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रातभर जागकर इस युवा नेबनाई पीएम की पेंटिंग………

मैं मोदी भक्त नुर्शीद अली हूं, मेरा दिल चीरकर देखो…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब तीन देशों का दौरा पूरा कर दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरे तो उनके स्वागत के लिए बड़ी संख्या में बीजेपी के कार्यकर्ता और समर्थक जुटे हुए थे।
पीएम मोदी के आने की खबर मिलने के बाद आधी रात से ही समर्थकों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। इनमें एक खास समर्थक भी था, जो पीएम मोदी से मिलने के लिए 9 साल से इंतजार कर रहा है। खुद को मोदी भक्त बताने वाले इस समर्थक का नाम नुर्शीद अली है। उसने रातभर जागकर पीएम मोदी की पेंटिंग बनाई, जिसे लेकर पहुंचा था। नुर्शीद अली ने बताया कि जैसे मुझे पता चला कि पीएम मोदी यहां लैंड करने वाले हैं तो मैंने रातभर जागकर उनकी ये पेंटिंग बनाई। अली ने बताया कि उन्होंने रात 10 बजे पेंटिंग बनानी शुरू की और दो बजे जाकर पूरी हुई। इसके बाद वह पेंटिंग हाथ में लेकर तीन बजे से ही पीएम मोदी की झलक पाने के लिए एयरपोर्ट पर खड़े हैं।
9 साल से कर रहा इंतजार
जब नुर्शीद से पूछा गया कि नींद नहीं आई तो उनका जवाब था कि पीएम मोदी के लिए नींद नहीं आती। मैं 9 साल से पीएम मोदी से मिलने का इंतजार कर रहा हूं। नुर्शीद ने अपना नाम मोदी भक्त नुर्शीद अली बताया और कहा कि मां-बाप से पहले पीएम मोदी का नाम लगाता हूं। उन्होंने मेरे देश का नाम रोशन किया है। मेरे लिए दीन (धर्म) से बढ़कर देश है।

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नई संसद का उद्घाटन राष्ट्रपति को करना चाहिए तो छत्तीसगढ़ विधानसभा का उद्घाटन राज्यपाल को करना चाहिए था…

सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ के नए विधानसभा भवन की नींव रखी थी। उन्होंने ऐसा किस अधिकार के तहत किया। उनके पास छत्तीसगढ़ राज्य में कोई संवैधानिक पद नहीं है। कांग्रेस के नेताओं ने उस कार्यक्रम का बहिष्कार क्यों नहीं किया?

पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कर्नाटक विधानसभा की नींव रखी थी। कर्नाटक के राज्यपाल ने इसका उद्घाटन क्यों नहीं किया?
पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने 1981 में महाराष्ट्र विधान भवन का उद्घाटन किया था। उन्होंने उस कार्यक्रम का बहिष्कार क्यों नहीं किया?
पूर्व पीएम राजीव गांधी ने 1987 में संसद पुस्तकालय भवन की नींव रखी थी। उस कार्यक्रम का किसी ने बहिष्कार नहीं किया… ऐसा क्यों?
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 24 अक्टूबर, 1975 को संसदीय सौध का उद्घाटन किया था, लेकिन किसी ने बहिष्कार नहीं किया?

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोनिया गांधी के साथ मणिपुर के नए विधानसभा परिसर का उद्घाटन किया था। सोनिया गांधी ने किस हैसियत से मणिपुर के नए विधानसभा परिसर का उद्घाटन किया? क्या वह राष्ट्रपति थीं? या मणिपुर की मुख्यमंत्री या राज्यपाल?

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नीति परायण का सेंगोल

ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने नेहरू को पीएम बनने से कुछ ही दिनों पहले पूछा कि आप देश की आजादी को किसी खास तरह के प्रतीक के जरिए सेलिब्रेट करना चाहते हैं तो बताएं। नेहरू भारत के जाने-माने स्वतंत्रता सेनानी सी. राजगोपालाचारी के पास गए। राजगोपालाचारी मद्रास के सीएम रह चुके थे, उन्हें परंपराओं की पहचान थी। उन्होंने नेहरू को राजदंड भेंट करने वाली तमिल परम्परा के बारे में बताया। इसमें राज्य का महायाजक (राजगुरु) नए राजा को सत्ता ग्रहण करने पर एक राजदंड भेंट करता है। परंपरा के अनुसार यह राजगुरु, थिरुवदुथुरै अधीनम मठ का होता है। राजगोपालाचारी ने सुझाव दिया कि आपके पीएम बनने के बाद माउंटबेटन आपको यह राजदंड स्वतंत्रता और सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में दे सकते हैं। नेहरू राजी हो गए और लगे हाथ राजगोपालाचारी को इसकी व्यवस्था करने की जिम्मेदारी भी दे दी।

पीएम मोदी को ही क्यों दिया जा रहा है राजदंड?

इस सेरेमनी के बाद ये राजदंड इलाहाबाद संग्रहालय में रख दिया गया। 1978 में कांची मठ के ‘महा पेरियवा’ (वरिष्ठ ज्ञाता) ने इस घटना को एक शिष्य को बताया, जिसने बाद में इसे प्रकाशित किया था। कहानी को तमिल मीडिया ने वरीयता दी और जीवित रखा। यह पिछले साल तमिलनाडु में आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर एक बार फिर सामने आई। पीएम मोदी भी इससे प्रभावित हुए। उन्होंने इसकी गहन जांच के आदेश दिए। इसके बाद तय किया गया कि इसे नई संसद में स्पीकर की कुर्सी के पास रखा जाएगा। नई संसद के उद्घाटन के मौके पर इसे पूरे विधिविधान से पीएम मोदी को सौंपा जाएगा। सेंगोल की नई वेबसाइट के मुताबिक 15 अगस्त, 1947 की भावना को दोहराते हुए वही समारोह 28 मई, 2023 को नई दिल्ली में संसद परिसर में दोहराया जाएगा। दिल्ली में इस अवसर पर तमिलनाडु के कई आधीनमों के प्रणेता उपस्थित रहेंगे। वे अनुष्ठान में हिस्सा लेंगे और कोलारु पदिगम गाएंगे। सेंगोल को गंगा जल से शुद्ध किया जाएगा, जैसा कि पहले किया गया था। इसे एक पवित्र प्रतीक के रूप में प्रधानमंत्री को सौंपा जाएगा।

ज्वेलर्स का दावा- पं. नेहरू को दिया गया सेंगोल हमारे परिवार ने बनाया
चेन्नई में एक ब्रांड है वुम्मिदी बंगारू ज्वेलर्स। यह ब्रांड वुम्मिदी परिवार का है, जिसकी 5वीं पीढ़ी आज इस बिजनेस में है। इनके पुरखे वेल्लोर के एक गांव में आभूषण बनाते थे। कंपनी की वेबसाइट पर दावा किया गया है कि माउंटबेटन ने जो सेंगोल नेहरू को सौंपा था, उसे इनके पुरखों ने बनाया था।

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Satyendar Jain: तिहाड़ जेल के बाथरूम में गिरे सत्येंद्र जैन, DDU अस्पताल में कराए गए भर्ती

दिल्ली सरकार में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन तिहाड़ जेल के बाथरूम में गिर गए हैं। चक्कर आने के कारण वह गिरे। इसके बाद जेल प्रशासन ने उन्हें पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती कराया है। सत्येंद्र जैन को बीते एक हफ्ते में दूसरी बार अस्पताल में एडमिट कराया गया है।

दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। तिहाड़ जेल प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक कल रात सत्येंद्र जैन अपने वार्ड के अंदर बाथरूम में गिर गए थे। बाथरूम के अंदर पैर फिसलने की वजह से सत्येंद्र जैन गिरे थे।

इससे पहले 22 मई को भी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में तिहाड़ जेल में बंद पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को दिल्ली पुलिस सफदरजंग अस्पताल लेकर पहुंची थी। रीढ़ की हड़्डी में तकलीफ होने की वजह से उनको अस्पताल लाया गया था। 

इससे पहले शनिवार को इसी तरह की शिकायत करने पर जेल प्रशासन ने उनको दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल भेजा था, वहां से आने के बाद पूर्व मंत्री ने दूसरे डॉक्टर से भी बीमारी को लेकर राय लेने के बाबत जेल प्रशासन को अवगत कराया था। अस्पताल से राय लेने के बाद उन्हें वापस तिहाड़ लाया गया।

जेल अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को सत्येंद्र जैन ने रीढ़ की हड्डी में दर्द की शिकायत की थी। अदालत में उनके वकील ने भी बताया था कि जैन का वजन 35 किलो घट गया है। उसके बाद जेल प्रशासन ने पुलिस टीम के साथ उन्हें शनिवार को दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल भेजा था, जहां पर डॉक्टरों ने उनका चेकअप किया और कुछ सलाह दी। 

उसके बाद वह जेल में वापस आ गए। जेल सूत्रों का कहना है कि सत्येंद्र जैन ने जेल प्रशासन को पत्र लिखकर अपनी बीमारी को लेकर दूसरे डॉक्टरों से राय लेने की गुजारिश की थी। उसके बाद जेल प्रशासन ने सोमवार को उन्हें पुलिस टीम की सुरक्षा में सफदरजंग अस्पताल भेजा। पुलिस टीम उन्हें लेकर न्यूरो सर्जरी ओपीडी पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने उनकी जांच पड़ताल की। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान सत्येंद्र जैन ने अपनी बीमारी को लेकर डॉक्टरों की राय ली। 

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Varanasi Birthday: बनारस, काशी और अस्सी से वाराणसी तक का सफर, जन्म और पुनर्जन्म के चक्र से मिलती है मुक्ति

Varanasi Birthday: आज वाराणसी का जन्मदिन है। 24 मई 1956 को वाराणसी का आधिकारिक नाम स्वीकार किया गया था। उससे पहले वाराणसी को बनारस, काशी अस्सी के नाम से जाना जाता था। 

आज हम वाराणसी की बात इसलिए कर रहे हैं कि क्योंकि आज वाराणसी का जन्मदिन है। 24 मई 1956 को वाराणसी का आधिकारिक नाम स्वीकार किया गया था। उससे पहले वाराणसी को बनारस, काशी अस्सी के नाम से जाना जाता था। 

हर शहर का अपना इतिहास और जियोग्राफी होती है। लेकिन आधिकारिक नाम गजेटियर और दस्तावेजों में दर्ज होना जरूरी होता है। वाराणसी का नाम भी दस्तावेज में दर्ज होने के बाद से आधिकारिक हुआ। हांलाकि अभी भी लोगों की जुबां पर काशी और बनारस का नाम चढ़ा है लेकिन जिले का आधिकारिक नाम वाराणसी ही है। 

यहां मिलती है जन्म और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति 
देवाधिदेव महादेव और पार्वती का निवास, वाराणसी की उत्पत्ति के बारे में अभी तक किसी के पास सटीक जानकतारी नहीं है। लेकिन ये मान्यता है कि काशी की धरती पर मरने वाला जन्म और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति प्राप्त करता है। बनारस 
3000 से अधिक वर्षों से सभ्यता का केंद्र है। 

संस्कृत, योग, अध्यात्मवाद और हिंदी भाषा फला फूला
विश्वप्रसिद्ध सारनाथ के बारे में कौन नहीं जानता। भगवान बुद्ध ने आत्मज्ञान के बाद पहला उपदेश यहीं दिया था। वाराणसी शिक्षा का भी केंद्र रहा है। यहां  संस्कृत, योग, अध्यात्मवाद और हिंदी भाषा फला फूला है। नृत्य और संगीत के लिए भी बनारस दुनिया में जाना जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध सितार वादक  रविशंकर और उस्ताद बिस्मिल्लाह खान (प्रसिद्ध शहनाई वादक) सभी इसी शहर के पुत्र हैं। 

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