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आईएफएफआई-2023 की शानदार शुरुआत

गोआ। भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के 54वें संस्करण में लाइट, एक्शन और फिल्मों ने देश और दुनियाभर से मशहूर हस्तियों, फिल्म फैटरनिटी और सिनेप्रेमियों के स्वागत के लिए रेड कारपेट बिछाया। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर भी शामिल हुए। आईएफएफआई इस साल 105 देशों से 2926 फिल्मों की भारी भरकम सबमिशन के साथ ग्लोबल फेस्टिवल सर्किट पर एक लोकप्रिय फिल्म एनबी2क्यू फेस्टिवल के रूप में उभरा है। इसमें पिछले साल की तुलना में तीन गुना अधिक इंटरनेशनल एंट्रियां शामिल हैं। डेलिगेट्स 270 से अधिक फिल्मों, 13 वर्ल्ड, 18 इंटरनेशनल, 62 एशियाई और 89 इंडियन प्रीमियर के क्यूरेटेड सिलेक्शन में शामिल हो सकते हैं। 15 फीचर फिल्में (12 इंटरनेशनल और तीन भारतीय फिल्में) प्रतिष्ठित गोल्डन पीकॉक अवॉर्ड के लिए और 15 ओटीटी प्लेटफॉर्मों से 32 एंट्री सर्वश्रेष्ठ वेब सीरीज (ओटीटी) अवॉर्ड के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। हर साल ओपनिंग सेरेमनी फिल्म फैटरनिटी के सितारों की मौजूदगी के साथ बड़ी होता जा रही है।

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इंडियन आइडल के सेट पर नजर आए, एनिमल का प्रमोशन शुरू हुआ

बुधवार को रणबीर कपूर और रश्मिका मंदाना इंडियन आइडल के सेट पर दिखे। रश्मिका पिंक जरी एंब्रॉयडर्ड साड़ी पहने नजर आईं, वहीं रणबीर ब्लू फॉर्मल लुक में दिखे। रणबीर हाथ में चाय का कप लिए नजर आए। रश्मिका ने पैपराजी से हंसी-मजाक किया। उन्होंने रणबीर को तमिल भी सिखाई।
एनिमल फिल्म एक दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी
रणबीर कपूर और रश्मिका मंदाना स्टारर इस फिल्म में अनिल कपूर और बॉबी देओल भी नजर आएंगे। अनिल कपूर रणबीर के पिता का किरदार निभाते दिखेंगे। बॉबी देओल फिल्म में विलेन की भूमिका में नजर आएंगे। यह एक गैंगस्टर ड्रामा फिल्म होगी। फिल्म की कहानी बाप और बेटे के रिश्ते के बैक ड्रॉप पर बेस्ड है। एनिमल एक दिसंबर को थिएटर्स में पांच भाषाओं में रिलीज होगी।

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पहले पोस्टल बैलेट की गिनती होगी फिर ईवीएम में दर्ज मतों की गणना

विधानसभा चुनाव की मतगणना को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। मतगणना 3 दिसंबर को नेहरू स्टेडियम में होगी। मतगणना का सिलसिला सुबह 8 बजे से प्रारंभ हो जाएगा। सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती शुरू की जाएगी, वहीं सुबह 8:30 बजे से ईवीएम में दर्ज मतों की गणना प्रारंभ होगी। मतगणना को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुपम राजन ने मंगलवार को भोपाल से जिला कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए निर्देश में कहा कि सभी जिला निर्वाचन अधिकारी सजग एवं सतर्क रहें और मतगणना को पारदर्शी प्रक्रिया से संपन्न कराएं। स्ट्रांग रूम में केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल की सुरक्षा व्यवस्था की जाए। मतगणना के दिन विद्युत की सतत आपूर्ति हो और किसी भी वजह से मतगणना प्रभावित न हो। राजन ने मतगणना संबंधी जिलों में की जा रही तैयारियों को लेकर जिलेवार विस्तार से चर्चा की और आवश्यक निर्देश दिए।
जिला निर्वाचन अधिकारी प्रतिदिन स्ट्रांग रूम का दो बार करें निरीक्षण और भेजें रिपोर्ट
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राजन ने कहा कि सभी जिला निर्वाचन अधिकारी ईवीएम स्ट्रांग रूम और जिस जगह पर पोस्टल बैलेट रखे गए हैं, उसका प्रतिदिन दो बार सुबह और शाम निरीक्षण करें और उसकी रिपोर्ट भेजें। ईवीएम स्ट्रांग रूम और पोस्टल बैलेट की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे, यह भी सुनिश्ेिचत कर लें। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राजेश कुमार कौल, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी बसंत कुर्रे और उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी प्रमोद कुमार शुक्ला उपस्थित थे।
राजन इंदौर में मतगणना स्थल
का करेंगे निरीक्षण
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी प्रदेश के विभिन्न मतगणना स्थलों का निरीक्षण करेंगे। इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को जिलेवार दायित्व दिए गए हैं। इंदौर की मतगणना स्थल का निरीक्षण मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन करेंगे।
मतगणना के दौरान मिलेगा
नाश्ता और भोजन
जिले में 3 दिसंबर को होने वाली मतगणना के लिए बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगायी जाएगी। इन अधिकारी-कर्मचारियों को मतगणना स्थल नेहरू स्टेडियम में सुबह से ही चाय, पानी, नाश्ता तथा भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।

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जी-20: कृषि व्यापार समझौता किसानों की परेशानी……….

विधानसभा चुनावों के दौरान वादों की फेहरिस्त काफी लंबी हो चली है। 12वीं पास को स्कूटी, केजी से पीजी तक फ्री शिक्षा, न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,700 या 2,900 रुपए क्विंटल के अलावा बोनस की भी अतिरिक्त व्यवस्था की जाएगी, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा पिछले दस साल में किए गए चुनावी वादे कहां तक पूरे हो पाए? नरेंद्र मोदी जैसे प्रभावी नेता और पूर्ण बहुमत की सरकार के बावजूद दस साल का हिसाब-किताब लगाना जरूरी है। आंकड़ों के खेल से देश को भ्रमित करना भले ही जारी रहे, पर कोरोना के रूप में वैश्विक महामारी हो या आर्थिक मंदी का दौर, पूर्वोत्तर राज्यों में घरेलू स्तर पर बढ़ती हिंसा हो, पड़ोसी राज्यों के साथ बढ़ता सीमा विवाद या कूटनीतिक रिश्ते, देश में बेरोजगारी की बढ़ती समस्या हो या किसानों की बढ़ती आत्महत्या… मोदी सरकार हर मोर्चे पर विफल ही दिखी है। आज भी देश को कृषि, रोजगार, अर्थव्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय संबंध और आंतरिक सामाजिक-असामंजस्य की समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है।
वर्ष 2004-05 में कृषि, वानिकी और मछली पकड़ना सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 21 प्रतिशत था। पिछले 18 साल में यह घटकर करीब 16 फीसदी रह गया है, लेकिन खेतों में कार्यबल की संख्या में उस हिसाब से गिरावट नहीं आई है। कृषि देश में करीब 55 प्रतिशत कार्यबल को रोजगार देती है। इस क्षेत्र में अनुमानित 26 करोड़ लोग काम कर रहे हैं, यानि करीब 55-57 प्रतिशत आबादी की कृषि पर निर्भरता है, जो नरेंद्र मोदी सरकार के दौरान लंबे समय से संकट में है। मोदी सरकार के तमाम दावों के बावजूद किसानों को उनकी खेती से लाभकारी मूल्य तो दूर, पारिश्रमिक भी नहीं मिल पा रहा। जी-20 समिट के दौरान किए गए कृषि व्यापार समझौते से किसानों की परेशानी और बढ़ गई है, क्योंकि अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के अनुसार… सरकार ने कई कृषि उत्पादों और पोल्ट्री उत्पादों पर आयात शुल्क कम कर दिया है, जिससे खासकर जम्मू-कश्मीर और हिमाचल के सेब उत्पादकों पर संकट है।
देश के 16 करोड़ किसानों पर सभी प्रकार के बैंकों का करीब 21 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है… यानि प्रति किसान कर्ज 1.35 लाख रुपए है। कृषि क्षेत्र में लगे व्यक्तियों की श्रेणी में वर्ष 2021 में 10,881 लोगों ने आत्महत्या की। इनमें 5,318 किसान थे और 5,563 खेतिहर मजदूर। उसी साल देश में जिन 1,64,033 लोगों ने आत्महत्या की, उनमें से 42,004 दिहाड़ी मजदूर थे, जबकि 4,246 महिलाएं थीं। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि भारत में अभी 23 करोड़ लोग गरीबी में जी रहे हैं, जिनमें से कुछ की हालत बेहद खराब है। रिपोर्ट के अनुसार, 2005-06 से 2015-16 तक देश में गरीबी से 27.5 करोड़ लोग बाहर आए, जबकि 2015-16 से 2019-21 तक 14 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए। संयुक्त राष्ट्र का आंकड़ा गांवों और शहरों में विकास की खाई को भी दिखाता है। गांवों में रहने वाले 21.2 प्रतिशत लोग गरीब हैं, जबकि शहरों में यह आंकड़ा 5.5 फीसदी है।
सालाना दो करोड़ नौकरियों के वादे और ‘अच्छे दिन’ के नारे ने 2014 और 2019 में नरेंद्र मोदी सरकार को सत्ता में ला दिया था, लेकिन सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016 की नोटबंदी और 2017 के जीएसटी रोलआउट के दुष्प्रभावों के कारण 2018 में करीब 1.1 करोड़ नौकरियां चली गईं। इंडिया स्पेंड के विश्लेषण के मुताबिक… रोजगार के बाजार में हर साल प्रवेश करने वाले 1.2 करोड़ लोगों में से केवल 47.5 लाख लोग ही श्रम बल में शामिल होते हैं। यूपीए सरकार के दशक में गैर-कृषि क्षेत्र में सालाना 75 लाख नौकरियों का सृजन हुआ; जबकि 2013-19 की अवधि में कोविड से पहले केवल 29 लाख गैर-कृषि नौकरियां सृजित हुईं (सरकारी पीएलएफएस डेटा के आधार पर)। 2004 से 2019 के बीच ग्रामीण/शहरी भारत में शिक्षित युवाओं की संख्या बढ़ी और फिर आर्थिक और स्वास्थ्य कुप्रबंधन के कारण कोविड के दौरान और भी अधिक बेरोजगारी बढ़ी। वर्तमान सरकार में युवा बेरोजगारी दुगनी से भी अधिक हो गई है। दूसरी ओर, वास्तविक वेतनवृद्धि भी तेजी से धीमी हो गई है।
(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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1200 कर्मचारी जिला जेल में करेंगे मतों की गणना………..

जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा सात विधानसभा क्षेत्र में 17 नवंबर को हुए मतदान की मतगणना को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है। इस बार मतगणना के लिए 1200 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। इनको जल्द ही दो चरणों में प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। सबसे पहले दक्षिण-पश्चिम और फिर उत्तर व मध्य विधानसभा क्षेत्र के परिणाम आएंगे।
पहले डाक मतों की गिनती
मतगणना की शुरुआत दिव्यांग और बुजुर्ग व डाक मतपत्रों की गिनती से होगी। इनके लिए एक विधानसभा क्षेत्र में तीन से चार टेबल लगाई जाएंगी। इनकी गिनती के बाद सातों विधानसभा क्षेत्र की ईवीएम के मतों की गिनती की जाएगी। बता दें कि इस बार सात विधानसभा क्षेत्र में कुल 96 प्रत्याशी मैदान में हैं।
मतगणना के लिए
14-14 टेबलें
जिले की सात विधानसभा क्षेत्र में मतों की गणना के लिए 14-14 टेबलें लगाई जाएंगी। हर विधानसभा क्षेत्र के मतों की गिनती इन टेबलों पर होगी। इससे एक बार में 14 मतदान केंद्रों की ईवीएम के मतों का पता चलेगा। इस तरह विधानसभा के मतदान केंद्रों के हिसाब से चरण होंगे। कुल मतदान केंद्र और डाक मतपत्र की गिनती के बाद विधानसभा के रिटर्निंग अधिकारी कुल मतों का प्रमाणपत्र जारी करेंगे। जिससे प्रत्याशी को मिले मतों के हिसाब से हार-जीत का फैसला होगा। जिला जेल के स्ट्रांग रूम में तीन दिसंबर रविवार को सुबह आठ बजे से दो हजार 49 ईवीएम के मतों की गिनती की जाएगी।
26 और 30 नवंबर को दिया जा सकता है प्रशिक्षण
जिले के सात विधानसभा क्षेत्र बैरसिया, नरेला, उत्तर, मध्य, गोविंदपुरा, दक्षिण-पश्चिम और हुजूर के ईवीएम मतों की गणना एक हजार 200 कर्मचारियों से कराई जाएगी। इससे पहले इन कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण 26 नवंबर ओर दूसरा 30 नवंबर को दिया जा सकता है। समन्वय भवन और माडल स्कूल में दो प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाने की तैयारी है। दोनों ही सत्रों में 600-600 कर्मचारी शामिल होंगे। यहां पर मास्टर ट्रेनर्स कर्मचारियों को मतगणना से जुड़ी हर प्रकार की जानकारी देंगे।
मतगणना के लिए शुरू कर दी है तैयारी
आशीष सिंह, जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर, भोपाल का कहना है कि जिला जेल में तीन दिसंबर को होने वाली मतगणना के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। पहले डाक मतपत्र और दिव्यांग एवं बुजुर्ग मतदाताओं के मतों की गिनती होगी और इसके बाद ईवीएम की गिनती शुरू कर दी जाएगी।

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