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शतरंज : इतिहास रचने से एक कदम दूर प्रगनानंदा……प्रेशर कुकर लेकर चलती हैं मां, ताकि बेटे को विदेश में भी मनपसंद खाना मिले………

चंद्रयान-3 की सफलता के बाद आज भारत की नजरें युवा चेस प्लेयर प्रगनानंदा पर टिकी रहेंगी। वे इस समय मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन नॉर्वे के मैग्नस कार्लसन के खिलाफ अजरबैजान के बाकू शहर में फीडे चेस वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला खेल रहे हैं। दो क्लासिकल गेम के बाद दोनों खिलाड़ी बराबरी पर चल रहे हैं। अब चैंपियन का फैसला आज रैपिड चेस के जरिए टाईब्रेकर से होगा।
अगर वे कार्लसन को मात देने में कामयाब हो जाते हैं, तो 21 साल बाद कोई भारतीय यह टाइटल जीतेगा। इससे पहले विश्वनाथन आनंद ने 2002 में इस चैंपियनशिप में जीत हासिल की थी। तब प्रगनानंदा पैदा भी नहीं हुए थे।
पिता बैंक में काम करते हैं,
मां हाउस वाइफ
प्रगनानंदा का जन्म 10 अगस्त, 2005 को चेन्नई में हुआ। उनके पिता स्टेट कॉपोर्रेशन बैंक में काम करते हैं, जबकि मां नागलक्ष्मी एक हाउस वाइफ हैं। उनकी एक बड़ी बहन वैशाली आर हैं। वैशाली भी शतरंज खेलती हैं। प्रगनानंदा का नाम पहली बार चर्चा में तब आए, जब उन्होंने 7 साल की उम्र में वर्ल्ड यूथ चेस चैंपियनशिप जीत ली। तब उन्हें फेडरेशन इंटरनेशनेल डेस एचेक्स (फीडे) मास्टर की उपाधि मिली। वे 12 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर बन गए और सबसे कम उम्र में यह उपाधि हासिल करने वाले भारतीय बने। इस मामले में प्रगनानंदा ने भारत के दिग्गज शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद का रिकॉर्ड तोड़ा। इससे पहले, वे 2016 में यंगेस्ट इंटरनेशनल मास्टर बनने का खिताब भी अपने नाम कर चुके हैं। तब वे 10 साल के ही थे। चेस में ग्रैंडमास्टर सबसे ऊंची कैटेगरी वाले खिलाड़ियों को कहा जाता है। इससे नीचे की कैटेगरी इंटरनेशनल मास्टर की होती है। प्रगनानंदा की सफलता के पीछे मां का बड़ा हाथ है। उनकी हर जरूरत का ध्यान मां खुद रखती है। बात चाहे खान-पान की हो या फिर ट्रेनिंग की। प्रगनानंद की मां हमेशा उनके साथ रहती हैं। वे जहां भी जाती हैं प्रेशर कुकर साथ लेकर जाती हैं, ताकि बेटे को विदेश में भी घर का खाना खिला सकें।
जब तक प्रगनानंदा मैच खेलते हैं वे हाल के एक कोच में चुपचाप बैठी रहती हैं। फाइनल के सेकेंड क्लासिकल गेम में कार्लसन को ड्रॉ पर रोकने के बाद प्रगनानंदा ने अपनी मां को लेकर कहा- ह्यमेरी मां मेरे साथ-साथ मेरी बहन के लिए भी बहुत बहुत बड़ा सहारा रही हैं।

बहन को देखकर चेस खेलना शुरू किया
इस युवा चेस प्लेयर ने कॅरियर की शुरुआत अपनी बड़ी बहन वैशाली आर को देखकर की। वैशाली भी शतरंज खेलती हैं। वे 5 साल की उम्र से शतरंज खेल रही है। वैशाली भी महिला ग्रैंडमास्टर हैं।
वे एक इंटरव्यू में बताती हैं- जब मैं करीब 6 साल की थी, तो बहुत कार्टून देखती थी। मुझे टीवी से दूर करने के लिए पैरेंट्स ने मेरा नाम शतरंज और ड्राइंग की क्लास में लिखा दिया। बहन को चेस खेलता देख प्रगनानंदा भी उससे प्रेरित हुए और महज 3 साल की उम्र में शतरंज सीखने लगे। उन्होंने चेस की कोई क्लास नहीं ली और अपनी बड़ी बहन से खेलना सीखा।

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चांद के दक्षिणी ध्रुव पर प्रदक्षिणा, भारत की दुनिया को गुरु दक्षिणा

स्वाधीनता दिवस के एक सप्ताह बाद भारत ने चांद पर तिरंगा लहराने का गौरव हासिल कर लिया है। भारत दुनिया का पहला देश बन गया है, जो चांद की दक्षिणी सतह पर अपना चंद्रयान उतारने में सफल हुआ है। रूस का मिशन ‘लूना’ कुछ दिन पहले ही क्रेश हो गया है। अब पूरी दुनिया टकटकी लगाए भारत के मिशन चंद्रयान को देख रही थी।
भारतीय वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में जो इतिहास रचा है, वह भारत के गौरव गान को चार चांद लगाएगा। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर मिशन चंद्रयान के विक्रम लैंडर से निकलकर प्रज्ञान रोवर की प्रदक्षिणा शुरू हो गई है। मिशन चंद्रयान के नतीजे दुनिया को भारत की गुरु दक्षिणा के रूप में अंतरिक्ष विज्ञान को नए चांद और सूरज उगाने का अवसर उपलब्ध कराएगी। अमेरिका, चीन, जापान, रूस और दूसरा कोई भी देश चांद के साउथ पोल पर अभी तक अपना यान नहीं उतार सका है।
चंद्रयान-2 की असफलता के बाद भारतीय वैज्ञानिकों ने भारतीय ज्ञान और विज्ञान की विरासत को चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए कड़ी मेहनत और निष्ठा से आज चांद को भारत की धरती पर उतार दिया है।
भारतीय ज्ञान और विज्ञान की परंपराओं और सनातन ग्रंथों के चमत्कारिक निष्कर्षों के आधार पर दुनिया के वैज्ञानिक नई-नई खोजें करने में सफल हो रहे हैं। अब तो दुनिया के वैज्ञानिक तक मानने लगे हैं कि भारतीय धर्मग्रंथों में जो भी बात लिखी गई है, उसको कल्पना मात्र मानना बहुत बड़ी भूल होगी। भारतीय मनीषियों ने अपने ग्रंथों में जिन निष्कर्षों का उल्लेख किया है, उनके भले ही भारतीयों के पास अभी कोई वैज्ञानिक आधार नहीं हो, लेकिन ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं है, जिसका कोई वैज्ञानिक आधार ना हो।
गणित, शल्य चिकित्सा, वायु विज्ञान के बारे में भारतीय ग्रंथों में वर्णित तथ्यों पर की गई वैज्ञानिक खोजों ने दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव किया है। अब तो चांद पर बस्तियां बसाने की बात हो रही है। भारतीय ज्ञान ने चांद को चंदामामा के रूप में उद्घाटित कर उस पर जीवन की संभावनाओं और पृथ्वी और चंद्रमा के जैविक संबंधों का ही इशारा किया है।
भारत में आज मिशन चंद्रयान का पर्व घर-घर में मनाया जा रहा है। चंद्रयान की लैंडिंग से पहले देश के हर मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च में प्रार्थनाएं भारत की शक्ति के रूप में पूरी दुनिया ने देखीं। भारत को जातियों और समुदायों में बांटकर देखने वाले लोगों को त्योहार चंद्रयान अचंभित कर रहा होगा। हिंदुओं के चारों धाम बद्रीनाथ, रामेश्वरम, द्वारिका और जगन्नाथ पुरी में चंद्रयान की सफल लैंडिंग के लिए पूजा-अर्चना की गई।
देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंग और दुर्गा शक्तिपीठों पर भी पूजा-अर्चना की गई। मुस्लिमों की पवित्र मस्जिद, दरगाह और मजारों पर भी चंद्रयान की सफलता के लिए दुआएं मांगी गईं। गुरुद्वारे और चर्च में भी चंद्रयान की सफलता के लिए दुआओं के नजारे भारत की खुशी बढ़ा रहे थे। ऐसा लग रहा था कि भारत में होली, दीपावली, दशहरा, दुर्गा पूजा, ईद, वैशाखी और क्रिसमस एक साथ मनाया जा रहा है। हर भारतवासी राष्ट्रीय गौरव और स्वाभिमान से झूम रहा है। भारतीय वैज्ञानिकों की मेहनत और परिश्रम पर पूरा भारत नतमस्तक दिखाई पड़ रहा है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिण अफ्रीका से चंद्रयान की लैंडिंग के दृश्य देखने के लिए इसरो के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े हुए थे। नेशनल प्राइड के ऐतिहासिक पल को हर भारतीय नागरिक अपनी आंखों में बसाना चाहता था। एक भारत और श्रेष्ठ भारत मिशन चंद्रयान वाले भारत को ही कहा जाएगा।
भारत के चंद्रयान-2 को जब असफलता मिली थी, तब भी तत्कालीन सरकार की राजनीतिक रूप से आलोचना की गई थी। भारत के राष्ट्रीय गौरव का मिशन चंद्रयान-3 भी राजनीति से दूर नहीं रह सका। कुछ दलों के नेता किस तरह शर्मनाक बात आज भी करने का दुस्साहस कर सके कि इसरो के वैज्ञानिकों को वेतन नहीं मिला है।
जो इसरो चांद को धरती पर उतारने की क्षमता रखता है, जिसने दुनिया को अपने चंद्रयान की सफलता से अचंभित कर दिया है… उसके वैज्ञानिकों को इस तरह के शर्मनाक वक्तव्य से अपमानित करने वालों की बुद्धि पर तरस किया जा सकता है। भारत का नेशनल प्राइड आज अपने चरम पर अपनी प्रतिष्ठा लहरा रहा है तो भारत के मान-सम्मान को बदनाम करने की राजनीतिक कोशिशें भारत विरोधी मानसिकता ही कही जाएंगी।
हमारी वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिए निश्चित रूप से वैज्ञानिकों को पूरा श्रेय जाता है। वैज्ञानिक भी अपनी पूरी क्षमताओं का उपयोग तभी करने में सक्षम होते हैं, जब उन्हें सरकारों की ओर से पर्याप्त संसाधन और संरक्षण प्रदान किया जाता है। जब भी ऐसे राष्ट्रीय गर्व और गौरव की उपलब्धियां हासिल होती हैं तो वैज्ञानिकों के अलावा उस समय की सरकारों और प्रधानमंत्री को निश्चित रूप से श्रेय दिया जाता है। मिशन चंद्रयान की सफलता के लिए दुनिया के विकसित और दूसरे देशों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी जा रही बधाइयां इसी बात का प्रतीक हैं कि देश की इस उपलब्धि के प्रतीक के रूप में प्रधानमंत्री को ही दुनिया द्वारा देखा जाता है।इसरो की स्थापना और उसके वैज्ञानिक प्रयासों और उपलब्धियों का एक लंबा सिलसिला है। इसके लिए किसी एक राजनीतिक दल या किसी एक राजनीतिक नेता को ही जिम्मेदार नहीं कहा जा सकता। देश में काम करने वाली सभी सरकारों और उनके लीडर ने अंतरिक्ष विज्ञान के विकास के लिए अपनी जिम्मेदारियों को निश्चित रूप से निभाया है। हमें वृक्ष दिखाई पड़ता है, लेकिन उसका बीज और जड़ें दिखाई नहीं पड़ती हैं। इसरो की नींव डालने वाले और इस संस्थान की जड़ों को मजबूत करने वाले सभी वैज्ञानिकों और सभी सरकारों को राष्ट्रीय गौरव के मिशन चंद्रयान-3 की सफलता का श्रेय जाता है।सोने की चिड़िया भारत अपनी विरासत और गौरव को फिर से पुनर्जीवित और गौरवान्वित करने के लिए आगे चल पड़ा है। ‘हर हाथ और हर घर में तिरंगा’ सही मायनों में भारत भाग्य विधाता बन रहा है। भारत की गुरु दक्षिणा आने वाले समय में दुनिया को ऐसे-ऐसे रहस्य उद्घाटित करेगी, जिससे पृथ्वी और चांद की दूरी कम हो जाएगी। चांद अब साहित्य और शृंगार में केवल उपमा के लिए नहीं, बल्कि हकीकत के रूप में अपनी अनुपमा से मानव जीवन को आलोकित करेगा। भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि से भावुक हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों और देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि भारत की यह उड़ान बहुत आगे जाएगी। पूरे विश्व को संदेश देते हुए पीएम मोदी ने कहा- भारत के अमृतकाल में नए भारत पर अमृत वर्षा हुई है। भारत के इस स्मरणीय पल का गवाह बनने के लिए स्वयं को और देश के 140 करोड़ परिवारजन को बधाई और शुभकामनाएं दीं। नया विश्व नए भारत के आत्मविश्वास के सहयोग और साथ से कई उपलब्धियां हासिल करेगा।
(ये लेखक के अपने निजी विचार हैं)

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भारत ने कर लिया चांद अपनी मुट्ठी में…

23 अगस्त, 2023 की शाम 6 बजकर 4 मिनट के ऐतिहासिक क्षण पर चांद के साउथ पोल पर चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग के साथ भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर तापमान माइनस 230 डिग्री तक चला जाता है और वहां काम करना बहुत चुनौतीपूर्ण और मुश्किल भरा होता है, लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने इस चुनौती को स्वीकारा और तय किया कि वो इस अबूझ पहेली को हल करेंगे।
चांद पर 14 दिन तक दिन और 14 दिन तक रात रहती है। अगर चंद्रयान को ऐसे वक्त में चांद पर उतारा जाता, जब वहां रात हो तो वह काम नहीं कर पाता। इसरो ने सभी चीजों की गणना करने के बाद 23 अगस्त को दिन इस काम के लिए तय किया, क्योंकि आज से अगले 14 दिनों तक चांद के दक्षिणी ध्रुव सूरज की रोशनी उपलब्‍ध रहेगी, जिसकी मदद से चंद्रयान का रोवर चार्ज हो सकेगा और अपने मिशन को सफलता से अंजाम देगा।
देश की इस बड़ी सफलता पर इसरो के सभी विज्ञानिकों और कर्मचारियों का उत्साह देखते ही बनाता है। पिछली असफलता से सहमे हुए सभी लोग आशंकित थे। कोर टीम के सदस्य पिछली कई रातों से बगैर सोये अपना काम कर रहे थे। इस बार उन्होंने रत्तीभर गलती की गुंजाइश नहीं छोड़ी और इसरो के वैज्ञानिक इस अग्नि परीक्षा में कामयाब रहे।
भारत का यह अंतरिक्ष अभियान पूरी दुनियाभर की नजर में था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए जोहान्सबर्ग दक्षिण अफ्रीका में थे और वो वहीं से इन गौरव से भरपूर पलों के साक्षी बने। इसरो की सफलता पर उत्साह से प्रफुल्लित प्रधानमंत्री ने कहा- ऐसी ऐतिहासिक घटनाएं राष्ट्र जीवन की चेतना बन जाती हैं। यह पल अविस्मरणीय है। यह क्षण अभूतपूर्व है। यह क्षण विकसित भारत के शंखनाद का है। यह क्षण नए भारत के जयघोष का है। यह क्षण मुश्किलों के महासागर को पार करने का है। यह क्षण जीत के चंद्रपथ पर चलने का है। यह क्षण 140 करोड़ धड़कनों के सामर्थ्य का है। यह क्षण भारत की नई ऊर्जा, नई चेतना का है। यह क्षण भारत के उदीयमान भाग्य के आह्वान का है। अमृतकाल की प्रथम प्रभा में सफलता की अमृत वर्षा हुई है। हमने धरती पर संकल्प लिया और चांद पर उसे साकार किया।
उत्साह और उमंग से भरे प्रधानमंत्री बोले कि आज के बाद से चांद से जुड़े मिथक बदल जाएंगे, कथानक भी बदल जाएंगे और नई पीढ़ी के लिए कहावतें भी बदल जाएंगी। भारत में तो हम सभी लोग धरती को मां कहते हैं और चांद को मामा बुलाते हैं। कभी कहा जाता था कि चंदा मामा बहुत दूर के हैं, अब एक दिन वो भी आएगा, जब बच्चे कहा करेंगे कि चंदा मामा बस एक टूर के हैं।
सफलता की इस घड़ी में आज यह जानना जरूरी है कि इस 615 करोड़ रुपए वाले मिशन से आगे क्या होगा। असली चंद्रयान मिशन तो अब शुरू होगा। लैंडर के पेट से निकलकर रोवर प्रज्ञान चांद की धरती का जायजा लेगा। 1 सेंटीमीटर/सेकंड की रफ्तार से चांद की सतह पर चलाने वाला प्रज्ञान 6 पहियों वाला रोवर है, जो चंद्रमा पर तस्वीरें लेगा। इसमें इसरो का लोगो और तिरंगा बना हुआ है। जैसे-जैसे प्रज्ञान आगे बढ़ेगा, चांद की सतह पर तिरंगा और इसरो का लोगो बनता चला जाएगा। लैंडर विक्रम में चार और रोवर प्रज्ञान में जो दो पेलोड्स लगे हैं, जो सक्रिय हो चुके हैं और इनकी मदद से लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान तरह के अध्ययन और प्रयोग कर रहे हैं।
विक्रम का पहला पेलोड रंभा चांद की सतह पर सूरज से आने वाले प्लाज्मा कणों के घनत्व, मात्रा और बदलाव की जांच करेगा। दूसरा चासते चांद की सतह की गर्मी यानि तापमान की जांच करेगा। तीसरा इलसा लैंडिंग साइट के आसपास भूकंपीय गतिविधियों की जांच करेगा… और चौथा लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टर एरे चांद के डायनेमिक्स को समझने का प्रयास करेगा।
इसी तरह प्रज्ञान का पहला पेलोड लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप चांद की सतह पर मौजूद केमिकल्स यानि रसायनों की मात्रा और गुणवत्ता का अध्ययन करेगा, साथ ही खनिजों की खोज भी करेगा। दूसरा पेलोड अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर चांद के सतह पर उपलब्ध विभिन्न तत्वों, जैसे- मैग्नीशियम, अल्यूमिनियम, सिलिकन, पोटेशियम, केल्सियम, टिन और लोहा आदि की संरचना का अध्ययन करेगा। प्रज्ञान इन समस्त जानकारियों को जुटाकर लैंडर तक पहुंचाएगा… और लैंडर धरती पर इसरो को डाटा भेजेगा, जहां वैज्ञानिक इनका विश्लेषण कर महत्वपूर्ण प्रायोगिक निष्कर्ष निकालेंगे, जो इस अभियान के आगे का मार्ग प्रशस्त करेगा। स्वतंत्रता के अमृतकाल में मिली इस अभूतपूर्व सफलता के लिए समस्त देशवासियों को बधाई।
(ये लेखक के अपने निजी विचार हैं)

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चंद्रयान-3 : कामयाबी का दिन… खुशियों को लगे चार चांद

चंद्रयान तीन की सफलता का जश्न पूरे शहर में उत्साह के साथ मनाया गया। शाम को स्कूलों में बुलाई गई विशेष सभा में मौजूद बच्चों में गजब का उत्साह था। प्रमुख कार्यक्रम शिवाजी नगर स्थित सुभाष एक्सीलेंस स्कूल में आयोजित हुआ। चंद्रयान 3 का लैंडर जब चंद्रमा से 500 मीटर दूर था, तब बच्चों ने भारत माता का जयकारा लगाया। लैंडर जब चंद्रमा से 200 मीटर दूर था, तब उत्साहित बच्चों ने हम होंगे कामयाब गीत गया। फिर सॉफ्ट लैंडिंग होते ही स्कूली बच्चे और उनके टीचर्स झूम उठे। डीईओ अंजनी कुमार त्रिपाठी ने बताया कि भोपाल के सरकारी स्कूलों के 10,000 विद्यार्थियों ने एक साथ लाइव टेलीकास्ट देखा। कई स्कूलों ने रिकॉर्डिंग कर ली है जिसे गुरुवार को स्कूलों में दिखाया जाएगा।
बांटी गई मिठाइयां
भारत माता चौराहे पर भी युवाओं ने मिठाई बांटी और जश्न मनाया। मंत्रालय, विंध्याचल, सतपुड़ा भवन के कर्मचारियों ने सतपुड़ा के सामने खुशी का इजहार किया।
आतिशबाजी से बढ़ी चमक
संत हिरदाराम नगर में भी लोगों ने आतिशबाजी कर जश्न मनाया। गुरुनानक मंडल व शहर की कई संस्थाओं के लोगों ने शहीद गेट पर भारत माता के जयकारे लगाते हुए जश्न मनाया। अनेक युवा सिर पर तिरंगा पगड़ी लगाए हुए थे।
ढोल-ताशे के साथ झूम उठा शहर
बुधवार शाम 6 बजकर 4 मिनट पर जैसे ही चंद्रयान-3 के लैंडर ने चांद पर कदम रखा, पूरे शहर का उल्लास आसमां पर पहुंच गया। घरों, बाजारों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर लोग खुशी से झूम उठे। ढोल-ताशे और आतिशबाजी के बीच तिरंगे लहराते हुए भारत माता की जय… हिंदुस्तान जिंदाबाद… के नारे लगाए गए। बाजारों और कॉलोनियों में मिठाइयां बांटी गई। शहर में विभिन्न स्कूलों में 10,000 विद्यार्थियों ने एक साथ लाइव टेलीकास्ट देखा।
योग साधकों ने दी बधाई
आदर्श योग आध्यात्मिक केंद्र के साधकों द्वारा चंद्रयान-3 की सफल लैडिंग पर सभी देशवासियों को बधाई दी। योगगुरु अग्रवाल ने कहा कि इस सफलता से पूरे देश में उत्साह एवं खुशी का माहौल है। नई खोज होगी एवं मनुष्य के विकास पर चन्द्रमा का प्रभाव पर और अध्ययन होगा। योग साधकों ने देश भक्ति गीत गाकर इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी एवं सभी के स्वस्थ दीर्घायु की कामना की। इस अवसर पर पूर्व भारतीय वन सेवा अधिकारी रमन श्रीवास्तव, रमेश कुमार साहू, सविता गुप्ता, विमला साहू, मनीषा श्रीवास्तव, किरण जौहरी, दीप्ती दूरवार, प्रीति सेठ, ज्योति खरे, आरती नायक उपस्थित रहे।
चंद्रयान-3 की टीम में भोपाल के नितिन भी
बुधवार को चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग के मिशन का कनेक्शन भोपाल से भी जुड़ा है। ई 7 अरेरा कॉलोनी में पले-बढ़े नितिन भारद्वाज इसरो में साइंटिस्ट इंजीनियर-एसएफ (लेवल 13) के पद पर कार्यरत हैं। इस मिशन में नितिन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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पुलिस गश्त के बाद भी लूटपाट

हिन्दुस्तान मेल, इंदौर
शहर में बढ़ते अपराध के कारण जहां एक ओर शहरवासियों सहित व्यापारियों में भय का तो वहीं पुलिस द्वारा तमाम बल के साथ आला अधिकारियों द्वारा देर रात तक विभिन्न क्षेत्रों में चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें पुलिस ने करीब 1500 से अधिक संदिग्धो सहित 800 गुंडे-बदमाशों की चेकिंग की और तमाम स्थानों पर कार्रवाई को अंजाम दिया, लेकिन उसके बावजूद शहर में लूटपाट की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।
इसी के तहत शहर में दो दिनों में बदमाशों द्वारा पिस्तौल से हवाई फायर करने के साथ ही पिस्तौल दिखाकर लूटपाट की घटना को अंजाम दिया गया है। पहला मामला एरोड्रम थाना क्षेत्र का है, जहां पर गुरु कृपा पेट्रोल पंप पर एक वाहन चालक द्वारा पहले 3410 का पेट्रोल भरवारा गया और उसके बाद वहां से भाग गया और दोबारा से वहां पेट्रोल पंप पर पहुंचकर पंप कर्मचारियों के साथ आड़ीबाजी कर हवाई फायर करते हुए वहां से फरार हो गया, जिस पर से पुलिस ने धर्मेंद्र राठौर की शिकायत के अनुसार विभिन्न धाराओं में कार्रवाई कर सीसीटीवी के आधार पर हवाई फायर करने वाले युवक की तलाश शुरू कर दी है। दूसरा मामला जूनी इंदौर थाना क्षेत्र में बीती रात को संजय केलवानी (30) निवासी केसरबाग रोड द्वारा कलेक्टर आॅफिस के सामने नेहा अपार्टमेंट में अपनी दुकान पर ग्राहक से चर्चा कर रहे थे कि तभी तीन अज्ञात नकाबपोश युवक उनकी दुकान पर पहुंचे और पिस्टल बढ़ाकर लूटपाट की, जिसमें युवक 8000 रु. छीनकर ले गए। पूरे मामले में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर प्रकरण दर्ज करने के साथ ही युवकों की तलाश शुरू कर दी है।

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