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इंदौर

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर…अंजनी पुत्र के जन्म की धूमजय हनुमान ज्ञान गुण सागर…

हिन्दुस्तान मेल, इंदौर
हनुमान जन्मोत्सव पर आज शहर भक्ति के रंग में रंगा नजर आ रहा है। रूद्र के 11वें अवतार हनुमानजी के जन्मोत्सव पर शहर के सभी छोटे-बड़े, नूतन और प्राचीन हनुमान मंदिरों में विशेष अनुष्ठान हो रहे हैं। मंगलवार को हनुमान जन्मोत्सव का विशेष संयोग आस्था, विश्वास और उमंग की सिंदूरी छटा लिए आया है। श्रीराम के भक्त के जन्मोत्सव पर कहीं भक्तों ने अपने आराध्य का स्वर्ण आभूषणों से श्रृंगार किया, तो कहीं काठियावाड़ी पोषाक भगवान को धारण करवाकर गुजराती व्यंजनों का भोग लगाया। अभिषेक कर सुबह 6 बजे मंदिरों में जन्म आरती की गई और फिर 56 भोग अर्पित किए जा रहे हैं। शाम को महाआरती के साथ ही शहर में कई स्थानों पर भंडारा भी होगा। कई मंदिरों में जन्मोत्सव अनुष्ठान की शुरूआत पहले ही हो चुकी है।

’ पंचकुइया स्थित वीर बगीची में भगवान का स्वर्ण आभूषणों से श्रृंगार किया गया है। आज सुबह 6 बजे भक्त मंडल व श्रद्धालुओं द्वारा जन्म आरती की गई। शाम 5 बजे महाआरती कर भगवान को छप्पन भोग समर्पित किए जाएंगे। मंदिर में लीली, मोगरा, एनथोरियम, गेंदा, सेवंती, गुलाब आदि देसी-विदेशी फूलों से फूल बंगला सजाया गया है। शाम को 60 हजार भक्तों के लिए भंडारा भी होगा।
’ राजवाड़ा स्थित श्री वनखंडी हनुमान मंदिर में सुबह 6 बजे हनुमान जन्मोत्सव की आरती कर जन्मोत्सव की शुरूआत की गई। रात 8 बजे सुंदरकांड पाठ व भजन संध्या आयोजित होगी।
’ कैट रोड स्थित हरिधाम आश्रम में बने संकटमोचन हनुमान मंदिर में सुबह 6 बजे जन्मआरती की गई। यहां हनुमानजी का श्रृंगार आम, अंगूर, संतरा, केला, अनानास व सेवफल से किया गया है। शाम को हनुमत कथा के समापन के बाद प्रसाद वितरण होगा। रात्रि में सुंदरकांड पाठ का आयोजन होगा।

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जांच समिति की पड़ताल शुरूहा​थ लगे महत्वपूर्ण सुराग

नगर निगम के ड्रेनेज विभाग में हुए 28 करोड़ 76 लाख रुपए के फर्जी बिल घोटाले की नगर निगम स्तर पर जांच शुरू हो गई है। उच्च स्तरीय समिति द्वारा फर्मों के अलावा कुछ अफसर व कर्मचारियों की भी जांच की जा रही है। जांच के तहत पूछताछ किए जाने के साथ दस्तावेजों को भी खंगाला जा रहा है। जांच के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे है।
फजीर्वाड़े से जुड़ी कई फाइल व बिलों को समिति ने अपने कब्जे में ले लिया है। जांच के चलते फर्मों के खातों को सील कर उन्हें ब्लेक लिस्ट कर दिया गया है। निगमायुक्त शिवम वर्मा ने समिति को 15 दिनों में जांच पूरी कर प्रतिवेदन सौंपने को कहा है।
उल्लेखनीय है कि ड्रेनेज विभाग के तहत 5 फर्मों द्वारा बिना काम के फर्जी बिल तैयार कर लेखा विभाग में भुगतान के लिए प्रस्तुत किए गए थे। इन 5 फर्म जिनमें मेसर्स नींव कंस्ट्रक्शन प्रोयरायटर मोहम्मद साजिद, मेसर्स ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्रोयरायटर मोहम्मद सिदिकी, मेसर्स किंग कंस्ट्रक्शन प्रोपरायटर मो. जाकिर, मेसर्स क्षितिज इंटरप्राइजेस प्रोपरायटर रेणु वडेरा एवं मेसर्स जहान्वी इंटरप्राइजेस प्रोपरायटर राहुल वडेरा शरीक है।
इन फर्मो द्वारा 28 करोड़ से ज्यादा के 20 पे आॅर्डर आॅडिट के पश्चात लेखा शाखा में प्रस्तुत किये गये थे। लेखा शाखा में प्राप्त उक्त पे आॅर्डर की प्रारंभिक जांच करने पर उक्त पे आॅर्डर में अधिक राशि के होने एवं मात्र 5 फर्म के होने से देयको के संबंध में शंका उत्पन्न हुई। उक्त प्रकरण की प्रथम दृष्टया जांच में प्रकरण फर्जी हस्ताक्षर एवं कुटरचित दस्तावेज के आधार पर तैयार किया जाना पाया गया था।
अन्य नगरीय निकाय भी जांच के दायरे में- इंदौर नगर निगम फर्जी बिल कांड सामने आने के बाद प्रदेश के अन्य नगरीय निकायों में हुए कार्य भी जांच के दायरे में आ गए हैं।
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने प्रमुख सचिव को जांच के लिए कहा है। इन निकायों में पिछले पांच वर्षों में विभिन्न प्रोजेक्ट के तहत हुए विकास कार्यों और उनके एवज में किए गए भुगतान की जांच की जाएगी।

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चौराहा को बनाया पार्किंग जिम्मेदारों की आंख बंद

शहर के यातायात को सुधारने के लिए विभिन्न प्रकार के अभियानों की कवायद यातायात पुलिस और प्रशासन द्वारा की जाती है। इसके बावजूद यातायात व्यवस्था में कोई खास सुधार दर्ज नहीं किया गया है। शुक्रवार शाम को बॉम्बे हॉस्पिटल चौराहे पर इंफिनिटी बिल्डिंग में कोई आयोजन था। इस आयोजन में आए लोगों ने चौराहे पर बाइक खड़ी कर दी। जिसके चलते ट्रैफिक जाम होने लगा। सर्विस रोड पर पहले से ही कई वाहन खड़े थे जिसके चलते यातायात काफी बाधित रहा। यहां आए दिन इस प्रकार की समस्या रहती है।

आयोजक की गलती
यातायात पुलिस और नगर निगम द्वारा वहां खड़े वाहनों के चालान काटे गए। अजय कुमार यादव ने बताया की इंफिनिटी के आॅर्गनाइजर की गलती हैं। गार्ड बाहर बैठा है, उसके बावजूद लोग गाड़ी खड़ी कर रहे हैं। उनको मना करना चाहिए कि पार्किंग स्थान पर गाड़ी को पार्क करें।

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कलेक्टर के निशाने पर राजस्य का राजा

इंदौर। राजस्व प्रकरणों के निराकरण को तेजी देने के लिए कलेक्टर आशीष सिंह ने पूरी ताकत झौंक दी है। लगातार बैठक, हिदायत, समझाइश और चेतावनी के बावजूद राजस्व का अमला सुधर नहीं रहा है। इसीलिए आरआई और पांच पटवारी को निलंबित करने के बाद अब सिंह ने नायब तहसीलदार और तहसीलदारों पर अपने तेवर दिखाए हैं। उन्होंने किसी की सात दिन की तनखा राजसात की तो किसी की महीनेभर की। हालांकि मैदानी स्तर पर अब भी इन तहसीलों में ऐसे लोग जमा हैं जो सुधार के पक्षधर नहीं है। क्योंकि इससे उनकी दुकानदारी ठप हो रही है।
कलेक्टर ने पिछलों दिनों अपर कलेक्टरों से जांच कराई थी। इसमें तहसील कार्यालयों में पेंडिंग प्रकरणों की संख्या अच्छी खासी मिली। जांच रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने कनाड़िया तहसीलदार योगेश मेश्राम, जूनी इंदौर तहसीलदार जगदीश रंधावा, मल्हारगंज तहसीलदार शैवाल सिंह व नायब तहसीलदार जितेंद्र वर्मा की एक-एक महीने की तनखा राजसात की गई। इसके साथ ही इन पर डीई बैठाई गई। खुड़लै नायब तहसीलदार जितेंद्र सोलंकी, सांवेर के नायब तहसीलदार चौखालाल टांक, हातोद तहसीलदार शिखा सोनी, बेटमा नायब तहसीलदार धर्मेंद्र सिंह चौहान की एक सप्ताह की तनखा रोकी।

इंदौर। राजस्व प्रकरणों के निराकरण को तेजी देने के लिए कलेक्टर आशीष सिंह ने पूरी ताकत झौंक दी है। लगातार बैठक, हिदायत, समझाइश और चेतावनी के बावजूद राजस्व का अमला सुधर नहीं रहा है। इसीलिए आरआई और पांच पटवारी को निलंबित करने के बाद अब सिंह ने नायब तहसीलदार और तहसीलदारों पर अपने तेवर दिखाए हैं। उन्होंने किसी की सात दिन की तनखा राजसात की तो किसी की महीनेभर की। हालांकि मैदानी स्तर पर अब भी इन तहसीलों में ऐसे लोग जमा हैं जो सुधार के पक्षधर नहीं है। क्योंकि इससे उनकी दुकानदारी ठप हो रही है।

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नमामि गंगे के लिए नमामि कान्ह जरूरी…

इंदौर। गंगा नदी को साफ करने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा नमामि गंगा योजना पर काम किया जा रहा है। 20 हजार करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट पर साल 2014 में काम प्रारंभ किया गया था और साल 2021 तक गंगा को प्रदूषण मुक्त करने का लक्ष्य था, लेकिन इस लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सका। हजारों करोड़ रुपए खर्च करने के बाद गंगा प्रदूषित की प्रदूषित ही रही। इसके कारणों को खोजा गया तो पता चला कि गंगा की सहायक नदियां जो देश भर से आकर इसमें मिलती है उन्हें भी साफ करना पड़ेगा ताकि उन नदियों का गंदा पानी गंगा में आकर नहीं मिले। आपकों यह जानकार शायद आश्चर्य हो सकता है कि शहर की कान्ह और सरस्वती नदी का पानी गंगा नदी में जाकर मिलता है। कान्ह-सरस्वती और शिप्रा गंगा की सहायक नदियों में शामिल हंै। इसी के चलते नमामि गंगा प्रोजेक्ट के तहत कान्ह- सरस्वती और शिप्रा नदी को साफ करने पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे है।

पिछले 10 सालों में कान्ह-सरस्वती को साफ करने पर 1200 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं लेकिन इन दोनों नदियों को साफ नहीं किया जा सका है। अब नमामि गंगा प्रोजेक्ट के तहत कान्ह-सरस्वती और शिप्रा नदी के कायाकल्प पर 603 करोड़ रुपए और खर्च किए जाएंगे। जानकारों के अनुसार शहर की कान्ह-सरस्वती और उज्जैन की शिप्रा नदी गंगा की सहायक नदियां हैं। इंदौर से निकलकर कान्ह-सरस्वती सांवेर के आगे शिप्रा से मिलती है और उज्जैन पहुंचती है। यहां से आगे जाकर शिप्रा चंबल नदी में मिल जाती है। चंबल नदी आगे जाकर यमुना में मिलती है। और यमुना नदी आगे जाकर प्रयागराज में संगम बनकर गंगा में मिल जाती है। इस प्रकार कान्ह-सरस्वती नदी का जुड़ाव गंगा नदी से है। गंगा को साफ करने के लिए इसकी सहायक नदियों को साफ करने के प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। इन नदियों में मिलने वाले सीवेज, गंदगी और नालों को रोका जाएगा। जब कान्ह-सरस्वती सहित गांगा की सहायक नदियों को साफ कर लिया जाएगा तभी गंगा प्रदूषण मुक्त होगी।
केन्द्र देगी पैसा, स्थानीय स्तर
पर होगी निगरानी
गंगा की सहायक नदियों कान्ह-सरस्वती और शिप्रा को साफ करने के लिए 603 करोड़ रुपए की राशि केन्द्र सरकार द्वारा दी जाएगी। इसके साथ ही अगले 15 साल तक इस प्रोजेक्ट में लगने वाले अन्य खर्च व मेंटेनेंस की राशि भी केन्द्र सरकार द्वारा ही प्रदान की जाएगी। इस प्रोजेक्ट को क्रियान्वित करने और उसकी निगरानी की जिम्मेदारी स्थानीय नगरीय निकायों की रहेगी।

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