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टाइम्स स्क्वायर पर होगा प्राण प्रतिष्ठा का लाइव प्रसारण

अयोध्या, एजेंसी। 22 जनवरी को अयोध्या में होने वाले राम लला की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की लाइव स्क्रीनिंग अमेरिका के न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध टाइम्स स्क्वायर पर भी होगी। टाइम्स स्क्वायर यह किसी भारतीय प्रोग्राम की पहली लाइव स्क्रीनिंग होगी। इसके अलावा दुनियाभर के भारतीय दूतावासों में भी प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की लाइव स्ट्रीमिंग होगी। अहमदाबाद से 44 फीट ऊंचा ध्वज अयोध्या लाया गया है। यह 161 फीट ऊंचे राम मंदिर पर लहराएगा। इस हिसाब से मंदिर और ध्वज की कुल ऊंचाई 205 फीट होगी। अंबिका इंजीनियर्स कंपनी ने इस ध्वज को 7 महीने में तैयार किया है। 5 जनवरी को गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अहमदाबाद से ध्वज को रवाना किया था।

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कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी फरवरी में तय हो जाएंगे : भंवर जितेंद्र सिंह

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस अब लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। कांग्रेस का दावा है कि वो फरवरी महीने में ही लोकसभा चुनाव के लिए प्रदेश की सभी 29 सीटों पर प्रत्याशी तय कर देगी।
सोमवार को भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस की तीन अहम् बैठक हुईं। सुबह प्रदेश चुनाव समिति की बैठक, इसके बाद पॉलिटिकल अफेयर्स समिति की बैठक और फिर दोपहर बाद जिला अध्यक्ष, जिला प्रभारी और लोकसभा सीटों पर नियुक्त किए गए को-आॅर्डिनेटर्स की बैठक हुई, जिसमें लोकसभा चुनाव की रणनीति से लेकर राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा को लेकर चर्चा की गई। बैठक के बाद मीडिया से चर्चा में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह ने नई टीम के गठन को लेकर बड़ी बात कही। उन्होंने कहा- काम करने वाले लोगों को पद मिले। जो खुद बूथ जीत सकते हैं, उनको जगह मिलनी चाहिए। जो खुद बूथ नहीं जीत पाते और बड़ी-बड़ी राजनीति करते हैं, उनके लिए एक सिस्टम बनाया जा रहा है। पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी में लोकसभा चुनाव की रणनीति और तैयारियों पर बात हुई। इसमें जो भी सुझाव आए हैं, उसे अभा कांग्रेस कमेटी के सामने रखा जाएगा। जहां चर्चा के बाद उन्हें इंप्लीमेंट करेंगे। जिला अध्यक्ष, प्रभारी और लोकसभा को-आॅर्डिनेटर की बैठक में राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर चर्चा की गई।
राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा मध्यप्रदेश से भी गुजरेगी। उसकी तैयारियों को लेकर जिला अध्यक्षों से चर्चा की गई। प्रदेश प्रभारी ने बताया कि इस यात्रा को लेकर कांग्रेस पार्टी के साथ-साथ आम लोगों में भी खुशी की लहर है। हमने इस यात्रा की पूरी तैयारी का रूट चार्ट बनाया है। कहां-कहां उनका पैदल कार्यक्रम होगा, वे कहां गाड़ी से जाएंगे… इसकी पूरी व्यवस्था हमने की है।
कमलनाथ पर बोले जितेंद्र सिंह- वे हमारे नेता
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को लेकर भंवर जितेंद्र सिंह ने कहा- कमलनाथ न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि देश के हमारे बहुत वरिष्ठ नेता हैं। उनका बहुत बड़ा सहयोग मध्यप्रदेश के अंदर रहा है, आगे भी उनका आशीर्वाद रहेगा।

जल्द होगी लोकसभा चुनाव के प्रत्याशियों की घोषणा
प्रदेश कांग्रेस प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह ने कहा- प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में ये तय हुआ कि समिति के सदस्य अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र में जाएंगे और जिला अध्यक्ष और मंडल संगठन से चर्चा करेंगे, जिसके बाद नामों का एक पैनल बनाकर 30 जनवरी तक देंगे। हमारी कोशिश है कि जल्द-से-जल्द हम टिकट की घोषणा कर पाएं।

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Ayodhya Ram Mandir: अधिपति और आधिपत्य का संतुलन ही है रामराज्य की असल परिकल्पना

सूर्य-चंद्रमा, वर्षा-शरद, पशु-पक्षी, पर्वत-नदी आदि-आदि पर हमारा विचार बना रहता है, दौड़ता रहता है, फिर भी इस महान विश्व का नियमबद्ध संचालक हमारी दृष्टि से सदैव ओझल ही रहता है। इसलिए हमारी यह विवशता होती है कि हम उस अदृश्य संचालक शक्ति की कल्पना करें और उसे परिभाषित करें, ताकि सृष्टि के राज्य को नियंत्रित करने वाले साकार या निराकार स्वरूप की विवेचना हो सकें। हम राम की प्रभुता को समझ सकें और रामराज्य की संप्रभुता को परिभाषित कर सकें।

जब किसी समाज में सर्वव्यापक प्रभु मनुष्यों के हृदय में अपना विभूतिपूर्ण रवि जैसा प्रतापमय प्रकाश कर देते हैं, तब धर्म, ज्ञान, विज्ञान, सुख, संतानोत्पत्ति, सब वृत्तियों की वृद्धि ही होती है और समाज में शेष मत्सर, मान, मोह आदि दुष्प्रवृत्तियां नष्ट हो जाती हैं। यही सृष्टि का मूल मंत्र है, जिससे नवजागरण होता है।

सृष्टि अर्थात जीवन का मूलाधार। सृष्टि अर्थात हमारे अस्तित्व की परिभाषा। सृष्टि अर्थात प्रकृति और पुरुष के बीच में समन्वय। सृष्टि अर्थात अधिपति और आधिपत्य का संतुलन। जब भी हम सृष्टि पर विचार करते हैं, तो उसके विस्तार में हमें अनेक आयाम देखने को मिलते हैं। अनेक गतिविधियों से हमारा सामना होता है। अनेक विधियों को सीखते हुए हम सृष्टि के अंश मात्र के भी नियंता न होते हुए भी अपने कर्मों का फल अपने जीवन में ही प्राप्त करने के लिए तत्पर रहते हैं। हम अधिपति बनना चाहते हैं। हम अधिकारी बनना चाहते हैं। हम नीति और नियति के विरुद्ध अपने अस्तित्व के लिए लड़ते हैं। इस सारी प्रक्रिया में कई बार हम सफल होते हैं और कई बार हम असफल। वैचारिक प्रवाह नित्य-प्रतिदिन हमारे भीतर उगते हैं, उठते हैं और गिर जाते हैं। कुछ वैचारिक प्रवाह ही ऐसे होते हैं, जो आपके जीवन काल में आपके साथ कुछ वर्षों तक या फिर लंबी कालावधि तक आपकी जीवन यात्रा में शामिल रहते हैं। 

सूर्य-चंद्रमा, वर्षा-शरद, पशु-पक्षी, पर्वत-नदी आदि-आदि पर हमारा विचार बना रहता है, दौड़ता रहता है, फिर भी इस महान विश्व का नियमबद्ध संचालक हमारी दृष्टि से सदैव ओझल ही रहता है। इसलिए हमारी यह विवशता होती है कि हम उस अदृश्य संचालक शक्ति की कल्पना करें और उसे परिभाषित करें, ताकि सृष्टि के राज्य को नियंत्रित करने वाले साकार या निराकार स्वरूप की विवेचना हो सकें। हम राम की प्रभुता को समझ सकें और रामराज्य की संप्रभुता को परिभाषित कर सकें।

दरअसल, इन सब बातों के निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए हमें राम के उन क्रांतिकारी विचारों को समझना पड़ेगा, जिन्हें हम ‘रामराज्य’ कहते हैं। यहां मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि ‘राम’ यहां क्रांति के प्रतीक नहीं हैं, परंतु ’रामराज्य’ भारतीय संस्कृति में क्रांति का प्रतीक है। रामराज्य ऐसी क्रांति है, जो अनवरत चली जा रही है। 

मैं इसके इतिहास में नहीं जाऊंगा। परंतु मैं यह जरूर कहूंगा कि समकालीन परिदृश्य में भी रामराज्य की परिकल्पना किसी क्रांति से कम नहीं है। अगर हम इसके प्रमुख कारणों के बारे में संक्षेप में चर्चा करें, तो कहा जा सकता है कि लौकिक जीवन में शुद्धता हमारे व्यक्तित्व को शुद्ध तो बनाती है, लेकिन व्यक्तित्व-शोधन मात्र से हमारा काम नहीं चलता। इसलिए प्रकृति के नियमानुसार व्यक्तियों का समुदाय और उस समस्त समुदाय को व्यवस्थित रखना आवश्यक हो जाता है। व्यवस्थाहीन समुदाय द्वारा अराजकता फैलाने के कारण शुद्ध व्यक्तिविशेष को भी सुख-शांति से वंचित रहना पड़ता है। इसलिए स्वभाविक नियम के अनुसार सृष्टि में स्थित मानव समुदाय को भी व्यवस्थित रखना आवश्यक है। 

हर समुदाय की, विशेष कर मानव समुदाय की इस व्यवस्था का ही नाम ‘राज्य’ है। अधिकांश समय देखने को मिलता है कि राज्य के नाम पर सुखद व्यवस्था के स्थान पर दुखप्रद व्यवस्थाएं मानव समाज में देखी जाती हैं। इसलिए उनके साथ ‘राम’ शब्द जोड़कर प्रकट किया गया है, ताकि यदि सुख-समृद्धि चाहते हो, तो हर राज्य को राम रूपी शोध से शुद्ध रखना चाहिए। 

सरल शब्दों में कहा जा सकता है कि सारी सृष्टि में तथा सृष्टि के प्रतीक समूहों में व्यवस्था सर्वोपरि है। व्यवस्थित समाज से ही व्यक्तित्व का निर्माण होता है। व्यक्तित्व के निर्माण से ही सामाजिक समरसता बढ़ती है और राज्य सबल होता है। भारतीय संस्कृति में इसीलिए रामराज्य की परिकल्पना को इस तरह से किया गया है कि जब किसी समूह में या राज्य में प्रधानकर्ता ईश्वरवाची राम नाम से प्रेरित रहे, तो वहां की व्यवस्था अन्य व्यवस्थाओं की तुलना में ज्यादा न्याय करने वाली और सुव्यवस्थित होती है। यहां व्यक्तिगत प्रभुता का स्थान नहीं होता, बल्कि सामाजिक संप्रभुता और लोकप्रभुता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। 

वैसे भी व्यक्तिगत नारा लगाने से किसी व्यक्ति विशेष की प्रभुता का महिमामंडन होता है, जबकि अगर किसी समूह का नारा लगाया जाए, तो उसका असर सामाजिक परिपेक्ष्य में भी व्यापक होता है। अहंकार की भावना का परित्याग होता है। यही कारण है कि हमारी संस्कृति में रामराज्य की परिकल्पना की गई है। 

रामराज्य कहने में सामूहिक था अथवा सामाजिक जीवन की शुद्धता का भाव परिलक्षित होता है, इसलिए आज भी रामराज्य जैसा शब्द हमारे समाज में उतना ही लोकप्रिय है, जितना युगों पहले था। सृष्टि ने राज्य के पश्चात दशरथ-नंदन राम के राज्य की रूपरेखा खींची है, जिसमें हमें राम के यज्ञ, दान, वेद- पथ धर्म- निर्णय था त्रिगुणातीत लक्षणों का बोध कराया गया है। उनकी पत्नी, माता, भाई, सेवक आदि का सम्मिलित आदर्श कुटुंब का परिचय दिया है एवं प्रजा में स्नान आदि नित्य क्रियाओं, सत्य-संगति, भजन-पूजन, कथा-पुराण आदि की रुचि विषयक चर्चा की गई है और फिर अवधवासियों को सुख-संपदा का उल्लेख किया है। 

तुलसीदास जी ने भी रामराज्य का वर्णन मानस के उत्तरकांड के पूर्वार्ध में किया है। साधारणतया पाठक यही समझते हैं कि तुलसी ने केवल दशरथ पुत्र राम की राज व्यवस्था का वर्णन किया है। परंतु यह सत्य नहीं है। अगर आप ध्यानपूर्वक और सुयोग्य विधि से इसे पढ़ने का प्रयास करेंगे, तो पता चलेगा कि उक्त वर्णन में तुलसीदास जी ने त्रिविध रामराज्य का उल्लेख किया है। 

प्रथम सर्वव्यापी रामराज्य, द्वितीय अवध नरेश पुरुषोत्तम राम का राज्य और तृतीय मानस का रामराज्य। आइए रामराज्य के इन तीनों बिंदुओं पर संक्षिप्त चर्चा कर ले। सर्वव्यापी राम के राज्य  से तात्पर्य है कि जो समस्त सृष्टि को व्यवस्थित रखता है। नीतियों का नियंता है और जो सृष्टि का अभियंता है। दूसरा अवध नरेश पुरुषोत्तम राजा का राज्य है, जिससे अपने आदर्श चरित्र या व्यवस्था द्वारा अवध राज्य में सुख-समृद्धि का प्रचार प्रसार किया जाता है। जन-मन के लिए न्याय की व्यवस्था की जाती है और यह तय किया जाता है कि सभी प्रजा को समान अधिकार मिलें, संतुष्टि मिले और समान अवसर मिलें। तीसरा मानस का रामराज्य है, जो मानव के मन, कर्म, वचन पर आरूढ़ होकर सर्व समाज को त्रिविध दुखों ईर्ष्या, द्वेष, दुर्गुणों से बचाकर सुखी और समृद्धशाली बनाता है। अर्थात समाज के चरित्र निर्माण पर विशेष जोर दिया जाता है और सामाजिक परंपराएं लोक आस्थाओं को जीवित रखने के लिए सभी उद्यम किए जाते हैं। 

तुलसीदास जी की मूल भावनाओं को यदि हम परिभाषित करने की चेष्टा करें, तो निस्संकोच कहा जा सकता है कि तुलसी का मूल उद्देश्य हर मनुष्य के मन पर ईश्वरीय राज्य की स्थापना का रहा होगा, क्योंकि जब तक समाज सुखी नहीं रहेगा, समृद्ध नहीं रहेगा, सत्य पर नहीं चलेगा, तब तक मानवता की बात निराधार है। 

त्रिलोक के स्वामी प्रभु श्रीराम के बारे में तुलसी ने कहा है- रामराज बैठे त्रैलोका। बहुधा आकाश, पृथ्वी और पाताल, इन तीनों को ही त्रिलोक कहते हैं, परंतु लोक का अर्थ यथार्थ में होता है कोई भाग विशेष, जिसे अंग्रेजी में स्फीयर या डोमेन कहते हैं। मनुष्य मन, वाणी और कर्म का संग्रहरूप होता है, इसलिए यह तीनों भाग विशेष मानव पृथ्वी के त्रिलोक हैं। इन तीनों में भी मन-लोक सबसे महत्वपूर्ण है। इसी मन-लोक पर शासन व्यवस्था का नाम रामराज्य है। चूंकि, रामराज्य की परिकल्पना में मन पर राम का राज्य है और राज्य पर राम का आधिपत्य, इसलिए रामाधिपत्य के कारण मनुष्य मन को वश में कर लेता है। यही रामराज्य का चरमोत्कर्ष है। यही रामराज्य की सिद्धि है। अधिपति और आधिपत्य का यही संतुलन रामराज्य का मूलाधार है।

यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, जैसा आजकल रामराज्य को परिभाषित किया जाता है। लोक-जीवन से संबंधित वैचारिक और सांस्कृतिक गहनता को समझे बिना हम प्रकट करने की होड़ में सबसे आगे निकल जाना चाहते हैं। हम इस बात की चिंता ही नहीं करते कि हमारे इस प्रकटीकरण से समाज को किस तरह का स्वरूप मिलेगा? तार्किक चिंतन की जगह पर हम भाषाई रहस्यवाद से अपनी सांस्कृतिक अवधारणा को ध्वस्त करना चाहते हैं। जबकि वर्तमान परिपेक्ष्य में जब पूरा देश आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है, राम के विचारों की बागडोर को पकड़ लेना अत्यंत लाभप्रद और सार्थक सिद्ध हो सकता है। किंतु विचारों को पूरी सच्चाई और निष्ठा से अपनाने की जरूरत है, न कि स्वार्थपरक रंगों में रंग कर प्रस्तुत करने की।
भारतीय परिपेक्ष्य में रामराज्य की परिकल्पना विशिष्ट महत्त्व रखती है। राम ने न सिर्फ भारत में, अपितु वैश्विक संदर्भ में भी अपनी सत्यता, सुंदरता और शिवत्व को सिद्ध किया है। आइए हम सब मिलकर रामराज्य की परिकल्पना को पुनः मूर्त रूप देने का प्रयास करें। श्रमदान करें, अर्थदान करें स्वाभिमानी बनें, आत्मनिर्भर बनें और निस्वार्थ होकर चरित्रवान राष्ट्र निर्माण करें। 

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US: ‘ऐसा लगा मानों श्रीराम आ गए हों’, राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले ह्यूस्टन में भक्तों ने निकाली कार रैली

राम मंदिर वाले भगवा बैनर लिए 500 से अधिक लोगों ने 216 कारों की एक रैली निकाली। रैली को श्री मीनाक्षी मंदिर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया था।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के उद्धाटन की तैयारियां जोरों पर हैं। 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए राम नगरी को सजाया जा रहा है। देश ही नहीं दुनिया में राम मंदिर के अभिषेक समारोह को लेकर उत्साह है। ह्यूस्टन में रविवार को हिंदू अमेरिकी समुदाय के सदस्यों ने भजनों और ‘जय श्री राम’ के नारों के बीच एक विशाल कार रैली निकाली। ये रैली रास्ते में 11 मंदिरों में रुकी।

मंदिर प्रशासन को 22 जनवरी को अयोध्या में आयोजित होने वाले अभिषेक समारोह में शामिल होने के लिए अमेरिका के विश्व हिंदू परिषद (विहिपए) की ओर से औपचारिक निमंत्रण दिया गया। 

सौ मील का रास्ता तय
राम मंदिर, भारतीय ध्वज और अमेरिकी ध्वज की तस्वीर वाले भगवा बैनर लिए 500 से अधिक लोगों ने 216 कारों की एक रैली निकाली। इस रैली ने सौ मील का रास्ता तय किया। रैली को ह्यूस्टन के समाजसेवी जुगल मलानी ने श्री मीनाक्षी मंदिर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और यह रिचमंड के श्री शरद अंबा मंदिर में दोपहर बाद संपन्न हुई।

दो हजार से अधिक लोगों ने लिया भाग
ह्यूस्टन की व्यस्त सड़कों को पार करते हुए एक ट्रक के नेतृत्व में रैली निकाली गई। जय श्री राम के नारे की गूंज के साथ निकाली गई रैली छह घंटे में 11 मंदिरों में रुकी। करीब 2,000 युवा और बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने मंदिरों में भजनों के साथ शोभायात्रा का स्वागत किया। मंदिर में मौजूद हर एक व्यक्ति ‘जय श्री राम’ के नारे और शंख की आवाज में मंत्रमुग्ध दिखा। लिविंग प्लैनेट फाउंडेशन की संस्थापक कुसुम व्यास ने कहा कि राम भक्तों के साथ इस पल का अनुभव करना बड़ा आनंददायक था। 

भक्ति और प्यार वाला पल
ह्यूस्टन के स्वयंसेवक अचलेश अमर, उमंग मेहता और अरुण मुंद्रा ने पहली बार इस तरह की रैली का आयोजन किया था।वीएचपीए के सदस्य अमर ने कहा कि भगवान श्री राम ह्यूस्टनवासियों के दिल में रहते हैं। कार रैली में भाग लेने वालों के लिए विभिन्न मंदिरों में एकत्र हुए 2,500 से अधिक भक्तों द्वारा दिखाई गई भक्ति और प्यार अभिभूत कर देने वाला था।

खुद ह्यूस्टन पहुंचे हों श्री राम
वहीं मेहता ने कहा, ‘माहौल भक्ति और प्रेम से भरा हुआ था। ऐसा लग रहा था जैसे श्रीराम खुद ह्यूस्टन पहुंचे हों।’ मुंद्रा ने कहा कि मंदिर प्रशासन को एक सुंदर निमंत्रण टोकरी भेंट की है। इस टोकरी में विहिपए की ओर दिया औपचारिक निमंत्रण, अयोध्या से पवित्र चावल, राम परिवार, गंगाजल, सुंदर कांड की एक प्रति और कुछ मिठाइयां थीं। उन्होंने कहा कि यह प्रत्येक मंदिर को भव्य श्री राम लला मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में भाग लेने का अनुरोध करते हुए दी गई थी।

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PM पर मालदीव के मंत्रियों की आपत्तिजनक टिप्पणी: भारत का व्यापार संगठन भड़का, कहा- लक्षद्वीप में करें निवेश

मालदीव की मंत्रियों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों पर विवाद के बीच इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) ने एक बड़ा कदम उठाया है। दरअसल, आईसीसी ने पर्यटन और व्यापार संघ से मालदीव को बढ़ावा देना बंद करने का आग्रह किया है। व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुभाष गोयल ने सभी व्यापार संघों के लिए एक बयान जारी किया है। 

PM पर मालदीव के मंत्रियों की आपत्तिजनक टिप्पणी: भारत का व्यापार संगठन भड़का, कहा- लक्षद्वीप में करें निवेश

सुभाष गोयल ने मालदीव में परिचालन करने वाले सभी वाहकों से अपने परिचालन को निलंबित करने की अपील की है। उन्होंने उड़ान योजना के तहत लक्षद्वीप में परिचालन के बारे में विचार करने की भी अपील की है।

मालदीव की मंत्रियों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों पर विवाद के बीच इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) ने एक बड़ा कदम उठाया है। दरअसल, आईसीसी ने पर्यटन और व्यापार संघ से मालदीव को बढ़ावा देना बंद करने का आग्रह किया है। व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुभाष गोयल ने सभी व्यापार संघों के लिए एक बयान जारी किया है। 

आईसीसी सचिव ने अपने बयान में कहा, ‘भारतीय विदेशी मुद्रा और व्यापार के सबसे बड़े स्रोतों में से एक है। कृपया लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबर में निवेश करें, क्योंकि ये मालदीव से बहुत बेहतर है। हिंद महासागर क्षेत्र में जिन अन्य स्थानों को बढ़ावा दिया जा सकता है वह है श्रीलंका, बाली, मॉरीशस और फुकेत।’

आईसीसी के अध्यक्ष की अपील 
सुभाष गोयल ने मालदीव में परिचालन करने वाले सभी वाहकों से अपने परिचालन को निलंबित करने की अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने उड़ान योजना के तहत लक्षद्वीप में परिचालन के बारे में विचार करने की भी अपील की है।

सुभाष गोयल ने अपने बयान में कहा, ‘मैं एफएचआरएआई और होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सदस्यों से अपील करता हूं कि वे लक्षद्वीप जैसे द्वीपों में निवेश पर गंभीरता से विचार करें क्योंकि भविष्य में यह आपको मालदीव की तुलना में आपके निवेश पर बेहतर रिटर्न देगा।’

बता दें कि पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों पर विवाद के बीच ही ऑनलाइन ट्रैवल कंपनी ईजमाईट्रिप ने मालदीव के लिए सभी उड़ान बुकिंग निलंबित कर दी है। सोमवार को मेकमाईट्रिप ने दावा किया कि पीएम मोदी के लक्षद्वीप यात्रा के बाद ऑन-प्लेटफॉर्म सर्च में 3400 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

भारत-मालदीव विवाद को लेकर ब्लू स्टार ट्रैवल सर्विसेस के निदेशक माधव ओझा ने कहा, ‘भारत और मालदीव के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में सुधार हुआ है। मालदीव के लिए भारत से आठ सीधी उड़ाने है। हर दिन 1,200-1,300 यात्री मालदीव के लिए रवाना होते हैं। अभी 20 से 30 फीसदी कैंसिलेशन की संभावना है।’

क्या था मामला
दरअसल, दो जनवरी को पीएम मोदी ने केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप का दौरा किया था और इस दौरे की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर किए थे। उन्हंने स्नॉर्कलिंग पर हाथ आजमाने के अपने अनुभव को भी उल्लेख किया था। पीएम मोदी के इस पोस्ट पर लक्षदीप की मंत्री मरियम शिउमा ने भारत के प्रधानमंत्री पर अपमानजनक टिप्पणी के साथ उनका मजाक उड़ाया था। उनकी पोस्ट में पीएम मोदी की लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें भी थी। 

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