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फरार आरोपी इंजीनियर राठौर पुलिस की पकड़ से बाहर…पत्नी से की पूछताछ

सवा सौ करोड़ रुपये के घोटाले में आरोपी एक्जीक्यूटिव इंजीनियर अभय राठौर अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। राठौर की तलाश में पुलिस अनेक स्थानों पर दबिश दिए जाने की बात कह रही है।
गुरुवार को पुलिस ने राठौर की पत्नी पत्नी शालिनी से पूछताछ की। इस दौरान आरोपी सब इंजीनियर उदय भदौरिया को भी साथ ले गई थी। पुलिस को दो अन्य फर्मों की जानकारी मिली है जिनमें फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपयों का भुगतान हुआ है।
डीसीपी जोन-3 पंकज पांडे के अनुसार आरोपी उदय भदौरिया नगर निगम में उप अभियंता है और अभय राठौर का रिश्तेदार है। उदय से मिली जानकारी के आधार पर एमजी रोड टीआई विजय सिंह सिसोदिया, एसआई कमल किशोर गुलाब बाग स्थित राठौर के घर पहुंचे और पूरे घर की तलाशी ली। आरोपी राहुल बढेरा ने पूछताछ में राठौर को ही मास्टर माइंड बताया है। उसने कहा कि सब राठौर के इशारे पर होता था। 50 प्रतिशत से ज्यादा कमीशन लेता था। राहुल ने बताया कि क्रिस्टल और ईश्वर इंटरप्राइजेज में भी इसी तरह फर्जी बिलों से भुगतान हुआ है। दोनों फर्म राठौर के इशारे पर बनाई गई थी। आरोपी लिपिक राजकुमार सालवी ने पूछताछ में बताया कि वह खुद भी ठेकेदारी करता था। वर्ष 2008 के आसपास उसकी फर्म निशांत क्रिएशन और गुरुकृपा इंटरप्राइजेज में करोड़ों के कार्यों का ठेका लिया था। मामले में पुलिस आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी कर रही है। आरोपियों की ऐसी संपत्ति मिली है जो रिश्तेदारों के नाम पर है।
घोटाले में बड़े लोग शामिल…
मूलत: आगरा (उप्र) निवासी राठौर वर्षों से घोटाले कर रहा है। छह साल पूर्व आर्थिक अपराध ब्यूरो ने छापा मार कर 19 करोड़ की जमीन, 40 बैंक खाते, मकान, प्लाट की जानकारी निकाली थी। फर्जी टैंकर कांड भी पकड़ में आया, लेकिन जांच दब गई। राठौर की पत्नी शालिनी का दावा है कि राठौर तो मोहरा है। घोटाले में बड़े लोग शामिल हैं। एक व्यक्ति कैसे घोटाला कर सकता है? इतना रुपये दिखना भी चाहिए। 2018 से साजिश चल रही है। एफआईआर के कुछ दिन पूर्व ही ज्वाइन हुआ था। अचानक नया कांड खुल गया। हमारे साथ सब फंसेंगे। शालिनी का इशारा बड़े अफसरों की तरफ था। हालांकि वह नाम नहीं बता रही।
आॅडिट और लेखा विभाग पर शक…
पुलिस आडिट विभाग में पदस्थ समर सिंह सहित लेखा विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों की भूमिका जांच रही है। प्रारंभिक जांच में लापरवाही मिली है। आरोपियों के काल विवरण की जांच की जा रही है। संपर्क में रहे अधिकारियों से तार जोड़े जा रहे हैं।

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मंत्रालय में जले फर्नीचर, ई-वेस्ट को खरीदने आए 92 कबाड़ी

मंत्रालय में दो माह पहले लगी आग के फर्नीचर और ई वेस्ट समेत अन्य सामग्री खरीदने के लिए लोक निर्माण विभाग के दफ्तर में 92 कबाड़ी इकट्‌ठा हो गए। हालात यह बने कि इन कबाड़ियों को नियंत्रित करने के लिए पीडब्ल्यूडी के अफसरों को पुलिस की मदद मांगनी पड़ी और इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में मंत्रालय में जलकर खाक हुई संपत्ति की नीलामी की गई है। मंत्रालय में आग से जलकर नष्ट हुई सामग्री को जब हटा लिया जाएगा तो लोक निर्माण विभाग इसके रेनोवेशन का काम शुरू कराएगा।
राजधानी के मंत्रालय में 9 मार्च को लगी आग में चौथी और पांचवीं मंजिल के कमरों में भारी नुकसान हुआ था। यहां तीन मंत्रियों के चेंबर में रखे कुर्सी, टेबल और अन्य सामग्री जलकर खाक होने के साथ मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ कई अफसरों के चेंबर भी आग की चपेट में आए थे। इस मामले की जांच के बाद अब मंत्रालय में रखरखाव का काम देख रहे अधिकारी यहां से जली हुई सामग्री ोको हटाने की प्रक्रिया पूरी करने में जुटे हैं। इसी तारतम्य में बुधवार को राजधानी परिक्षेत्र के पीडब्ल्यूडी दफ्तर में मंत्रालय में जली कुर्सी, टेबल, पर्दे और अन्य सामग्रियों की नीलामी के लिए टेंडर बुलाए गए थे। मंत्रालय और लोक निर्माण विभाग के अफसरों के अनुसार इस टेंडर प्रक्रिया के दौरान भोपाल के 92 कबाड़ी वहां इकट्‌ठा हो गए। इतने कबाड़ियों की भीड़ जुटने की उम्मीद पीडब्ल्यूडी के अफसरों को नहीं थी और स्थिति यह बनी कि कई बार गदर की स्थिति बन गई। इसे देखते हुए पीडब्ल्यूडी के अफसरों को पुलिस बुलाकर नीलामी की कार्यवाही पूरी करानी पड़ी।
ढाई करोड़ में होगा रेनोवेशन
अधीक्षण यंत्री योगेंद्र सिंह के अनुसार रेनोवेशन के लिए सरकार ने राशि मंजूर कर दी है। इसके लिए ढाई करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। इस राशि से रेनोवेशन कराए जाने के बाद उसके उपयोग और शेष बिल्डिंग में सुधार आदि के लिए शासन जो फैसला करेगा, उसके आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।

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ट्रेन डिजाइनर सुधांशु मणि बोले- ट्रैवल टाइम पर ट्रेन खरी नहीं उतरी, ट्रैक अपग्रेडेशन है वजह

हिन्दुस्तान मेल, भोपाल
प्रॉमिसिंग ट्रैवल टाइम और स्पीड को लेकर वंदे भारत उतनी खरी नहीं उतर पाई है, जितनी बात की गई थी। इसका मुख्य कारण है- ट्रेन के ट्रैक्स का अपग्रेड नहीं होना, क्योंकि ट्रेन तो 160 किमी प्रतिघंटा पर चलने के लिए काबिल है। मगर, ट्रैक अपग्रेड नहीं हैं।
यह बात चेन्नई स्थित इंटीग्रेटेड कोच फैक्ट्री के पूर्व जीएम और वंदे भारत के क्रिएटर कहे जाने वाले सुधांशु मणि ने कही। वे गुरुवार को एलएनसीटी स्थित आॅल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन और भोपाल मैनेजमेंट एसोसिएशन के कार्यक्रम में हिस्सा लेने भोपाल पहुंचे। उन्होंने वंदे भारत को लेकर बात की। उन्होंने बताया कि इसके लिए कई सेफ्टी फीचर जैसे फेंसिंग व कवच जरूरी हैं। सरकार को जल्द ट्रैक अपग्रेड करने चाहिए, जिससे ट्रैवल टाइम कट डाउन यानी कम हो सके। यात्रियों को बेहतर अनुभव मिल सके। बता दें कि सुधांशु मणि ही भारत में वंदे भारत ट्रेनों के जनक माने जाते हैं।
भारतीय रेलवे के कामयाब मैकेनिकल अफसरों में से एक सुधांशु मणि ने इंटीग्रेटेड कोच फैक्ट्री चेन्नई में जीएम हैं। वे वंदे भारत के डिजाइनर भी हैं।
स्लीपर वंदे भारत की सुविधा अगस्त-सितंबर तक
सुधांशु मणि कहते हैं कि स्लीपर वंदे भारत की सुविधा अगले चार महीने में मिल सकती है। उन्होंने बताया कि मैं शुरू से कहता आया हूं कि इसमें स्लीपर भी जरूरी है। इससे आप लंबी दूरी आसानी से तय कर सकते हैं। जैसे दिल्ली- मुम्बई-हावड़ा आदि जैसे डिस्टेंस को ओवर नाइट पूरा किया जा सके। साथ ही, इससे यात्रियों का ट्रैवल टाइम कम हो सकेगा। अभी तक तो स्लीपर वंदे भारत आ जानी चाहिए थी। मगर, इसमें काफी देर हो गई है। किराए के बारे में उन्होंने कहा कि आप ट्रैवल टाइम 2 से 2:30 घंटे कम कीजिए। लीजिए, किराया कितना ले सकते हैं।
अगले चार साल में 300 से अधिक वंदे भारत दौड़ती नजर आएंगी
वंदे भारत में आम आदमी कभी सफर कर पाएगा, इस सवाल के जवाब में सुधांशु कहते हैं कि विकसित भारत का यही गोल है कि जनरल क्लास में पैसेंजर बिना डिग्निटी और कंफर्ट के चलते हैं, उनकी तरफ ध्यान देना होगा। मैं तो इस बात को हमेशा कहता हूं और एक्सेप्ट भी करता हूं कि हर ट्रेन एयर कंडीशन्ड होनी चाहिए। यह भारतीय रेलवे की जिम्मेदारी भी है। इसके बिना विकसित भारत का सपना पूरा नहीं हो पाएगा। वहीं, उन्होंने इसकी कमियां और खूबियों के बारे में कहा कि यह तो चलती रहेंगी। कमियों को बस ठीक करते रहना है। प्रधानमंत्री ने इस ट्रेन को बहुत इंक-रेज किया है। इससे पैसेंजर्स सेगमेंट की शक्ल बदली है। मुझे लगता है कि अगले चार साल में करीब 300 -400 वंदे भारत ट्रेन दौड़ती नजर आएंगी।
केबल के कारण
लगी थी आग
वंदे भारत में आग को लेकर सुधांशु मणि कहते हैं कि इस बारे में पढ़ा था। बाद में पता चला कि केबल के कारण आग लगी थी। हालांकि यह इतना सीरियस मसला नहीं हैं। देशभर में 60 से 65 वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं। इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए। बता दें कि ट्रेन नंबर 20171 वंदे भारत में करीब 10 महीने पहले रानी कमलापति से निजामुद्दीन जा रही ट्रेन के सी-14 कोच में आग लग गई थी। आग कोच के नीचे लगे बैटरी बॉक्स में लगी थी।

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आज से पंचकोशी यात्रा शुरू, 7 मई को समापन

पंचकोशी यात्रा प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी आज शुक्रवार 3 मई से प्रारम्भ हो गई। चिलचिलाती धूप पर आस्था और विश्वास की पंचकोशी यात्रा भारी रहेगी। पंचकोशी यात्रा का समापन 7 मई को होगा। पंचकोशी यात्रा 118 किलोमीटर है। प्राचीन नगरी उज्जयिनी तीर्थ नगरी के रूप में मानी जाती है। प्रमुख द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन के महाकाल ही हैं। महाकालेश्वर स्वयंभू दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग हैं। शिवतीर्थ होने से चौरासी महादेव के रूप में शिवलिंग स्वरूप में स्थित है।
महाकालेश्वर मन्दिर मध्य में स्थित है। तीर्थ के चारों दिशाओं में क्षेत्र की रक्षा के लिए महादेव ने चार द्वारपाल शिव रूप में स्थापित किए हैं, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदाता हैं, जिनका उल्लेख स्कंदपुराण अन्तर्गत अवन्तिखण्ड में है। पंचेशानी यात्रा जिसे पंचकोशी यात्रा कहते हैं, इन्हीं चार द्वारपालों की कथा, पूजा विधान में इष्ट परिक्रमा का विशेष महत्व है।
पंचकोशी के मूल में इसी विधान की भावना है। स्कंदपुराण के अनुसार अनन्तकाल तक काशीवास की अपेक्षा वैशाख मास में मात्र पांच दिवस अवन्तिवास का पुण्यफल अधिक है। वैशाख कृष्ण दशमी पर शिप्रा स्नान व पटनी बाजार स्थित नागचंद्रेश्वर मन्दिर में पूजन के पश्चात पंचकोशी यात्रा प्रारम्भ होगी, जो 118 किलोमीटर की परिक्रमा करने के पश्चात कर्क तीर्थवास में समाप्त होती है और तत्काल अष्टतीर्थ यात्रा आरम्भ होकर वैशाख कृष्ण अमावस्या को शिप्रा स्नान के पश्चात यात्रा का समापन होता है। वैशाख कृष्ण दशमी शुक्रवार 3 मई से यात्रा प्रारम्भ होकर वैशाख कृष्ण अमावस्या 7 मई को यात्रा का समापन होगा। यात्रा के पड़ाव एवं उप-पड़ाव स्थलों में क्रमश: पिंगलेश्वर, करोहन, नलवा, अंबोदिया, कालियादेह महल, जैथल, उंडासा रहेंगे।

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सीईओ से नाराज 400 सरपंच चुनाव का करेंगे बहिष्कार

जिले में सरपंचों ने एकजुट होकर जिला पंचायत सीईओ के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। तकरीबन 400 सरपंच इटावा रोड स्थित एक निजी मैरिज गार्डन में एकत्रित हुए और यहां लोकसभा चुनाव बहिष्कार का निर्णय लिया गया। दरअसल, भिंड जिले के सरपंच जिला पंचायत सीईओ जगदीश गोमे से नाराज चल रहे हैं।
सरपंचों का कहना है कि जिला पंचायत सीईओ द्वारा सरपंचों के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है और उनकी पंचायतों में काम नहीं होने दिए जा रहे हैं। सचिवों की बैठक में जिला पंचायत सीईओ ने सरपंचों के लिए अपशब्द कहे। जिला पंचायत सीईओ पंचायत में काम नहीं होने दे रहे हैं, इसलिए सभी सरपंच एकजुट हुए हैं। 400 सरपंचों ने निजी मैरिज गार्डन में एकत्रित होकर बैठक की और यह निर्णय लिया कि जिला पंचायत सीईओ का तबादला भिंड से बाहर किया जाए और उनकी मांगों को माना जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो सभी सरपंच लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे।

प्रशासन मतदान बढ़ाने में लगा, ये घटाने में
सरपंच अपने गांव में पहुंचकर जनता के बीच यह संदेश देंगे कि जनता भी उनका समर्थन करे और चुनाव का बहिष्कार करे। हालांकि, अभी तक जिला पंचायत सीईओ की तरफ से इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन एक तरफ जहां जिला प्रशासन मतदान का प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहा है।

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