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कबड्डी : भारतीय महिला टीम ने नेपाल को हराकर लगातार चौथी बार फाइनल में बनाई जगह

एशियन गेम्स 2023 में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने सेमीफाइनल मैच में शुक्रवार को नेपाल को 61-17 से हराकर फाइनल में अपनी जगह बना ली। हांगझोऊ में अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज करते हुए भारत ने लगातार चौथी बार एशियाई खेलों की कबड्डी प्रतियोगिता के फाइनल में जगह बनाई। साल 2010 और 2014 में चैंपियन और 2018 में उपविजेता रही भारतीय कबड्डी टीम का सामना शनिवार को स्वर्ण पदक मैच में ईरान और चीनी ताइपे के बीच होने वाले सेमीफाइनल मैच के विजेता से होगा। नेपाल ने एशियन गेम्स 2023 में कांस्य पदक के साथ अपना अभियान समाप्त किया। गौरतलब है कि जकार्ता 2018 एशियन गेम्स में टीम इंडिया को फाइनल मैच में ईरान से हार का सामना करना पड़ा था। पीपुल्स रिपब्लिक आॅफ चाइना के हांगझोऊ में जिÞयाओशान गुआली स्पोर्ट्स सेंटर में खेले गए एकतरफा मैच में भारत ने नेपाल को पांच बार आॅल-आउट किया, जबकि नेपाल की कबड्डी टीम पूरे मुकाबले के दौरान भारत की बेहद संतुलित टीम के आगे संघर्ष करती दिखी। रितु नेगी की अगुवाई में भारतीय टीम महिला टीम ने नेपाल के खिलाफ बेहद आक्रामक अंदाज में शुरुआत की। पूजा हाथवाला के दमदार रेड की बदौलत कुछ ही मिनट के बाद भारत ने नेपाल को आॅल-आउट कर दिया और 14-5 की बढ़त हासिल की। भारतीय रेडरों ने लगातार नेपाल पर दबाव बनाए रखा और जल्द ही मैच में दूसरी बार विरोधी टीम को आॅल-आउट किया। हाफ टाइम तक भारत ने 29-10 स्कोर के साथ 19 अंकों की बड़ी बढ़त बना ली थी।

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अमित टंडन ने पत्नी रूबी से दूसरी बार शादी रचाई

टी वी और बॉलीवुड इंडस्ट्री के सेलेब्स एक के बाद एक शादी के बंधन में बंधे नजर आ रहे हैं। हाल ही में जहां परिणीति चोपड़ा आप नेता राघव चड्ढा की दुल्हन बनी। वहीं अब टीवी एक्टर अमित टंडन ने भी शादी रचाई। जी हां, अमित टंडन ने दूसरी बार शादी रचाई और वो भी अपनी पहली पत्नी रूबी से। इस कपल ने ‘सात वचनों’ को फिर से रिन्यू करते हुए दोबारा शादी की है। टीवी इंडस्ट्री के जाने-माने एक्टर अमित टंडन ने साल 2007 में रूबी टंडन से शादी की थी। शादी के करीब 10 साल बाद यानी साल 2017 में इस कपल की शादी में दरार आ गई थी। ये कपल एक-दूसरे से अलग होने वाला थे, लेकिन रूबी दुबई में सरकारी अधिकारियों को धमकी देने के मामले में फंस गई थी। बस, फिर क्या था इस दौरान अमित ने रुबी की मदद की और ये कपल एक बार फिर साथ नजर आया। ऐसे में अब दोनों ने मिलकर अपनी दोबारा शादी रचाई। अमित टंडन और रूबी टंडन ने परिवार और दोस्तों की मौजूदगी में 13 साल की बेटी के सामने फिर से सात फेरे लिए। इंस्टाग्राम पर इस कपल ने शादी की कई तस्वीरें साझा की हैं। इस खास मौके पर रूबी पिंक कलर के लहंगे में नजर आई।

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सभी नोडल अधिकारी पारदर्शिता के साथ कार्य करें : कलेक्टर

हिन्दुस्तान मेल, इंदौर
जिले में विधानसभा निर्वाचन 2023 के लिए व्यापक तैयारियां जारी हैं। तैयारियों की कड़ी में बैठकों का दौर भी जारी है। कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने बुधवार को चुनाव के संबंध में महत्वपूर्ण बैठक ली। उन्होंने बैठक में निर्वाचन की विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए नियुक्त नोडल अधिकारियों के कार्यों की समीक्षा की। बैठक तीन सत्रों में आयोजित की गई। कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने इस मौके पर निर्देश दिये कि सभी अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण गंभीरता के साथ भारत निर्वाचन आयोग के नियम और निर्देशों के तहत करें। कार्यों में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरती जाए। नोडल अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे टीम भावना, आपसी समन्वय एवं सामजंस्य के साथ कार्य करें। बैठक में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी वंदना शर्मा, आईडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आरपी अहिरवार, अपर कलेक्टर सपना लोवंशी, रोशन राय, उप जिला निर्वाचन अधिकारी राजेन्द्र रघुवंशी सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। तीन सत्रों में संपन्न हुई इस बैठक में कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने निर्वाचन के दौरान लगने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की संख्या, उनके प्रशिक्षण, मतदान दलों को सामग्री वितरण तथा उसकी प्राप्ति, मतदान दलों के परिवहन आदि की समीक्षा की।
राजनीतिक दलों को लगने वाली अनुमतियों और एनओसी के लिए एकल खिड़की व्यवस्था बैठक में बताया गया कि निर्वाचन के दौरान उम्मीदवारों तथा राजनीतिक दलों को लगने वाली अनुमतियों और एनओसी देने के लिए एकल खिड़की व्यवस्था की गई है। इसके लिए आॅनलाइन आवेदन लेकर उसका त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जायेगा। अभ्यर्थियों द्वारा निर्वाचन के दौरान खर्च किये जाने वाली राशि के संधारण के लिये व्यय लेखा दल का गठन कर लिया गया है। यह दल विधानसभ क्षेत्रवार रहेंगे। कलेक्टर ने निर्देश दिये की सूक्ष्मता के साथ व्यय का आकलन कर अभ्यर्थियों और राजनीतिक दलों के खाते में दर्ज किया जाये। बताया गया कि जिले में निर्वाचन के दौरान मतदान दलों सहित अन्य दलों में 18 हजार 386 अधिकारी/कर्मचारियों की सेवाएं ली जायेंगी। प्रशिक्षण का कार्य विभिन्न चरणों में होल्कर साइंस कॉलेज में होगा। इसके लिये 28 कक्ष तैयार किए जा रहे हैं।

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चार फ्लाई ओवरब्रिज का काम शुरूसिक्स लेन ब्रिज के निर्माण में 260 करोड़ से ज्यादा होंगे खर्च

चुनाव के मौके पर अच्छी खबर है। इंदौर में चार फ्लाई ओवर ब्रिज के निर्माण का कार्य हुआ शुरू हो गया है। शहर के अलग अलग प्रमुख चौराहो पर बन रहे इन फ्लाई ओवर ब्रिज का भूमिपूजन मुख्यमंत्री द्वारा किया गया था। ब्रिज के निर्माण पर 260 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए जाएंगे। इन ब्रिज के बनने से जहां यातायात समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी, वहीं विकास को भी रफ़्तार मिलेगी। साथ ही कई कॉलोनियों के रहवासियों को भी फायदा मिलेगा।
इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के अवसर पर इंदौर को विकास कार्यों की काफी सौगातें मिली है। खास बात यह है कि चुनावी साल में जिन स्थानों पर विकास कार्यों के लिए भूमिपूजन हुआ था, वहां पर कार्यों की शुरूआत भी हो गई है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा पिछले दिनों इंदौर में जिन चार फ्लाई ओवरों के निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया गया था, उन फ्लाई ओवर ब्रिज का निर्माण का कार्य प्रारंभ हो गया है। म.प्र. सड़क विकास निगम द्वारा शहर में चार स्थानों पर ब्रिज निर्माण की प्रारंभिक शुरुआत की गई है। विकास निगम के संभागीय प्रबंधक राकेश जैन ने बताया कि इंदौर शहर में यातायात को सुगम बनाने के लिये देवास नाका चौराहा पर 74.49 करोड़ रुपए की लागत से सत्यसांई चौराहा पर 62.45 करोड़ रुपए, मूसाखेड़ी चौराहा पर 67.02 करोड़ रुपए एवं आईटी पार्क चौराहा पर 63.33 करोÞड़ रुपए की लागत से ब्रिज का निर्माण किया जाएगा। सभी दूर 6 लेन फ्लाई ओवर ब्रिज बनाए जाएंगे। जैन के अनुसार इन चारों स्थानों पर मुख्यमंत्री के भूमि पूजन के पश्चात तत्काल निर्माण कार्य प्रांरभ कर दिया गया है। अनुबंधानुसार उक्त चारों फ्लाई ओवर की निर्माण अवधि 24 माह निर्धारित की गई है।
इन फ्लाई ओवर ब्रिज के बन जाने से इंदौर शहर में यातायात सुगम हो सकेगा। गौरतलब है कि शहर के जिन प्रमुख चौराहों पर ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है, उन चौराहा पर सुबह से लेकर रात तक यातायात का काफी दवाब बना रहता है। अक्सर वाहनों की कतार लगे रहती है। ब्रिज बनने से जहाँ शहर का यातायात सुगम होगा बल्कि वाहन चालकों से लेकर आम राहगीरों को भी राहत मिलेगी। कई कालोनियों के हजारों रहवासियों को भी राहत मिलेगी। वही विकास को रफ्तार मिलने के साथ ही नए रास्ते भी खुलेंगे।

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‘चाचा क्रिकेट’ को नहीं मिला भारत का वीजा, वर्ल्ड कप देखने घर बेचा

भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट फैन दुनिया के हर कोने में मिल जाते हैं, लेकिन ‘चाचा क्रिकेट’ जैसा यूनिक फैन आपने कम ही देखा होगा। 70 साल की उम्र पूरी कर चुके चौधरी अब्दुल जलील पाकिस्तान क्रिकेट टीम को सपोर्ट करने दुनिया के हर कोने में पहुंचते हैं।
उन्होंने अलग-अलग देशों की तीन पीढ़ियों को खेलते हुए देखा है। चाचा क्रिकेट का दावा है कि उन्होंने स्टेडियम में 500 से अधिक इंटरनेशनल मैच देखे हैं।
बहरहाल, अब जबकि इस बार भारत वर्ल्ड कप की मेजबानी कर रहा है, तो चाचा क्रिकेट सुर्खियों में हैं। इस मौके पर चाचा क्रिकेट की जिंदगी और उनके इस खेल के लिए जुनून से जुड़े सवालों के जवाब यहां उन्हीं से जानते हैं…
हालातों के कारण पढ़ाई छोड़ी
‘चाचा क्रिकेट’ के नाम से मशहूर चौधरी अब्दुल जलील कहते हैं- मेरा जन्म 8 अक्टूबर 1949 को सियालकोट में हुआ। मैट्रिक तक पढ़ाई की, लेकिन इसके बाद हालात की वजह से पढ़ाई छोड़ दी। परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं।
भारत आने पर असमंजस
क्रिकेट वर्ल्ड कप देखने के लिए भारत आने के सवाल पर यह बुजुर्ग क्रिकेट फैन कहता है- 10 दिन पहले मैं अमेरिका में था। यहां अगले साल होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप का एक प्रोग्राम था। मुझे भी बुलाया गया था। इस कार्यक्रम के बाद मुझे उम्मीद थी कि इस बार भारत में होने वाले विश्व कप के लिए मुझे भी वहां जाने का मौका मिलेगा। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और इउउक से गुजारिश की। हालांकि, अभी तक भारत का वीजा नहीं मिला। शायद एक-दो दिन में अच्छी खबर मिले। जलील 2005 में पहली बार मैच देखने भारत आए थे। वो कहते हैं- मैं भारत समेत कई देशों में जा चुका हूं। इस बार अब तक वीजा के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। अगर मुझे भारत आने और मैच देखने का मौका मिला तो मैं इसकी शुरुआत अहमदाबाद में भारत-पाकिस्तान मैच से करूंगा। वीजा नहीं मिला तो घर में टीवी पर मैच देखूंगा। पाकिस्तान टीम इस बार बाहर हो गई, तो भारतीय टीम का समर्थन करूंगा।
क्रिकेट का किस्मत कनेक्शन
चाचा क्रिकेट बचपन की यादें ताजा करते हुए कहते हैं- शुरू से ही क्रिकेट का बहुत शौक था। मैट्रिक में तीन बार फेल भी हो गया। सियालकोट में स्पोर्ट्स एसेसरीज बनाने वाली कंपनी में भी काम किया है। हमारे पास कुछ पुरानी प्रॉपर्टीज थीं। इनके किराए से परिवार का खर्च चलता था। पांच साल एक क्रिकेट क्लब में भी रहा। यहां पाकिस्तान के कई इंटरनेशनल स्टार्स के साथ खेलने का मौका मिला। 1968 में मैंने पाकिस्तान की पहली सीमेंट पिच तैयार करवाई थी। तब लोग दूर-दूर से इसे देखने आए थे।
19 साल बाद पहली बार लाहौर के स्टेडियम में मैच देखा
चौधरी अब्दुल जलील आगे कहते हैं- मैंने पहली बार 19 साल की उम्र में 1969 में लाहौर स्टेडियम में एक अंतरराष्ट्रीय मैच देखा था। 1973 में पाकिस्तान छोड़कर अमेरिका या डेनमार्क में बसने का प्लान बनाया था।

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