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मदुरै में ट्रेन हादसा: ‘जो भाग पाए वो ही बच पाए’, सुरक्षित बचे यूपी के यात्रियों ने बताया कैसे बची जान?

Madurai Train Fire incident: तमिलनाडु के मदुरै रेलवे स्टेशन पर एक ट्रेन के प्राइवेट कोच में आग लगने की घटना में यात्रियों की मौत का आंकड़ा 9 हो गया है। जबकि घायलों की संख्या 50 हैं। हादसा शनिवार सुबह 5.15 बजे हुआ। जिस कोच में आग लगी है वो यूपी के 63 लोगों का प्राइवेट कोच था, जो यार्ड में खड़ा था।

आग से झुलसे लोगों को गवर्नमेंट राजाजी कॉलेज मदुरै में भर्ती करवाया गया है, जहां कुछ लोगों से जब घटना के बारे में बात की तो उन्होंने डरा देने वाली आपबीती बताई। घायलों के मुताबिक कोच के गेट बंद थे, जिससे अंदर अफरा-तफरी मच गई।

हादसे पर तमिलनाडु के मंत्री मा. सुब्रमण्यम ने कहा कि इस घटना में 9 लोगों की मृत्यु हुई है, जिनमें से चार लोगों की पहचान हो गई है। घायलों का इलाज चल रहा है। पोस्टमॉर्टम के बाद शवों को उनके गृहनगर भेजा जाएगा। हम उत्तर प्रदेश सरकार से बात कर रहे हैं।

सुबह सवा रात बजे बुझी आग दक्षिणी रेलवे अधिकारियों के मुताबिक हादसा पुनालुर-मदुरै एक्सप्रेस में आज सुबह 5:15 बजे मदुरै यार्ड में निजी/व्यक्तिगत कोच में आग लगी। हादसे के बाद करीब 5 बजकर 45 मिनट पर फायर टीम पहुंची और उसने 7 बजकर 15 मिनट पर आग पर काबू पाया।

ऐसे में अस्पताल में घायल लोगों से जब हादसे के बारे में बताया वो काफी खौफनाक था। घायल अशोक ने कहा कि हम सो रहे थे और जैसे आग लगी तो हम उठे और भागे, तो चारों तरफ से खिड़कियां और दरवाजे बंद थे। चाबी भी नहीं मिल रही थी, एक दरवाजा खुला, जिससे जो लोग निकल पाए वो निकल पाए।”

वहीं एक और घायल महिला ने रेखा ने बताया कि “मैं बीच वाली सीट पर लेटी था और आग लगने की आवाज सुनी… हम सभी तुरंत भागे और गेट के पास पहुंचे, लेकिन वह बंद था। फिर हमने किसी तरह उसे खोला। जो पीछे थे वे भागे और जो बीच में बैठे थे वो फंस गए।’

सीतापुर से रामेश्वरम का टूर इस हादसे की वजह रेलवे कोच के अंदर सिलेंडर का इस्तेमाल करना था। बताया जा रहा है कि कोच के अंदर कॉफी बनाते समय सिलेंडर ने आग पकड़ी, जो देखते ही देखते पूरे कोच में फैल गई। इस कोच में सवार सभी 63 लोग यूपी के रहने वाले थे। इस कोच का टूर सीतापुर से रामेश्वरम के लिए टूर गया था। प्राइवेट कोच 17 अगस्त को लखनऊ से चला था, जिसे वापस 30 अगस्त को लौटना था।

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इंटरनेशनल डॉग डे : कभी कुत्ते भी भेड़िए थे, सफर इंसानों का पालतू बनने का…

नई दिल्ली, एजेंसी
इंसानों का सबसे वफादार जानवर ‘भेड़िया’ है। आपको ये बेतुका लगेगा, लेकिन आंशिक रूप से सच है। दरअसल, आपके आसपास मौजूद कुत्ते पहले कभी भेड़िए थे। करीब 20 हजार साल पहले ये इंसानों के सबसे बड़े दुश्मन माने जाते थे। फिर ऐसा क्या हुआ कि हमारे सबसे बड़े दोस्त और वफादार बन गए।
करीब 30 हजार से 10 हजार साल पुरानी बात है। आइस एज यानी बर्फ से ढंकी धरती का आखिरी दौर चल रहा था। इंसानों की आबादी धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी। साथ ही पेड़-पौधे और तमाम जानवर सतह पर आने लगे थे। वैज्ञानिकों ने इस समय को नाम दिया है प्लेस्टोसीन। प्लेस्टोसीन के दौर में प्राचीन भेड़िए भी फले-फूले। इन भेड़ियों को खाने के लिए मांस की तलाश रहती थी, लेकिन धरती अब भी ठंडी थी तो शिकार के लिए छोटे जानवरों को ढूंढ़ना मुश्किल होता था। वैज्ञानिकों का दावा है कि इसी में से कुछ भेड़िए जो कम डरपोक थे, इंसानों की बस्ती के पास जाने लगे। वहां इंसानों के इस्तेमाल के बाद बची हुई हड्डियां और मांस इन भेड़ियों को आसानी से मिल जाता। यहीं से इंसानों से इनका शुरुआती संपर्क हुआ।
सराह मार्शल, पेसकिनी और जुलिअन कमिन्स्की के रिसर्च पेपर ‘द सोशल डॉग एंड इवोल्यूशन’ के मुताबिक जब इंसान होमो सेपियन्स बने तो एक जगह रहने लगे। झुंड में घूमते और एक जगह पर ही खाते-पीते थे। दूसरी तरफ भेड़िए काफी फुर्तीले थे। उनकी सुनने और सूंघने की क्षमता बाकी जानवरों से कहीं बेहतर थी। कई बार ऐसा भी होता कि इंसानों और भेड़ियों के बीच शिकार को लेकर मुठभेड़ हो जाती। इस दौरान इंसान और भेड़िए एक-दूसरे के जानी दुश्मन बन गए। रिसर्च के मुताबिक भेड़ियों के शरीर में स्ट्रेस हार्मोन ज्यादा होते हैं। यह स्ट्रेस हार्मोन ही उन्हें चिड़चिड़ा बनाता था और इंसानी बस्तियों में जाने से रोकता था, लेकिन कुछ भेड़ियों में यह स्ट्रेस हार्मोन नैचुरली कम था।
स्ट्रेस हार्मोन कम होने की वजह से ऐसे भेड़िए इंसान के करीब जाने की कोशिश करने लगे। इंसानों ने भी इन्हें अपना खाने में बची हुई हड्डियां डालनी शुरू कर दीं। यहीं से इंसान और शांत भेड़ियों की दोस्ती शुरू हो गई। आने वाले कुछ सालों में इंसानों ने इन भेड़ियों के साथ कई प्रयोग किए। इसमें उनके प्रजनन से लेकर उनके बर्ताव में बदलाव लाने की कोशिश करना शामिल था। यही दौर था जहां से भेड़ियों का कुत्तों के रूप में बदलाव शुरू हुआ। उनके डीएनए में स्ट्रेस हार्मोन्स गिरने लगा। इसके बाद उन भेड़ियों का डीएनए इवोल्यूशन की स्टेज में आ गया। इससे उनके दांतों का नुकीलापन कम होने लगा। जबड़े और दूसरी हड्डियों में फर्क दिखने लगा। इंसानों के साथ रहते-रहते उनका स्वभाव इंसानों के लिए दोस्ताना होने लगा। एशिया में कुत्तों की प्रजाति ‘ग्रे वुल्फ’ से निकली है, जबकि अफ्रीका में ‘सियार’ की प्रजाति से कुत्ते बने हैं।
पहला कुत्ता कहां मिला
इस पर अब भी विवाद
इंसान ने सबसे पहले भेड़िए को पालतू कहां बनाया? इस पर कोई एक राय नहीं है। नेचर्स कम्युनिकेशन रिसर्च पेपर का दावा है कि कुत्तों या उस समय के नॉन-एग्रेसिव भेड़ियों को साउथ चीन से मंगोल और यूरोप के कई देशों में लगभग एक ही समय पर पालतू बनाया गया था। चीन में 16 हजार साल पहले और भारत में करीब 12 से 14 हजार साल पहले भेड़िए पाले जाने लगे थे। वहीं अमेरिका में करीब 10 हजार साल पहले इन्हें पालना शुरू किया गया था।

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शिमला का शिव मंदिर भारी तबाही के बीच में केदारनाथ जैसा स्थिर

शिमला, एजेंसी। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में इस बार बारिश ने जमकर तबाही मचाई है। शिमला के समरहिल में स्थित शिव मंदिर में भी इस बारिश का प्रकोप देखने को मिला था, लेकिन शिव मंदिर की ताजा तस्वीरों ने केदारनाथ की याद दिला दी है। दस साल पहले केदारनाथ मंदिर में एक चमत्कार देखने को मिला था। अब हिमाचल में सैलाब से मचे हाहाकार के बीच एक बार फिर चमत्कार हुआ है। समरहिल में हुए लैंडस्लाइड से शिव मंदिर में भारी तबाही हुई है। इस तबाही में 20 लोगों की मौत हो गई। मगर मंदिर में मौजूद भगवान शिव की मूर्ति बिल्कुल सुरक्षित है। उसे एक खरोंच तक भी नहीं आई है। दस साल पहले जब मंदाकिनी ने रौद्र रूप धारण किया था, तब केदारनाथ मंदिर और नदी की धारा के बीच एक शिला आ गई थी और मंदिर सुरक्षित रहा था। अब समरहिल में तबाही के बीच शिव मंदिर में भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मूर्ति सही सलामत देखने को मिली है।

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प्रधानमंत्री मोदी को ग्रीस का दूसरा सबसे बड़ा सम्मान

नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री मोदी एक दिन के ग्रीस दौरे के बाद शुक्रवार रात (25 अगस्त) भारत के लिए रवाना हो गए। उन्होंने शुक्रवार रात राजधानी एथेंस में भारतीयों को संबोधित किया। चंद्रयान-3 की कामयाबी पर कहा- जब जश्न का माहौल होता है तो मन करता है कि जल्द से जल्द परिवार के बीच पहुंच जाएं। मैं भी अपने परिवार के लोगों के बीच पहुंच गया। पीएम ने कहा- सावन के महीने में भारत ने एक अहम कामयाबी हासिल की है। हम चंद्रमा के साउथ पोल पर पहुंचने वाले पहले देश बन गए हैं। भारत को दुनिया से बधाई संदेश मिल रहे हैं। ग्रीस सरकार ने मुझे दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान दिया है। इस सम्मान के हकदार आप और 140 करोड़ भारतीय हैं।

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Tamil Nadu: कॉफी बनाने के दौरान सिलेंडर में विस्फोट, पर्यटक ट्रेन के कोच में लगी आग; 10 की मौत, 20 अन्य घायल

बताया गया कि यह एक प्राइवेट पार्टी कोच था। इसे 25 अगस्त को नागरकोविल जंक्शन पर ट्रेन संख्या 16730 (पुनालुर-मदुरै एक्सप्रेस) में जोड़ा गया था। इस डिब्बे में यात्री अवैध रूप से गैस सिलेंडर लेकर आए थे। इसी वजह से आग लगी।

तमिलनाडु के मदुरै रेलवे स्टेशन पर एक ट्रेन के डिब्बे में शनिवार तड़के आग लग गई। हादसे में कम से कम 10 यात्रियों की मौत हो गई। इस दौरान 20 अन्य यात्री घायल बताए जा रहे हैं। दक्षिणी रेलवे ने अवैध रूप से ले जाए गए गैस सिलेंडर को हादसे की वजह बताया है। इस बीच मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा भी की गई है।

जानकारी के मुताबिक, जिस डिब्बे में आग लगी, वह एक प्राइवेट पार्टी कोच यानी किसी व्यक्ति द्वारा बुक किया गया पूरा डिब्बा था। उसमें सवार यात्री उत्तर प्रदेश के लखनऊ से मदुरै पहुंचे थे। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आग बुझाने की कोशिशों में जुटे रेल कर्मियों के अलावा पुलिस, दमकल और बचाव कर्मियों ने डिब्बे से शवों को बाहर निकाला।

रामेश्वरम जा रही थी ट्रेन
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ट्रेन रामेश्वरम जा रही थी। इसका नाम पुनालुर मदुरै एक्सप्रेस बताया जा रहा है। आग की चपेट में आने वाले कोच में ज्यादातर यात्री लखनऊ से सवार हुए थे। जान गंवाने वालों में ज्यादातर लोग उत्तर प्रदेश के ही हैं। आग लगने की घटना की सूचना सुबह करीब 5.15 बजे मिली। उस वक्त ट्रेन मदुरै यार्ड जंक्शन पर रुकी थी। सुबह सात बजकर 15 मिनट पर लपटों पर काबू पा लिया गया। अन्य डिब्बों को कोई नुकसान नहीं हुआ है। 

हादसे की वजह अवैध रूप से लाया गया गैस सिलेंडर
बताया गया कि यह एक प्राइवेट पार्टी कोच था। इसे 25 अगस्त को नागरकोविल जंक्शन पर ट्रेन संख्या 16730 (पुनालुर-मदुरै एक्सप्रेस) में जोड़ा गया था। डिब्बे को अलग कर मदुरै रेलवे स्टेशन पर खड़ा किया गया था। इस डिब्बे में यात्री अवैध रूप से गैस सिलेंडर लेकर आए थे। इसी वजह से आग लगी। आग लगने की भनक मिलने पर कई यात्री कोच से बाहर निकल गए। कुछ यात्री प्लेटफार्म पर ही उतर गए थे।
क्या कहता है नियम? 
नियम के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति आईआरसीटीसी के पोर्टल का उपयोग करके प्राइवेट पार्टी कोच बुक कर सकता है, लेकिन उसे डिब्बे में गैस सिलेंडर या कोई ज्वलनशील पदार्थ ले जाने की अनुमति नहीं होती है। कोच का इस्तेमाल केवल यात्रा उद्देश्य के लिए किया जा सकता है।

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