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आदिवासी सीएम : कमलनाथ बोले- सबके अपने विचार हैं, क्यों कही ये बात वो ही जानें

आदिवासी स्वाभिमान यात्रा का समापन झाबुआ में हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पीसीसी चीफ कमलनाथ थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार के आदिवासी मुख्यमंत्री के बयान पर कमलनाथ ने कहा कि सबके अपने-अपने विचार हैं, वे ही जानें। मुख्यमंत्री का चुनाव एक प्रक्रिया से होता है। सवालों के पूर्व उन्होंने पहले अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज मध्यप्रदेश में आदिवासियों पर अत्याचार लगातार बढ़ गए हैं। आदिवासी अत्याचारों में प्रदेश नंबर 1 पर है। मीडिया के माध्यम से अपराध समाने आते हैं। कई ऐसे अपराध भी हैं जो सामने नहीं आते। उन्होंने नेमावर, सीधी, खरगोन की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज की सरकार विकास पर्व मना रही है, यात्राएं निकाली जा रही है। उन्हें तो माफी यात्रा निकालना चाहिए।
कमलनाथ ने कहा कई वर्षों से भाजपा की सरकार प्रदेश में थी, लेकिन उन्हें अब तक लाड़ली बहना की याद नहीं आई। संविदा कर्मचारी, आशा कार्यकर्ता, उषा बहनें अब उन्हें याद आ रही हैं। शिवराज सरकार अपने पापों को चुनाव समय में धोना चाहती है, लेकिन प्रदेश की जनता समझदार है।
कमलनाथ ने कहा कि अमित शाह प्रदेश आ रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान उनसे भी झूठ बुलवाते हैं। शाह छिंदवाड़ा में भी आए, उन्हें जो सूची दी गई, सब झूठी बात थी। राहुल गांधी के सवाल पर उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का वे स्वागत करते हैं। लोकसभा को इस पर नोटिफिकेशन को 2 दिन पहले जारी कर देना था। उन्होंने मणिपुर की घटना पर कहा कि लगातार घटनाएं अभी भी हो रही हैं। सेना, सीआरपीएफ सहित अन्य सुरक्षा बल होने के बाद भी हिंसा शांत नहीं हो रही। भाजपा देशभर में राजनीतिक लाभ के लिए हिंसा को बढ़ावा दे रही है। कांग्रेस के अजय सिंह ने सिंगरोली गोलीकांड का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा विधायक के बेटे ने आदिवासी युवक को गोली मारी। विधायक पुत्र पहले भी गोलीकांड कर चुका है। जब इसका जमकर विरोध हुआ तब जाकर एफआइआर दर्ज की गई। अब भाजपा विधायक कह रहे हैं कि उनका बेटा साथ नहीं रहता, उन्हें नहीं पता क्या करता है।

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युवा-महिला जिसके साथ, कुर्सी भी उसी दल के हाथ

चाहे विधानसभा चुनाव हों, या लोकसभा चुनाव। पिछले कुछ चुनावों का रिकॉर्ड रहा है कि मतदान करने वालों में महिला और युवा मतदाताओं पर जिस दल का जादू चल जाता है, वो सरकार बनाने की रेस में आगे निकल जाता है। हालांकि युद्ध, प्रेम, क्रिकेट और इलेक्शन में ऊंट किस करवट बैठ जाए, पहले से कहा नहीं जा सकता, लेकिन मप्र चुनाव के संदर्भ में फिलहाल आंकड़े तो संकेत कर रहे हैं कि पांचवीं बार भी भाजपा की सरकार बनने के आसार हैं। रही बात मुख्यमंत्री कौन? तो खुद भाजपा प्रधानमंत्री के नाम-काम को आधार बना कर चुनाव लड़ रही है। तय है मोशाजी के मन को जो जीत लेगा, वही अगला सीएम होगा। रही शिवराज सिंह की बात, तो खुद उनके समर्थक भी जानते हैं कि मोशाजी का दिल तो वो पहले से ही खूब जीत चुके हैं।
इस चुनाव में मतदान करने वालों के जो आंकड़े प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) अनुपम राजन ने जारी किए हैं, वो संकेत दे रहे हैं कि मप्र में भाजपा फिर सत्ता में आती है तो चुनाव रणनीति को अंजाम दे रही टीम से अधिक श्रेय अमित शाह के खाते में जाने वाला है। इस साल विधानसभा और अगले साल मप्र में भी लोकसभा चुनाव होना है। विधानसभा चुनाव में मतदान करने वाले कुल मतदाता 5 करोड़ 44 लाख 52 हजार 522 हो गए हैं। इनमें भी पुरुष मतदाता 2 करोड़ 81 लाख 99 हजार 333 और महिला मतदाताओं की संख्या 2 करोड़ 62 लाख 51 हजार 863 है। हर चुनाव में पहली बार मतदान करने वाले युवा मतदाताओं को जो दल प्रभावित कर लेता है, वही सत्ता सिंहासन की राह पर चल पड़ता है।
मध्यप्रदेश में जनवरी से जुलाई के बीच इन युवा मतदाताओं की संख्या 5 लाख 17 हजार 423 दर्ज की गई है। भाजपा की सारी तैयारी विधानसभा में 200 सीटें जीतने के साथ लोकसभा चुनाव का माहौल बनाने वाली चल रही है। इसके विपरीत कर्नाटक में मिली सफलता से उत्साहित कांग्रेस के रणनीतिकारों का फोकस अभी सिर्फ विधानसभा चुनाव पर और लक्ष्य 150 से अधिक सीटें जीतने पर है। इनके साथ ही 20 से 29 वर्ष के मतदाताओं की संख्या 1 करोड़ 31 लाख 93 हजार 816 है और 30 से 39 वर्ष के मतदाता 1 करोड़ 44 लाख 02 हजार 242। 50 से 59 वर्ष के मतदाता 75 लाख 22 हजार 156 एवं 60 से 69 वर्ष के मतदाता 43 लाख 72 हजार 141 हैं।
आंकड़ों के आधार पर तो आभास होता है कि पहली बार मतदान करने वालों के साथ ही 30 वर्ष तक के मतदाताओं को नरेंद्र मोदी के हर काम को विश्व स्तर पर मिली प्रसिद्धि वाला प्रचार और भाजपा की नीतियां प्रभावित कर सकती है। किंतु, दूसरा पक्ष यह भी है कि सोशल मीडिया पर परोसे जाने वाली हर खबर का दूसरा पक्ष भी कुछ पल में उतनी ही तेजी से वायरल करने में एक्टिव विभिन्न दलों की ट्रोल आर्मी दिलो-दिमाग को झटका देने में सक्रिय रहती हैं। भाजपा यदि मप्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ने का मन बहुत पहले ही बना चुकी थी, तो उसकी एक बड़ी वजह हाल ही में कर्नाटक विधानसभा के चुनाव परिणाम के साथ भाजपा वाले राज्यों में बीते वर्षों में पनपा भ्रष्टाचार, नौकरशाही पर निर्भरता और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की सतत अनदेखी से राज्यों के नेतृत्व पर बढ़ता जनाक्रोश भी है। मोशाजी ने इन राज्यों में ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए ही चुनाव संचालन के लिए अपनी विश्वस्त टीम को राज्यों में तैनात कर रखा है।
पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को लेपटॉप, स्कूटी, साइकिल, स्कॉलरशिप आदि योजनाओं में मिलने वाला लाभ भाजपा के अत्यधिक विश्वास का कारण बना हुआ है, तो मप्र में सवा करोड़ से अधिक लाड़ली बहनों को हर माह दी जा रही किस्त से रिटर्न गिफ्ट मिलने का भी भरोसा है। 25 जुलाई से 21 साल की विवाहित-अविवाहित युवतियों को भी इस योजना के फार्म भरने योग्य मान लिया है। इनके लिए ही उम्र के 23 साल वाले बंधन को घटा कर 21 किया गया है। अभी 23 साल या अधिक उम्र वाली 1.25 करोड़ महिलाओं को जून और जुलाई दो किस्तों का लाभ मिल चुका है। इसी माह से 21 से 23 वर्ष वाली 10 लाख महिलाओं को भी 10 तारीख से पहली किस्त मिलने लग जाएगी। जिन किसान परिवारों को ट्रैक्टर होने से लाभ नहीं मिल रहा था, उन परिवारों की 21 से 60 साल तक की महिलाएं भी अब इस योजना का लाभ ले सकेंगी। इन थोकबंद वोटर्स का आंकड़ा किसी भी दल की जीत में मददगार बनेगा ही।
बाकी दलों से बसपा आगे
सबसे पहले 66 सीटों पर प्रत्याशी घोषित करने का दावा करने वाली कांग्रेस को भी पीछे छोड़ते हुए बसपा ने अपने एक प्रत्याशी की घोषणा कर दी है। बसपा का यूपी में प्रभाव अधिक है, इसलिए यूपी सीमा से लगने वाले मप्र के जिलों में बसपा अपना प्रभाव पहले स्थापित करना चाहती है। यही कारण है कि सतना की रामपुर बघेलान सीट से सेवानिवृत तहसीलदार मणिराज पटेल को प्रत्याशी भी घोषित कर दिया है। पिछले चुनावों में बसपा की सफलता का आंकड़ा भले ही 10 सीटों पर भी कामयाबी वाला नहीं रहा, लेकिन बहनजी ने इस बार भी प्रदेश की सभी सीटों से लड़ने की घोषणा कर दी है। मायावती के निर्देश पर इसी महीने पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद भोपाल में सभा करने आ रहे हैं। अगले महीने मायावती की सभा कहां कराना बेहतर रहेगा, प्रदेश अध्यक्ष रमाकांत पिप्पल सभा के लिए शहर तलाश रहे हैं।
अभिमंत्रित ताबीज!
दिल्ली की हिदायत पर प्रदेश भाजपा ने नाराज चल रहे खुर्राट नेताओं को जब से गंडे-ताबीज बांधना शुरू किया है, पार्टी में बधाई गीत गूंजने लगे हैं। चाहे अनूप मिश्रा हों, अजय बिश्नोई या दमोह में पिछला चुनाव हार चुके जयंत मलैया हों, इनमें कोई मंत्री नहीं बनाने से, तो कोई अपनी उपेक्षा से नाराज था। मोशा जी के हाथों अभिमंत्रित डिब्बा लेकर आए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और चुनाव प्रबंधन समिति संयोजक नरेंद्र सिंह तोमर जब से नाराज नेताओं को ताबीज बांध रहे हैं, इन सभी की आवाज में भी मिश्री घुल गई है।

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तारक… के मेकर्स देंगे 1 करोड़ रु. लोढ़ा बोले- लड़ाई आत्मसम्मान की

तारक मेहता का उल्टा चश्मा फेम एक्टर शैलेश लोढ़ा ने शो के प्रोड्यूसर असित मोदी के खिलाफ केस जीत लिया है। रिपोर्ट्स की मानें तो अब मोदी को सेटलमेंट के तौर पर शैलेश को डिमांड ड्रॉफ्ट के जरिए 1 करोड़ 5 लाख 84 हजार रुपए का अमाउंट देना होगा।
मैंने युद्ध जीत लिया है
इस फैसले के आने के बाद लोढ़ा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, यह लड़ाई कभी पैसों की थी ही नहीं। यह इंसाफ और सेल्फ रिस्पेक्ट की लड़ाई थी। मुझे लग रहा है कि मैंने युद्ध जीत लिया है और मैं खुश हूं कि सच सामने आ गया। मैं किसी के झुकाने पर भी नहीं झुका।
क्या था पूरा मामला
करीबन 14 साल तक इस फेमस टीवी शो में टाइटल रोल प्ले करने वाले लोढ़ा ने 2022 में बिना कोई वजह बताए शो छोड़ दिया था। उन्होंने कहा था कि वे सही समय आने पर इस बारे में बात करेंगे। इसके बाद यह अफवाह थी कि एक्टर ने अपना बकाया ना चुकाने के लिए मेकर्स को फटकार लगाई थी। शो छोड़ने पर शैलेश ने अपने साल भर के बकाए के भुगतान के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद दिवाला और दिवालियापन की धारा 9 के तहत मामले की सुनवाई की गई और सहमति की शर्तों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच समझौता किया गया।
6 साल बाद लौटेंगी दिशा वकानी
हाल ही में शो के 15 साल पूरे होने के मौके पर प्रोड्यूसर असित मोदी ने बड़ी अनाउंसमेंट की। उन्होंने बताया कि वो जल्द ही दिशा वकानी को शो पर वापस लेकर आएंगे। शो की पॉपुलर कैरेक्टर दयाबेन बीते छह साल से मिसिंग है। दिशा वकानी, जो इस शो में दयाबेन का रोल प्ले करती हैं, वो 2017 में मैटरनिटी लीव पर गई थीं। तब से लेकर अब तक वो शो पर नहीं लौटी हैं। यह शो बीते 15 साल से सक्सेसफुली टेलीकास्ट हो रहा है। हालांकि, पिछले कुछ वक्त से शो गलत कारणों से चर्चा में है। शो के प्रोड्यूसर असित मोदी पर एक्ट्रेस जेनिफर मिस्त्री ने सेक्सुअल हैरेसमेंट के आरोप लगाए थे।

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भारत के पास सीरीज बचाने का आखिरी मौकाहारे तो विंडीज से 6 साल बाद टी-20 सीरीज गंवाएंगे

भारत और वेस्टइंडीज के बीच तीसरा टी-20 मुकाबला गुयाना के प्रोविडेंस स्टेडियम में खेला जाएगा। मैच का टॉस 7:30 बजे होगा और मुकाबला रात 8 बजे से खेला जाएगा। विंडीज की टीम 5 टी-20 मैचों की सीरीज में 2-0 की बढ़त पर है। भारत को यह सीरीज बचाने के लिए यह मैच किसी भी हाल में जीतना होगा। अगर भारत हारता है, तो वह वेस्टइंडीज के खिलाफ 3 या उससे ज्यादा मैच की सीरीज पहली बार हारेगा।
भारत के ओपनर फेल
वनडे सीरीज में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय ओपनर्स टी-20 सीरीज में फीके रहे। गिल और ईशान दोनों टी-20 में शुरुआती ओवर में आउट होकर पवेलियन लौट गए। ईशान किशन 2 मैच में 33 और शुभमन गिल 2 मैच में 10 रन ही बना सके हैं। ऐसे में अब करो या मरो मुकाबले में उन्हें अच्छा प्रदर्शन करना होगा। दूसरी ओर सूर्यकुमार यादव भी अपना जादू नहीं दिखा सके हैं। मिडिल आॅर्डर बल्लेबाज संजू सैमसन के लिए भी यह मैच प्रेशर से भरा होगा। सैमसन अब तक 2 मैच में 19 रन ही बना सके हैं। गेंदबाजी में कुलदीप यादव चोटिल हैं। दूसरे टी-20 में उनकी जगह रवि बिश्नोई को मौका मिला था। युजवेंद्र चहल ने 2 मैच में 4 विकेट ले कर शानदार प्रदर्शन किया है।
वेस्टइंडीज का मिडिल आॅर्डर मजबूत
वेस्टइंडीज की टीम कैरेबियन प्रीमियर लीग (सीपीएल) से पहले ही टी-20 के रंग में नजर आ रही है। टीम ने पहले टी-20 आसानी से जीते। वेस्टइंडीज के मिडिल आॅर्डर ने पहली 2 जीत में बड़ी भूमिका निभाई है। पूर्व कप्तान निकोलस पूरन ने दोनों मैचों में शानदार प्रदर्शन किया। उनके साथ कप्तान रोवमन पॉवेल ने भी टीम को जीत दिलाई। फास्ट बॉलर रोमारियो शेफर्ड ने भी शानदार गेंदबाजी की है।
आईपीएल में कमाल करने वाले काइल मेयर्स अपनी नेशनल टीम के लिए अपना प्रदर्शन दोहरा नहीं पाए। वनडे सीरीज के बाद उन्होंने पहले दो टी20 में भी 1 और 15 रन बनाए। उन्हें अपना गेम मजबूत करना होगा।

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इंदौर पुलिस कमिश्नर दफ्तर के सामने मारपीट: रहवासियों ने बनाया स्कूटर सवार युवकों का वीडियो

इंदौर। इंदौर के पलासिया में पुलिस कमिश्नर और डीसीपी आॅफिस के सामने ही रात में स्कूटर सवार युवकों ने जमकर हंगामा किया। यहां विवाद करने के बाद वह जमकर एक दूसरे पर अपशब्दों की बौछार करते रहे। आवाज सुन बिल्डिंग के लोग बाहर आए। कुछ लोगों ने बालकनी से उनका वीडियो बना लिया। काफी देर तक हंगामा करते हुए युवक यहां से चले गए। पूरा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। यह जगह पलासिया थाने से भी कुछ ही दूरी पर है। पलासिया से साकेत की ओर जाने वाले रोड के इस वीडियो में स्कूटर सवार चार युवक सड़क पर दो युवकों से बुरी तरह से मारपीट कर रहे हैं। मारपीट करने के दौरान वे दोनों को धमका भी रहे हैं। यहां से निकलने वाले दूसरे वाहन चालक उन्हें देखते हुए जा रहे, लेकिन विवाद में बचाव करने से डरते रहे। कुछ लोग बचाव के लिए भी आगे आए, लेकिन मारपीट करने वाले युवकों ने उन्हें भी दूर कर दिया।

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