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खुल गए स्वर्ग के द्वार….

महाद्रिपार्श्वे च तटे रमन्तं सम्पूज्यमानं सततं मुनीन्द्रे:
सुरासुरैर्यक्षमहोरगाद्यै: केदारमीशं शिवमेकमीडे…..

भगवान शिव शंकर, जो पर्वतराज हिमालय के नजदीक पवित्र मन्दाकिनी के तट पर स्थित केदारखण्ड नामक श्रृंग में निवास करते हंैं और हमेशा ऋषि-मुनियों द्वारा पूजे जाते हैं। जिनकी यक्ष-किन्नर, नाग व देवता-असुर आदि भी हमेशा पूजा करते हैं, उन अद्वितीय कल्याणकारी केदारनाथ नामक शिव शंकर की मैं स्तुति करता हूं।

देहरादून। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम के कपाट मंगलवार को पूरे विधि विधान के साथ खोले गए, इस दौरान मंदिर को करीब 20 क्विंटल फूलों से सजाया गया था। मंदिर के कपाट जिस वक्त खोले गए, उस समय वहां करीब आठ हजार श्रद्धालु पहुंचे थे। हालांकि, मौसम खराब रहने की आशंका के मद्देनजर सोमवार को श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। अगले छह महीने तक श्रद्धालु मंदिरों के दर्शन कर सकेंगे। वहीं मौसम विभाग द्वारा 29 अप्रैल तक बर्फबारी और बारिश का पूवार्नुमान व्यक्त किए जाने की वजह से राज्य सरकार ने रविवार को केदारनाथ के लिए श्रद्धालुओं का पंजीकरण 30 तारीख तक के लिए बंद कर दिया, जबकि ऋषिकेश, गौरीकुंड, गुप्तकाशी और सोनप्रयाग सहित कई जगहों पर यात्रियों को फिलहाल वहीं ठहरने को कहा जा रहा है।

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तारिक फतेह का निधन दिल में ही रह गई आम हिंदुस्‍तानी नागरिक बनने की चाहत

जाने-माने लेखक तारिक फतेह का सोमवार को निधन हो गया। वह 73 साल के थे। पाकिस्‍तान में वह पैदा जरूर हुए, लेकिन हिंदुस्‍तान उनके दिल में बसता था। सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया के दूसरे हिस्‍सों में भी चर्चा के दौरान तारिक हिंदुस्‍तान का पक्ष रखते थे। ऐसा नहीं है कि तारिक भारत की खामियां नहीं गिनाते थे। लेकिन, जब वह ऐसा करते थे तो वाकई लगता था कि कोई अपना ही बिल्‍कुल सही बात कह रहा है। तारिक खुलकर कहते थे कि वह पाकिस्‍तान में पैदा हुए भारतीय हैं। हिंदुस्‍तान में तारिक के प्रशंसकों की बड़ी संख्‍या थी। हर मुद्दे पर वह खुलकर राय रखते थे। इसमें किसी तरह की मिलावट नहीं होती थी। जिस तरह तारिक अपनी बातों को कहते थे, उसमें यह दिखता था।
उनकी बेटी नताशा ने पिता के निधन की जानकारी दी। नताशा ने लिखा, ‘पंजाब के शेर, हिंदुस्‍तान के बेटे, कनाडा के प्रेमी, सच बोलने वाले, न्याय के लिए लड़ने वाले, शोषितों की आवाज तारिक फतेह अब हमारे बीच नहीं रहे। उनका काम और उनकी क्रांति उन सभी के साथ जारी रहेगी, जो उन्हें जानते और प्यार करते थे।’

खुद का परिचय इस तरह देते थे तारिक
वह अपना परिचय पाकिस्‍तान में पैदा हुए भारतीय के तौर पर देते थे। वह कहते थे, मैं पाकिस्तान में पैदा हुआ भारतीय हूं। इस्लाम में जन्मा पंजाबी हूं। एक मुस्लिम चेतना के साथ कनाडा में एक अप्रवासी हूं। एक मार्क्सवादी मार्गदर्शित युवा हूं। हालांकि, तारिक फतेह की भारतीय नागरिक बनने की चाहत अधूरी रह गई। वह भारतीय नागरिक नहीं बन सके। यह और बात है कि उनका काफी समय भारत में बीतता था। भारतीय न्‍यूज चैनलों पर चर्चाओं में वह अक्‍सर दिखते थे। भारत में उनके चाहने वालों की कमी नहीं थी। अब उन्‍हें वह बेबाक आवाज नहीं सुनाई देगी।
अगर तारिक फतेह खुद को पाकिस्‍तान में पैदा हुआ भारतीय कहते थे तो उसकी एक वजह थी। उनका परिवार मुंबई का रहने वाला था। 1947 में भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद उनका परिवार कराची में जाकर बस गया। 20 नवंबर, 1949 को कराची में तारिक का जन्म हुआ था।

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अब तक 35 हजार बैग मुफ्त बांटे

बीते कई सालों से मधुकांता भट्ट फटे-पुराने कपड़ों को इको-फ्रेंडली बैग में बदल रही हैं। इसका मकसद प्‍लास्टिक बैग का विकल्‍प देना है। इससे इन फटे-पुराने कपड़ों का भी इस्‍तेमाल हो जाता है। मधुकांता की उम्र 93 साल हो चुकी है। उन्‍हें सिलाई करना बहुत पसंद है। वह अब तक 35,000 से ज्‍यादा कपड़ों के बैग मुफ्ट बांट चुकी हैं। 2015 से एक दिन भी ऐसा नहीं गया जब उन्‍होंने बैग न सिला हो। सुबह नहाकर पूजा और फिर ब्रेकफास्‍ट करने के बाद वह सीधे अपनी सिलाई मशीन पर बैठ जाती हैं। वह चाहती हैं कि धरती से प्‍लास्टिक का बोझ जितना कम हो सकता है हो।

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टीएलएफ के खिलाफ व्यापारियों का गुस्सा भड़का हवन करते हाथ जले सरकार के…

सरकार को सलाह देने वाले यदि वाकई समझदार हैं तो छोटे दुकानदार, ठेले-वाहन पर व्यवसाय करने वाले खुदरा दुकानदार भी इतने नासमझ नहीं हैं, जो सरकार के ट्रेड लाइसेंस शुल्क (टीएलएफ) को आंख मूंद कर स्वीकार कर लें। यही वजह है कि इंदौर ही नहीं, पूरे प्रदेश में कारोबार पर कुठाराघात माने जा रहे टीएलएफ के खिलाफ व्यापारिक संगठनों में भड़की चिंगारी आग बनने वाली है। भाजपा नेताओं को आश्चर्य करना ही चाहिए कि चुनावी साल में सरकार ने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने का यह निर्णय कैसे ले लिया? व्यापारी वर्ग को इस बात पर आश्चर्य करना चाहिए कि टीएलएफ की मार उन्हें तो तत्काल समझ आ गई, लेकिन फिर से सत्ता में आने के घुंघरू बांधे घूम रहे कांग्रेस के नेताओं को संपट क्यों नहीं बंध रही है? शायद कांग्रेस इसलिए बोलने से कतरा रही है कि उसके दिमाग में अब तक यह भरा हुआ है कि भाजपा तो व्यापारियों की पार्टी है, व्यापारियों के वोट जब मिलते ही नहीं तो क्यों बोलें ! कांग्रेस यदि अब भी किसानों के भरोसे है तो उसके रणनीतिकारों को यह भी पता होगा कि शहरों में भी मतदाता बसते हैं।

सत्ता-संगठन की जो रणनीति समझ आ रही है, वह यह है कि अगले कुछ दिनों तक टीएलएफ की आग को भड़कने दिया जाएगा, फिर व्यापारी संगठनों के साथ सरकार के प्रमुखों की द्विपक्षीय बैठक में टीएलएफ को स्थगित (समाप्त करने का नहीं) करने का निर्णय लेकर सरकार भी अपने इस वोट बैंक की नाराजी दूर कर देगी। निर्णय से खुश व्यापारी संगठन जय जयकार करने के साथ ही सरकार को जिले-जिले में सम्मान-आभार वाले इवेंट की राह दिखा देंगे। होना तो यह चाहिए था कि कानून के जानकार इंदौर के महापौर जब मुख्यमंत्री से इंदौर के मास्टर प्लान का अनुरोध करने गए थे, तब ही कान में फूंक देते कि टीएलएफ का निर्णय सरकार के लिए आत्मघाती हो सकता है।
महापौर ने आश्वस्त तो किया है कि टैक्स लागू नहीं करेंगे, लेकिन जानकार यह भी जानते हैं कि सरकार गजट नोटिफिकेशन जारी कर चुकी है। संभव है कि संगठन की गाइड लाइन का लिहाज कर के इंदौर सहित अन्य नगर निगमों के प्रथम नागरिक चुप रह गए हों, ताज्जुब तो इस बात का है कि विपक्ष के मुंह में भी दही जमा है और पैरों में मेहंदी लगी है। प्रदेश की किसी भी नगर निगम, पालिका आदि के नेता प्रतिपक्ष ने टीएलएफ जैसे निर्णय लेने वाली सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए महापौरों पर दबाव लाने का साहस नहीं दिखलाया है। टीएलएफ में हर दो साल में पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रावधान भी किया गया है। इसके लिए सरकार की तरफ से 18 अप्रैल 2023 को गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है।

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‘पाकिस्तान भारत से युद्ध नहीं कर सकता’: बाजवा का चौंकाने वाला कबूलनामा पत्रकारों ने किया खुलासा

पाकिस्तान की सेना का भारतीय सेना से कोई मुकाबला नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान गोला-बारूद की कमी झेल रहा है और आर्थिक तंगी का शिकार है। यह बात पाकिस्तान के सेना प्रमुख रहे कमर जावेद बाजवा ने दो वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकारों से कही थी। अब जबकि बाजवा अवकाश प्राप्त कर चुके हैं तब यह बात सार्वजनिक हुई है। इसे ब्रिटेन में पाकिस्तानी मीडिया यूके 44 ने सार्वजनिक किया है।

अजीत डोभाल के साथ हो रही थी गोपनीय वार्ता

पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर और नसीम जेहरा ने यूके 44 के शो में कहा, सन 2021 में जनरल बाजवा ने उन्हें बताया था कि वह भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ गोपनीय वार्ता कर रहे हैं। दोनों की वार्ता में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पाकिस्तान यात्रा की संभावना पर बात हो रही थी। दोनों देशों के बीच 2021 में घोषित युद्धविराम के बाद मोदी की यात्रा हो सकती थी।

इमरान खान को भी थी वार्ता की जानकारी

पाकिस्तानी पत्रकारों ने कहा, बाजवा ने कश्मीर पर हुई सौदेबाजी के बारे में पाकिस्तानी नागरिकों को कुछ नहीं बताया था। बाजवा और डोभाल के बीच चल रही वार्ता की जानकारी जब पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को हुई तो वे तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान के पास पहुंचे और भारत-पाकिस्तान के बीच चल रही वार्ता से खुद को अनभिज्ञ बताया। इस पर इमरान ने उनसे कहा कि भारतीय सुरक्षा सलाहकार से वार्ता होने की उन्हें जानकारी है लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के पाकिस्तान दौरे को लेकर उनके पास पुष्ट सूचना नहीं है।

यूके 44 को दिए इंटरव्यू में पाकिस्तानी पत्रकारों ने कहा, तत्कालीन सेना प्रमुख बाजवा पाकिस्तानी सेना की क्षमता को लेकर सशंकित थे। उन्होंने साफ कहा था कि पाकिस्तान भारत से युद्ध नहीं लड़ सकता है।

‘पाकिस्तानी सेना का भारतीय सेना से कोई मुकाबला नहीं’

जावेद मीर ने बताया कि बाजवा ने पाकिस्तान के सैन्य कमांडरों की बैठक में भी साफ कह दिया था कि पाकिस्तानी सेना का भारतीय सेना से कोई मुकाबला नहीं है। पुराने टैंक युद्ध में इस्तेमाल होने लायक नहीं हैं और उनके लिए पर्याप्त मात्रा में गोला-बारूद और डीजल भी नहीं हैं। बाद में बाजवा ने यह बात दोनों पत्रकारों से भी कही। कहा कि पाकिस्तान की सेना भारतीय सेना से मुकाबला करने में सक्षम नहीं है।

इसलिए ठीक रहेगा कि पाकिस्तान भारत के साथ टकराव का रास्ता छोड़े और सामान्य संबंध कायम करे। इस बीच कश्मीर समस्या का बातचीत के जरिये समाधान निकालने की कोशिश भी जारी रहे। अंग्रेजी अखबार डान के मुताबिक कुछ लोगों की राय है कि पाकिस्तान सरकार आम चुनाव टालने के लिए भारत के साथ युद्ध छेड़ सकती है लेकिन जमीनी हकीकत इसका समर्थन नहीं करती है।

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