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रानी बाटड मैहर और अजय देव शर्मा पांढुर्णा के होंगे पहले कलेक्टर

मैहर और पांढुर्णा को जिला बनाने के बाद सरकार ने गुरुवार देर रात वहां कलेक्टर पदस्थ कर दिए। 2014 बैच की आईएएस अधिकारी रानी बाटड को मैहर का पहला कलेक्टर बनाया गया है। वे अभी शहडोल संभाग की अपर आयुक्त हैं। वहीं, अजय देव शर्मा को पांढुर्णा का कलेक्टर बनाया है। शर्मा वर्तमान में उज्जैन जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हैं। अजय देव शर्मा के स्थान पर अपर कलेक्टर उज्जैन मृणाल मीना को जिला पंचायत उज्जैन का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। मंत्रालय में पदस्थ उप सचिव प्रीति यादव को अपर कलेक्टर उज्जैन पदस्थ किया है। बता दें मप्र में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले शिवराज सरकार ने अपनी घोषणा को पूरा करते हुए दो नए जिले पांढुर्णा और मैहर का गठन कर दिया। बुधवार देर रात निर्णय होने के बाद गुरुवार को सुबह अधिसूचना भी जारी कर दी। दोनों जिले अस्तित्व में आ गए। अब प्रदेश में 55 जिले हो गए हैं। पांढुर्णा और मैहर जिले के गठन को शिवराज सरकार को बड़ा सियासी कदम माना जा रहा है। छिंदवाड़ा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का गढ़ है। विंध्य क्षेत्र में मऊगंज के बाद सरकार ने मैहर जिला गठित किया है। विंध्य में भाजपा ने 2018 के विधानसभा चुनाव में 23 सीटें जीती थीं।

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242 करोड़ रुपए की विस्तारीकरण योजना से बदल गया महाकाल परिसर

महाकालेश्वर मंदिर के विस्तारीकरण का दूसरा चरण पूर्ण हो गया है। इस पर सरकार ने 242 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इनमें राज्य सरकार और केंद्र सरकार का 50-50 प्रतिशत अंश है। स्मार्ट सिटी योजना के तहत पूरे कार्य पूर्ण हुए हैं जिसमें श्रद्धालुओं के लिए कई सुविधाएं मुखिया कराई गई है।
महाकालेश्वर मंदिर परिसर में पहले चरण का कार्य 351 करोड़ रुपए की लागत से पूर्ण हुआ था। 11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकाल लोक का उद्घाटन करते हुए पहले चरण के कार्य के जरिए मंदिर को भव्यता देने का प्रयास किया। महाकालेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष और कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम के मुताबिक दूसरे चरण में 242 करोड़ रुपए की राशि खर्च हुई है। इसके जरिए नीलकंठ क्षेत्र में विकास कार्य किए गए हैं, जबकि मंदिर परिसर में शक्तिपथ, अन्न क्षेत्र, महाराज वाड़ा परिसर, रुद्र सागर का विकास किया गया है। इसी तरह सबसे महत्वपूर्ण महाकालेश्वर शिखर दर्शन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है ताकि मंदिर आने वाले भक्तों को शिखर दर्शन भी हो सके।

बहुत कुछ बदल गया महाकाल मंदिर में
’महाकालेश्वर मंदिर में नीलकंठ मार्ग विकास योजना के तहत पूर्व दिशा की ओर से प्रवेश मार्ग का निर्माण कराया गया है।
’म्यूरल वॉल के जरिए उज्जैन के प्राकृतिक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को बताया है।
’नीलकंठ वन क्षेत्र का भी विकास किया गया है।
’श्रद्धालुओं के आराम के लिए पथ, ग्रास, लॉन, सुलभ शौचालय आदि का निर्माण किया गया।
’मंदिर समिति द्वारा अन्न क्षेत्र का निर्माण कराया, जहां पर 50000 श्रद्धालुओं को प्रतिदिन भोजन कराया जाएगा।
’महाराज वाड़ा परिसर को हेरिटेज होटल के रूप में परिवर्तित किया गया है।
’प्रवचन हाल, फूड कोड सहित अन्य सुविधाएं जुटाई गई हैं। रुद्र सागर के जीर्णोद्धार पर भी 21 करोड़ रुपए की राशि खर्च की गई है।
’रुद्र सागर के जलस्तर में सुधार, पानी की गुणवत्ता, पौधारोपण, लैंडस्कैपिंग, मनोरंजन क्षेत्र आदि विकसित किया गया है।
’महाकाल तपोवन सहित ध्यान कुटिया और विश्राम के लिए सुसज्जित जगह विकसित की गई है।

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मालवा-निमाड़ पर कांग्रेस, महाकौशल पर भाजपा का ‘फोकस’

जबलपुर से शुरुआत, फिर ग्वालियर और तीसरा दौरा मोहनखेड़ा का। प्रियंका गांधी ने पहली यात्रा में पांच गारंटी की बात कही थी, तो तीसरे दौरे में मप्र सरकार की लाड़ली बहना सहित रसोई गैस टंकी के बढ़ते दाम को निशाने पर लिया कि अब जब चुनाव सिर पर हैं, तब घोषणाओं पर घोषणा कर के शिवराज प्रदेश की जनता को भरमा रहे हैं। उनका यह कहना भी खास था कि कांग्रेस राज में गैस टंकी और पांच किलो अनाज 485 रुपए में मिल रहा था, अब से दोनों जरूरी चीजें 1100 से अधिक दाम पर पहुंच गई हैं। बीते चुनाव में कांग्रेस का सिर मालवा-निमाड़ की सीटों ने ऊंचा किया था। भाजपा ने भी इस क्षेत्र के साथ महाकौशल क्षेत्र की सीटों पर फोकस कर रखा है।
कांग्रेस में राहुल हों, या प्रियंका – इन्हें लोग देखने के लिए तो उमड़ते हैं, लेकिन भाषण के मामले में मोशा जी तो ठीक शिवराज तक के आगे ये दोनों फीके साबित रहते हैं। ठीक है कि ये दोनों दिल से बात करते हैं, लेकिन भाजपा नेताओं की तरह इनके भाषण चमत्कृत और प्रभावित करने वाले नहीं होते। वजह शायद यह भी कि 65 साल से अधिक समय तक सत्ता में रही कांग्रेस को तब किसी दल ने आज जैसी चुनौती दी नहीं, इसलिए मनमोहन सिंह या उनके पहले नरसिंह राव, राजीव गांधी रहे, उनके प्रति आम मतदाता का रवैया भेड़-चाल जैसा ही रहा।
हाल के तीन दशकों में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सहित अन्य सोशल मीडिया का जितने आक्रामक तरीके भाजपा उपयोग कर रही है, उतना कांग्रेस नहीं। कटु सत्य यह भी है कि जो सोशल मीडिया सत्ता शीर्ष पर पहुंचाने के लिए भाजपा का सहारा बना था, वही अब इन नेताओं, दल की पोल खोल अभियान में भी अग्रणी होकर भाजपा के लिए भस्मासुर की भूमिका निभा रहा है।
प्रियंका गांधी का मोहनखेड़ा आना कांग्रेस अपने लिए शुभ मानती रही है। दिग्विजय सिंह की ब्रह्मलीन ऋषभ विजय जी महाराज से नजदीकी का ही असर रहा कि इंदिरा जी से लेकर सोनिया गांधी, राहुल तक मोहनखेड़ा का मोह नहीं छोड़ पाए। गांधी खानदान की चौथी सदस्य के रूप में प्रियंका यहां आई थीं। शिवराज सरकार ने पातालपानी के समीप टंट्या मामा का स्मारक बनाया, तो आदिवासी समाज को अपने से जोड़ने के लिए प्रियंका ने भी राजगढ़ के आदिवासी अंचल में जनसभा को संबोधित करने के साथ आदिवासी जननायक टंट्या मामा की प्रतिमा का अनावरण भी कर दिया।
राहुल और प्रियंका को देखने का ही आकर्षण है कि जबलपुर, ग्वालियर, पोलायकलां, मोहनखेड़ा तक उमड़ने वाली भीड़ ने सरकार को भी चौंकाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी निरंतर मप्र आ रहे हैं। भाषण में वह गांधी परिवार को ‘एक कार और तीन बेकार’ कह कर खिल्ली भी उड़ाते रहे हैं, लेकिन इस दल के रणनीतिकार भी जानते हैं कि गांधी परिवार का आकर्षण भारी पड़ रहा है।
मध्यप्रदेश के आमजन से सीधे संवाद करने और उन्हें प्रभावित करने की जो ताकत शिवराज सिंह में है वह तोमर, सिंधिया, विजयवर्गीय, प्रह्लाद पटेल में भी नहीं है, किंतु चौहान को जिस तरह भाजपा नेतृत्व ने साइड लाइन कर रखा है, उसका नकारात्मक प्रभाव भी भाजपा पर पड़ रहा है। आदिवासी बहुल सीटों की बात करें तो 2018 में इन 47 सीटों में से 29 सीटें कांग्रेस के पास थीं और भाजपा को 17 सीटें मिली थीं। जिस मोहनखेड़ा में प्रियंका की सभा हुई है, 2018 में कांग्रेस की सरकार बनाने में भी धार ने मुख्य भूमिका निभाई थी। जिले की 7 में से 6 सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी जीते थे। उस समय जिले में कांग्रेस का एक-तरफा माहौल भी था। कांग्रेस के विधायक 30 हजार से लेकर 60 हजार वोटों तक से भी जीते थे, लेकिन 2020 के उपचुनाव के बाद जिले में कांग्रेस के पांच ही विधायक जीते हैं। कांग्रेस पार्टी का, प्रियंका गांधी का ध्यान मालवा निमाड़ पर है, यहां कुल 66 सीटें हैं और 2018 में कांग्रेस को मालवा निमाड़ का साथ मिला था, उसे 37 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा को 29 सीटें ही मिली थीं। मोदी से लेकर शाह तक का फोकस महाकौशल क्षेत्र पर है। महाकौशल में कुल 38 विधानसभा सीटें हैं, और 2018 में कांग्रेस को 24 सीटें और बीजेपी को 13 सीटें मिली थीं।

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तिलक वर्मा का अर्धशतक, भारतीय क्रिकेट टीम एशियन गेम्स के फाइनल में

भारत ने एशियन गेम्स मेंस क्रिकेट के फाइनल में जगह बना ली है। टीम इंडिया ने शुक्रवार को खेले गए सेमीफाइनल में बांग्लादेश को 9 विकेट से हरा दिया। भारत ने टॉस जीतकर पहले फील्डिंग का फैसला किया। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए बांग्लादेश टीम ने 20 ओवर में 9 विकेट पर 96 रन बनाए। जवाब में टीम इंडिया 9.2 ओवर में एक विकेट खोकर आसानी से टारगेट हासिल कर ली। तिलक वर्मा ने बेहतरीन अर्धशतक जमाया। दोनों टीमें एशियन गेम्स में पहली बार खेल रही हैं। शुक्रवार को गेम्स का 13वां दिन है और भारत अब तक 21 गोल्ड, 32 सिल्वर और 33 ब्रॉन्ज सहित 86 मेडल जीत चुका है।

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खेलो एमपी यूथ गेम्स का रंगारंग कार्यक्रम के साथ समापन, इंदौर बना ओवरआॅल चैंपियन

खेलो एमपी यूथ गेम्स-2023 का समापन गुरुवार को हुआ। इसमें इंदौर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 42 स्वर्ण, 32 रजत और 24 कांस्य सहित कुल 98 पदक लेकर पहले स्थान प्राप्त किया और ओवरआल चैंपियनशिप की ट्रॉफी अपने नाम की। जबलपुर 24 स्वर्ण, 27 रजत और 35 कांस्य समेत कुल 86 पदक लेकर दूसरे स्थान पर रहा। भोपाल 24 स्वर्ण, 27 रजत और 35 कांस्य समेत कुल 77 पदक के साथ तीसरे स्थान पर रहा। उज्जैन नौ स्वर्ण, 13 रजत और 17 कांस्य सहित कुल 39 पदकों के साथ चौथा स्थान प्राप्त किया।
दो करोड़ की राशि पुरस्कार स्वरूप बांटी गई- राजधानी के तात्या टोपे स्टेडियम (टीटी नगर स्टेडियम) में हुए समापन समारोह में अपर मुख्य सचिव गृह राजेश राजौरा ने खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया। यहां दलीय एवं व्यक्तिगत खेल के खिलाड़ियों को प्रथम पुरस्कार 31 हजार, द्वितीय 21 हजार, तृतीय और चतुर्थ पुरस्कार पाने वाले खिलाड़ियों को 11 हजार रुपये दिए गए। कुल दो करोड़ रुपये की राशि पुरस्कार के रूप में बांटी गई। इससे पहले समापन समारोह में इंडियन आइडल फेम अभिजीत सावंत ने गीतों की प्रस्तुति दी।
प्रदेश में खेलों के प्रति युवाओं को जागरूक करने, खेल को सर्वसुलभ बनाने, ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के प्रतिभावान खिलाड़ियों की पहचान और उन्हें खेलों की तकनीकी पद्धति से प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए प्रदेश में कई अभिनव पहल की जा रही हैं।
चार चरणों में हुआ आयोजन
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में पहली बार हुए खेलो इंडिया यूथ गेम्स की सफलता के बाद घोषणा की थी कि प्रदेश में खेलो एमपी यूथ गेम्स का आयोजन होगा। इसके बाद खेलो एमपी यूथ गेम्स का आयोजन प्रदेश के 52 जिलों के 313 विकासखंडों में किया गया। यूथ गेम्स चार चरणों ब्लाक, जिला, संभाग एवं राज्य स्तर पर किया गया। ब्लॉक स्तरीय चयन स्पर्धा 12 से 14 सितंबर, जिला स्तरीय 16 से 18 सितंबर, संभाग स्तरीय 20 से 23 सितंबर तथा राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन एक से पांच अक्टूबर तक किया गया।

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