Hindustanmailnews

Author name: Hindustanmailnews

स्वागत द्वार-कैफेटेरिया से किया तकरीबन 4 हजार वर्गफीट जमीन पर कब्जा 2022 में हुई बड़ी कार्रवाई के बाजवूद हाईस्ट्रीट मॉल में मनमानी

टूटने के बाद बहुत दिन तक खंडहर रहे इस मॉल का नया नाम हाईस्ट्रीट है। जिसके नीचे एनआरके लिखा है। प्लॉट नंबर 22 व 23 का प्लॉट एरिया कुल 43 हजार वर्गफीट है। इस पर 20 हजार वर्गफीट में मॉल की बिल्डिंग खड़ी है। सामने 18 हजार वर्गफीट जमीन पार्किंग के लिए है। इसमें ईश शोरूम के पास तकरीबन 15 फीट लम्बा और 20 फीट चौड़ा सी-शेप का स्वागत द्वार बना हुआ है। इसके ठीक सामने 1800 वर्गफीट में कैफेटेरिया बना दिया है। जहां शोरूम में आने वाले ग्राहकों के रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था की गई है, ताकि उन्हें किसी बात की तकलीफ न हो। चूंकि मॉल में बी-1 और बी-2 में पार्किंग की व्यवस्था है। जहां दोपहिया वाहन भी पार्क होते हैं। चार पहिया वाहन भी। पहले गाड़ियां आराम से निकल जाती थी। अब स्वागत द्वार और कैफेटेरिया के कारण मात्र 15 फीट जगह बची है। जिसकी वजह से थोड़ी दिक्कत होती है। जिसकी शिकायत लोग मॉल प्रबंधन से भी कर चुके हैं।
इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद भी समझ नहीं आया… अवैध निर्माण को लेकर बिल्डर को चार नोटिस दिए थे। जिनका जवाब निगम को नहीं मिला। तब 12 सितंबर 2022 को अल सुबह से निगम ने रिमूवल की कार्रवाई शुरू कर दी थी। मॉल में करीब 10 हजार वर्गफीट अवैध निर्माण मिला।
निगम को क्यों नहीं दिखता…. मॉल दूसरी इमारतों के मुकाबले पीछे की तरफ बना है और सामने पार्किंग है। बावजूद इसके अवैध निर्माण के कारण मॉल में तोड़फोड़ हुई थी। तब शहर के लोगों ने निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। कहा था कि मॉल में पार्किंग पर्याप्त है। फिर दिक्कत क्या है? अब वही लोग कहते हैं कि नगर निगम को पीछे बिल्डिंग का अवैध निर्माण दिख गया था लेकिन सामने पार्किंग में बना इतना बड़ा कैफेटेरिया नहीं दिखता है क्या?

हिन्दुस्तान मेल, इंदौर। 13 सितंबर 2022 को एबी रोड स्थित जिस मॉल के अवैध हिस्से को नेस्तनाबूत किया था, वह एक बार फिर चर्चा में है। वजह है पार्किंग की जमीन पर बनाया गया कैफेटेरिया और लगाया गया जनरेटर सिस्टम। जिसकी वजह से मॉल की बेसमेंट पार्किंग से रोड तक आने में लोगों को दिक्कत होती है। कैफेटेरिया पर ‘ईश’ लिखा हुआ है। बिल्डिंग में हाल ही में ईश का ज्वैलरी शोरूम खुला है, जो आनंद ज्वैलर की एक्सक्लूसिव ब्रांच है।

स्वागत द्वार-कैफेटेरिया से किया तकरीबन 4 हजार वर्गफीट जमीन पर कब्जा 2022 में हुई बड़ी कार्रवाई के बाजवूद हाईस्ट्रीट मॉल में मनमानी Read More »

पीएम और सीएम खड़े रहे ‘डीएम’ बैठे रहे….!

मंगलवार को वाराणसी से नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान पीएम मोदी खड़े थे, जबकि रिटर्निंग आॅफिसर (कलेक्टर) बैठे हुए थे। ऐसे में हर व्यक्ति के दिमाग में एक सवाल था कि क्या रिटर्निंग अधिकारी पीएम से बड़ा होता है। यदि नहीं तो फिर पीएम के सामने खड़ा क्यों नहीं हुआ।
पीएम मोदी जब नामांकन दाखिल करने पहुंचे, तब उनके साथ गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीएम योगी आदित्यनाथ समेत तमाम बड़े नेता भी मौजूद रहे। तस्वीर पर गौर किया कि नामांकन पत्र दाखिल करते वक्त पीएम मोदी तो खड़े थे, लेकिन रिटर्निंग आॅफिसर कुर्सी पर ही बैठे रहे। हालांकि, सिर्फ पीएम मोदी ही नहीं, बल्कि कोई भी उम्मीदवार हो, रिटर्निंग आॅफिसर बैठे ही रहते हैं। दरअसल, ये एक प्रोटोकॉल होता है। नामांकन करने कितना ही बड़ा नेता क्यों न आ जाए, उनके सम्मान में रिटर्निंग आॅफिसर खड़ा नहीं हो सकता।
खड़े क्यों नहीं होते रिटर्निंग आॅफिसर?- चुनाव के दौरान रिटर्निंग आॅफिसर उस जिले का मुख्य चुनाव अधिकारी होता है। और कोई भी व्यक्ति एक उम्मीदवार की हैसियत से नामांकन करने आया होता है, फिर चाहे वो प्रधानमंत्री ही क्यों न हों, इसलिए रिटर्निंग आॅफिसर बैठे रहते हैं। रिटर्निंग आॅफिसर एकमात्र लीगल अथॉरिटी होता है और उनपर कोई भी आदेश नहीं चला सकता। प्रोटोकॉल के कारण नामांकन प्रक्रिया के दौरान रिटर्निंग आॅफिसर अपनी कुर्सी पर बैठे रहते हैं। ये ठीक उसी तरह होता है जैसा अदालतों में होता है। अदालत में बड़े नेता या मंत्री की पेशी क्यों न हो, जज अपनी कुर्सी से खड़े नहीं होते। वैसे ही रिटर्निंग आॅफिसर भी नामांकन के समय कभी खड़े नहीं होते।

पीएम और सीएम खड़े रहे ‘डीएम’ बैठे रहे….! Read More »

बेटी समेत तीन महीने के घायल मासूम को छोड़ कर चले गए माता-पिता

ग्वालियर का कमलाराजा अस्पताल। यहां बाल गहन चिकित्सा इकाई (पीआईसीयू) में भर्ती है तीन महीने का मासूम। शरीर पर जलने के मल्टीपल घाव हैं। चोट के भी निशान हैं। रात से झटके आ रहे हैं। कभी बेहोश हो जाता है, तो कभी रोने लगता है। रह-रहकर दर्द से कराहता है। उसकी हालत देख नर्सों के भी आंसू निकल आते हैं। यहां आॅक्सीजन सपोर्ट पर है। 24 घंटे के आॅब्जर्वेशन में रखा गया है। घाव देखकर कहते हैं कि इस मासूम ने कितनी प्रताड़ना झेली होगी, इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता।
ग्वालियर रेलवे स्टेशन बुकिंग काउंटर के पास शनिवार रात आरपीएफ (रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स) को तीन बच्चे लावारिस मिले थे। इनमें एक की उम्र 6 साल, दूसरे की 7 साल और मासूम की उम्र करीब 3 महीने है। दोनों बच्चों को महिला बालिका विकास गृह में भेजा गया है।

महिला बाल विकास ने बालिका गृह में रह रही दोनों बच्चियों की काउंसिलिंग की गई। बच्चियां अभी भी सहमी हुई हैं। 7 साल की बच्ची को कुछ-कुछ याद है। उसने बताया कि वे गुजरात के रहने वाले हैं। पिता मजदूरी करते थे, जबकि मां लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा लगाती है। वह गुजरात से ट्रेन में बैठकर धौलपुर आ गए। कुछ दिन से धौलपुर रेलवे स्टेशन के पास रह रहे थे। फिर वह ट्रेन से ग्वालियर पहुंचे। माता-पिता शुक्रवार (10 मई) रात को उन्हें रेलवे स्टेशन पर छोड़कर चले गए। अगले दिन सुबह माता-पिता आए और खाना खिलाया। साथ ही, मां ने कहा था कि बाबू का ख्याल रखना। हम कुछ देर में आते हैं। इसके बाद दोनों नहीं लौटे।
शरीर पर निशान कीड़े काटने के नहीं, वो जल गया था : बच्ची ने काउंसिलिंग में बताया कि उनके भाई (बाबू) के जो घाव हैं, वह कीड़े काटने से नहीं, बल्कि जलने के हैं। हालांकि, बच्ची यह नहीं बता पाई कि भाई बार-बार कैसे जला। उसके शरीर पर अन्य घाव कैसे आए। माता-पिता उन्हें क्यों छोड़ गए? बच्चियों ने यह तो बताया कि वह गुजरात के रहने वाले हैं, पर कहां के, यह नहीं बता पा रहीं।
नहीं दिखे बच्चों के माता-पिता : पुलिस का कहना है कि घटना के एक दिन पहले से लेकर एक दिन बाद और उसके बाद के भी सीसीटीवी फुटेज देख लिए हैं, लेकिन सुराग नहीं मिला है। आरपीएफ थाना प्रभारी संजय आर्य ने बताया कि बच्चियों ने जैसा बताया कि धौलपुर स्टेशन के आसपास काफी दिन तक रुके थे। बच्चियां धौलपुर का कह रही हैं, लेकिन वो धौलपुर व मनिया के बीच में किसी छोटे स्टेशन पर रहे होंगे। आरपीएफ की एक टीम वहां भी सर्चिंग कर रही है।

बेटी समेत तीन महीने के घायल मासूम को छोड़ कर चले गए माता-पिता Read More »

दमोह में 7 घंटे में बैंक लूट के आरोपी गिरफ्तार चौकीदार ने दोस्तों के साथ बनाई थी योजना

दमोह जिले के गैसाबाद थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव में मध्यांचल ग्रामीण बैंक में हुई 40 लाख से ज्यादा की लूट के आरोपियों को पुलिस ने महज 7 घंटे में ही गिरफ्तार कर लिया है। लूट की प्लानिंग चौकीदार ने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर की थी।
षडयंत्र में शामिल चौकीदार ने ही दी थी पुलिस को सूचना : मंगलवार रात करीब 8 बजे बैंक के चौकीदार ने पुलिस को सूचना दी कि बैंक में पांच नकाबपोश बदमाशों ने हमला किया और उसे घायल कर बैंक के रुपए लूट कर ले गए हैं। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई। दमोह एसपी श्रतकीर्ति सोमवंशी खुद मौके पर पहुंचे। इस दौरान बैंक से लूट कर भाग रहे आरोपियों के हाथ से 100 के नोटों की दो गड्डियां बैंक के बाहर नाली में भी गिर गई, जिन्हें पुलिस ने जब्त कर लिया। भागते समय आरोपी बैंक के सीसीटीवी की हार्ड डिस्क भी साथ में ले गए, इसलिए कोई फुटेज पुलिस के पास नहीं थे, लेकिन बाद में पुलिस को चौकीदार पर संदेह हुआ। जब रात में उससे पूछताछ की गई तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
एसपी सोमवंशी ने बताया कि बैंक के सभी कर्मचारियों के घर चले जाने के बाद आरोपी चौकीदार ने अपने दो दोस्तों को बैंक में बुलाया और लूट की घटना को अंजाम दिया। जब उन दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनसे पूछताछ की, तो उन्होंने बताया कि उन तीनों ने मिलकर पहले से पूरी प्लानिंग की थी कि किस तरह बैंक को लूटेंगे।
चौकीदार ने शरीर पर बनाए घाव के निशान : प्लानिंग में शामिल बैंक के कर्मचारी(चौकीदार) ने खुद अपने शरीर पर कटर से घाव के निशान बनाए, ताकि पुलिस को उसे पर संदेह ना हो। इसके अलावा उसने तीन की जगह पांच आरोपियों के घटना में शामिल होने की बात बताई, ताकि पुलिस गुमराह होती रहे। लेकिन पूछताछ में उसने इस षड्यंत्र को कबूल कर लिया। आरोपी चौकीदार ने पुलिस को यह भी बताया कि बैंक के मैनेजर बैंक में ही लॉकर की चाबी छोड़कर चले गए थे, ताकि पुलिस को मैनेजर पर संदेह हो।
पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। रात तक पुलिस को यह बताया जा रहा था कि 40 लाख रुपए की लूट हुई है, लेकिन पुलिस ने आरोपियों से 42 लाख रुपए रिकवर किए हैं। रात 8 बजे हुई इस घटना से जुड़े आरोपियों को पुलिस ने सुबह 3 बजे अपनी गिरफ्त में ले लिया।

दमोह में 7 घंटे में बैंक लूट के आरोपी गिरफ्तार चौकीदार ने दोस्तों के साथ बनाई थी योजना Read More »

बेटी समेत तीन महीने के घायल मासूम को छोड़ कर चले गए माता-पिता

ग्वालियर का कमलाराजा अस्पताल। यहां बाल गहन चिकित्सा इकाई (पीआईसीयू) में भर्ती है तीन महीने का मासूम। शरीर पर जलने के मल्टीपल घाव हैं। चोट के भी निशान हैं। रात से झटके आ रहे हैं। कभी बेहोश हो जाता है, तो कभी रोने लगता है। रह-रहकर दर्द से कराहता है। उसकी हालत देख नर्सों के भी आंसू निकल आते हैं। यहां आॅक्सीजन सपोर्ट पर है। 24 घंटे के आॅब्जर्वेशन में रखा गया है। घाव देखकर कहते हैं कि इस मासूम ने कितनी प्रताड़ना झेली होगी, इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता।
ग्वालियर रेलवे स्टेशन बुकिंग काउंटर के पास शनिवार रात आरपीएफ (रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स) को तीन बच्चे लावारिस मिले थे। इनमें एक की उम्र 6 साल, दूसरे की 7 साल और मासूम की उम्र करीब 3 महीने है। दोनों बच्चों को महिला बालिका विकास गृह में भेजा गया है।

बेटी समेत तीन महीने के घायल मासूम को छोड़ कर चले गए माता-पिता Read More »

Scroll to Top
Verified by MonsterInsights