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मध्यप्रदेश चुनाव में योगी आदित्यनाथ की इंट्री

हिंदुस्तान मेल, भोपाल। मप्र में पांचवीं बार सरकार बनाने के लिए प्रयासरत भाजपा इस बार यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संघ की सलाह पर मुख्य स्टार प्रचारक के रूप में जिम्मा देकर चुनाव मैदान में उतारेगी। इसमें खास बात यह भी है कि मप्र में यूपी के निवासी बड़ी संख्या में रहते हैं। इस बड़े वोट बैंक को ध्यान में रखकर हिंदू हृदय सम्राट आने जाने वाले यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बीजेपी आलाकमान मप्र विधानसभा चुनाव में उतारने की सोच रहे हैं। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की रिपोर्ट के बाद भाजपा आलाकमान मप्र को लेकर चिंतित है। वह किसी भी हाल में मप्र में अपनी सत्ता बचाए रखना चाहते हैं। इसी कारण अब देशभर में चर्चित यूपी के मुख्यमंत्री से मप्र में मुख्य स्टार प्रचारक के रूप में कैंपेनिंग कराई जा सकती है। बताया जाता है कि ऐसे विधानसभा क्षेत्रों व जिलों की सूचियां तैयार की जा रही हैं, जहां भाजपा अपेक्षाकृत कमजोर है।

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मध्यप्रदेश : डिंडौरी-मंडला रोड बंद, नर्मदा किनारे के घाट डूबे, 12 जिलों में अलर्ट

मध्यप्रदेश के पूर्वी हिस्से में एक्टिव सिस्टम से अगले 24 घंटे में रीवा, पन्ना समेत 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन समेत प्रदेश के बाकी जिलों में भी हल्की से तेज बारिश हो सकती है।
सीनियर मौसम वैज्ञानिक एचएस पांडे ने बताया कि ट्रफ लाइन और कम दबाव का एरिया बनने से पूर्वी मध्यप्रदेश में 5 अगस्त तक तेज बारिश होने का अनुमान है। पश्चिमी हिस्से में हल्की बारिश होगी या फिर मौसम साफ रहेगा। डिंडौरी में नर्मदा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। डिंडौरी-मंडला मार्ग किसलपुरी के पास खरमेर नदी में बाढ़ आ गई। पुल पर पानी आने से डिंडौरी-मंडला रोड बंद हो गया है। करंजिया जनपद पंचायत क्षेत्र के बोंदर गांव के पास नाला उफनाया हुआ है।

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गुरुग्राम के बाद अब हिंसा की चपेट में आया पलवल, मस्जिद में तोड़फोड़ , फेंका पेट्रोल बम

दिल्ली से सटे हरियाणा में पिछले कई दिनों से जारी हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है। नूंह से शुरू हुआ बवाल अब गुरुग्राम के बाद पलवल जिले तक पहुंच गया है। राज्य के उस हिस्से में लगातार हिंसा का दौर देखने को मिल रहा है।

बुधवार को पलवल में माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। दरअसल मंगलवार देर रात उपद्रवियों ने शहर में स्थित एक मस्जिद पर हमला कर उसमें जमकर तोड़फोड़ की। यहीं नहीं मस्जिद पर पेट्रोल बम फेंके गए।

जिससे मस्जिद को काफी नुकसान हुआ है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में डर और तनाव की स्थिति बनी हुई है। इस तोड़फोड़ को लेकर हिंदू संगठनों ने दावा किया कि, धार्मिक स्थल से जुड़े समुदाय के लोगों ने ही खुद अपने धार्मिक स्थल में तोड़फोड़ की है।

पुलिस ने एक अगस्त की रात को मौके से रामनगर के रहने वाले मोहित, मयंक, निरंजन, पवन, सागर और खैर (उप्र) के रहने वाले दिनेश को मौके से पकड़ लिया। जबकि पांच दर्जन के करीब बवाली मौके से फरार हो गए। सोमवार और मंगलवार को हुई हिंसा को लेकर जिला के विभिन्न थानों में 250 अज्ञात शरारती तत्वों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं। होडल की मस्जिद में आगजनी और तोड़फोड़ कर रहे छह युवकों को भी पुलिस द्वारा मौके से पकड़ लिया गया।इस घटना के बाद पलवल में स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है। पुलिस की टीमें सुबह से ही लगातार गश्त कर रही हैं।

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दोनों दलों का अंचल पर फोकस

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर दोनों ही दलों का अंचल पर फोकस है। अभियान को गति देने कांग्रेस ने चुनाव से समितियों का गठन कर दिया है। चुनाव अभियान समिति की कमान आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया को सौंपी तो अन्य आदिवासी नेताओं को भी स्थान दिया है। चुनाव समिति के अध्यक्ष कमल नाथ रहेंगे। दोनों समितियों में क्षेत्रीय और गुटीय संतुलन को साधने के साथ वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया है। 230 सदस्यीय विधानसभा में 47 सीटें आदिवासियों के लिए सुरक्षित हैं। 30 पर आदिवासी मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में आदिवासी मतदाताओं का साथ कांग्रेस को मिला था और सुरक्षित सीटों में से 30 सीटें कांग्रेस ने जीती थीं। इसके कारण 15 वर्ष बाद पार्टी की सत्ता में वापसी हुई थी। इस वोट बैंक का साथ बरकरार रखने के लिए कांग्रेस लगातार प्रयास कर रही है। आदिवासी स्वाभिमान यात्रा और सामाजिक संगठनों के माध्यम से अपनी बात मतदाताओं तक पहुंचाने में जुटी है।
भाजपा ने भी उठाए हैं कदम
वहीं, भाजपा ने भी आदिवासी वोटबैंक को अपने पक्ष में करने के लिए कई कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पिछले दिनों आदिवासी बहुल शहडोल में आदिवासियों से संवाद कर चुके हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सतना में कोल महाकुंभ में शामिल हुए थे। शिवराज सरकार ने आदिवासियों के हित में कई कदम उठाए हैं। दरअसल, दोनों ही दल अच्छी तरह से जानते हैं कि सत्ता की चाबी आदिवासियों के हाथ में है इसलिए इन्हें साधने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। यही कारण है कि कांग्रेस ने चुनाव अभियान समिति की कमान आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया को देने के साथ बाला बच्चन, ओंकार सिंह मरकाम और सुरेंद्र सिंह बघेल को सदस्य बनाया है। हालांकि, वरिष्ठ नेता उमंग सिंघार को दोनों समितियों में स्थान नहीं मिला।
कांग्रेस ने क्षेत्रीय संतुलन साधा
चुनाव अभियान और चुनाव समिति के माध्यम से कांग्रेस ने क्षेत्रीय संतुलन साधने का काम किया है। विंध्य क्षेत्र से अजय सिंह, राजेंद्र सिंह, राजमणि पटेल, कमलेश्वर पटेल को दोनों समितियों में रखा गया है। महाकौशल से विवेक तन्खा, तरुण भनोत, हिना कांवरे, नकुल नाथ, एनपी प्रजापति, ओमकार सिंह मरकाम और सुखदेव पांसे सदस्य बनाए गए हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र को तुलनात्मक रूप से सबसे कम प्रतिनिधित्व मिला है। यहां से केवल सुरेंद्र चौधरी को अभियान समिति में रखा है। मालवा-निमाड़ से अरुण यादव, बाला बच्चन, विजयलक्ष्मी साधौ, जीतू पटवारी, शोभा ओझा सहित अन्य को स्थान मिला है तो ग्वालियर-चंबल से डॉ. गोविंद सिंह, अशोक सिंह, रामनिवास रावत, लाखन सिंह यादव, केपी सिंह, लक्ष्मण सिंह को समितियों में सम्मिलित किया है। मध्य क्षेत्र से सुरेश पचौरी और आरिफ मसूद दोनों समितियों के सदस्य हैं।

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हल्के में मत लेना

म प्र में इंदौर से चुनावी शंखनाद करके गृहमंत्री अमित शाह फिर से आने के लिए वापस चले गए हैं। लेकिन, इंदौर यात्रा में मैसेज तो दे ही गए हैं कि न तो मालवा-निमाड़ में विधानसभा चुनाव को और न ही विजयवर्गीय को इतने हल्के में लेना। सही भी है, 2018 के विधानसभा चुनाव में मालवा-निमाड़ की सीटों को हल्के में नहीं लिया होता तो सिंधिया को भाजपा में इतनी तवज्जो भी नहीं मिल पाती।
कैलाश विजयवर्गीय और विधायक रमेश मेंदोला की मंडली ने 72 घंटे से भी कम समय में बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन की तैयारियों को अंजाम देकर पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं को यह विश्वास दिला दिया है कि इस तरह की चुनौतियों से निपटना सहज बात है। जन-धन-बल में हर तरह से सम्पन्न यह मंडली एक तो क्या हर संभाग में ऐसे सम्मेलन कराने के साथ ही पांच-पच्चीस प्रत्याशियों को अपने खर्चे पर चुनाव लड़वाने की ताकत भी रखती है। कथा-भजन-भंडारे में माहिर मंडली की इस प्रतिभा को अमित शाह ने तो पहली बार ही परखा है।
मुख्यमंत्री और उनके सलाहकारों को जिन नेताओं के कारण अपनी कुर्सी खींच लिए जाने का अज्ञात भय सताता रहा है, तो उस लिस्ट में कैलाश विजयवर्गीय का नाम अमिट रहा है और अमित शाह की इस इंदौर यात्रा ने तो विजयवर्गीय के उज्ज्वल भविष्य की कल्याण कथा लिख डाली है, बशर्ते मालवा और निमाड़ में भाजपा 2013 जैसा इतिहास रच डाले। तब इन दोनों क्षेत्रों की 66 सीटों में से भाजपा ने 57 सीटें हासिल की थीं और कांग्रेस मात्र 7 सीटों पर सिमट गई थी। शाह के दौरे से तो मालवा-निमाड़ क्षेत्र में भाजपा के आक्रामक अभियान की शुरुआत हुई है, चुनाव तक तो यह तूफानी हो जाएगा। यदि भाजपा मालवा-निमाड़ में 2013 वाला चुनाव परिणाम दोहरा देती है, तो पूर्व विधायक भंवर सिंह शेखावत द्वारा 2018 में इस क्षेत्र में मिली कम सीटों को लेकर विजयवर्गीय पर निरंतर लगाए जाते रहे आरोप भी स्वत: धुल जाएंगे।

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