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नक्षत्र सिटी में कई दिनों से पसरा है अंधेरा, जिम्मेदार नहीं ले रहे सुध

नगर की एकमात्र वीआईपी कही जाने वाली नक्षत्र सिटी में पिछले कई दिनों से सड़कों पर अंधेरा पसरा पड़ा है, लेकिन जिम्मेदारों ने अब तक सुध नहीं ली, जबकि सर्वसुविधायुक्त और वीआईपी कॉलोनी के नाम पर लोगों के साथ छलावा मात्र है। बारिश का मौसम और प्रदेश के दूसरे बड़े तालाब के समीप बसी कॉलोनी में पहले भी सड़कों पर जानलेवा जीव-जंतु देखे गए थे, उसके बावजूद भी शाम से लेकर अलसुबह तक पूरी कॉलोनी अंधेरे के आगोश में रहती है।
बता दें कि नक्षत्र सिटी के कॉलोनाइजर ने लोकलुभावन वादों के साथ सर्वसुविधा के नाम पर लोगों को मनचाहे भाव पर प्लॉट बेचे थे, लेकिन आज कॉलोनी में न रोशनी है और न ही सड़कों पर भरा बारिश के पानी निकासी का कोई इंतजाम। अभी तक गरीब जरूरतमंद परिवारों के ईओडब्ल्यूएस के मकान नगर परिषद् को हैंड ओवर नहीं किए। उधर, एमपीईबी के सुपरवाइजर का कहना है कि कॉलोनी में तीन कनेक्शन हंै और कई महीनों से बिल जमा नहीं हुआ।
कॉलोनाइजर को भी कई बार सूचना दी, लेकिन भुगतान नहीं हुआ तो फिर लाइट काटना पड़ी, वहीं रहवासियों का कहना है कि यहां न समय पर नल आते हैं और न सड़कों पर बिजली है। नगर परिषद् को शिकायत की तो जवाब मिला कि हमारे हैंड ओवर नहीं है। कॉलोनाइजर ही सारी व्यवस्था करवाएगा।

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नगर निगम की कचरा गाड़ी से रील बनाना युवा को पड़ेगा भारी

इंदौर। सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरने के लिए कई लोग कई तरह की गलतियां कर बैठते हैं और इसी के तहत रील बनाने वाले युवाओं द्वारा बिना सोचे-समझे रील बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दी। इसके बाद जोन क्रमांक 7 के जोनल अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। दरअसल मामला यह है कि एक युवक और युवती द्वारा रील बनाकर स्टाग्राम और फेसबुक पर भेजकर वायरल की गई, जिसमें युवती द्वारा दोपहिया वाहन पर ना बैठने के बाद कहते हुए युवक उसे चार पहिया वाहन पर बैठाने का वादा कर उसे कचरे की गाड़ी में बैठाकर घर छोड़ने चल दिया। भले ही कई लोग इस वीडियो को लेकर हंस रहे हो, लेकिन सरकारी वाहन का इस वीडियो में दुरुपयोग किया गया। फिलहाल देखते हैं जोनल अधिकारी पर किस तरह की कार्रवाई नगर निगम कर पाता है।

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पैसे मांगे तो डाल दिया खौलता तेल दुकानदार की हालत गंभीर देर रात दो आरोपी गिरफ्तार…………

दुकानदार की हालत गंभीर देर रात दो आरोपी गिरफ्तार……………..

स्वच्छता और खानपान के लिए मशहूर इंदौर में अपराध का ग्राफ भी दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है। इंदौर में खानपान के लिए मशहूर मेघदूत चाट चौपाटी पर बदमाशों ने एक दुकान संचालक पर खौलता हुआ तेल डाल दिया। दुकानदारों ने बताया कि यह बदमाश वसूली का काम करते हैं और इनमें पुलिस का कोई खौफ नहीं है। हमला करने के बाद बदमाश मौके से फरार हो गए। पुलिस ने देर रात दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मौके पर पहुंची पुलिस ने एंबुलेस से ठेला संचालक को एमवाय भेजा। यहां उसका आईसीयू में उपचार चल रहा है।
विजय नगर थाना प्रभारी रवींद्र गुर्जर के मुताबिक मंगलवार रात को मेघदूत गार्डन यह घटना हुई। यहां मुकेश पुत्र राकेश जैन खाने की दुकान संचालित करते हैं। पुलिस के मुताबिक मुकेश ने बताया कि रात में ऋषभ जोशी, नमन ठाकुर, राहुल बारीक यहां पर आए। उन्होंने मुफ्त में खाना और रुपए मांगे। मुकेश ने मुफ्त में खाना देने से मना किया तो बदमाशों ने अपशब्द कहे और मारपीट शुरू कर दी। इस बीच एक बदमाश ने मुकेश पर खौलता हुआ तेल डाल दिया। इससे मुकेश गंभीर रूप से जल गया।पुलिस के मुताबिक सभी बदमाशों के आपराधिक रिकॉर्ड है। फिलहाल दो आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। बाकी की तलाश की जा रही है। यह सभी बदमाश शहर के कई क्षेत्रों में अवैध वसूली करते हैं। पहले भी इनके खिलाफ परदेशीपुरा, एमआईजी, विजयनगर और हीरानगर इलाके में लोगों को धमकाकर अवैध वसूली और मारपीट करने के मामले सामने आए हैं। वहीं पूरे मामले में पुलिस ने ऋषभ और राहुल बारीक को गिरफ्तार कर लिया है और पूरे मामले में फरियादी के कहे अनुसार हत्या का प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है। पकड़ाए बदमाशों के पुराने रिकॉर्ड भी पुलिस खंगालने में जुटी हुई है।

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छात्राओं ने सुनाई पीड़ा, एचओडी को हटाया

गांधी मेडिकल कॉलेज की जूनियर डॉक्टर बाला सरस्वती की सुसाइड केस के बाद जूडा आक्रोशित है। बुधवार की दोपहर करीब 3:30 बजे एचओडी को हटाने की मांग को लेकर जूडा ने डीन से मुलाकात की। डीन अरविंद कुमार राय के आॅफिस परिसर में छात्राएं अपनी पीड़ा सुनाते हुए रो पड़ीं। डॉ. कविता कुमार की समझाइश के बाद छात्राएं शांत हुई। हालांकि शाम करीब 7:30 बजे डिपार्टमेंट की एचओडी अरुणा कुमार को पद से हटा दिया गया।
बाला सरस्वती के साथ काम करने वाले अन्य डॉक्टर्स ने पुलिस को एक बॉक्स सौंपा था, जिसमें उन्होंने डिपार्टमेंट में स्वयं के साथ होने वाली प्रताड़ना का जिक्र किया है। इन बेनामी पत्रों में जिस तरह के मजमून लिखे हैं, इन्हें पढ़ कर पुलिस भी हैरान है। इनमें किसी ने लिखा कि वांट मेजर चेंज गायनिक डिपार्टमेंट (गायनिक डिपार्टमेंट में बड़ा बदलाव चाहिए) सीनियर डॉक्टरों की प्रताड़नाओं से थक चुके हैं। इस जहरीले माहौल में सर्वाइव करना मुश्किल हो चुका है। इसकी खास वजह डिपार्टमेंट की पांच जिम्मेदार महिला डॉक्टर हैं। जीएमसी के एक जूनियर डॉक्टर ने साफ लिखा कि जहरीला माहौल रहने लायक नहीं। इस पत्र में पांच महिला डॉक्टरों के नाम का उल्लेख किया गया है।
मानसिक प्रताड़ना ने थकाया
एक चिट्‌ठी में लिखा गया कि मैंटल हिरासमेंट से थक चुके हैं। विभाग की जिम्मेदार डॉक्टर्स के जहरीले बोल दिल पर लगते हैं। एक छात्रा ने विभाग की सात महिला डॉक्टरों के नाम का उल्लेख करते हुए दी जाने वाली मानसिक प्रताड़ना का जिक्र किया है। इसमें कहा गया है कि हम अच्छे परिवारों से, यहां कुछ सीखने आए हैं। हमसे अच्छा बर्ताव और अच्छे संबंध सीनियर डॉक्टरों को करना चाहिये।
डॉक्टर्स देती हैं गाली
एक अन्य चिट्‌ठी में लिखा गया है कि हमें बेइज्जत किया जाता है। लेबर रूम में डॉक्टर्स गाली देने से लेकर पीटते तक हैं। हम अच्छे परिवार से हैं। हम पढ़ने आए हैं। प्रताड़ना सहने नहीं, लेकिन कुछ कर नहीं सकते…हमारा रिजल्ट इन्ही के हाथ में जो है।
पहले ही दिन लेबर रूम में पीटा
एक डॉक्टर ने लिखा मुझे पहले ही दिन लेबर रूम में पीटा गया। बहुत डिप्रेशन में चली गई थी, पर देखा की इन लोगों को किसी के तनाव से कोई मतलब नहीं है। सिखाने के नाम पर पीटना ठीक बात नहीं। कई बार मुझे इक्युप्मेंट्स से तक पीटा गया है। अपशब्द कहे जात हैं।
एसीपी ने यह बताया
मामले की जांच कर रहे एसीपी उमेश तिवारी ने बताया कि पत्रों में अलग-अलग आरोप छात्रों की ओर से लिखे गए हैं। हालांकि कोई सामने आकर शिकायत करने को तैयार नहीं है। कई छात्रों को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया, थाने आकर बयान दर्ज कराने के लिए भी कोई तैयार नहीं है। डॉक्टर बाला सरस्वती के जूनियर डॉक्टर ने बताया कि शुक्रवार को उन्होंने सरस्वती मैडम के साथ ड्यूटी की थी। तब वह किसी प्रकार के तनाव में नहीं लगी। सामान्य बर्ताव था, ग्रुप के साथ उन्होंने तस्वीर भी खिंचाई थी। मुझे कभी गुमान भी न था कि यह उनके साथ आखिरी तस्वीर होगी।

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छात्राओं ने सुनाई पीड़ा, एचओडी को हटाया

गांधी मेडिकल कॉलेज की जूनियर डॉक्टर बाला सरस्वती की सुसाइड केस के बाद जूडा आक्रोशित है। बुधवार की दोपहर करीब 3:30 बजे एचओडी को हटाने की मांग को लेकर जूडा ने डीन से मुलाकात की। डीन अरविंद कुमार राय के आॅफिस परिसर में छात्राएं अपनी पीड़ा सुनाते हुए रो पड़ीं। डॉ. कविता कुमार की समझाइश के बाद छात्राएं शांत हुई। हालांकि शाम करीब 7:30 बजे डिपार्टमेंट की एचओडी अरुणा कुमार को पद से हटा दिया गया।
बाला सरस्वती के साथ काम करने वाले अन्य डॉक्टर्स ने पुलिस को एक बॉक्स सौंपा था, जिसमें उन्होंने डिपार्टमेंट में स्वयं के साथ होने वाली प्रताड़ना का जिक्र किया है। इन बेनामी पत्रों में जिस तरह के मजमून लिखे हैं, इन्हें पढ़ कर पुलिस भी हैरान है। इनमें किसी ने लिखा कि वांट मेजर चेंज गायनिक डिपार्टमेंट (गायनिक डिपार्टमेंट में बड़ा बदलाव चाहिए) सीनियर डॉक्टरों की प्रताड़नाओं से थक चुके हैं। इस जहरीले माहौल में सर्वाइव करना मुश्किल हो चुका है। इसकी खास वजह डिपार्टमेंट की पांच जिम्मेदार महिला डॉक्टर हैं। जीएमसी के एक जूनियर डॉक्टर ने साफ लिखा कि जहरीला माहौल रहने लायक नहीं। इस पत्र में पांच महिला डॉक्टरों के नाम का उल्लेख किया गया है।
मानसिक प्रताड़ना ने थकाया
एक चिट्‌ठी में लिखा गया कि मैंटल हिरासमेंट से थक चुके हैं। विभाग की जिम्मेदार डॉक्टर्स के जहरीले बोल दिल पर लगते हैं। एक छात्रा ने विभाग की सात महिला डॉक्टरों के नाम का उल्लेख करते हुए दी जाने वाली मानसिक प्रताड़ना का जिक्र किया है। इसमें कहा गया है कि हम अच्छे परिवारों से, यहां कुछ सीखने आए हैं। हमसे अच्छा बर्ताव और अच्छे संबंध सीनियर डॉक्टरों को करना चाहिये।
डॉक्टर्स देती हैं गाली
एक अन्य चिट्‌ठी में लिखा गया है कि हमें बेइज्जत किया जाता है। लेबर रूम में डॉक्टर्स गाली देने से लेकर पीटते तक हैं। हम अच्छे परिवार से हैं। हम पढ़ने आए हैं। प्रताड़ना सहने नहीं, लेकिन कुछ कर नहीं सकते…हमारा रिजल्ट इन्ही के हाथ में जो है।
पहले ही दिन लेबर रूम में पीटा
एक डॉक्टर ने लिखा मुझे पहले ही दिन लेबर रूम में पीटा गया। बहुत डिप्रेशन में चली गई थी, पर देखा की इन लोगों को किसी के तनाव से कोई मतलब नहीं है। सिखाने के नाम पर पीटना ठीक बात नहीं। कई बार मुझे इक्युप्मेंट्स से तक पीटा गया है। अपशब्द कहे जात हैं।
एसीपी ने यह बताया
मामले की जांच कर रहे एसीपी उमेश तिवारी ने बताया कि पत्रों में अलग-अलग आरोप छात्रों की ओर से लिखे गए हैं। हालांकि कोई सामने आकर शिकायत करने को तैयार नहीं है। कई छात्रों को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया, थाने आकर बयान दर्ज कराने के लिए भी कोई तैयार नहीं है। डॉक्टर बाला सरस्वती के जूनियर डॉक्टर ने बताया कि शुक्रवार को उन्होंने सरस्वती मैडम के साथ ड्यूटी की थी। तब वह किसी प्रकार के तनाव में नहीं लगी। सामान्य बर्ताव था, ग्रुप के साथ उन्होंने तस्वीर भी खिंचाई थी। मुझे कभी गुमान भी न था कि यह उनके साथ आखिरी तस्वीर होगी।

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