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झारखंड की 43 सीटों पर 29.31 प्रतिशत मतदान

झारखंड विधानसभा चुनाव के फर्स्ट फेज में मंगलवार को 15 जिलों की 43 सीटों पर सुबह 7 बजे से वोटिंग जारी है। सुबह 11 बजे तक 29.31% मतदान हुआ। अब तक सबसे ज्यादा सिमडेगा जिले में 15% और सबसे कम पूर्वी सिंहभूम जिले में 11.25% वोट पड़े हैं। खास बात है कि आदिवासी रिजर्व सीटों पर मतदान ज्यादा है। वहां सुबह से ही बूथों पर लंबी कतार देखी जा रही है। इसमें महिलाएं ज्यादा हैं, जबकि रांची-जमशेदपुर शहरी इलाके में वोटिंग की रफ्तार धीमी है। झारखंड के फर्स्ट फेज में पूर्व सीएम चंपाई सोरेन, उनका बेटा बाबूलाल सोरेन, पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा की पत्नी मीरा मुंडा, मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा, रघुवर दास की बहू पूर्णिमा साहू, मंत्री मिथिलेश ठाकुर, मंत्री रामेश्वर उरांव, रांची विधायक सीपी सिंह और जेएमएम की राज्यसभा सांसद महुआ माजी चुनाव लड़ रही हैं। राज्य की 81 विधानसभा सीटों में बाकी बची 38 सीटों पर 20 नवंबर को वोटिंग होगी।
29 सीट जीता था इंडिया- जिन 43 सीटों पर वोटिंग हो रही है, पिछले चुनाव नतीजों (2019) को देखा जाए तो यूपीए (वर्तमान में इंडी ब्लॉक) ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

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मप्र की दो सहित 31 सीटों पर मतदान जारी

10 राज्यों की 31 विधानसभा और केरल की वायनाड लोकसभा सीट पर बुधवार सुबह 7 बजे से वोटिंग शुरू हो गई है। इनमें मप्र की विजयपुर और बुधनी सीट भी शामिल हैं। बुधनी में बुधवार को केंद्रीय मंत्री शिवराजसिंह चौहान और उनके परिवार ने भी वोट किया। रिजल्ट 23 नवंबर को आएगा।
केरल की वायनाड लोकसभा सीट पर कांग्रेस की प्रियंका गांधी वाड्रा का मुकाबला भाजपा की नव्या हरिदास और लेफ्ट के सत्यन मोकेरी से है। प्रियंका वायनाड में एक बूथ पर पहुंचीं और लोगों से मिलीं। उन्होंने कहा कि वायनाड के लोगों ने मेरे भाई राहुल को प्यार दिया है। वे मुझे भी अपनी सेवा का मौका देंगे। उधर, पश्चिम बंगाल के कूच बिहार जिले के सीताई सीट से भाजपा कैंडिडेट दीपक कुमार रॉय ने कहा टीएमसी के बदमाश वोटर्स को डरा रहे हैं। कई मतदान केंद्र खाली हैं। पुलिस टीएमसी की मदद कर रही है।
रिकॉर्ड मतों से जीतेंगे : शिवराज
चौहान की परम्परागत सीट बुधनी से बीजेपी ने रमाकांत भार्गव को मौका दिया है। उनका मुकाबला कांग्रेस के डॉ. राजकुमार पटेल से है। भार्गव 2019 में सांसद रहे हैं। वहीं पटेल 1993 में बुधनी से विधायक रह चुके हैं। शिवराज सिंह चौहान ने अपना वोट डालने के बाद मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि भार्गव रिकार्ड मतों से जीतेंगे।

कहां कितनी वोटिंग
9 बजे तक 11 बजे तक
विजयपुर 17.86 38.26
बुधनी 16.90 36.00
राज्यवार चुनाव स्थिति
राज्य सीट मतदान
राजस्थान 7 20.43 से 28.97
प.बंगाल 6 25.17 से 32.00
असम 5 24.65 से 32.90
बिहार 4 19.60 से 24.81
कर्नाटक 3 25.96 से 27.02
मध्यप्रदेश 2 36.00 से 38.26
छत्तीसगढ़ 1 18.73
गुजरात 1 24.39
केरल 1 29.36
मेघालय 1 37.50
कुल 31 सीट

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SC Guidelines on Bulldozer Action:सरकारें जज नहीं बन सकतीं’ प्वाइंट में समझें बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन

सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारें न्यायाधीश नहीं बन सकतीं। किसी भी कानून व्यवस्था के तहत कार्रवाई करने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

बुलडोजर कार्रवाई पर रोक: कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अवैध निर्माणों को तोड़ने की कार्रवाई राज्य सरकारों द्वारा बिना न्यायिक आदेश के नहीं की जा सकती।

प्राकृतिक न्याय का पालन: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी संपत्ति तोड़े जाने से पहले सुनवाई का अधिकार मिलना चाहिए। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है, अगर बिना सुनवाई के कार्रवाई की जाती है।

प्रशासनिक फैसले न्यायिक तरीके से किए जाएं: अदालत ने यह भी कहा कि प्रशासन को अपने फैसले लेने में स्वतंत्रता है, लेकिन उसे न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना होगा।

अवैध निर्माणों पर कार्रवाई: सुप्रीम कोर्ट ने माना कि अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जरूरत है, लेकिन यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए, न कि मनमाने तरीके से।

राज्य सरकारों को दी सलाह: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को यह सलाह दी कि वे अवैध निर्माणों को हटाने के लिए उचित प्रक्रिया अपनाएं और इसे न्यायिक समीक्षा से बचाने के लिए कार्रवाई करें।

दूसरे राज्य की कार्रवाई पर भी ध्यान: कोर्ट ने कहा कि बुलडोजर कार्रवाई से पहले संबंधित व्यक्ति को उचित समय और मौका देना जरूरी है, ताकि वे अपने पक्ष को रख सकें।

सुनवाई का अधिकार: कोर्ट ने यह भी कहा कि जो लोग प्रभावित हो रहे हैं, उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलना चाहिए।

संविधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट ने संविधानिक सिद्धांतों और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने से बचने की आवश्यकता पर बल दिया।

कानूनी प्रक्रिया का पालन: अंत में, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बुलडोजर जैसी कार्रवाइयों में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए और इसे न्यायिक आदेश से ही संचालित किया जाना चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब ……शराब की दुकानों और पबों में उम्र जांचने की क्या है व्यवस्था?

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र से उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें शराब की दुकानों और अन्य विक्रय स्थलों पर उम्र की अनिवार्य नियमावली है। कोर्ट ने उम्र की प्रभावी नियमावली और सुदृढ़ नीति बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। याचिका में कहा गया है कि विभिन्न राज्यों की आबकारी नीति में उम्र संबंधी कानून है, जिसके तहत एक निश्चित उम्र से कम उम्र के व्यक्ति के लिए शराब पीना या रखना अवैध है। इसके बावजूद शराब की बिक्री या सेवन के स्थानों पर उपभोक्ताओं या खरीदारों की उम्र की जांच करने के लिए कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है।
घर पर शराब की आपूर्ति का विरोध- याचिका में शराब की घर पर ही आपूर्ति करने की नीति का विरोध किया गया है। साथ ही दलील दी गई कि इससे कम उम्र के लोगों में शराब पीने की लत तेजी से बढ़ेगी। यह याचिका न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई।
देश में शराब पीने की न्यूनतम
उम्र 18 से 25 साल
मालूम हो कि देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शराब पीने की न्यूनतम कानूनी उम्र 18 से 25 साल के बीच तय की गई है। इसके बावजूद कई जगहों पर 18 से कम उम्र के लोग भी शराब पीते हुए दिख जाते हैं।
उम्र जांचने की नहीं है कोई व्यवस्था
गैर सरकारी संगठन (ठॠड) कम्यूनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग ने यह याचिका दाखिल की है। उसके वकील विपिन नायर ने सुनवाई के लिए दलील दी कि शराब की दुकानों, बार, पब आदि में उपभोक्ताओं या खरीदारों की उम्र जांचने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। इसमें कहा गया है कि इस संबंध में एक ठोस नीति से शराब पीकर गाड़ी चलाने की समस्या को कम करने और रोकने में मदद मिलेगी तथा कम उम्र में शराब पीने पर भी अंकुश लगेगा।

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केंद्र सरकार की नौेकरी के लिए 2.57 करोड़ से ज्यादा आवेदन, 1.41 लाख की भर्ती की गई

नौकरी एक ऐसा मुद्दा है, जो शायद कभी खत्म नहीं होगा। इसमें भी सरकारी नौकरी। अब केंद्र सरकार की नौकरियों पर एक रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि 2023-24 में केंद्र सरकार की नौकरियों के लिए ढाई करोड़ से ज्यादा आवेदन आए थे। इनमें से डेढ़ लाख लोगों को भी नौकरी नहीं मिली।
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट में बताया गया है कि 2023-24 में केंद्र सरकार की नौकरियों में भर्ती के लिए होने वाले एग्जाम में 2.57 करोड़ से ज्यादा उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था। इन उम्मीदवारों में से 1.41 लाख की भर्ती की गई थी। ये भर्तियां ग्रुप-बी और सी में हुई थीं।
सबसे ज्यादा 46,554 भर्तियां उअढऋ में कॉन्स्टेबल, असम राइफल में राइफलमैन और एनसीबी में सिपाही पद पर हुई थीं।
आंकड़ों से पता चलता है कि 2023-24 में 2022-23 की तुलना में लगभग दोगुना भर्तियां हुई हैं। 2022-23 में 73,721 भर्तियां हुई थीं। इससे पहले 2021-22 में 29,173 भर्तियां ही हुई थीं।
एसएससी और यूपीएससी
की 32 परीक्षाएं
केंद्र सरकार के पदों पर भर्तियां करने वाली दो बड़ी एजेंसियां- स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (एसएससी) और यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) हैं।
एसएससी की सालाना रिपोर्ट बताती है कि 2022-23 में कमीशन ने देशभर में 32 परीक्षाएं करवाई थीं, लेकिन तब तक 14 परीक्षाओं का ही फाइनल रिजल्ट आया था। इन परीक्षाओं में 1.32 करोड़ से ज्यादा उम्मीदवार शामिल हुए थे। इन परीक्षाओं के जरिए केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के 1,276 पदों पर 72,445 उम्मीदवारों को भर्ती किया गया था। इन उम्मीदवारों में 44,400 से ज्यादा एससी, एसटी और ओबीसी से थे।
इसी तरह से यूपीएससी ने 2022-23 में 15 एग्जाम करवाए थे। इनके लिए साढ़े 33 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने आवेदन दिया था। इन परीक्षाओं में चुने गए लगभग 28 हजार उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया गया था। इंटरव्यू के बाद 4,195 उम्मीदवारों को भर्ती किया गया था। इनमें से 2,721 उम्मीदवारों को सिविल सर्विस और 1,474 को डिफेंस सर्विस के लिए भर्ती किया गया गया था।
यूपीए बनाम एनडीए: भर्तियों
में कौन आगे?
पिछले साल जून में केंद्र सरकार ने भर्तियों की जानकारी संसद में दी थी। इसमें बताया गया था कि मोदी सरकार में 2014 से 2023 के बीच 8,82,189 भर्तियां की गई हैं। ये भर्तियां एसएसी, यूपीएससी और आरआरबी के जरिए हुई थीं। जबकि, 2004 से 2014 के बीच यूपीए सरकार में 6,02,045 भर्तियां हुई थीं। मोदी सरकार में यूपीएससी के जरिए 50,906 भर्तियां हुई थीं। जबकि, एसएससी के जरिए 4,00,691 उम्मीदवारों को भर्ती किया गया था। वहीं, आरआरबी के जरिए 4,30,592 पदों पर भर्तियां हुई थीं।

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