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खंडवा में एक के बाद एक 26 गैस सिलेंडरों में ब्लास्ट

बीती रात घासपुरा उर्दू स्कूल के पास गैस सिलेंडर के गोदाम में आग लग गई। वहां एक के बाद एक 26 टंकियों में ब्लास्ट हुआ। धमाके की आवाज से आसपास के इलाके में दहशत का माहौल है। 7 लोग घायल हैं। गैस गोदाम पर 20 से ज्यादा फायर ब्रिगेड की मदद से रात 10.15 बजे आग पर काबू पा लिया गया है। अवैध गोदाम पर प्रशासन ने बुलडोजर चला दिया है। राजेश उर्फ राजा पंवार का परिवार गैस रिफिलिंग का काम करता है। उसने घर में गोदाम बना रखा था। उसके घर में 150 से ज्यादा सिलेंडर रखे हुए थे। यहां हर 10 मिनट में विस्फोट हो रहा था। हादसे में राजेश पवार पत्नी माधुरी, पुत्र रोशन और दीपक, भानु भांवरे, हर्षल भगत और सतीश विश्वकर्मा घायल हैं। माधुरी और दीपक को इंदौर रेफर किया गया है।

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अफसर संवेदनशीलता के साथ करें लोगों की समस्याओं का निराकरण – कलेक्टर

कलेक्टर इलैयाराजा टी ने सभी अफसरों को निर्देश दिए हैं कि जनसुनवाई में आने वाले लोगों की समस्याओं का निराकरण संवेदनशीलता के साथ करें। उन्होंने कहा कि लोग जनसुनवाई में दूर-दूर से काफी उम्मीद से आते हैं। कलेक्टर ने यह निर्देश जनसुनवाई को लेकर दिए। इधर इस बार की जनसुनवाई में भी जरूरतमंद और पीड़ितों की भारी भीड़ उमड़ी।
इंदौर के कलेक्टर कार्यालय में हर मंगलवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई में लोग जिले के कोने-कोने से अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आशा के साथ आते हैं। जनसमस्याओं का निराकरण कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी व अन्य अफसरों द्वारा धैर्य और संवेदनशीलता के साथ सुनकर किया जाता है। इसी क्रम में इस मंगलवार को भी जनसुनवाई में बड़ी संख्या लोग पहुंचे।
जनसुनवाई में जिले की तीन अनाथ बेटियां स्वाति, गौरी और छमा परमार कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी के समक्ष सहायता की उम्मीद से आईं। उन्होंने बताया कि वे अनाथ आश्रम में रहती हैं और कॉलेज में छोटी-सी जॉब करती हैं, साथ ही वे तीनों अपनी पढ़ाई भी पूरी कर रही हैं। रोजगार और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाने के लिए उन्हें आवागमन में दिक्कत आ रही है, जिसके लिए उन्हें स्कूटी की आवश्यकता है।
कलेक्टर ने उनकी समस्या को समझा और रेडक्रॉस के माध्यम से तीनों बालिकाओं को स्कूटी प्रदान करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई में कलेक्टर ने तत्कालिक जरूरतों की पूर्ति के लिए ज्योति प्रजापत को 30 हजार रुपए, दया मेहरा को 10 हजार रुपए, वंदना इंगले को सिलाई मशीन हेतु 10 हजार रुपए, रवि यादव, वंदना कश्यप तथा अंजलि रावत को 5-5 हजार रुपए, ज्योति कौशल तथा अर्पिता को 3-3 हजार रुपए तथा अन्य को रेडक्रॉस से मदद स्वीकृत की।

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इंदौर की बेटी कृष्णा नई सरकार में बनी राज्यमंत्रीकाछी मोहल्ला में मायका, टअ की पढ़ाई के दौरान लड़ा था पहला छात्र संघ चुनाव

बेटे कैलाश विजयवर्गीय, तुलसी सिलावट के अलावा इंदौर की बेटी और भोपाल की गोविंदपुरा सीट से विधायक कृष्णा गौर भी डॉ. मोहन यादव सरकार में मंत्री बनी हैं। उनका मायका इंदौर के काछी मोहल्ला में है और यहीं उनका बचपन बीता। बड़े भाई-बहनों में झगड़ा हो जाता था, तो छोटी होने के बावजूद उन्हें समझाती थी। खाने में टिक्कड़-आलू मैथी की सब्जी और मक्खन बड़े पसंद हैं। शादी के बाद भोपाल गई तो वहां राजनीति को बहुत करीब से देखा। पति की मौत के 4 दिन बाद ही जनसेवा के लिए कमर कस ली थी। जानिए इंदौर की बेटी की कहानी भाई गोपाल सिंह यादव की जुबानी..।
गरबों का शौक था, कृष्ण बनती थी- कुश्ती में विक्रम अवार्डी भाई गोपाल सिंह यादव ने कृष्णा के बचपन और परिवार के बारे में चर्चा करते हुए कहा, हमारा कुल 10 भाई-बहनों का परिवार है। बड़े भाई स्व.मदन सिंह यादव, मैं और कृष्णा सहित 5 बहने हैं। मैं गोद गया था, तो वहां मेरी दो बहनें और हैं। कृष्णा बचपन से ही खुशमिजाज है। वो परिवार, भाई-बहनों के प्रति हमेशा एक्टिव रही। उसका शुरू से ही अलग ही नजरिया रहा है। सामाजिक कार्यक्रमों में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेती थी। बड़ा परिवार है तो शादी समारोह में भी जाती और वहां भी खूब काम करती। पिताजी ने नवरात्रि गरबों की आधार शिला रखी थी। सबसे पहले गुजराती समाज के खातीपुरा में गरबे होते थे और दूसरे नंबर पर हमारे यहां काछी मोहल्ले में गरबे होते थे। इसके बाद ही पूरे इंदौर में गरबे शुरू हुए हैं। बहन कृष्णा को गरबों का बहुत शौक था। इस दौरान किसी भी प्रसंग के चित्रण में वो ऐसा अभिनय करती थी कि उस पात्र को जीवंत कर देती थी।
अहिल्याश्रम और कमला नेहरू से स्कूलिंग, ओल्ड जीडीसी से किया एमए- गोपाल सिंह के मुताबिक कृष्णा की शुरूआती स्कूलिंग राजकला निकेतन से हुई। पांचवीं तक अहिल्याश्रम में पढ़ीं। फिर छावनी स्थित कमला नेहरू स्कूल में कक्षा 6 से 11वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद ओल्ड जीडीसी कॉलेज से भूगोल में एमए किया। इसी दौरान 1984-85 में छात्र संघ का चुनाव भी लड़ीं। पढ़ाई भी लक्ष्य तय कर करती थी। पिताजी से खुद आगे होकर ट्यूशन लगवाने के लिए कहती थी। मन लगाकर पढ़ती थी। बचपन में हम भाई-बहनों में कुछ झगड़ा हो जाता था। मनमुटाव हो जाता तो बैठकर सबको समझाती थी कि हमें ऐसा नहीं करना है। अपना परिवार क्या है वो देखो, पिताजी किस स्तर के हैं वो देखो। उसका उद्देश्य परिवार को साथ लेकर चलना रहा है। मेरा तो आज तक उससे कोई वाद-विवाद, झगड़ा भी नहीं हुआ। उसका कभी किसी से मनमुटाव तक नहीं हुआ। बहन कृष्णा शुरू से जो ठान लेती थी वो करती थी। उसे कुछ समझाने की जरूरत नहीं पड़ती थी। किसी भी मामले में पिता उससे पूछते तो कहती थी मैंने सोच लिया दादा। पिताजी को वो दादा बोलती थी। वो काफी जिज्ञासु थी। अपने निर्णय खुद लेती थी। बहन कृष्णा को जब हमारे बहनोई (स्व.पुरुषोत्तम गौर) देखने आए तो उनका ये कहना था कि जिससे मैं शादी करू वो परफेक्ट हो, क्योंकि राजनीतिक परिवार है। पिताजी (पूर्व मुख्यमंत्री स्व.बाबूलाल गौर) राजनीति में थे। बहन से जब उनकी बातचीत हुई और जो-जो सवाल पूछे उनके बहन ने बहुत ही सटीक जवाब दिए तो वे खड़े हुए और बोले की मुझे लड़की (कृष्णा गौर) पसंद है। शादी की जब तैयारियां शुरू हुई तो उस समय माहौल ये था कि मैरिज गार्डन नहीं होते थे। जो भी शादी होती थी वो मोहल्ले या धर्मशाला में होती थी। बारात में सभी वरिष्ठ लोग आए थे। पिताजी ने तब बारात के ठहराने की व्यवस्था जेल रोड पर ब्राह्मण सभा की धर्मशाला में की थी। संघ से जुड़े लोग थे तो जमीन पर सोना। बैठकर भोजन करना ये सारी चीजें रहती थी। तो उस हिसाब से सारी व्यवस्था की गई। शुद्ध घी में भोजन बना था। तब सुंदरलाल पटवा, कैलाश जोशी सहित अन्य सभी आए थे। इंदौर में तब पन्ना लाल एसपी थे। बारात निकल रही तो उन्हें सूचना गई कि सभी वरिष्ठ लोग यहां पर एकत्रित हैं। इस पर उन्होंने तुरंत प्रशासनिक व्यवस्था संभाली और पिताजी से कहा कि कम से कम मुझे तो बताना चाहिए था कि इतने वरिष्ठ जन बारात में आ रहे हैं।

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कई जगहों पर महसूस किए गए झटके, रिएक्टर स्केल पर 3.3 रही तीव्रता

मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। मंगलवार दोपहर 2 बजकर 50 मिनट पर भूकंप आया। रिएक्टर स्केल में इसकी तीव्रता 3.3 नापी गई है। जिसके बाद जिले में हड़कंप मच गया। लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल गए। हालांकि 3.3 की तीव्रता ज्यादा नहीं मानी जाती है। भूकंप का केंद्र मध्यप्रदेश के सिंगरौली में था। सिंगरौली में दोपहर 2.50 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। जिले के माडा, देवसर, चितरंगी और बैढ़न तहसीलों में कहीं-कहीं हल्के कंपन महसूस किए गए है। 3.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ है, जिसका अवकेंद्र (हाइपोसेंटर) 4 किलोमीटर गहराई पर था। मौसम विभाग भोपाल ने इसकी पुष्टि की है। आपको बता दें कि जुलाई 2022 से सिंगरौली जिले से सटे छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में 6 बार भूकंप आ चुका है। इस बार भूकंप का असर सिंगरौली जिले में भी देखने को मिला है।

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इफळर मुक्त होगा भोपाल…4 साल में 3 रिव्यू, फैसला अब

360 करोड़ रु. में बना, लेकिन प्लानिंग बेतरतीब; फ्लाईओवर-मेट्रो के बाद यह बेकार

हिन्दुस्तान मेल, भोपाल
भोपाल में 24किमी लंबे इफळर कॉरिडोर को हटाने पर आखिरकार सहमति बन गई है। 13 साल पहले इसे बनाने में 360 करोड़ रुपए खर्च हुए थे, जबकि मेंटेनेंस पर हर साल लाखों रुपए खर्च होते रहे, फिर भी कॉरिडोर पर हादसे कम नहीं हुए। यही वजह है कि कई मौकों पर मंत्री से लेकर विधायक तक इसे हटाने को लेकर पैरवी करते रहे। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में जब कॉरिडोर पर चर्चा शुरू हुई तो दो मंत्री, दो विधायक और महापौर ने हटाने की बात कह दी। कॉरिडोर हटाए जाने के निर्णय से वे सभी ज्यादा खुश हैं, जो हर रोज बैरागढ़ और होशंगाबाद रोड पर जाम में फंसते रहे हैं। साल 2009-10 में मिसरोद से बैरागढ़ तक लगभग 24 किमी लंबा बीआरटीएस कॉरिडोर बनाया गया था। तब इस पर 360 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। बीसीएलएल (भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड) और नगर निगम ने 13 साल में कॉरिडोर के रखरखाव पर लाखों रुपए खर्च किए। बावजूद कॉरिडोर से गुजरने वाले लाखों लोगों के लिए यह मुसीबत बना रहा।
कॉरिडोर से कॉलोनियों
को जोड़ा नहीं
इंस्टीट्यूट आॅफ टाउन प्लानर्स आॅफ इंडिया (आईटीपीआई) के जनरल सेक्रेटरी वीपी कुलश्रेष्ठ का कहना है कि भोपाल में बीआरटीएस बना ही गलत। शहर की सबसे मुख्य सड़क पर बीआरटीएस बना दिया गया, लेकिन इसे आसपास की कॉलोनियों से नहीं जोड़ा गया। यानी लास्ट माइल कनेक्टिविटी नहीं दी गई। शहर की सबसे प्रमुख सड़क होने के कारण स्वाभाविक रूप से फ्लाईओवर भी वहीं आए और डेडिकेटेड कॉरिडोर को हटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। अब मेट्रो भी आ रही है, ऐसे में बीआरटीएस को हटा देना ही ठीक है। बता दें, इंस्टीट्यूट आॅफ टाउन प्लानर्स आॅफ इंडिया (आईटीपीआई) देशभर के टाउन प्लानर्स का संगठन है। बीआरटीएस कॉरिडोर को हटाने के लिए मंगलवार को सहमति बन गई। मंत्री और विधायकों ने इसे हटाने को कहा है।

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