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2047 तक भ्रष्टाचार, जातिवाद, सांप्रदायिकता मुक्त होगा विकसित भारत : पीएम

भारत की अर्थव्‍यवस्‍था तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र होगा। भ्रष्टाचार, जातिवाद और सांप्रदायिकता की हमारे राष्ट्रीय जीवन में कोई जगह नहीं होगी। दुनिया का जीडीपी-केंद्रित दृष्टिकोण अब मानव-केंद्रित दृष्टिकोण में बदल रहा है। भारत इसमें उत्प्रेरक की भूमिका निभा रहा है। ‘सबका साथ, सबका विकास’ विश्व कल्याण के लिए भी एक मार्गदर्शक सिद्धांत हो सकता है।
एक दशक से भी कम समय में पांच पायदान की छलांग लगाने की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने न्‍यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्‍यू में कहा कि निकट भविष्य में भारत दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में होगा। आज भारतीयों के पास विकास की नींव रखने का एक बड़ा मौका है, जिसे अगले एक हजार वर्षों तक याद किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश में जी-20 की बैठकें आयोजित करने पर पाकिस्तान और चीन की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि (भारत के) हर भाग में बैठक आयोजित होना ‘स्वाभाविक’ है। पीएम मोदी ने कहा- जी-20 में हमारे शब्दों और दृष्टिकोण को विश्व ने केवल विचारों के रूप में ही नहीं, बल्कि भविष्य के एक रोडमैप के रूप में देखा है। बढ़ते साइबर अपराधों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा- साइबर अपराधों से लड़ने में वैश्विक सहयोग न केवल वांछनीय, बल्कि अपरिहार्य है। साइबर क्षेत्र ने अवैध वित्तीय गतिविधियों और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक नया आयाम पेश किया है। साइबर खतरों को बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए। साइबर आतंकवाद, आॅनलाइन कट्टरपंथ, धनशोधन इस खतरे की झलकभर हैं। आतंकवादी अपने नापाक मंसूबों को पूरा करने के लिए ‘डार्कनेट’, ‘मेटावर्स’ और ‘क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म’ का उपयोग कर रहे हैं। राष्ट्रों के सामाजिक ताने-बाने पर इसका असर पड़ सकता है। आपराधिक उद्देश्यों के लिए आईसीटी के उपयोग का मुकाबला करने के लिए एक समग्र अंतर्राष्ट्रीय संधि करने की जरूरत है।
गैर-जिम्मेदाराना वित्तीय नीतियों
की चुकानी पड़ेगी कीमत
पीएम मोदी ने कहा कि नौ साल की राजनीतिक स्थिरता के चलते कई सुधार हुए हैं और विकास इसका स्वाभाविक प्रतिफल है, साथ ही उन्‍होंने चेताया कि गैर-जिम्मेदाराना वित्तीय और लोकलुभावन नीतियों के अल्पकालिक राजनीतिक परिणाम मिल सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि में इसकी बड़ी सामाजिक और आर्थिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। गैर-जिम्मेदाराना वित्तीय नीतियों और लोकलुभावनवाद का सबसे अधिक असर सबसे गरीब वर्ग पर पड़ता है।

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Aditya L1: सूरज की ऊपरी परत कोरोना सबसे गर्म क्यों…इस रहस्य को सुलझाना आदित्य के लिए चुनौती, वैज्ञानिक अनजान

अगले चार महीने में भारत का आदित्य एल1 अपने निर्धारित बिंदु पर पहुंचने के बाद यह रहस्य सुलझाने में मदद कर सकता है। आदित्य से मिली जानकारियां व डाटा कोरोना के मुख्य सतह से कई गुना ज्यादा गर्म होने का अबूझ रहस्य सुलझाने में पूरे विश्व की मदद कर सकती हैं।

सूर्य के ऊपरी वातावरण को मुख्यत: तीन परतों फोटोस्फीयर, क्रोमोस्फीयर और कोरोना में बांटा गया है। इसके भीतर से आने वाली ऊर्जा इन तीनों परतों में ही प्रकाश व अन्य तत्वों में बदलती है, लेकिन सबसे बाहरी परत होने के बावजूद कोरोना का तापमान बाकी दो परतों से क्रमश : 500 व 200 गुना तक अधिक पाया गया है। इसकी वजह वैज्ञानिकों को नहीं पता है।\

अगले चार महीने में भारत का आदित्य एल1 अपने निर्धारित बिंदु पर पहुंचने के बाद यह रहस्य सुलझाने में मदद कर सकता है। आदित्य से मिली जानकारियां व डाटा कोरोना के मुख्य सतह से कई गुना ज्यादा गर्म होने का अबूझ रहस्य सुलझाने में पूरे विश्व की मदद कर सकती हैं।

फोटोस्फीयर
यहीं से निकला उजाला हम तक आठ मिनट में पहुंचता है : फोटोस्फीयर यानी… प्रकाश का गोला। सूर्य के वातावरण की यह पहली परत 500 किमी मोटी है। यहीं से सबसे ज्यादा ऊर्जा, हजारों किमी लंबी लपटें, एक्स-रे, यूवी रे, चुंबकीय विकिरण, रेडियो तरंगें बाहर आती हैं और यहीं से निकली किरणें हमारी पृथ्वी तक आठ मिनट में पहुंचती हैं। इसका तापमान 4,125 से 6,125 डिग्री सेल्सियस माना जाता है, जो सूर्य के केंद्र के मुकाबले कहीं कम है।

क्रोमोस्फीयर
सूर्य के ताप को बाहर निकालती परत: क्रोमोस्फीयर फोटोस्फीयर के ऊपर की परत होती है और तीन हजार किमी मोटी मानी जाती है। यह परत लाल दिखती है, जैसा हाइड्रोजन को जलाने पर होता है। वैज्ञानिक अनुमानों के अनुसार इसका तापमान सात हजार से 14 हजार डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है। इस परत में सौर तरंगें नजर आती हैं, जिन पर वैज्ञानिक निगरानी रखते हैं। यही तरंगें ऊपर की ओर बढ़कर कोरोना में जाती हैं।

कोरोना
जहां आवेशित गैसों की पताकाएं लहराती हैं: कोरोना सूर्य की तीसरी और सबसे ऊपरी परत है। इसे केवल ग्रहण के दौरान देखा जाता है। वैज्ञानिक इसकी मोटाई आठ से 10 हजार किमी तक मानते हैं। कोरोना का तापमान 10 लाख से 20 लाख डिग्री सेल्सियस तक माना गया है। इससे निकल रहीं आवेशित गैसों का तापमान जब जरा भी कम होने लगता है, तो वे कोरोना को छोड़ कर हमारे सौरमंडल की ओर बढ़ती हैं। इससे सौर-तूफान बनते हैं।

दुनियाभर के वैज्ञानिकों को परिणामों का इंतजार 
गैस का गोला कहे जाने वाले हमारे तारे के कोर यानी केंद्र में तापमान डेढ़ करोड़ डिग्री सेल्सियस माना गया है, लेकिन फोटोस्फीयर चार हजार से छह हजार डिग्री सेल्सियस ही गर्म है। यह रहस्य और गहराता है, जब वैज्ञानिक कोरोना का तापमान 20 लाख डिग्री बताते हैं। सूर्य के केंद्र और कोरोना में हजारों किमी का फासला है और बीच कम कम तापमान वाली परतें हैं, फिर भी कोरोना इतनी गर्म कैसे हो जाती है? क्या ऐसा सूर्य पर आने वाले तूफानों से होता है? या हर सेकंड होने वाले करोड़ों सूक्ष्म लपटों के विस्फोट से? यह सूक्ष्म लपटें सूर्य की सामान्य लपटों से अरबों गुना छोटी होती हैं, लेकिन ऐसी हर लपट एक करोड़ टन हाइड्रोजन बम जितनी ऊर्जा पैदा करती है। तापमान में बदलाव के इसी रहस्य को समझने में भारत का आदित्य एल1 मदद कर सकता है। कई प्रमुख देशों के वैज्ञानिक इससे मिलने वाले डाटा और जानकारियां का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

चंद्रयान-3 की सफलता को फिर मिली चीन से तारीफ
वहीं, भारत के चंद्रयान-3 की सफलता पर चीन से एक बार फिर सराहना के शब्द आए हैं। भारत के खिलाफ हमेशा जहर उगलने वाले ग्लोबल टाइम्स ने मिशन की सफलता के तुरंत बाद इस सफलता की तारीफ करते हुए इसरो को चीनी अंतरिक्ष एजेंसी के साथ मिलकर काम करने का सुझाव दिया था। दूसरी ओर अब ग्लोबल टाइम्स के पूर्व प्रधान संपादक और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव हू शी जिन ने लिखा है कि अंतरिक्ष में भारत की सफलता प्रभावशाली है। शी जिन ने एक्स पर इस बारे में पोस्ट लिखा और इसमें इसरो को टैग किया है।

दिलचस्प तथ्य यह है कि हू शी जिन भारत के कट्टर विरोधी रहे हैं। गलवां संघर्ष के दौरान उन्होंने भारत के खिलाफ कई लेख लिखे थे। उन्हें चीनी कप्युनिस्ट पार्टी का राजनीतिक प्रचारक माना जाता है। भारत ने दो महीने में अंतरिक्ष में शानदार कामयाबी हासिल की है। जिसकी पूरी दुनिया में तारीफ हो रही है। 

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BRICS: जयशंकर ने याद किया चंद्रयान-3 के लैंडिंग वाला पल, बताया- ‘हम दक्षिण अफ्रीका में थे, पर मानसिक रूप से..’

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि जब दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन हो रहा था, तब मैं वहां मौजूद था। उस दौरान भारत में चंद्रयान-3 चांद पर लैंड करने वाला था। उस दिन सभी के मन में चंद्रयान-3 का ही विचार था। 

विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर ने चंद्रयान-3 को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि जिस दिन चंद्रयान चांद पर लैंड करने वाला था, उस समय भला हम दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शारीरिक रूप से मौजूद थे। हालांकि, मानसिक रूप से हम बंगलूरू में थे। 

चंद्रयान-3 का ही विचार

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि कार्यक्रम शुरू होने से पहले मैं कुछ अनुभव साझा करना चाहता हूं। जब दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन हो रहा था, तब मैं वहां मौजूद था। उस दौरान भारत में चंद्रयान-3 चांद पर लैंड करने वाला था। उन्होंने कहा कि उस दिन प्रधानमंत्री मोदी यहां तक कि हमारे मन में चंद्रयान-3 का ही विचार था। उस शाम वहां सिर्फ एक ही विषय पर चर्चा हो रही थी। वह विषय था चंद्रयान-3 का चांद पर सफलतापूर्वक उतरना। 

गर्व महसूस हो रहा
उन्होंने कहा कि मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा था। मेरे लिए सबसे बड़ी संतुष्टि यह थी कि दक्षिण अफ्रीका में उपस्थित सभी नेताओं का मानना था कि भारत ने कर दिखाया। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से इसकी तारीफ की थी।  


भारत का महत्व बढ़ता जा रहा
उन्होंने कहा कि हमारी G20 की अध्यक्षता अलग क्यों है? क्योंकि कई देशों ने पहले भी G20 की अध्यक्षता की है, इसका पहला कारण दरअसल कुर्सी है। सच तो यह है कि भारत ने ऐसे समय में G20 की अध्यक्षता संभाली है जब दुनिया के लिए भारत का महत्व बढ़ता जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि यह दुनिया के लिए आंशिक रूप से हमारी आर्थिक उपलब्धियों के कारण अधिक मायने रखता है क्योंकि अब हम पांचवें नंबर की अर्थव्यवस्था बन गए हैं। चंद्रयान भी इसका एक उदाहरण है। 

विदेश मंत्री ने कहा कि आज हमें वैश्विक कार्यस्थल, वैश्विक प्रतिभा पूल के लिए आवश्यक माना जाता है। यह मायने रखता है क्योंकि हमने भी आज एक क्षमता का प्रदर्शन किया है। हमने अन्य देशों की मदद करने की क्षमता प्रदर्शित की है। इसलिए G20 की भारत की अध्यक्षता से अपेक्षाएं और जिम्मेदारियां बहुत असाधारण हैं।

उन्होंने कहा कि हमने इंटरनेशनल सोलर अलायंस के माध्यम से सौर ऊर्जा को लेकर दुनिया की सोच बदल दी है। आज हम इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स के माध्यम से दुनिया की खान-पान की आदतों को बदलने का प्रयास कर रहे हैं। हमने आपदा प्रतिक्रिया के गठबंधन के माध्यम से आपदाओं का जवाब देने का एक सामूहिक तरीका बनाया है। 

जयशंकर ने कहा कि यह एक जगह है, एक देश है, जिसे आज जिम्मेदार के रूप में देखा जाता है, जिसे नवोन्वेषी के रूप में देखा जाता है, जिसे वास्तव में वैश्विक प्रगति को आगे बढ़ाने वाले के रूप में देखा जाता है। इसलिए मुझे पूरा विश्वास है कि जब एक दिन आप सभी पीछे मुड़कर देखेंगे तो आप ऐसा करेंगे। सभी लोग 2023 को भारत के लिए एक बड़े वर्ष के रूप में याद करेंगे। एक ऐसे वर्ष के रूप में जब हमारी G20 की अध्यक्षता ने हमें दुनिया के मानचित्र पर एक अलग स्थान पर खड़ा किया।

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China: भारत में होने वाली जी-20 बैठक से किनारा कर सकते हैं शी जिनपिंग, रिपोर्ट में दावा…

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत में 9-10 सितंबर को होने वाली जी20 बैठक से किनारा कर सकते हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले यह दावा किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो भारतीय अधिकारियों, चीन में एक राजनयिक और जी-20 में शामिल एक और देश के सरकारी अधिकारी ने कहा कि शी जिनपिंग की जगह जी-20 की बैठक में इस बार चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग आ सकते हैं। 

हालांकि, इसे लेकर चीन और भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से कोई बयान नहीं जारी किया गया है। गौरतलब है कि पहले भारत में होने वाली जी-20 बैठक को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और शी जिनपिंग के बीच बातचीत के अहम मौके के तौर पर देखा जा रहा था। माना जा रहा था कि जी-20 में बैठक के बाद अमेरिका-चीन के बीच तनाव को कम करने की कोशिश की जाएगी। 

अभी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत न आने का कारण साफ नहीं है। चीन के आधिकारिक सूत्रों ने भी इस बारे में जानकारी से इनकार किया। उधर भारत में सरकारी अफसरों ने पुष्टि की कि उन्हें जिनपिंग की जगह चीनी प्रधानमंत्री के आने की जानकारी है।

इससे पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही पीएम मोदी के साथ फोन पर बातचीत में भारत आने में असमर्थता जता चुके हैं। रूस की तरफ से जी-20 बैठक में विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव हिस्सा लेंगे। 

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प्रचंड भला

बुडापेस्ट, एजेंसी
भारतीय जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रविवार देर रात इतिहास रच दिया है। टूर्नामेंट के फाइनल में उन्होंने 88.17 मीटर के अपने बेस्ट एफर्ट के साथ गोल्ड जीता। यह चैंपियनशिप हंगरी के बुडापेस्ट में 19 अगस्त से 27 अगस्त तक खेली गई।
25 साल के नीरज वर्ल्ड एथलेटिक्स चैम्पियन में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने पिछले साल यूजीन में वर्ल्ड चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था, जिसे उन्होंने इस बार गोल्ड में बदला। पाकिस्तान के अरशद नदीम ने सिल्वर जीता। उन्होंने 87.82 मीटर का बेस्ट एफर्ट निकाला। यह चैंपियनशिप 1983 से हो रही है। वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में यह भारत का ओवरआॅल तीसरा मेडल है। नीरज की ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी। कहा- प्रतिभाशाली नीरज ने अपना सर्वश्रेष्ठ दिखाया है। उनका समर्पण, सटीकता और जुनून, उन्हें न सिर्फ एथलेटिक्स में चैंपियन बनाता है, बल्कि पूरे खेल जगत में उन्हें उत्कृष्टता का प्रतीक बनाता है।
नीरज का पहला थ्रो फाउल रहा। ओलिंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा ने फाउल से शुरुआत की। पहले प्रयास में फिनलैंड के ओलिवर हेलैंडर ने 83.38 मीटर स्कोर किया और टॉप पर रहे। नीरज चोपड़ा का अटैम्प्ट फाउल रहा और वे 12वें नंबर पर रहे। किशोर जेना ने 75.6 और डीपी मनु ने 78.44 मीटर थ्रो किया। पाकिस्तान के अरशद नदीम ने 74.80 मीटर डिस्टेंस तक भाला फेंका।

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