलसिला लगातार जारी है। इस बीच दिल्ली में एक विमान के उड़ान भरने में देरी को लेकर एक यात्री इतना नाराज हो गया कि उसने फ्लाइट के कैप्टन पर ही हमला बोल दिया। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।

यात्री ने पायलट पर किया हमला
इस वीडियो में शख्स को पायलट को घूंसा मारते देखा जा सकता है। विमानन सुरक्षा एजेंसी ने इस घटना का संज्ञान लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। बताया गया है कि यह घटना तब हुई जब पायलट माइक्रोफोन पर यात्रियों को दिल्ली से गोवा जा रही फ्लाइट के कोहरे के चलते लेट होने की जानकारी दे रहा था। इसी दौरान यात्री ने पायलट को घूंसा मार दिया।

यह घटना रविवार की दोपहर एक बजे की है। यात्री की पहचान साहिल कटारिया के तौर पर की गई है। दिल्ली पुलिस ने इस घटना पर कहा, ‘आरोपी के खिलाफ हम उचित कानूनी कार्रवाई करेंगे।’ इंडिगो ने भी यात्री के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

लोगों ने की यात्री को नो-फ्लाई-लिस्ट में डालने की अपील
इस घटना का वीडियो वायरल होते ही लोगों की प्रतिक्रिया सामने आई। एक यूजर ने कहा, ‘उड़ान में देरी को लेकर पायलट क्या कर सकता है? वह केवल अपना काम कर रहा था। इस व्यक्ति को गिरफ्तार कर इसे नो-फ्लाई लिस्ट में डाल देना चाहिए। इसकी तस्वीर को सार्वजनिक करना चाहिए, जिससे की अन्य लोगों को इसके बुरे व्यवहार के बारे में मालूम होना चाहिए।’ 

वहीं एक अन्य यूजर ने कहा, ‘इस व्यक्ति पर हमला करने का मामला दर्ज करना चाहिए। इसे नो-फ्लाई-लिस्ट में डाल देना चाहिए। यात्री का यह व्यवहार अस्वीकार्य है।’

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14 की रात मकर राशि में प्रवेश करेंगे सूर्य, 15 को मनेगा पर्व

हिन्दुस्तान मेल, धार
पंचांग की गणना के अनुसार 14 जनवरी की रात तीन बजे सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होगा। 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्वकाल मनाया जाएगा। धर्मशास्त्रीय मान्यता और भारतीय ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांत के अनुसार जब संक्रांति का क्रम सायं अथवा रात्रि या अपर रात्रि में हो तो पर्वकाल अगले दिन मनाने की बात कही गई है। इस दृष्टिकोण से 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पुण्यकाल मनाना शास्त्रसम्मत रहेगा। इस दिन तीर्थ स्नान तथा तिल, गुड़ व मूंग की दाल-चावल की खिचड़ी के दान का विशेष महत्व है। इस बार मकर संक्रांति को लेकर पतंग, मिष्ठान्न और अन्य खाद्य पदार्थों से दुकानें सज चुकी हैं।
मकर के अवसर पर तिल के लड्डू का विशेष महत्व है। घरों में तिल के लड्डू बनाने की पुरानी प्रथा रही है, लेकिन बीते कुछ सालों से लोग इसे रेडीमेड ही खरीदना पसंद कर रहे हैं। इसी के चलते शहर के मिष्ठान्न दुकानों में इन दिनों तिल के लड्डू, तिल के गजक, गुड़ और फल्ली के लड्डू, मुर्रा लड्डू आदि जैसे खाद्य पदार्थ दुकानों की शोभा बढ़ा रहे हैं। इन दिनों बाजार में तिल के लड्डू चार से साढ़े चार सौ रुपए किलो तक में बिक रहे हैं, जिसकी मुख्य वजह है… तिल और गुड़ के बढ़े हुए दाम। पिछले साल की तुलना में तिल और गुड़ के दामों में बढ़ोतरी हुई है। शहर के किराना दुकानों में तिल 240 से 250 रुपए प्रतिकिलो तक बिक रहा है, वहीं गुड़ 45 से 50 रुपए प्रतिकिलो बाजार में बिक्री हो रही है। हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि गन्ना लगाने से लेकर गुड़ बनाने तक की लागत अधिक आने के कारण गुड़ के दामों में तेजी आई है।
15 जनवरी को
मनेगी संक्रांति
इस साल मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को रवि योग के शुभ संयोग में मनाया जाएगा। इस दिन गंगा स्नान कर श्रद्धालु सूर्यदेव की पूजा कर दान-पुण्य करने के साथ अपने और अपने परिवार समाज की खुशहाली की कामना करेंगे। ज्योतिष अशोक शास्त्री के अनुसार 2025 व 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी और 2027 व 2028 में 15 जनवरी को मनेगी।
सूर्य देव को अर्घ्य देना शुभ
ज्योतिष शास्त्री ने बताया कि मकर संक्रांति पर गंगा स्नान के साथ सूर्यदेव को अर्घ्य व पूजा अर्चना करने से परिवार में कुशलता बनी रहती है। स्वास्थ्य उत्तम रहने के साथ यश-कीर्ति में वृद्धि होती है। गंगा स्नान का इस दिन विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन व दक्षिणायन को देवताओं की रात के तौर पर माना जाता है। भगवान सूर्य की कृपा पाने के लिए इस दिन तांबे के पात्र में जल के साथ काला तिल, गुड़, लाल चंदन, लाल पुष्प, अक्षत डालकर सूर्य को अर्घ्य देने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस दिन जरूरतमंदों को दान-पुण्य करने से कई गुना फल की प्राप्ति होती है। इस बार मकर संक्रांति का वाहन अश्व व उपवाहन सिंह रहेगा। वाहन अश्व होने से जनहितैषी कार्यों की गति बढ़ेगी तथा उपवाहन सिंह होने से विशेष प्रभाव दिखाई देगा।

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यूं ही नहीं मिला प्राण-प्रतिष्ठा का पहला निमंत्रण

सूरज अपनी गरिमा छोड़ सकता है। चंद्रमा अपनी शीतलता का परित्याग कर सकता है। सागर अपनी सीमाओं का उल्लंघन कर सकता है, पर रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण को विश्व की कोई ताकत रोक नहीं सकती। यह एक साध्वी का संकल्प है, एक रामभक्त का ओज और मां भारती की आराधना में लीन एक तपस्विनी की हुंकार। अयोध्या में कारसेवकों पर उत्तरप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायमसिंह यादव की सरकार ने गोलियां चलवाई थीं। पुलिस की बंदूकों ने जिन कारसेवकों का असमय प्राण हर लिए, उनके संकल्प एक-एक हिंदू के रग-रग में संचारित होते रहें, इसके लिए वो साध्वी दहाड़ रही थीं। एक-एक शब्द मानों युद्ध का निनाद था, हरेक भाव-भंगिमा मानों युग परिवर्तन का आह्वान और सामने रामभक्तों का जनसैलाब। वह स्थान देश की राजधानी दिल्ली का इंडिया गेट था, जहां श्रीराम कारसेवा समिति, हिंदू परिषद् और राम जन्मभूमि न्यास के बुलावे पर दुनिया के कोने-कोने से रामभक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा था। जिधर दृष्टि पड़े, रामभक्तों का तांता। मंच पर लगे माइक से जो आवाज रामभक्तों में जोश का संचार कर रही थी, वो आवाज थी- साध्वी ऋतंभरा की।
पंजाब के लुधियाना स्थित दोराहा में जन्मीं निशा ने महज 16 वर्ष की उम्र में भगवा चोला पहन लिया था। हरिद्वार के गुरु परमानंद गिरि ने नए उन्हें साध्वी जीवन का नया नाम दिया- ऋतंभरा। आज भी साध्वी ऋतंभरा की वाणी में ऐसा ओज है कि वो सुनने वालों में एक गजब सी कशिश पैदा कर देती है। तब ऋतंभरा युवावस्था में थीं। वो बोलतीं तो ऐसा लगता मानों युद्धभूमि में तलवारों की टंकार गूंज रही हो। उनके एक-एक शब्द संकल्पों की सिद्धि को प्रेरित करता और रामभक्तों में नए जज्बे का संचार कर देता। वो बेबाक थीं, कोई डर नहीं, कोई संशय नहीं, इसलिए दिल की बात बेझिझक उनकी जुबां पर आ जाती। दिल्ली की ही उस रैली में साध्वी ऋतंभरा ने मुलायमसिंह यादव को कातिल, हिजड़ा जैसे शब्दों से नवाजा तो राम मंदिर का विरोध करने वालों को कुत्ता तक कहा।
उन्होंने एक रामभक्त से अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए कहती हैं- मैंने उससे कहा… तुम एक हिजड़े को मारने के लिए गोली बर्बाद करोगे? दरअसल, कारसेवकों की हत्या से दु:खी उस रामभक्त ने पास में बंदूक रखने की इच्छा साध्वी ऋतंभरा के सामने जताई थी, जिस पर साध्वी ने उसे समझाते हुए कहा कि राम के विरोधी नेताओं पर गोलियां चलाने की जरूरत नहीं है, उन्हें कुर्सी से हटा दो। वो मंच से कहती हैं- ये राम द्रोही नेताओं के प्राण इनकी कुर्सी में रहते हैं, इनकी कुर्सी छीन लो… ये अपने आप कुत्ते की मौत मर जाएंगे। इनको मारने के लिए किसी बम-बारूद, गोली की जरूरत नहीं है। इसी बेबाकी से साध्वी ऋतंभरा मंच से आवाज देतीं तो रामभक्तों का संकल्प और गहरा हो जाता। उनकी कविताएं देशप्रेमियों के दिलों को बखूबी सिंचित करतीं। साध्वी ऋतंभरा कहा करतीं- हो हिंदू हो या मुसलमान, जिसको इस देश से प्यार नहीं; तो फिर उसको इस देश में रहने का कोई अधिकार नहीं।
दरअसल, 1980 के दशक में विश्व हिंदू परिषद् ने अयोध्या में राम जन्मभूमि पर राम मंदिर के निर्माण का आंदोलन छेड़ा तो इससे देशभर के साधु-संत जुड़ने लगे। एक ओजस्वी वक्ता के रूप में साध्वी ऋतंभरा राम मंदिर आंदोलन का प्रमुख चेहरा बन गईं। इससे पहले साध्वी ऋतंभरा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की महिला संगठन राष्ट्रीय सेविका समिति से भी जुड़ी थीं, लेकिन वीएचपी के कार्यक्रमों के जरिए उन्होंने हिंदू जागृति अभियान का कमान संभाल लिया। 1990 में जब अयोध्या आंदोलन ने जोर पकड़ लिया तो साध्वी ऋतंभरा घर-घर जाने लगीं। 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया तो वो अयोध्या में ही थीं, इसीलिए लिब्राहन आयोग ने बाबरी विध्वंस के लिए जिन 68 आरोपियों की सूची बनाई, उसमें साध्वी ऋतंभरा का भी नाम था। आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा कि साध्वी ऋतंभरा ने तीखे भाषणों के जरिये मस्जिद विध्वंस का माहौल बनाया था।
अयोध्या में राम जन्मभूमि से बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराए जाने के तीन साल ही हुए थे कि मध्यप्रदेश में साध्वी ऋतंभरा को गिरफ्तार कर लिया गया। तब एमपी में कांग्रेस की सरकार थी और मुख्यमंत्री थे दिग्विजय सिंह। साध्वी ऋतंभरा इंदौर की एक जनसभा में ईसाई मिशनरियों की तरफ से हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करवाए जाने पर अपनी चिंता जाहिर की। तब सीएम दिग्विजय सिंह के आदेश पर मध्यप्रदेश की पुलिस ने साध्वी ऋतंभरा को भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हाईकोर्ट से जमानत के बाद साध्वी ऋतंभरा 11 दिन बाद जेल से निकल पाईं। उसके बाद वो धीरे-धीरे थोड़ा गुप्त रहने लगीं।
बाद में साध्वी ऋतंभरा ने उत्तरप्रदेश के वृंदावन में वात्सल्य ग्राम की स्थापना की। उन्होंने मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर और हिमाचल प्रदेश के सोलन में भी वात्सल्य ग्राम बनाए। बाद में इसकी शाखाओं का विस्तार होता रहा। वात्सल्य ग्राम के बच्चे उन्हें दीदी मां कहकर पुकारते हैं। दीदी मां को पुस्तकें पढ़ने का शौका है। उन्हीं दीदी मां के वृंदावन स्थित वात्सल्य ग्राम में देश का पहला बालिका सैनिक स्कूल भी खुला है। साध्वी ऋतंभरा के प्रवचन आज भी लोगों को आह्लादित करते हैं। उनके प्रवचनों को पसंद करने वालों की संख्या करोड़ों में हैं। साध्वी ऋतंभरा रामकथा करती हैं और श्रीमद् भागवत कथा भी। वो आज भी बेधड़क, बेहिचक अपने मन की बात करती हैं। 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी तो मीडिया ने साध्वी ऋतंभरा का विचार जानना चाहा। एक टीवी इंटरव्यू में साध्वी ऋतंभरा ने बिना लाग-लपेट कह डाला- राम रहेंगे टाट में, भक्त रहेंगे ठाठ से… ऐसा नहीं होना चाहिए। नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंदिर नहीं बनेगा तो फिर कब बनेगा?
ये वही साध्वी ऋतंभरा थीं, जिन्होंने महज छह वर्ष पहले 14 अप्रैल, 2008 को नरेंद्र मोदी को राष्ट्रनायक बताया था। उन्होंने अहमदाबाद के टैगोर हॉल में साध्वी ऋतंभरा ने कहा था- मैं आज गुजरात के लोकनायक की पुस्तक के लोकार्पण कार्यक्रम में नहीं आई हूं, मैं राष्ट्रनायक के रूप में नरेंद्र भाई मोदी को देखती हूं। वह अवसर था गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की लिखी पुस्तक ‘ज्योतिपुंज’ को लोकार्पण का। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवकों पर लिखी गई पुस्तक के लोकार्पण समारोह में साध्वी ऋतंभरा ने भविष्य के नरेंद्र मोदी का दीदार किया था, वो सच था। नरेंद्र मोदी आज करोड़ों लोगों के लिए राष्ट्रनायक ही तो हैं। 5 अगस्त, 2019 को राम मंदिर के भूमिपूजन के लिए अयोध्या पहुंचे उस राष्ट्रनायक नरेंद्र मोदी ने रामलला को दंडवत प्रणाम किया तो साध्वी ऋतंभरा गद्गद् हो गईं। आज वो हर इंटरव्यू में उस दृश्य का बखान करती हैं और कहती हैं- यह एकजुट हिंदुओं का दृढ़संकल्प का परिणाम है। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम का पहला निमंत्रण पत्र साध्वी ऋतंभरा को ही मिला। (ये लेखक के निजी विचार हैं)

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भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल में कहा- संगीत नहीं सीखा, क्योंकि मुझे क्लास से बाहर निकाल दिया था

भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल में पॉप सिंगर उषा उत्थुप ने कहा, ह्यमैं 100% ओरिजनल सिंगर हूं। संगीत मेरे खून में है। मेरा मकसद सबके चेहरे पर मुस्कुराहट लाना है। मैंने संगीत नहीं सीखा, क्योंकि मुझे तो क्लास चौथी में संगीत क्लास से बाहर निकाल दिया गया था। इसकी वजह यह था कि मेरी आवाज भारी थी। सोसायटी फॉर कल्चर एंड एनवायरनमेंट के 6वें भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल (बीएलएफ) का आगाज शुक्रवार को भारत भवन में हुआ। फेस्टिवल के पहले दिन कई विद्वान शामिल हुए। इनमें पॉप सिंगर उषा उत्थुप का भी सेशन रहा। करीब 1 घंटे तक उन्होंने अपने बारे में एक-एक बात बताई। दर्शकों के सवालों के जवाब भी दिए। इस दौरान उन्होंने मीडिया से चर्चा भी की।
म्यूजिक में करियर बनाने का ख्याल कैसे आया – संगीत और मेरी आॅडियंस मेरे लिए सब कुछ है। एक कलाकार के लिए उसकी आॅडियंस के प्यार से बढ़कर और कुछ भी नहीं। लोग हमेशा सोचते हैं कि ये तो इंग्लिश गाती है, हमारे लिए क्या गाएगी। बाकी सिंगर्स की तरह मेरे पास 10 हजार, 20 हजार, 30 हजार आॅडियंस तो नहीं है, लेकिन मेरे पास आप लोग हैं, जो मेरे 54 साल के संगीत की कमाई हैं। बाय चांस मैं संगीत की दुनिया में आ गई। पहले से कोई प्लान नहीं था। मेरे पिता, दादा सब संगीत से ताल्लुक रखते हैं और मैं भी हिस्सा बन गई। तब सिर्फ रेडियो हुआ करता है। किसी को कॉपी नहीं कर सकते थे। मैं कह सकती हूं कि मैं 100 % ओरिजनल सिंगर हूं। संगीत मेरे खून में है।
ज्यादातर लोगों ने सोचा कि ये साउथ इंडियन लड़की कांजीवरम साड़ी में नाइट क्लब में क्या कर रही है। मैंने पहले दिन 3-4 गाने गाए। फिर मैंने लोगों को बताया कि मेरा नाम उषा उत्थुप है। मैं बॉम्बे से हूं। केरला में शादी हुई है और अब मैं कोलकाता में रह रही हूं।
कलकत्ता के नाइट क्लब में इंग्लिश सॉन्ग कैसे गाने लगीं?- 1969 में सिर्फ एंग्लो इंडियन ही नाइट क्लब में गाना गाया करते थे। पहले का माहौल बहुत अलग था। सिर्फ लड़के/आदमी ही नाइट क्लब जाते थे। फिर मैं कांजीवरम साड़ी में गाने लगी। मुझे औरतों का सपोर्ट बहुत ज्यादा मिला और वहीं से महिला शक्ति की शुरूआत हुई। मेरी आॅडियंस में शानदार महिलाएं थीं, जिन्होंने ये नहीं सोचा कि सिर्फ मर्द ही नाइट क्लब में गा सकते हैं। धीरे-धीरे मैं नाइट क्लब परिवार का हिस्सा बन गई। लोग नाइट क्लब में अपनी बेटियों – बहनों के साथ मेरा गाना सुनने आने लगे।

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सुबह कोहरा, रात में ठंड: ग्वालियर-भोपाल समेत आधे प्रदेश में धुंध छाई

मध्यप्रदेश में मौसम ने फिर करवट बदली है। सुबह कोहरा छा रहा है तो रातें ठंडी हैं। वहीं, दिन में टेम्प्रेचर में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। शुक्रवार को प्रदेश में ऐसा ही मौसम रहा। ज्यादातर शहरों में दिन का तापमान 1 से 5 डिग्री तक बढ़ गया। शनिवार को ग्वालियर-भोपाल समेत आधे प्रदेश में मध्यम से घना कोहरा छाया रहा।
शुक्रवार को रीवा सबसे ठंडा रहा। यहां दिन का तापमान 22.6 डिग्री दर्ज किया गया। इसके बाद ग्वालियर दूसरा सबसे ठंडा शहर रहा। यहां टेम्प्रेचर 3.9 डिग्री बढ़कर 27.8 डिग्री पहुंच गया। इंदौर में 27.8 डिग्री, जबलपुर में 25.4 डिग्री और उज्जैन में 28 डिग्री पारा रहा।
खंडवा सबसे गर्म, पारा 29 डिग्री के पार- शुक्रवार को रीवा सबसे ठंडा और खंडवा सबसे गर्म रहा। रीवा में पारा 22.6 डिग्री और खंडवा में 29.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। खजुराहो, सीधी, पचमढ़ी, टीकमगढ़, नौगांव और मलाजखंड में दिन का तापमान 25 डिग्री से कम रहा।
आज ऐसा रहेगा मौसम- हल्के से मध्यम कोहरा: भोपाल, रीवा संभाग के साथ मंडला, अशोकनगर, शिवपुरी, मुरैना, श्योपुर, पन्ना, दमोह, सागर, धार, बड़वानी और अलीराजपुर जिलों में। विजिबिलिटी 200 से 800 मीटर के बीच रह सकती है। मध्यम से घना कोहरा: ग्वालियर, दतिया, भिंड, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में। यहां विजिबिलिटी 50 से 500 मीटर तक रहने का अनुमान है।
इसलिए बदला मौसम का मिजाज- कटऊ, भोपाल के सीनियर वैज्ञानिक डॉ. वेदप्रकाश सिंह ने बताया, अभी वेस्टर्न डिस्टरबेंस अफगान-ईरान के आसपास है। इस वजह से विंड पैटर्न बदल गया है। राजस्थान के आसपास प्रति चक्रवात की एक्टिविटी है। इन वजहों से अगले 2 से 3 दिन तक कोहरा रहेगा। इसके बाद रात के टेम्प्रेचर में कुछ गिरावट हो सकती है, लेकिन 16 जनवरी से एक और वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव होने का अनुमान है। इससे रात के तापमान ज्यादा नहीं लुढ़केंगे।
सिस्टम के बाद ठंड बढ़ेगी- मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, सिस्टम गुजरने के बाद ही रात के तापमान में गिरावट होगी और ठंड असर दिखाएगी। हालांकि, दिन ठंड रहेंगे। ज्यादातर शहरों में टेम्प्रेचर 25 डिग्री के आसपास ही रहेंगे।

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