48 पंचायतों के 476 टोले-मजरों तक नहीं पहुंचा पानी, महिलाओं को 2-3 किमी दूर से लाना पड़ रहा पानी; दूषित पानी से बीमारी फैलने का खतरा
टांडा/धार। अशोक मांझी। हिंदुस्तान मेल संवाददाता
गंधवानी विधानसभा क्षेत्र के बाग विकासखंड की 48 पंचायतों के 91 गांवों और करीब 476 टोले-मजरों में नल-जल मिशन योजना का लाभ नहीं पहुंच पाने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई गांवों में आज भी लोग झिरों, नालों और दूर स्थित कुओं से पानी लाकर पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी के कारण गंभीर बीमारियों का खतरा बना हुआ है।

ग्रामीणों के अनुसार, अधिकारियों और ठेकेदारों की लापरवाही के चलते कई स्थानों पर नल कनेक्शन नहीं हुए हैं। वहीं कुछ गांवों में योजना का काम शुरू ही नहीं हुआ या कागजों तक सीमित रह गया है। महिलाओं और बच्चों को पानी के लिए दो से तीन किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ रहा है।
विधानसभा में भी उठ चुका है मामला
गंधवानी विधायक एवं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार इस मामले को विधानसभा में उठा चुके हैं। उन्होंने नल-जल मिशन में प्रदेश स्तर पर करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाते हुए सरकार पर मामले को दबाने और आदिवासी ग्रामीणों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

इन गांवों में नहीं पहुंचा नल का पानी
ग्राम पंचायत झाई के झड़ामली, गुराडिया और पीपलदलिया, ग्राम पंचायत नरवाली के गुड़ा, गढ़रावत और नरवाली सहित कई गांवों में ग्रामीण नल-जल योजना के लाभ से वंचित हैं। ग्राम पंचायत चमझार, घोड़दलिया, बगोली और सिंगाचोरी में भी योजना का काम नहीं होने की शिकायत सामने आई है।
ग्राम पंचायत जेतगढ़ के खोखरिया फलिया में परिवार नाले का पानी पीने को मजबूर हैं। इसी पंचायत के गातला गांव के डोडवा फलिया में करीब 40 परिवार झिरे के पानी पर निर्भर हैं। ग्राम पंचायत मगदी के खड़ापुरा में करीब 30 परिवार दूषित झिरे का पानी पी रहे हैं।
तरसिंग गांव के तड़वीपुरा के करीब 40 परिवारों को करीब दो किलोमीटर दूर स्थित कुएं से पानी लाना पड़ रहा है।

आजादी के बाद भी नल का इंतजार
ग्राम पंचायत झाई के गुराडिया के पटेल फलिया के ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के बाद से आज तक उनके घरों तक नल नहीं पहुंचा है। यहां लोग वर्षों से झिरे का पानी पी रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है—“गांव में नल भी नहीं है और जल भी नहीं।”

जिले के अंतिम छोर पर बसे गांवों की अलग परेशानी
ग्राम पंचायत काकड़वा के करछट गांव के बामनिया फलिया के ग्रामीणों को अलीराजपुर जिले की चूल्या नदी से पानी लाना पड़ता है। नदी गांव से करीब दो से तीन किलोमीटर दूर है। इसी तरह छड़ावद गांव के लोग भी चूल्या नदी से पानी लाकर अपनी जरूरत पूरी कर रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक पानी लाने के रास्ते में जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है।
कलेक्टर को कई बार दिया ज्ञापन, नहीं हुई सुनवाई
बाग जनपद अध्यक्ष सकरीबाई भूरिया ने बताया कि नल-जल योजना को लेकर कई बार कलेक्टर को आवेदन और ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक गरीब आदिवासी परिवारों की समस्या का समाधान नहीं हुआ। बड़दा क्षेत्र में भी ग्रामीणों को योजना का लाभ नहीं मिलने और गंदे झिरे का पानी पीने की शिकायत है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नल-जल मिशन की जमीनी स्थिति की जांच कराई जाए, अधूरे कार्य तत्काल पूरे किए जाएं और सभी टोले-मजरों तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाया जाए। साथ ही दूषित पानी से संभावित बीमारी के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी तत्काल जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाए।