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लक्षद्वीप में शराबबंदी का खेल…!

हर दल अपनी सुविधा और वोट बैंक की राजनीति के हिसाब से अपनी नीतियां बदलता रहा है। यही वजह है कि विपक्षी दल भाजपा के निशाने पर रहे हैं। विपक्षी दल जब तक जनहित और देशहित के व्यापक मुद्दों पर नीतिगत निर्णय नहीं लेंगे, तब तक आम लोगों में उनके प्रति विश्वास कायम होना मुश्किल है। इसी से भाजपा को भी मौका मिलता है। उम्मीद यही की जाती है कि मुंबई में होने वाली विपक्षी दलों की तीसरी बैठक में जनहित से जुड़े मुद्दों पर कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा। सुविधा के हिसाब से नीतियां बदलना विपक्षी दलों को छोड़ा होगा। हालांकि विपक्षी दलों की दो बैठकों के परिणाम सिर्फ मेल-मिलाप तक ही सीमित रहे हैं। इन बैठकों में सिर्फ विपक्षी एकता का नया नाम इंडिया ही तय किया जा सका। देखना यही है कि मुंबई की बैठक में विपक्षी दल देश के सामने किस नए रंगरूप में पेश होते हैं। भाजपा को भी इसी बात का इंतजार है, ताकि आरोपों के नए हथियारों को धार दी जा सके। विपक्षी दलों को अपने भीतर के अंतर्विरोध पहले दूर करने होंगे, तभी वे सत्तापक्ष के सामने एकजुट दिखाई दे सकेंगे, अन्यथा संसद में भी वे हार गए हैं।
विपक्षी दल वोट बैंक को पाने के लिए कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहते। बेशक इसके लिए उन्हें भेदभाव, धर्म-जाति और अन्य ऐसे ही मुद्दों का सहारा क्यों न लेना पड़े! विपक्षी दलों की इसी छद्म नीति को भारतीय जनता पार्टी उजागर करती रही है। केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप में विपक्षी दलों का यही चेहरा सामने आया है। विपक्षी दल इस प्रदेश में शराबबंदी हटाने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। विपक्षी दलों का यह विरोध अल्पसंख्यक वोट बैंक को रिझाने के लिए है, जबकि लक्षद्वीप प्रशासन पर्यटकों की सुविधा और मांग के मद्देनजर इस प्रदेश में शराबबंदी हटाने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। लक्षद्वीप प्रशासन ने एक मसौदा उत्पाद शुल्क विनियमन विधेयक प्रकाशित किया है और द्वीप समूह में शराब की बिक्री और खपत की अनुमति देने पर स्थानीय निवासियों से सुझाव मांगे हैं। कांग्रेस, एनसीपी और अन्य विपक्षी दल इस प्रस्ताव के विरोध पर आमदा हैं। विपक्षी दलों की दलील है कि लक्षद्वीप की 97 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है, जो मानते हैं कि शराब का सेवन उनकी संस्कृति और धार्मिक परंपरा के खिलाफ है।
सन् 1979 में द्वीपों में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों की मांग को पूरा करने के लिए एक निर्जन द्वीप बंगाराम के रिसॉर्ट्स में शराब परोसी जाती है। प्रशासन ने द्वीप पर बनने वाले नए पांच सितारा होटलों में शराब की अनुमति देने का प्रावधान किया है। ड्राफ्ट बिल में एक्साइज कमिश्नर की पोस्टिंग का प्रस्ताव है। मसौदा विधेयक में शराब की बिक्री और खपत की निगरानी और विनियमन के लिए उत्पाद शुल्क आयुक्त और सहायक कर्मचारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव है। शराब के निर्माण, बिक्री और उपभोग से संबंधित तकनीकी या कानूनी मुद्दों पर प्रशासक को सलाह देने के लिए विशेषज्ञों का एक बोर्ड गठित किया जाएगा। विनियमन के प्रावधानों के अधीन, उत्पाद शुल्क आयुक्त किसी भी स्थानीय क्षेत्र के भीतर थोक या खुदरा द्वारा निर्माण और बिक्री के लिए लाइसेंस या पट्टा दे सकता है। प्रशासन को शराब की दुकानों को बंद करने का आदेश देने का अधिकार है, लेकिन लाइसेंस वर्ष में बंद दिनों की संख्या कुल मिलाकर सात दिनों से अधिक या लगातार तीन दिनों से अधिक नहीं होगी। गौरतलब है कि विपक्षी गठबंधन इंडिया के प्रमुख घटक समाजवादी पार्टी व उसके समर्थित मुस्लिम संगठनों ने मथुरा में शराब और मांस की बिक्री प्रतिबंधित करने के योगी सरकार के निर्णय का विरोध किया था। योगी सरकार के इस फैसले के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक मुस्लिम सामाजिक कार्यकर्ता शाहिदा ने याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने मथुरा-वृंदावन के 22 वार्डों में प्रदेश सरकार द्वारा शराब व मांस की बिक्री पर रोक लगाने के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका खारिज कर दी गई। कोर्ट ने याचिका खारिज कर कहा था कि भारत विविधताओं का देश है। अगर देश में एकता बनाए रखना है तो सभी समुदायों और धर्मों का समादर बहुत जरूरी है। हमारे देश में विविधताओं के बावजूद एकता यहां की खूबसूरती है।
वर्ष-2016 में बिहार में शराब पर प्रतिबंध लगाने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उत्तरप्रदेश में पूर्ण शराबबंदी की वकालत की थी, जिस पर सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी ने तुरंत आलोचना की। समाजवादी पार्टी ने मुख्यमंत्री नीतीश पर राज्य के खिलाफ नकारात्मक टिप्पणियां करने और इस तरह ‘सांप्रदायिक ताकतों को मजबूत करने’ का आरोप लगाया था। समाजवादी पार्टी की दलील थी कि सरकार के खिलाफ उनकी टिप्पणियों से सांप्रदायिक ताकतों को बढ़ावा मिलेगा, जिनके खिलाफ उत्तरप्रदेश सरकार लड़ रही है। यह अलग बात है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर एक-दूसरे को गरियाने के बावजूद दोनों ही दल अब जोर-शोर से विपक्षी एकता की कवायद में जुटे हुए हैं। छद्म धर्मनिरपेक्षता का आलम यह है कि इसमें राजनीतिक दल ही नहीं, अभिनेता भी पीछे नहीं हैं। लक्षद्वीप के कट्टरपंथी मुसलमानों ने ‘अनारकली’ की शूटिंग नहीं होने दी, पर अभिनेता पृथ्वीराज के लिए वहां सब चंगा था। लक्षद्वीप के ‘बहुसंख्यकों’ के बचाव में शराब की दुकानें खोले जाने के विरोध में मलयाली अभिनेता पृथ्वीराज सुकुमारन भी सामने आए थे, जिन्हें खुद इसी द्वीप के कट्टरपंथियों द्वारा अपनी ही फिल्म ‘अनारकली’ की शूटिंग के पीछे काफी विरोध का सामना करना पड़ा था। निश्चित तौर पर मद्यपान के नुकसान सर्वविदित है, लेकिन सिर्फ एकतरफा धर्म और संस्कृति के आधार पर वोट की खातिर इस मुद्दे का समर्थन या विरोध करना विपक्षी दलों की असलियत को उजागर करता है। यही वजह है कि ऐसे दोहरे मापदंडों की वजह से भाजपा विपक्षी दलों पर हमलावर रही है। विपक्षी दल सामाजिक, धार्मिक सहित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर कभी भी एक राय कायम नहीं कर सके।
(ये लेखक के अपने निजी विचार हैं)

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नागपुर की भाजपा नेता सना खान की जबलपुर में हत्या

मुंबई, एजेंसी। महाराष्‍ट्र के नागपुर की बीजेपी नेता सना खान की जबलपुर में हत्या हो गई है। नागपुर और जबलपुर पुलिस ने आरोपी और सना के कथित पति अमित साहू उर्फ पप्पू को इस हत्‍या के मामले में गिरफ्तार किया है। पप्पू साहू ने हत्या की बात कबूल की और हत्या के बाद सना का शव नदी में फेंकने की बात कबूल कर ली है। पुलिस अब शव की तलाश में जुटी है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक आरोपी अमित साहू उर्फ पप्पू को दो अन्य लोगों के साथ नागपुर पुलिस ने मध्यप्रदेश के जबलपुर के घोड़ा बाजार इलाके से गिरफ्तार किया था। सना खान नागपुर में भाजपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की पदाधिकारी थीं और एक अगस्त से लापता थीं। नागपुर के पुलिस उपायुक्त (जोन- द्वितीय) राहुल मदने ने दावा किया कि मामले का मुख्य आरोपी अमित साहू, हीना (34) को जानता था और उसने सना के अपहरण और उसकी हत्या करने की बात कबूल कर ली है। पुलिस उपायुक्त के मुताबिक सना का शव अब तक बरामद नहीं किया गया है। हत्या का कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है। घरवालों के मुताबिक… वो मध्यप्रदेश के जबलपुर में अपने बिजनेस पार्टनर के पास गई थीं, लेकिन उसके बाद कुछ पता नहीं चला। पता चल रहा है कि नागपुर पुलिस जब जबलपुर गई तो बिजनेस पार्टनर भी लापता है। शक है कि उसने बीजेपी की महिला नेता सना खान की हत्या कर दी है। हालांकि, अभी तक सना का शव नहीं मिला है।

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मॉब लिंचिंग, नाबालिग से रेप पर मौत की सजा तीन साल में फैसला सुनाना होगा…………….

अंग्रेजों के जमाने के कानून खत्म होंगे। मानसून सेशन के आखिरी दिन 11 अगस्त को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 163 साल पुराने 3 मूलभूत कानूनों में बदलाव के बिल लोकसभा में पेश किए। सबसे बड़ा बदलाव राजद्रोह कानून को लेकर है, जिसे नए स्वरूप में लाया जाएगा।
कई धाराएं और प्रावधान अब बदल जाएंगे। आईपीसी में 511 धाराएं हैं, अब 356 बचेंगी। 175 धाराएं बदलेंगी। 8 नई जोड़ी जाएंगी, 22 धाराएं खत्म होंगी। इसी तरह सीआरपीसी में 533 धाराएं बचेंगी। 160 धाराएं बदलेंगी, 9 नई जुड़ेंगी, 9 खत्म होंगी। पूछताछ से ट्रॉयल तक वीडियो कॉन्फ्रेंस से करने का प्रावधान होगा, जो पहले नहीं था।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ट्रॉयल कोर्ट को हर फैसला अधिकतम 3 साल में देना होगा। देश में 5 करोड़ केस पेंडिंग हैं। इनमें से 4.44 करोड़ केस ट्रॉयल कोर्ट में हैं। इसी तरह जिला अदालतों में जजों के 25,042 पदों में से 5,850 पद खाली हैं। तीनों बिल को जांच के लिए संसदीय कमेटी के पास भेजा जाएगा। इसके बाद लोकसभा और राज्यसभा में पास किए जाएंगे।
राजद्रोह नहीं, अब देशद्रोह: ब्रिटिशकाल के शब्द राजद्रोह को हटाकर देशद्रोह शब्द आएगा। प्रावधान और कड़े। अब धारा 150 के तहत राष्ट्र के खिलाफ कोई भी कृत्य, चाहे बोला हो या लिखा हो, या संकेत या तस्वीर या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किया हो… तो 7 साल से उम्रकैद तक सजा संभव होगी। देश की एकता एवं संप्रभुता को खतरा पहुंचाना अपराध होगा। आतंकवाद शब्द भी परिभाषित। अभी आईपीसी की धारा 124ए में राजद्रोह में 3 साल से उम्रकैद तक होती है।
सामुदायिक सजा: पहली बार छोटे-मोटे अपराधों (नशे में हंगामा, 5 हजार से कम की चोरी) के लिए 24 घंटे की सजा या एक हजार रु. जुर्माना या सामुदायिक सेवा करने की सजा हो सकती है। अभी ऐसे अपराधों पर जेल भेजा जाता है। अमेरिका-यूके में ऐसा कानून है।
मॉब लिन्चिंग : मौत की सजा का प्रावधान। 5 या अधिक लोग जाति, नस्ल या भाषा आधार पर हत्या करते हैं तो न्यूनतम 7 साल या फांसी की सजा होगी। अभी स्पष्ट कानून नहीं है। धारा 302, 147-148 में कार्रवाई होती है।
180 दिन में चार्जशीट, ट्रॉयल के बाद 30 दिन में फैसला
पुलिस को 90 दिन में आरोप-पत्र दाखिल करना होगा। कोर्ट इसे 90 दिन बढ़ा सकेगा, लेकिन अधिकतम 180 दिन में जांच पूरी कर ट्रॉयल के लिए भेजनी होगी। ट्रॉयल के बाद कोर्ट को 30 दिन में फैसला देना होगा। फैसला एक सप्ताह के भीतर आॅनलाइन अपलोड करना होगा। 3 साल से कम सजा वाले मामलों में संक्षिप्त सुनवाई पर्याप्त होगी। इससे सेशन कोर्ट में 40% मुकदमे कम हो जाएंगे। सजा की दर 90% तक ले जाने का लक्ष्य है।
सजा माफी का सियासी इस्तेमाल सीमित: सरकार सजा में छूट का सियासी इस्तेमाल ना कर सके, इसके लिए नया प्रावधान किया है। मौत की सजा सिर्फ आजीवन कारावास और आजीवन कारावास को 7 साल तक सजा में बदला जा सकेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि सियासी प्रभाव वाले लोग कानून से बच न सकें। सरकार पीड़ित को सुने बिना 7 साल कैद या अधिक सजा वाले केस वापस नहीं ले सकेगी।

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Parliament: मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिरा, अधीर रंजन लोकसभा से निलंबित; PM ने विपक्ष को लताड़ा

नई दिल्ली, एजेंसी। मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों का लाया अविश्वास प्रस्ताव गुरुवार यानि 10 अगस्त को गिर गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंत में अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब दिया। मोदी ने 2 घंटे 12 मिनट का भाषण दिया, जिसमें वे मणिपुर पर 1 घंटे 32 मिनट बाद बोले। बड़ी बात ये कि जब प्रधानमंत्री ने मणिपुर पर बात शुरू की, उसके पहले ही विपक्ष सदन से वॉकआउट कर चुका था। पीएम ने ये भी कहा- यूपीए को लगता है कि देश के नाम का इस्तेमाल कर विश्वसनीयता बढ़ाई जा सकती है। ये इंडिया गठबंधन नहीं है। ये घमंडिया गठबंधन है। इसकी बरात में हर कोई दूल्हा बनना चाहता है। सबको प्रधानमंत्री बनना है। मैं भगवान का आशीर्वाद मानता हूं कि उन्होंने विपक्ष को सुझाया और वे इसका प्रस्ताव लेकर आए। 2018 में भी वे अविश्वास प्रस्ताव लाए थे। तब मैंने कहा था कि यह हमारी सरकार के लिए फ्लोर टेस्ट नहीं है। उन्हीं का फ्लोर टेस्ट है। हुआ भी वही। जब मतदान हुआ तो विपक्ष के पास जितने वोट थे, उतने भी जमा नहीं कर पाए थे।

एक तरह से विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव हमारे लिए शुभ होता है। एनडीए और बीजेपी 2024 के चुनाव में पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़कर जनता के आशीर्वाद से वापस आएगी। आप जुटे तो अविश्वास प्रस्ताव पर जुटे। कट्टर भ्रष्ट साथी की सलाह पर मजबूर होकर जुटे। इस अविश्वास प्रस्ताव पर भी आपने कैसी चर्चा की। सोशल मीडिया पर आपके दरबारी भी बहुत दु:खी हैं। मजा इस डिबेट का… फील्डिंग विपक्ष ने आॅर्गनाइज की, लेकिन चौके-छक्के यहीं से लगे। विपक्ष नो-कॉन्फिडेंस पर नो बॉल कर रहा है और इधर से सेंचुरी हो रही है। आप तैयारी करके क्यों नहीं आते जी! हमने युवाओं को घोटालों से रहित सरकार दी है। दुनिया में भारत की बिगड़ी हुई साख को संभाला है। अभी भी कुछ लोग कोशिश में हैं कि साख को दाग लग गए। विश्व का विश्वास भारत में बढ़ता चला जा रहा है। इस दौरान हमारे विपक्ष ने क्या किया? इन्होंने अविश्वास प्रस्ताव की आड़ में जनता के आत्मविश्वास को तोड़ने की विफल कोशिश की है। अविश्वास और घमंड इनकी रगों में रच-बस गया है। वे जनता के विश्वास को कभी देख नहीं पाते। ये जो शुतुरमुर्ग एप्रोच है, इसके लिए देश क्या कर सकता है?

मणिपुर समस्या के पीछे सिर्फ कांग्रेस की राजनीति
मेरे मंत्रिपरिषद् के मंत्री वहां 400 बार गए, मैं खुद 50 बार गया। ये साधना है, वहां के प्रति समर्पण है। मैं पिछले 9 साल के प्रयासों से कहता हूं कि हमारे लिए नॉर्थ-ईस्ट हमारे जिगर का टुकड़ा है। नॉर्थ-ईस्ट की समस्याओं की एकमात्र जननी कांग्रेस है। वहां के लोग नहीं, कांग्रेस की राजनीति जिम्मेदार है।

अधीर रंजन के सस्पेंशन पर
सोनिया ने बैठक बुलाई
अधीर रंजन के सस्पेंशन पर सोनिया ने 10:30 बजे बैठक बुलाई। कांग्रेस नेता ने राजा अंधा वाला बयान दिया था। संसद के मानसून सत्र का आज आखिरी दिन है। 10 अगस्त को चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने एक विवादित बयान दिया। अधीर ने कहा- जहां राजा अंधा, वहां द्रौपदी का चीरहरण होता है। उनके इस बयान के बाद संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने चौधरी को सस्पेंड करने का प्रस्ताव दिया, जिसे स्पीकर ने स्वीकार कर लिया। अधीर के सस्पेंशन को लेकर सीपीपी (कांग्रेस पार्लियामेंट्री पार्टी) अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज सुबह 10.30 बजे कांग्रेस के लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई है। यह मीटिंग संसद स्थित सीपीपी कार्यालय में रखी गई। लोकसभा में गुरुवार (10 अगस्त) को कांग्रेस नेता अधीर रंजन ने मणिपुर हिंसा पर कहा- जहां राजा अंधा बैठा रहता है, वहां द्रौपदी का चीरहरण होता है… चाहे हस्तिनापुर में हो या फिर मणिपुर में हो, हस्तिनापुर और मणिपुर में कोई फर्क नहीं है। कांग्रेस नेता की इस टिप्पणी पर अमित शाह ने आपत्ति जताई। उन्होंने स्पीकर से कहा- पीएम के लिए ऐसे बयान देना गलत है। इन्हें कंट्रोल किया जाए। पीएम पर की गई इस टिप्पणी की वजह से अधीर रंजन चौधरी को लोकसभा से सस्पेंड कर दिया गया है। वे सदन से तब तक निलंबित रहेंगे, जब तक विशेषाधिकार समिति उनके खिलाफ अपनी रिपोर्ट पेश नहीं कर देती।

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मिस यूनिवर्स इंडोनेशिया सेक्स स्कैंडल, पुलिस को सबूत मिले

नई दिल्ली, एजेंसी
मिस यूनिवर्स इंडोनेशिया कॉम्पिटिशन में शिरकत के लिए विनर चुनते वक्त आॅर्गनाइजर्स पर 6 लड़कियों को टॉपलेस करने का आरोप लगा है। विक्टिम्स ने एकजुट होकर पुलिस और फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के पास इसकी शिकायत दर्ज कराई है।
पुलिस ने भी माना है कि उसे इस घटना से जुड़े कुछ सबूत मिल चुके हैं और जांच तेजी से की जा रही है। यह ब्यूटी पेजेंट राजधानी जकार्ता में 29 जुलाई से 3 अगस्त के बीच कराया गया था। इसमें हिस्सा लेने वाली 6 लड़कियों का आरोप है कि उन्हें एक अलग कमरे में ले जाया गया और वहां 20 लोगों के सामने टॉपलेस होने को कहा गया। उनके फोटो लिए गए और वीडियो बनाए गए। यह मामला सामने आने के बाद इंडोनेशिया की सियासत में भी बवाल होना तय माना जा रहा है। इंडोनेशिया की आबादी करीब 28 करोड़ है। यह दुनिया की चौथी सबसे बड़ी आबादी वाला मुल्क है। इंडोनेशिया में ही दुनिया के सबसे ज्यादा मुसलमान रहते हैं। इंडोनेशियाई मीडिया के मुताबिक मिस यूनिवर्स इंडोनेशिया ब्यूटी कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने वाली 6 लड़कियों का आरोप है कि आॅर्गनाइजर्स ने फिजिकल एग्जामिनेशन को बहाना बनाया। उनसे कहा गया कि टॉपलेस होकर ब्यूटी चेक करवाना होगा। इसके लिए उन्हें एक अलग कमरे में ले जाया गया। यहां 20 लोग मौजूद थे। इनमें से ज्यादातर पुरुष थे। पांच लड़कियों को एक ही बार में टॉपलेस होने को कहा गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन पांचों लड़कियों को टॉपलेस होना पड़ा और आॅर्गनाइजर्स ने बाद में इनके फोटोग्राफ भी लिए। महिला ने इसकी पुष्टि भी की है। अब यह फोटोग्राफ कुछ मीडिया हाउस के हाथ लग चुके हैं और इन्हें फेस ब्लर करने के बाद जारी भी किया गया है।
आॅर्गनाइजर्स ने चुप्पी साधी
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने मंगलवार को यह मामला सामने आने के बाद इस इवेंट के आॅर्गनाइजर्स का जवाब जानना चाहा। हालांकि उनकी तरफ से किसी सवाल का जवाब नहीं दिया गया। इस इवेंट को इंडोनेशियाई कंपनी पीटी केपेला कर्या ने आॅर्गनाइज किया था। इसके फाउंडर का नाम पॉपी केपेला है। पॉपी तो चुप रहे ही, उनकी कंपनी के स्पोक्सपर्सन ने भी चुप्पी साध ली।

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