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प्रधानमंत्री मोदी को ग्रीस का दूसरा सबसे बड़ा सम्मान

नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री मोदी एक दिन के ग्रीस दौरे के बाद शुक्रवार रात (25 अगस्त) भारत के लिए रवाना हो गए। उन्होंने शुक्रवार रात राजधानी एथेंस में भारतीयों को संबोधित किया। चंद्रयान-3 की कामयाबी पर कहा- जब जश्न का माहौल होता है तो मन करता है कि जल्द से जल्द परिवार के बीच पहुंच जाएं। मैं भी अपने परिवार के लोगों के बीच पहुंच गया। पीएम ने कहा- सावन के महीने में भारत ने एक अहम कामयाबी हासिल की है। हम चंद्रमा के साउथ पोल पर पहुंचने वाले पहले देश बन गए हैं। भारत को दुनिया से बधाई संदेश मिल रहे हैं। ग्रीस सरकार ने मुझे दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान दिया है। इस सम्मान के हकदार आप और 140 करोड़ भारतीय हैं।

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Tamil Nadu: कॉफी बनाने के दौरान सिलेंडर में विस्फोट, पर्यटक ट्रेन के कोच में लगी आग; 10 की मौत, 20 अन्य घायल

बताया गया कि यह एक प्राइवेट पार्टी कोच था। इसे 25 अगस्त को नागरकोविल जंक्शन पर ट्रेन संख्या 16730 (पुनालुर-मदुरै एक्सप्रेस) में जोड़ा गया था। इस डिब्बे में यात्री अवैध रूप से गैस सिलेंडर लेकर आए थे। इसी वजह से आग लगी।

तमिलनाडु के मदुरै रेलवे स्टेशन पर एक ट्रेन के डिब्बे में शनिवार तड़के आग लग गई। हादसे में कम से कम 10 यात्रियों की मौत हो गई। इस दौरान 20 अन्य यात्री घायल बताए जा रहे हैं। दक्षिणी रेलवे ने अवैध रूप से ले जाए गए गैस सिलेंडर को हादसे की वजह बताया है। इस बीच मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा भी की गई है।

जानकारी के मुताबिक, जिस डिब्बे में आग लगी, वह एक प्राइवेट पार्टी कोच यानी किसी व्यक्ति द्वारा बुक किया गया पूरा डिब्बा था। उसमें सवार यात्री उत्तर प्रदेश के लखनऊ से मदुरै पहुंचे थे। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आग बुझाने की कोशिशों में जुटे रेल कर्मियों के अलावा पुलिस, दमकल और बचाव कर्मियों ने डिब्बे से शवों को बाहर निकाला।

रामेश्वरम जा रही थी ट्रेन
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ट्रेन रामेश्वरम जा रही थी। इसका नाम पुनालुर मदुरै एक्सप्रेस बताया जा रहा है। आग की चपेट में आने वाले कोच में ज्यादातर यात्री लखनऊ से सवार हुए थे। जान गंवाने वालों में ज्यादातर लोग उत्तर प्रदेश के ही हैं। आग लगने की घटना की सूचना सुबह करीब 5.15 बजे मिली। उस वक्त ट्रेन मदुरै यार्ड जंक्शन पर रुकी थी। सुबह सात बजकर 15 मिनट पर लपटों पर काबू पा लिया गया। अन्य डिब्बों को कोई नुकसान नहीं हुआ है। 

हादसे की वजह अवैध रूप से लाया गया गैस सिलेंडर
बताया गया कि यह एक प्राइवेट पार्टी कोच था। इसे 25 अगस्त को नागरकोविल जंक्शन पर ट्रेन संख्या 16730 (पुनालुर-मदुरै एक्सप्रेस) में जोड़ा गया था। डिब्बे को अलग कर मदुरै रेलवे स्टेशन पर खड़ा किया गया था। इस डिब्बे में यात्री अवैध रूप से गैस सिलेंडर लेकर आए थे। इसी वजह से आग लगी। आग लगने की भनक मिलने पर कई यात्री कोच से बाहर निकल गए। कुछ यात्री प्लेटफार्म पर ही उतर गए थे।
क्या कहता है नियम? 
नियम के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति आईआरसीटीसी के पोर्टल का उपयोग करके प्राइवेट पार्टी कोच बुक कर सकता है, लेकिन उसे डिब्बे में गैस सिलेंडर या कोई ज्वलनशील पदार्थ ले जाने की अनुमति नहीं होती है। कोच का इस्तेमाल केवल यात्रा उद्देश्य के लिए किया जा सकता है।

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IIT बॉम्बे को अजनबी ने दान दिए 160 करोड़

आईआईटी-बॉम्बे को परिसर में एक हरित ऊर्जा और स्थिरता अनुसंधान केंद्र स्थापित करने के लिए एक पूर्व छात्र से 160 करोड़ रुपए का एक गुप्त दान प्राप्त हुआ है। इस मौके पर आईआईटी बॉम्बे के निदेशक सुभाशीष चौधरी ने मंदिरों का जिक्र किया जहां लोग दानपात्र में दान देते हैं।
उन्होंने कहा कि यह सबसे दुर्लभ अवसरों में से एक है जब हमें एक अनाम दान प्राप्त हुआ है। हालांकि यह अमेरिका में आम है। मुझे नहीं लगता कि हाल के दिनों में भारत में किसी भी विश्वविद्यालय को इतना बड़ा निजी उपहार मिला है, जहां दाता बिना चेहरे के रहना चाहता है। एक दशक से अधिक समय पहले, जब इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी ने आईआईटी-बी को किस्तों में 85 करोड़ रुपये उपहार में दिए थे, तो यह भी गुमनाम था। अपने अल्मा मेटर में उनका योगदान बाद में सार्वजनिक हो गया। जून 2023 में उन्होंने 315 करोड़ रुपये का दान दिया, जिससे आईआईटी-बी को उनका कुल उपहार 400 करोड़ रुपये हो गया। यह आज तक भारत में किसी संस्थान द्वारा प्राप्त सबसे बड़ा व्यक्तिगत दान है। यह दान ऐसे समय में आया है जब संस्थान बजट में कटौती से प्रभावित है और विस्तार के लिए उच्च शिक्षा वित्तीय एजेंसी से ऋण ले रहा है। दान की गई धनराशि परिसर में एक हरित ऊर्जा और स्थिरता अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की दिशा में जाएगी। इसका एक हिस्सा नए बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इस राशि का बड़ा हिस्सा अनुसंधान के लिए अलग रखा जाएगा।

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चांद के दक्षिणी ध्रुव पर प्रदक्षिणा, भारत की दुनिया को गुरु दक्षिणा

स्वाधीनता दिवस के एक सप्ताह बाद भारत ने चांद पर तिरंगा लहराने का गौरव हासिल कर लिया है। भारत दुनिया का पहला देश बन गया है, जो चांद की दक्षिणी सतह पर अपना चंद्रयान उतारने में सफल हुआ है। रूस का मिशन ‘लूना’ कुछ दिन पहले ही क्रेश हो गया है। अब पूरी दुनिया टकटकी लगाए भारत के मिशन चंद्रयान को देख रही थी।
भारतीय वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में जो इतिहास रचा है, वह भारत के गौरव गान को चार चांद लगाएगा। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर मिशन चंद्रयान के विक्रम लैंडर से निकलकर प्रज्ञान रोवर की प्रदक्षिणा शुरू हो गई है। मिशन चंद्रयान के नतीजे दुनिया को भारत की गुरु दक्षिणा के रूप में अंतरिक्ष विज्ञान को नए चांद और सूरज उगाने का अवसर उपलब्ध कराएगी। अमेरिका, चीन, जापान, रूस और दूसरा कोई भी देश चांद के साउथ पोल पर अभी तक अपना यान नहीं उतार सका है।
चंद्रयान-2 की असफलता के बाद भारतीय वैज्ञानिकों ने भारतीय ज्ञान और विज्ञान की विरासत को चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए कड़ी मेहनत और निष्ठा से आज चांद को भारत की धरती पर उतार दिया है।
भारतीय ज्ञान और विज्ञान की परंपराओं और सनातन ग्रंथों के चमत्कारिक निष्कर्षों के आधार पर दुनिया के वैज्ञानिक नई-नई खोजें करने में सफल हो रहे हैं। अब तो दुनिया के वैज्ञानिक तक मानने लगे हैं कि भारतीय धर्मग्रंथों में जो भी बात लिखी गई है, उसको कल्पना मात्र मानना बहुत बड़ी भूल होगी। भारतीय मनीषियों ने अपने ग्रंथों में जिन निष्कर्षों का उल्लेख किया है, उनके भले ही भारतीयों के पास अभी कोई वैज्ञानिक आधार नहीं हो, लेकिन ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं है, जिसका कोई वैज्ञानिक आधार ना हो।
गणित, शल्य चिकित्सा, वायु विज्ञान के बारे में भारतीय ग्रंथों में वर्णित तथ्यों पर की गई वैज्ञानिक खोजों ने दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव किया है। अब तो चांद पर बस्तियां बसाने की बात हो रही है। भारतीय ज्ञान ने चांद को चंदामामा के रूप में उद्घाटित कर उस पर जीवन की संभावनाओं और पृथ्वी और चंद्रमा के जैविक संबंधों का ही इशारा किया है।
भारत में आज मिशन चंद्रयान का पर्व घर-घर में मनाया जा रहा है। चंद्रयान की लैंडिंग से पहले देश के हर मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च में प्रार्थनाएं भारत की शक्ति के रूप में पूरी दुनिया ने देखीं। भारत को जातियों और समुदायों में बांटकर देखने वाले लोगों को त्योहार चंद्रयान अचंभित कर रहा होगा। हिंदुओं के चारों धाम बद्रीनाथ, रामेश्वरम, द्वारिका और जगन्नाथ पुरी में चंद्रयान की सफल लैंडिंग के लिए पूजा-अर्चना की गई।
देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंग और दुर्गा शक्तिपीठों पर भी पूजा-अर्चना की गई। मुस्लिमों की पवित्र मस्जिद, दरगाह और मजारों पर भी चंद्रयान की सफलता के लिए दुआएं मांगी गईं। गुरुद्वारे और चर्च में भी चंद्रयान की सफलता के लिए दुआओं के नजारे भारत की खुशी बढ़ा रहे थे। ऐसा लग रहा था कि भारत में होली, दीपावली, दशहरा, दुर्गा पूजा, ईद, वैशाखी और क्रिसमस एक साथ मनाया जा रहा है। हर भारतवासी राष्ट्रीय गौरव और स्वाभिमान से झूम रहा है। भारतीय वैज्ञानिकों की मेहनत और परिश्रम पर पूरा भारत नतमस्तक दिखाई पड़ रहा है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिण अफ्रीका से चंद्रयान की लैंडिंग के दृश्य देखने के लिए इसरो के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े हुए थे। नेशनल प्राइड के ऐतिहासिक पल को हर भारतीय नागरिक अपनी आंखों में बसाना चाहता था। एक भारत और श्रेष्ठ भारत मिशन चंद्रयान वाले भारत को ही कहा जाएगा।
भारत के चंद्रयान-2 को जब असफलता मिली थी, तब भी तत्कालीन सरकार की राजनीतिक रूप से आलोचना की गई थी। भारत के राष्ट्रीय गौरव का मिशन चंद्रयान-3 भी राजनीति से दूर नहीं रह सका। कुछ दलों के नेता किस तरह शर्मनाक बात आज भी करने का दुस्साहस कर सके कि इसरो के वैज्ञानिकों को वेतन नहीं मिला है।
जो इसरो चांद को धरती पर उतारने की क्षमता रखता है, जिसने दुनिया को अपने चंद्रयान की सफलता से अचंभित कर दिया है… उसके वैज्ञानिकों को इस तरह के शर्मनाक वक्तव्य से अपमानित करने वालों की बुद्धि पर तरस किया जा सकता है। भारत का नेशनल प्राइड आज अपने चरम पर अपनी प्रतिष्ठा लहरा रहा है तो भारत के मान-सम्मान को बदनाम करने की राजनीतिक कोशिशें भारत विरोधी मानसिकता ही कही जाएंगी।
हमारी वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिए निश्चित रूप से वैज्ञानिकों को पूरा श्रेय जाता है। वैज्ञानिक भी अपनी पूरी क्षमताओं का उपयोग तभी करने में सक्षम होते हैं, जब उन्हें सरकारों की ओर से पर्याप्त संसाधन और संरक्षण प्रदान किया जाता है। जब भी ऐसे राष्ट्रीय गर्व और गौरव की उपलब्धियां हासिल होती हैं तो वैज्ञानिकों के अलावा उस समय की सरकारों और प्रधानमंत्री को निश्चित रूप से श्रेय दिया जाता है। मिशन चंद्रयान की सफलता के लिए दुनिया के विकसित और दूसरे देशों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी जा रही बधाइयां इसी बात का प्रतीक हैं कि देश की इस उपलब्धि के प्रतीक के रूप में प्रधानमंत्री को ही दुनिया द्वारा देखा जाता है।इसरो की स्थापना और उसके वैज्ञानिक प्रयासों और उपलब्धियों का एक लंबा सिलसिला है। इसके लिए किसी एक राजनीतिक दल या किसी एक राजनीतिक नेता को ही जिम्मेदार नहीं कहा जा सकता। देश में काम करने वाली सभी सरकारों और उनके लीडर ने अंतरिक्ष विज्ञान के विकास के लिए अपनी जिम्मेदारियों को निश्चित रूप से निभाया है। हमें वृक्ष दिखाई पड़ता है, लेकिन उसका बीज और जड़ें दिखाई नहीं पड़ती हैं। इसरो की नींव डालने वाले और इस संस्थान की जड़ों को मजबूत करने वाले सभी वैज्ञानिकों और सभी सरकारों को राष्ट्रीय गौरव के मिशन चंद्रयान-3 की सफलता का श्रेय जाता है।सोने की चिड़िया भारत अपनी विरासत और गौरव को फिर से पुनर्जीवित और गौरवान्वित करने के लिए आगे चल पड़ा है। ‘हर हाथ और हर घर में तिरंगा’ सही मायनों में भारत भाग्य विधाता बन रहा है। भारत की गुरु दक्षिणा आने वाले समय में दुनिया को ऐसे-ऐसे रहस्य उद्घाटित करेगी, जिससे पृथ्वी और चांद की दूरी कम हो जाएगी। चांद अब साहित्य और शृंगार में केवल उपमा के लिए नहीं, बल्कि हकीकत के रूप में अपनी अनुपमा से मानव जीवन को आलोकित करेगा। भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि से भावुक हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों और देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि भारत की यह उड़ान बहुत आगे जाएगी। पूरे विश्व को संदेश देते हुए पीएम मोदी ने कहा- भारत के अमृतकाल में नए भारत पर अमृत वर्षा हुई है। भारत के इस स्मरणीय पल का गवाह बनने के लिए स्वयं को और देश के 140 करोड़ परिवारजन को बधाई और शुभकामनाएं दीं। नया विश्व नए भारत के आत्मविश्वास के सहयोग और साथ से कई उपलब्धियां हासिल करेगा।
(ये लेखक के अपने निजी विचार हैं)

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भारत ने कर लिया चांद अपनी मुट्ठी में…

23 अगस्त, 2023 की शाम 6 बजकर 4 मिनट के ऐतिहासिक क्षण पर चांद के साउथ पोल पर चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग के साथ भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर तापमान माइनस 230 डिग्री तक चला जाता है और वहां काम करना बहुत चुनौतीपूर्ण और मुश्किल भरा होता है, लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने इस चुनौती को स्वीकारा और तय किया कि वो इस अबूझ पहेली को हल करेंगे।
चांद पर 14 दिन तक दिन और 14 दिन तक रात रहती है। अगर चंद्रयान को ऐसे वक्त में चांद पर उतारा जाता, जब वहां रात हो तो वह काम नहीं कर पाता। इसरो ने सभी चीजों की गणना करने के बाद 23 अगस्त को दिन इस काम के लिए तय किया, क्योंकि आज से अगले 14 दिनों तक चांद के दक्षिणी ध्रुव सूरज की रोशनी उपलब्‍ध रहेगी, जिसकी मदद से चंद्रयान का रोवर चार्ज हो सकेगा और अपने मिशन को सफलता से अंजाम देगा।
देश की इस बड़ी सफलता पर इसरो के सभी विज्ञानिकों और कर्मचारियों का उत्साह देखते ही बनाता है। पिछली असफलता से सहमे हुए सभी लोग आशंकित थे। कोर टीम के सदस्य पिछली कई रातों से बगैर सोये अपना काम कर रहे थे। इस बार उन्होंने रत्तीभर गलती की गुंजाइश नहीं छोड़ी और इसरो के वैज्ञानिक इस अग्नि परीक्षा में कामयाब रहे।
भारत का यह अंतरिक्ष अभियान पूरी दुनियाभर की नजर में था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए जोहान्सबर्ग दक्षिण अफ्रीका में थे और वो वहीं से इन गौरव से भरपूर पलों के साक्षी बने। इसरो की सफलता पर उत्साह से प्रफुल्लित प्रधानमंत्री ने कहा- ऐसी ऐतिहासिक घटनाएं राष्ट्र जीवन की चेतना बन जाती हैं। यह पल अविस्मरणीय है। यह क्षण अभूतपूर्व है। यह क्षण विकसित भारत के शंखनाद का है। यह क्षण नए भारत के जयघोष का है। यह क्षण मुश्किलों के महासागर को पार करने का है। यह क्षण जीत के चंद्रपथ पर चलने का है। यह क्षण 140 करोड़ धड़कनों के सामर्थ्य का है। यह क्षण भारत की नई ऊर्जा, नई चेतना का है। यह क्षण भारत के उदीयमान भाग्य के आह्वान का है। अमृतकाल की प्रथम प्रभा में सफलता की अमृत वर्षा हुई है। हमने धरती पर संकल्प लिया और चांद पर उसे साकार किया।
उत्साह और उमंग से भरे प्रधानमंत्री बोले कि आज के बाद से चांद से जुड़े मिथक बदल जाएंगे, कथानक भी बदल जाएंगे और नई पीढ़ी के लिए कहावतें भी बदल जाएंगी। भारत में तो हम सभी लोग धरती को मां कहते हैं और चांद को मामा बुलाते हैं। कभी कहा जाता था कि चंदा मामा बहुत दूर के हैं, अब एक दिन वो भी आएगा, जब बच्चे कहा करेंगे कि चंदा मामा बस एक टूर के हैं।
सफलता की इस घड़ी में आज यह जानना जरूरी है कि इस 615 करोड़ रुपए वाले मिशन से आगे क्या होगा। असली चंद्रयान मिशन तो अब शुरू होगा। लैंडर के पेट से निकलकर रोवर प्रज्ञान चांद की धरती का जायजा लेगा। 1 सेंटीमीटर/सेकंड की रफ्तार से चांद की सतह पर चलाने वाला प्रज्ञान 6 पहियों वाला रोवर है, जो चंद्रमा पर तस्वीरें लेगा। इसमें इसरो का लोगो और तिरंगा बना हुआ है। जैसे-जैसे प्रज्ञान आगे बढ़ेगा, चांद की सतह पर तिरंगा और इसरो का लोगो बनता चला जाएगा। लैंडर विक्रम में चार और रोवर प्रज्ञान में जो दो पेलोड्स लगे हैं, जो सक्रिय हो चुके हैं और इनकी मदद से लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान तरह के अध्ययन और प्रयोग कर रहे हैं।
विक्रम का पहला पेलोड रंभा चांद की सतह पर सूरज से आने वाले प्लाज्मा कणों के घनत्व, मात्रा और बदलाव की जांच करेगा। दूसरा चासते चांद की सतह की गर्मी यानि तापमान की जांच करेगा। तीसरा इलसा लैंडिंग साइट के आसपास भूकंपीय गतिविधियों की जांच करेगा… और चौथा लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टर एरे चांद के डायनेमिक्स को समझने का प्रयास करेगा।
इसी तरह प्रज्ञान का पहला पेलोड लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप चांद की सतह पर मौजूद केमिकल्स यानि रसायनों की मात्रा और गुणवत्ता का अध्ययन करेगा, साथ ही खनिजों की खोज भी करेगा। दूसरा पेलोड अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर चांद के सतह पर उपलब्ध विभिन्न तत्वों, जैसे- मैग्नीशियम, अल्यूमिनियम, सिलिकन, पोटेशियम, केल्सियम, टिन और लोहा आदि की संरचना का अध्ययन करेगा। प्रज्ञान इन समस्त जानकारियों को जुटाकर लैंडर तक पहुंचाएगा… और लैंडर धरती पर इसरो को डाटा भेजेगा, जहां वैज्ञानिक इनका विश्लेषण कर महत्वपूर्ण प्रायोगिक निष्कर्ष निकालेंगे, जो इस अभियान के आगे का मार्ग प्रशस्त करेगा। स्वतंत्रता के अमृतकाल में मिली इस अभूतपूर्व सफलता के लिए समस्त देशवासियों को बधाई।
(ये लेखक के अपने निजी विचार हैं)

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