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ब्रिज के दोनों सिरे जोड़ते हैं वीर सावरकर सेतु और शौर्य स्मारक चौराहे को

भोपाल के एमपी नगर से गुजरे जीजी फ्लाई ओवर (गायत्री मंदिर से गणेश मंदिर के बीच) की एप्रोच रोड कम्पलीट हो गई है। ब्रिज के दोनों सिरे- आरकेएमपी रेलवे स्टेशन के आगे वीर सावरकर सेतु और शौर्य स्मारक चौराहे को जोड़ते हैं। अप्रैल में लोड टेस्टिंग होगी। लोकसभा चुनाव के बीच ही ब्रिज के ऊपर से ट्रैफिक भी शुरू हो सकता है। कुल 121 करोड़ रुपए की लागत के फ्लाईओवर का काम 20 दिसंबर, 2020 से शुरू हुआ था। इसकी डेडलाइन दिसंबर- 2022 तक थी, लेकिन कोविड समेत अन्य कारणों से काम लेट हो गया। थर्ड लेन यानि गायत्री मंदिर के सामने वाले हिस्से को छोड़कर बाकी दोनों हिस्से बन चुके हैं। इसी पर फ्लाईओवर की लॉन्चिंग की जाएगी।

कोविड के चलते बंद हो गया था काम
फ्लाईओवर का काम 20 दिसंबर, 2020 में शुरू हुआ था। दो साल में यानि दिसंबर-2022 को इसे बनकर तैयार हो जाना था। अफसरों का कहना है कि इस दौरान कोविड के कारण तीन महीने तक काम बंद हो गया था। इसके एवज में बगैर पेनाल्टी दिए 6 महीने का एक्सटेंशन मिला, फिर भी इसे मार्च-2023 तक पूरा नहीं किया जा सका। इसके बाद अक्टूबर-2023 और दिसंबर-2023 की तारीख भी लॉन्चिंग के लिए घोषित की गई। अब यह अप्रैल में शुरू किया जाना है।
शिफ्ट करनी थी पाइप लाइन
मैदा मिल से पहले गायत्री मंदिर के पास नगर निगम को नर्मदा की पाइप लाइन शिफ्ट करनी थी। निगम को इसके लिए दो बार टेंडर करना पड़ा। लाइन अब शिफ्ट हो पाई है, इसलिए काम पूरा होने में महीना भर और लगेगा।
ब्रिज का काम तकरीबन पूरा
अफसरों ने बताया कि गणेश मंदिर के पास ब्रिज का काम तकरीबन पूरा हो चुका है। एमपी नगर थाने के सामने के हिस्से में डामरीकरण पूरा हो गया है। गायत्री मंदिर के पास वाले तीसरे हिस्से में काम पूरा होने में वक्त लगेगा।

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ज्ञानवापी की तर्ज पर सर्वे… सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मुस्लिम पक्ष

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के आदेश पर ज्ञानवापी की तरह धार स्थित भोजशाला का वैज्ञानिक सर्वे (अरक सर्वे) आज (शुक्रवार) से शुरू हो गया। दिल्ली और भोपाल के अफसरों की सर्वे टीम सुबह 6 बजे भोजशाला परिसर में पहुंची। टीम ने भवन का निरीक्षण किया। मजदूरों को मेटल डिटेक्टर से जांच के बाद प्रवेश दिया गया है। सभी के मोबाइल फोन बाहर रखवा लिए गए हैं। मजदूर खुदाई के लिए उपयोगी सामग्री के साथ आए हैं। इस क्षेत्र की निगरानी 60 कैमरों की मदद से की जा रही है। सर्वे टीम पहले चरण में दोपहर 12 बजे तक काम करेगी। जुमे की नमाज के लिए काम रोका जाएगा।
सर्वे को देखते हुए शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। भोजशाला में एएसपी डॉ. इंद्रजीत बाकलवार, सीएसपी, तीन डीएसपी, आठ थाना प्रभारी सहित 175 का पुलिस बल तैनात किया गया है। शहर के हाईराइज भवनों पर भी पुलिस तैनात की गई है। शहर में 25 चौराहों पर पुलिस का फिक्स प्वॉइंट बनाया गया है। चार पुलिस मोबाइल भी लगातार भ्रमण कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मुस्लिम पक्ष-भोजशाला सर्वे मामले में मुस्लिम पक्ष ने 16 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर कोर्ट ने 1 अप्रैल को सुनवाई के लिए तारीख दी थी। हालांकि, आज से सर्वे शुरू होने के कारण मुस्लिम पक्ष अर्जेंट हेयरिंग के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। इस पर तत्काल सुनवाई की मांग करेगा।
गुरुवार को पहुंची थी 15 सदस्यीय टीम- इससे पहले गुरुवार रात दिल्ली और भोपाल से अरक (अ१ूँीङ्म’ङ्मॅ्रूं’ २४१५ी८ ङ्मा ्रल्ल्िरं) के 15 सदस्य धार पहुंचे। टीम में दिल्ली से अधीक्षण पुरातत्वविद् और क्षेत्रीय निदेशक शामिल हैं। टीम ने यहां सर्किटहाउस में कलेक्टर और एसपी से सर्वे के संबंध में बात की। एएसआई भोजशाला के पिछले हिस्से को कवर करने के उद्देश्य से पांच फीट ऊंची दीवार का निर्माण भी करवा रहा है।
सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अपर महानिदेशक प्रो. आलोक त्रिपाठी ने पत्र में बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश पर वैज्ञानिक सर्वे को जीपीआर-जीपीएस तरीके से किया जाएगा। इसको लेकर एक टीम धार आएगी, पांच सदस्यों की टीम को भोजशाला में पुरातात्विक जांच के दौरान पर्याप्त सुरक्षा सहित अन्य व्यवस्थाएं करवाने की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की रहेगी।

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ग्लोबल प्राइड वुमेंस अवॉर्ड से 14 महिलाओं को किया सम्मानित

निशा जोशी योग एकेडमी तथा योग गंगा योगिक, साईंटिफिक एंड स्प्रीचुअल फाउंडेशन ने विश्व महिला दिवस पर विविध क्षेत्रों मे बेहतर काम कर रही 14 महिलाओ को पांचवे ग्लोबल प्राइड वुमेंस नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया। आयोजन बफार्नी धाम के सामने सोपा आॅडिटोरियम में आयोजित किया गया था। निशा जोशी ने बताया कि समारोह में मिशन कौन्तेय के तीसरे और चौथे फ्री योगा टीचर ट्रेनिंग कोर्स के दीक्षांत समारोह में 62 स्टूडेंट्स को सम्मानित किया गया और प्रमाण पत्र दिए गए। साथ ही योग पर राष्ट्रीय सेमिनार भी हुआ जिसका विषय था ‘योग एवं भगवदगीता के माध्यम से स्व प्रबन्धन’। गीता में स्पष्ट लिखा है कर्म करो और फल की चिंता मत करो। स्वयं पर विश्वास रखो और आत्मबल को अपना हथियार बनाओ। चुनौतियों से घबराना नही है बल्कि उससे मुकाबला करना है।
समारोह के मुख्य अतिथि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर थे। अध्यक्षता अर्चना खेर अतिरिक्त महाधिवक्ता मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने की। डॉ. सौम्या कपूर, योगिनी हेमलता शर्मा, (जयपुर), हृदय योग विशेषज्ञ डॉ. भारत रावत, ब्रिगेडियर सौरभ जैन, मंजूषा राघव, इंदिरा पाटीदार, सौंदर्य शिक्षिका उन्नति सिंह विशेष अतिथि थे।
डॉ. कपूर ने कहा कि नारी शक्ति का पर्याय है कि उसने असुरों तक का संहार किया है। नारी शक्ति जितनी अधिक शिक्षित, स्वस्थ और सुरक्षित होगी उतना ही हमारा राष्ट्र और समाज मजबूत होगा। आवश्यकता है। हम नारी शक्ति को सही दिशा में ले जाए तभी अच्छे परिणाम मिलेंगे।
अर्चना खेर ने कहा कि यहां आकर के मुझे एक अलग ही अनुभूति हुई, महिलाएं अपनी मयार्दा में रहे, लेकिन अगर कहीं कुछ गलत हो रहा है तो उसका खुलकर विरोध करे। आज की महिलाएं सशक्त है, निर्भीक है और वह आकाशीय ऊंचाइयों को स्पर्श कर रही है।
डॉ. भारत रावत ने कहा कि हमारे युवा समय के पाबंद रहे, अनावश्यक कार्यो में टाइम वेस्ट नही करे। स्वास्थ सबसे महत्वपूर्ण है, इसलिए स्टेमिना के साथ स्ट्रेंचिंग और स्टेबिलिश को भी महत्व दे।

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22.94 करोड़ टैक्स वसूलने के लिए सहारा सिटी की 1.8 हैक्टेयर जमीन होगी नीलाम

इंदौर। आर्थिक संकट से जूझ रहे और लेनदारों से परेशान इंदौर नगर निगम ने अब अपना खाली खजाना भरने के लिए कड़ा एक्शन लेते हुए बड़े बकायादारों पर शिकंजा कसा है। निगम ने 22 करोड़ 94 लाख रुपए बकाया टैक्स वसूलने के लिए बायपास बिचौली मदार्ना स्थित सहारा इंडिया होम्स की सम्पत्ति बेचने का फैसला लिया है। 26 मार्च को सहारा की कुल 31 हेक्टेयर संपत्ति में से निगम 1.8 हेक्टेयर यानी 18066.46 वर्गमीटर रिक्त भूखंड नीलामी के जरिए बेचने जा रहा है। आर्थिक संकट से अपने को उभारने के लिए नगर निगम अब एक्शन मोड़ में है। नवागत निगमायुक्त शिवम वर्मा ने बड़े बकायादारों की सम्पत्ति कुर्क और नीलाम करने के निर्देश दिए है। निगम ने तय किया है कि बकाया टैक्स की वसूली में किसी भी प्रकार ढिलाई नही दी जाएगी और सख्ती से वसूली की जाएगी। इसी कड़ी में निगम पहली बङी कार्रवाई करने जा रहा है। सहारा इंडिया सिटी होम्स की संपति को नीलाम करने की तैयारी करली गई है।
निगम अपर आयुक्त राजस्व अभिलाष मिश्रा के अनुसार आयुक्त शिवम वर्मा के निदेर्शानुसार राजस्व की बकाया राशि होने पर बकायादारों के विरूद्ध जब्ती व कुर्की के साथ ही नीलामी भी की जा रही है। इसी क्रम में झोन क्रमांक 19 अंतर्गत स्थित संपति सहारा इंडिया कमर्शियल कॉपोर्रेशन लिमिटेड सहारा सिटी होम्स पता सर्वे 167 से 187 तक ग्राम बिचौली मदार्ना बायपास रोड (क्षेत्रफल 18066.46 वर्ग मीटर रिक्त भूखण्ड) पर बकाया राशि 22 करोड 94 लाख रुपए से अधिक होने पर पूर्व में कुर्की की कार्यवाही की गई थी। नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 175 के तहत उक्त संपति पर झोन राजस्व विभाग में निगम देय संपतिकर एवं अन्य कर की राशि बकाया होने पर कुर्की की कार्यवाही की जा रही है। जो जैसा है, जहां हैं के आधार पर दिनांक 26 मार्च 2023 को नीलामी की कार्यवाही के निर्देश दिये गये है। अपर आयुक्त मिश्रा के अनुसार रिक्त भूमि की कीमत कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार 30 करोड़ रुपए है।

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बैठक के बाद संकेत… मौद्रिक नीति का मार्ग और शेयर बाजारों में तेजी

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने अपनी दो दिवसीय बैठक के बाद यह संकेत देकर शेयर बाजारों में तेजी ला दी कि वह इस वर्ष नीतिगत ब्याज दरों में 0.75 फीसदी की कटौती के मार्ग पर बनी रहेगी। इस वर्ष मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान में इजाफे के बावजूद ऐसा किया जा रहा है। हालांकि फेड से यह उम्मीद नहीं थी कि वह मार्च की बैठक में नीतिगत दरों में कटौती करेगा, लेकिन कुछ बाजार प्रतिभागी इस बात को लेकर चिंतित थे कि मुद्रास्फीति के हालात नीतिगत दरों में कटौती की संभावना को कम कर सकते हैं या उसमें देर कर सकते हैं।
निश्चित तौर पर फेडरल रिजर्व के बोर्ड सदस्यों तथा फेडरल रिजर्व बैंक के प्रेसिडेंट के ताजा अनुमान दिखाते हैं कि 2024 में मध्यम कोर मुद्रास्फीति की दर 2.6 फीसदी रहेगी, जबकि दिसंबर में इसके 2.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था। चालू वर्ष की आर्थिक वृद्धि के अनुमानों को भी दिसंबर के 2.1 फीसदी से संशोधित करके 1.4 फीसदी कर दिया गया है। आर्थिक वृद्धि की गति और कीमतों पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए टिकाऊ ढंग से दो फीसदी का मुद्रास्फीति लक्ष्य हासिल करने में कुछ वक्त लग सकता है। जैसा कि फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जीरोम पॉवेल ने अपनी टिप्पणी में कहा- यह सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहने वाला है। चाहे जो भी हो, फेडरल फंड्स की दर का लक्षित दायरा 5.25 से 5.5 फीसदी है, जो दो दशक का उच्चतम स्तर है और यह दरों में कटौती की प्रक्रिया शुरू करने की गुंजाइश देता है। बहरहाल, फेड चालू वर्ष में और अगले वर्ष में किस हद तक कटौती करने में सक्षम होता है… यह देखना होगा। बाजार जहां फेड के दरों में कटौती करने की प्रतीक्षा कर रहा है, वहीं बैंक आॅफ जापान ने इस सप्ताह 17 वर्षों में पहली बार नीतिगत दरों में इजाफा किया। मंगलवार को वह ऋणात्मक नीतिगत दर व्यवस्था समाप्त करने वाला पहला केंद्रीय बैंक भी बन गया और उसने नीतिगत दर को 0-0.1 के दायरे में बढ़ा दिया। बैंक आॅफ जापान ने एक्सचेंज ट्रेडेड फंड के साथ यील्ड कर्व नियंत्रण कार्यक्रम को भी समाप्त करने का निर्णय लिया। बहरहाल, केंद्रीय बैंक जरूरत के मुताबिक बाजार से दीर्घावधि के सरकारी बॉण्ड की खरीद जारी रखेगा।
ऋणात्मक नीतिगत ब्याज दरों का विचार हमेशा से विवादास्पद रहा है और यह स्पष्ट नहीं है कि इससे अर्थव्यवस्थाओं को लाभ हुआ या नहीं। बैंक आॅफ जापान के अलावा अन्य केंद्रीय बैंकों, मसलन- यूरोपीय केंद्रीय बैंक तथा स्विट्जरलैंड और स्वीडन के केंद्रीय बैंकों ने ऋणात्मक ब्याज दरों के साथ प्रयोग किया।
इसकी शुरुआत 2010 के दशक में हुई थी, जब केंद्रीय बैंकों खासकर पश्चिमी देशों के बैंकों की ओर से यह कोशिश हो रही थी कि वैश्विक वित्तीय संकट के बाद आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाया जाए। कुछ यूरोपीय देशों में सॉवरिन ऋण बाजार की समस्या ने भी आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया और केंद्रीय बैंक को आर्थिक गतिविधियों का समर्थन करने की प्रेरणा दी। बहरहाल, जापान ने इसे भी अपस्फीति से लड़ाई का एक और औजार माना। ध्यान रहे कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने कभी नीतिगत दरों को ऋणात्मक नहीं होने दिया।
वैश्विक वित्तीय बाजार में जापानी पूंजी की सीमित भूमिका को देखते हुए नीतिगत कदमों का भी सीमित प्रभाव है। इसके अलावा मौजूदा आर्थिक हालात में बैंक आॅफ जापान निकट भविष्य में मौद्रिक नीति को सख्त नहीं बना सकता। ऐसे में बाजार फेड पर ध्यान देगा और कुछ हद तक यूरोपीय केंद्रीय बैंक पर भी।
यह उम्मीद करना उचित है कि आने वाली तिमाहियों में वैश्विक वित्तीय हालात आसान होंगे, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों में पूंजी की आवक बढ़ेगी। ऐसे हालात में नीति निर्माताओं को मुद्रा कीमतों में अनावश्यक वृद्धि और परिसंपत्ति मूल्य मुद्रास्फीति से बचना होगा।
(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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