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सड़क पर पलटा ट्रक…भूसे से लगा जाम

शिप्रा फ्लाईओवर पर गुरुवार सुबह भूसे से भरा एक मिनी ट्रक ऐसा पलटा कि सामने का हिस्सा पूरी तरह टूट गया। वहीं पिछला हिस्सा ब्रिज पर लटक गया। जिससे भूसा बिखरा। देवास से इंदौर की ओर आने वाले वाहनों की कतार लगती रही। जिसे देखते हुए औद्योगिक थाने का बल लगाया गया। पुलिस ने ताबड़तोड़ भूसा दूसरे ट्रक में शिफ्ट कराया। क्रेन से शाम को ट्रक भी हटा दिया गया है। ड्राइवर कमलेश को घुटने में चोट आई। उसने बताया कि एक कार वाले को बचाने के चक्कर में गाड़ी पलट गई थी।

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29 साल बाद सरकारी स्कूल के लिए 100 बसें चलाने की कवायद

इंदौर। 29 साल बाद सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को निजी स्कूलों की तर्ज पर स्कूल बस सुविधा उपलब्ध कराने की कवायद की जा रही है।
इंदौर जिले के ग्यारह सीएम राइज स्कूलों के छात्रों को नए शैक्षणिक सत्र से स्कूल बस सुविधा मिलने का दावा किया गया है। खास बात यह है कि छात्रों को बस सुविधा के लिए किसी प्राकार का शुल्क नहीं देना होगा अर्थात बस सुविधा फ्री रहेगी। हालांकि इस सुविधा के बदले बस संचालकों को सरकार भुगतान करेगी। इन स्कूलों में पढ़ने वाले 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों के लिए 100 बसें चलाई जाएगी। फिलहाल इन बसों का रूट तय किया जा रहा है।
जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार स्कूल के 2 किमी के दायरे से बाहर रहने वाले छात्र इस सुविधा का लाभ ले सकेंगे। शिक्षा विभाग ने सीएम राइज स्कूल के प्राचार्यों से छात्रों की सूची रूट सहित जमा करने को कहा है। इंदौर शहर में सात और इंदौर ग्रामीण में चार सीएम राइज स्कूलों के लिए यह बस चलाई जाएंगी।
नहीं मिल रहे थे ट्रांसपोर्टर
सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए बस सुविधा प्रारंभ करना चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि बस सुविधा मुफ़्त है जिससे ट्रांसपोर्टरों के लिए यह बहुत लाभदायक नहीं हो सकता है। इसके लिए पूर्व में प्रयास किए गए थे।
इसके लिए कई बार टेंडर भी जारी किए गए थे लेकिन ट्रांसपोर्टर नहीं मिल सका था। अब निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सरकार 2050 रुपए प्रति सीट के हिसाब से सरकार ट्रांसपोर्टरों को भुगतान करेगी। बस 17, 25, 32 और 50 सीटर रहेगी, यह छात्रों की संख्या पर निर्भर करेगा। बस का ड्राइवर, कंडक्टर और हेल्पर संबंधित ट्रांसपोर्टर को ही रखना होगा।
बुरहानपुर-बड़वानी में उपलब्ध है सुविधा
इंदौर संभाग के बुरहानपुर और बड़वानी में संचालित सीएम राइज स्कूलों में इस प्रकार की बस सुविधा को प्रारंभ कर दिया गया है। अब जून 2024 में प्रारंभ होने वाले नए सत्र में इंदौर, धार, खंडवा, खरगोन, नीमच-मंदसौर जिलों के सीएम राइस स्कूलों में बस सुविधा प्रारंभ करने की पूरी तैयारी है।

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किडनैपिंग की कहानी रचने वाली छात्रा की उज्जैन-ओंकारेश्वर में तलाश जारी…

हिन्दुस्तान मेल, इंदौर
राजस्थान के कोटा से गायब बैराड़ (शिवपुरी) निवासी 20 वर्षीय छात्रा काव्या धाकड़ का पता अब तक पुलिस को नहीं चल सका है। लड़की की लोकेशन इंदौर और आसपास के इलाके में बताई जा रही है। क्राइम ब्रांच और राजस्थान पुलिस भी इंदौर में सक्रिय है। दोनों टीमें छात्रा और उसके साथी को खोज रही हैं। पुलिस को शंका है दोनों उज्जैन या ओंकारेश्वर में हो सकते हैं। काव्या का मोबाइल भी इंदौर रिंग रोड से ही बंद हुआ है। इस बीच छात्रा के पिता भी इंदौर पहुंच गए हैं।
एडीशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के मुताबिक काव्या और हर्षित को लेकर अभी भी इंदौर में क्राइम ब्रांच की टीमें सर्चिंग कर रही हैं। गजेंद्र उर्फ ब्रजेश और अमन को राजस्थान पुलिस अपने साथ ले गई है। जबकि हर्षित का मोबाइल गजेंद्र के कमरे पर ही मिला। जिसे क्राइम ब्रांच ने जब्त कर लिया। दूसरे साथी अमन ने पूछताछ में बताया कि वह काव्या और हर्षित को छोड़ने मेन रोड तक आए था। इसके बाद वह कहां गए उन्हें नहीं पता।
ब्वायज हास्टल में रुकवाया लड़की को
केस की जांच के दौरान यह पता चला कि हास्टल के एक ही कमरे में छात्रा और ब्वायफ्रेंड ठहरा था। नियमानुसार हास्टल में विद्यार्थी के माता-पिता व स्वजन को ठहरने के लिए भी पहचान पत्र दिखाना होता है। वैसे ब्वायज हास्टल में लड़की और गर्ल्स हास्टल में लड़कों को रुकने की अनुमति नहीं रहती है। प्रशासन ने हास्टल चलाने के लिए नियम बना रखे हैं। हास्टल संचालक थोड़े से मुनाफे के चलते धज्जियां उड़ते रहते हैं। वहीं जिम्मेदार अफसर हास्टलों का दौरा नहीं करते हैं। इस कारण संचालकों की लापरवाही बढ़ने लगी है।

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जिनसे होता रहा बचाव… अब उन्हें बचाना बहुत जरूरी

भोपाल में पानी का सबसे बड़ा स्रोत और शहर की लाइफ लाइन बड़े तालाब को सेहतमंद रखने वाले जलीय पौधों पर खतरा मंडरा रहा है। तालाब के आसपास लगातार बढ़ रहा अतिक्रमण, इंसानी दखल और सीवेज मिलने के कारण पैदा होने वाली जलकुंभी इन एक्वाटिक प्लांट को धीरे-धीरे खत्म कर रही है। जब हमने इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट (आईआईएफएम) के साथ मिलकर मैक्रोफाइट्स आॅफ भोज वेटलैंड विषय पर रिसर्च की तो कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं। तीन साल तक हुई इस रिसर्च में पता चला कि यहां पर 223 प्रजातियों के जलीय पौधे हैं, जिसमें से 103 प्रजाति के पौधे विलुप्ति के कगार पर हैं।
इनमें बड़ी संख्या में ऐसे पौधे हैं, जो पानी में मौजूद विषैले तत्वों को खत्म करते हैं और पानी को साफ करते हैं। इन पौधों से पानी में आॅक्सीजन की मात्रा बनी रहती है, जो अन्य जल जीवों के बने रहने और बढ़ोतरी के लिए जरूरी हैं। तीन ऐसी प्रजाति के पौधे भी यहां हैं, जो मांसाहारी हैं और इनकी जड़ें और फूल तालाब में मौजूद कीड़ों को खाते हैं।
कुल मिलाकर इन जलीय पौधों की वजह से बड़े तालाब की जैव विविधता और ईको सिस्टम बना रहता है, जो किसी भी वाटर बॉडी की लंबी उम्र के लिए जरूरी है। इस समय बड़े तालाब के लिए जलकुंभी और बेशरम के पौधों से सबसे बड़ा खतरा है। ये जलकुंभी और बेशरम के पौधों को हटाते वक्त भी ये सावधानी जरूरी है कि इनसे अन्य जलीय पौधों को नुकसान न पहुंचे।

कैसे खत्म हो रहे जलीय पौधे
’ तालाब के आसपास अतिक्रमण और अन्य तरह की गतिविधियों के कारण जलीय पौधों को नुकसान।
’ विदेशी पौधों की प्रजातियां, जैसे- जलकुंभी, बेशरम आदि लोकल एक्वाटिक प्रजातियों को खत्म कर रही हैं। ये एक तरह से पानी की गाजर घास हैं।
’ चारों ओर हो रहे कंस्ट्रक्शन वर्क की वजह से पौधों को नुकसान पहुंच रहा है।
’ अधिक पशु चराई, फिशिंग और टूरिज्म की वजह की वजह से भी पौधे खत्म हो रहे हैं।
’ सिंघाड़े की खेती में उपयोग होने वाली कीटनाशक।

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‘सम्मानजनक तरीके से बोलिए… आप अनादर नहीं कर सकते’अफसरों के बीच तनातनी

जेल विभाग के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी और सचिव ललित दाहिमा के बीच तनातनी हो गई। इसकी वजह रही… फार्मासिस्ट के वेतनवृद्धि और एक जेल अधीक्षक के कोर्ट केस से जुड़ी अवमानना की फाइलों की नोटशीट पर लिखी टीप। मामला बुधवार का है, जो गुरुवार रात सामने आया। मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। रस्तोगी पूर्व सीएम के पीएस रहे हैं। रस्तोगी ने दाहिमा से कह दिया कि यहां से जाइए। दाहिमा ने जवाब दिया- सम्मान से बोलिए। विवाद इतना बढ़ा कि बात सीएम और मुख्य सचिव तक पहुंच गई। गुरुवार को दाहिमा ने मुख्य सचिव वीरा राणा से मिलकर पूरी जानकारी दी। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही एक अधिकारी की जेल विभाग से रवानगी हो सकती है।

ऐसी हुई तू-तू-मै-मै… मामला सीएम तक पहुंचा
रस्तोगी- आपकी सुबह तो लेट होती।
दाहिमा- गाड़ी जैसे आई, आ गया।
रस्तोगी- आप विभाग में ही क्यों आ गए, यहां 3 अफसरों की क्या जरूरत?
दाहिमा- सरकार ने पोस्टिंग दी है, इसलिए आया हूं।
रस्तोगी- आपने फाइलें करना क्यों शुरू कर दिया? ज्यादा दिमाग है कि आप गोद रहे हैं।
दाहिमा- डीएस फाइल भेजेंगे तो मेरी ड्यूटी है कि उसे टीप के साथ आपके पास भेजूं। जो भी लीगल होगा, उसे तो लिखना पड़ेगा।
रस्तोगी- आप जाइए यहां से, (तेज आवाज में)।
दाहिमा- सम्मानजनक तरीके से बोलिए। आप अनादर नहीं कर सकते। मेरा भी आत्मसम्मान है।
रस्तोगी- आप यहां बैठिए, मैं ही चला जाता हूं।
दाहिमा- जी नहीं, आपका कक्ष है। मैं जाता हूं।
(जैसा मंत्रालय सूत्रों ने बताया। यह घटनाक्रम करीब 10-12 मिनट चला। चूंकि रस्तोगी के कक्ष का दरवाजा हमेशा खुला रहता है, इसलिए कुछ लोग वहां जमा हो गए और घटनाक्रम सुना।)

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