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पति से नफरत के चलते अपने ही बेटे की हत्या कर दी माँ ने

गोवा के होटल में 4 साल के बेटे की हत्या के मामले में पुलिस और पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर ने कई खुलासे किए हैं। गोवा पुलिस ने दावा किया है कि बेंगलुरु की स्टार्टअप कंपनी की सीईओ सूचना सेठ ने प्लानिंग के तहत अपने बेटे का मर्डर किया। पुलिस ने होटल के कमरे से कफ सीरप की दो खाली बोटल्स बरामद की हैं। पुलिस को आशंका है कि मर्डर से पहले सूचना ने अपने बेटे को कफ सीरप की हैवी डोज दी होगी। सूचना ने कफ सीरप की एक बोटल होटल के एक स्टाफ से मंगवाई थी। सूचना ने कहा था कि उसे खांसी है।
बच्चे का पोस्टमॉर्टम करने वाले कर्नाटक के हिरियूर तालुक हॉस्पिटल के डॉक्टर कुमार नाइक ने बताया कि किसी कपड़े के तकिए से बच्चे का गला घोंटा गया था। बच्चे का चेहरा और छाती सूज गई थी। नाक से भी खून बह रहा था। हत्या करीब 36 घंटे पहले हुई थी।
क्या है पूरा मामला- बेंगलुरु की स्टार्टअप कंपनी माइंडफुल एआई लैब की फाउंडर और सीईओ सूचना 6 जनवरी को गोवा के सोल बनयान ग्रांडे होटल में अपने बेटे के साथ आई थी। सोमवार (8 जनवरी) को उसने होटल से चेक-आउट किया था। वह टैक्सी से बेंगलुरु के लिए निकली थी।
इधर, होटल स्टाफ सूचना का रूम साफ करने गया, तो खून से सना तौलिया देखा। पुलिस को जानकारी दी। कर्नाटक के चित्रदुर्ग से उसे गिरफ्तार किया गया। गोवा की मापुसा कोर्ट ने उसे 6 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद आरोपी महिला का पति वेंकट रमन जकार्ता (इंडोनेशिया) से चित्रदुर्ग आया। उसकी सहमति के बाद बेटे के शव का पोस्टमॉर्टम किया गया।
मर्डर की असल वजह अभी पता नहीं – सूचना ने बेटे का मर्डर क्यों किया, पुलिस ने इसकी वजह नहीं बताई है। सूचना ने पुलिस को ये बताया है कि वह पति से अलग रह रही थी और उनके तलाक की प्रक्रिया चल रही थी। सूचना मूल रूप से पश्चिम बंगाल की निवासी है। वह बेंगलुरु में रहती थी।
गोवा पुलिस के मुताबिक, सोमवार को होटल की तरफ से उन्हें घटना की जानकारी मिली। दरअसल, जब होटल का एक स्टाफ रूम में सफाई करने पहुंचा तो उसने वहां टॉवेल में खून के धब्बे देखे। स्टाफ ने होटल मैनेजमेंट को इसकी सूचना दी। इसके बाद गोवा पुलिस को बुलाया गया।
पुलिस ने सीसीटीवी चेक किया, जिसमें सूचना अपने बेटे के साथ होटल में आती दिखती है। हालांकि चेक आउट के वक्त वह अकेली थी। इसके बाद गोवा पुलिस हरकत में आई। उसने कर्नाटक पुलिस को जानकारी दी और महिला को चित्रदुर्ग से गिरफ्तार कर लिया गया।
टैक्सी से जाने की जिद से शक और बढ़ा- होटल के स्टाफ ने पुलिस को बताया कि सोमवार को महिला अपने कमरे से अकेले बाहर निकली और बेंगलुरु के लिए टैक्सी बुक करने को कहा। स्टाफ ने महिला से कहा कि कैब का किराया ज्यादा होगा। उसने सूचना को फ्लाइट से बेंगलुरु जाने की सलाह दी। हालांकि वह टैक्सी से ही जाने की जिद कर रही थी। गोवा पुलिस ने टैक्सी ड्राइवर को फोन किया और सूचना से बात करवाने को कहा। पुलिस ने सूचना से उसके बेटे के बारे में पूछा तो सूचना ने झूठ बोला कि उसका बेटा गोवा के फतोर्डा में एक रिश्तेदार के घर पर है।

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बच्चे के चेहरे की नशें बाहर आ गई थीं, इतना जोर से दबाया गया था गला… गोवा में 4 साल के मासूम का पोस्टमार्टम वाले डॉक्टर भी कांप गए!

गोवा में चार साल के बच्चे की मां द्वारा की गई हत्या की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई हैं। पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. कुमार नाइक ने खुलासा करते हुए कहा कि बच्चे की हत्या 36 घंटे पहले की गई थी। साथ ही दावा किया कि बच्चे का गला हाथों से नहीं बल्कि किसी अन्य चीज से दबाया गया था। 

गोवा में एक मां ने दरिंदगी की सारे हदें पार कर दी। चार साल के बच्चे की हत्या का मामला सामने आते ही सोशल मीडिया में तमाम प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। पुलिस ने मंगलवार को दावा किया था कि बच्चे की हत्या के बाद मां ने खुदकुशी की कोशिश की थी। इसी बीच, पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. कुमार नाइक ने खुलासा करते हुए कहा कि बच्चे की हत्या 36 घंटे पहले की गई थी। बच्चे की मौत गला दबने से हुई है। गौरतलब है कि द माइंडफुल एआई लैब की सीईओ सूचना सेठ को गोवा के एक सर्विस अपार्टमेंट में अपने बेटे की हत्या करने के आरोप में सोमवार रात कर्नाटक के चित्रदुर्ग से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने बताया कि सुचना सेठ का अलग हो चुका पति वेंकट रमन अपने बच्चे की हत्या के बारे में जानने के बाद मंगलवार शाम को जकार्ता से भारत लौट आया।

हाथों से नहीं बल्कि किसी अन्य चीज से हुई हत्या- नाइक
डॉ. कुमार नाइक ने कहा कि ऐसा नहीं लग रहा कि बच्चों का गला हाथों से दबाया गया हो, शव को देखकर लग रहा है कि तकिया या किसी अन्य सामग्री के इस्तेमाल से इस वारदात को अंजाम दिया गया है। नाइक ने कहा कि बच्चे के शरीर पर कोई खून की कमी या किसी तरह के संघर्ष का निशान नहीं था। हालांकि, नाइक ने कहा कि वे सटीक समय नहीं बता सकते लेकिन उसकी मौत को 36 घंटे हो चुके हैं। चार साल के बच्चे की हत्या पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत का कहना कि जैसे ही पुलिस को कुछ संदिग्ध लगा, तुरंत महिला को गिरफ्तार कर लिया गया था। मामले में जांच जारी है। 

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टाइम्स स्क्वायर पर होगा प्राण प्रतिष्ठा का लाइव प्रसारण

अयोध्या, एजेंसी। 22 जनवरी को अयोध्या में होने वाले राम लला की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की लाइव स्क्रीनिंग अमेरिका के न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध टाइम्स स्क्वायर पर भी होगी। टाइम्स स्क्वायर यह किसी भारतीय प्रोग्राम की पहली लाइव स्क्रीनिंग होगी। इसके अलावा दुनियाभर के भारतीय दूतावासों में भी प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की लाइव स्ट्रीमिंग होगी। अहमदाबाद से 44 फीट ऊंचा ध्वज अयोध्या लाया गया है। यह 161 फीट ऊंचे राम मंदिर पर लहराएगा। इस हिसाब से मंदिर और ध्वज की कुल ऊंचाई 205 फीट होगी। अंबिका इंजीनियर्स कंपनी ने इस ध्वज को 7 महीने में तैयार किया है। 5 जनवरी को गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अहमदाबाद से ध्वज को रवाना किया था।

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Ayodhya Ram Mandir: अधिपति और आधिपत्य का संतुलन ही है रामराज्य की असल परिकल्पना

सूर्य-चंद्रमा, वर्षा-शरद, पशु-पक्षी, पर्वत-नदी आदि-आदि पर हमारा विचार बना रहता है, दौड़ता रहता है, फिर भी इस महान विश्व का नियमबद्ध संचालक हमारी दृष्टि से सदैव ओझल ही रहता है। इसलिए हमारी यह विवशता होती है कि हम उस अदृश्य संचालक शक्ति की कल्पना करें और उसे परिभाषित करें, ताकि सृष्टि के राज्य को नियंत्रित करने वाले साकार या निराकार स्वरूप की विवेचना हो सकें। हम राम की प्रभुता को समझ सकें और रामराज्य की संप्रभुता को परिभाषित कर सकें।

जब किसी समाज में सर्वव्यापक प्रभु मनुष्यों के हृदय में अपना विभूतिपूर्ण रवि जैसा प्रतापमय प्रकाश कर देते हैं, तब धर्म, ज्ञान, विज्ञान, सुख, संतानोत्पत्ति, सब वृत्तियों की वृद्धि ही होती है और समाज में शेष मत्सर, मान, मोह आदि दुष्प्रवृत्तियां नष्ट हो जाती हैं। यही सृष्टि का मूल मंत्र है, जिससे नवजागरण होता है।

सृष्टि अर्थात जीवन का मूलाधार। सृष्टि अर्थात हमारे अस्तित्व की परिभाषा। सृष्टि अर्थात प्रकृति और पुरुष के बीच में समन्वय। सृष्टि अर्थात अधिपति और आधिपत्य का संतुलन। जब भी हम सृष्टि पर विचार करते हैं, तो उसके विस्तार में हमें अनेक आयाम देखने को मिलते हैं। अनेक गतिविधियों से हमारा सामना होता है। अनेक विधियों को सीखते हुए हम सृष्टि के अंश मात्र के भी नियंता न होते हुए भी अपने कर्मों का फल अपने जीवन में ही प्राप्त करने के लिए तत्पर रहते हैं। हम अधिपति बनना चाहते हैं। हम अधिकारी बनना चाहते हैं। हम नीति और नियति के विरुद्ध अपने अस्तित्व के लिए लड़ते हैं। इस सारी प्रक्रिया में कई बार हम सफल होते हैं और कई बार हम असफल। वैचारिक प्रवाह नित्य-प्रतिदिन हमारे भीतर उगते हैं, उठते हैं और गिर जाते हैं। कुछ वैचारिक प्रवाह ही ऐसे होते हैं, जो आपके जीवन काल में आपके साथ कुछ वर्षों तक या फिर लंबी कालावधि तक आपकी जीवन यात्रा में शामिल रहते हैं। 

सूर्य-चंद्रमा, वर्षा-शरद, पशु-पक्षी, पर्वत-नदी आदि-आदि पर हमारा विचार बना रहता है, दौड़ता रहता है, फिर भी इस महान विश्व का नियमबद्ध संचालक हमारी दृष्टि से सदैव ओझल ही रहता है। इसलिए हमारी यह विवशता होती है कि हम उस अदृश्य संचालक शक्ति की कल्पना करें और उसे परिभाषित करें, ताकि सृष्टि के राज्य को नियंत्रित करने वाले साकार या निराकार स्वरूप की विवेचना हो सकें। हम राम की प्रभुता को समझ सकें और रामराज्य की संप्रभुता को परिभाषित कर सकें।

दरअसल, इन सब बातों के निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए हमें राम के उन क्रांतिकारी विचारों को समझना पड़ेगा, जिन्हें हम ‘रामराज्य’ कहते हैं। यहां मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि ‘राम’ यहां क्रांति के प्रतीक नहीं हैं, परंतु ’रामराज्य’ भारतीय संस्कृति में क्रांति का प्रतीक है। रामराज्य ऐसी क्रांति है, जो अनवरत चली जा रही है। 

मैं इसके इतिहास में नहीं जाऊंगा। परंतु मैं यह जरूर कहूंगा कि समकालीन परिदृश्य में भी रामराज्य की परिकल्पना किसी क्रांति से कम नहीं है। अगर हम इसके प्रमुख कारणों के बारे में संक्षेप में चर्चा करें, तो कहा जा सकता है कि लौकिक जीवन में शुद्धता हमारे व्यक्तित्व को शुद्ध तो बनाती है, लेकिन व्यक्तित्व-शोधन मात्र से हमारा काम नहीं चलता। इसलिए प्रकृति के नियमानुसार व्यक्तियों का समुदाय और उस समस्त समुदाय को व्यवस्थित रखना आवश्यक हो जाता है। व्यवस्थाहीन समुदाय द्वारा अराजकता फैलाने के कारण शुद्ध व्यक्तिविशेष को भी सुख-शांति से वंचित रहना पड़ता है। इसलिए स्वभाविक नियम के अनुसार सृष्टि में स्थित मानव समुदाय को भी व्यवस्थित रखना आवश्यक है। 

हर समुदाय की, विशेष कर मानव समुदाय की इस व्यवस्था का ही नाम ‘राज्य’ है। अधिकांश समय देखने को मिलता है कि राज्य के नाम पर सुखद व्यवस्था के स्थान पर दुखप्रद व्यवस्थाएं मानव समाज में देखी जाती हैं। इसलिए उनके साथ ‘राम’ शब्द जोड़कर प्रकट किया गया है, ताकि यदि सुख-समृद्धि चाहते हो, तो हर राज्य को राम रूपी शोध से शुद्ध रखना चाहिए। 

सरल शब्दों में कहा जा सकता है कि सारी सृष्टि में तथा सृष्टि के प्रतीक समूहों में व्यवस्था सर्वोपरि है। व्यवस्थित समाज से ही व्यक्तित्व का निर्माण होता है। व्यक्तित्व के निर्माण से ही सामाजिक समरसता बढ़ती है और राज्य सबल होता है। भारतीय संस्कृति में इसीलिए रामराज्य की परिकल्पना को इस तरह से किया गया है कि जब किसी समूह में या राज्य में प्रधानकर्ता ईश्वरवाची राम नाम से प्रेरित रहे, तो वहां की व्यवस्था अन्य व्यवस्थाओं की तुलना में ज्यादा न्याय करने वाली और सुव्यवस्थित होती है। यहां व्यक्तिगत प्रभुता का स्थान नहीं होता, बल्कि सामाजिक संप्रभुता और लोकप्रभुता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। 

वैसे भी व्यक्तिगत नारा लगाने से किसी व्यक्ति विशेष की प्रभुता का महिमामंडन होता है, जबकि अगर किसी समूह का नारा लगाया जाए, तो उसका असर सामाजिक परिपेक्ष्य में भी व्यापक होता है। अहंकार की भावना का परित्याग होता है। यही कारण है कि हमारी संस्कृति में रामराज्य की परिकल्पना की गई है। 

रामराज्य कहने में सामूहिक था अथवा सामाजिक जीवन की शुद्धता का भाव परिलक्षित होता है, इसलिए आज भी रामराज्य जैसा शब्द हमारे समाज में उतना ही लोकप्रिय है, जितना युगों पहले था। सृष्टि ने राज्य के पश्चात दशरथ-नंदन राम के राज्य की रूपरेखा खींची है, जिसमें हमें राम के यज्ञ, दान, वेद- पथ धर्म- निर्णय था त्रिगुणातीत लक्षणों का बोध कराया गया है। उनकी पत्नी, माता, भाई, सेवक आदि का सम्मिलित आदर्श कुटुंब का परिचय दिया है एवं प्रजा में स्नान आदि नित्य क्रियाओं, सत्य-संगति, भजन-पूजन, कथा-पुराण आदि की रुचि विषयक चर्चा की गई है और फिर अवधवासियों को सुख-संपदा का उल्लेख किया है। 

तुलसीदास जी ने भी रामराज्य का वर्णन मानस के उत्तरकांड के पूर्वार्ध में किया है। साधारणतया पाठक यही समझते हैं कि तुलसी ने केवल दशरथ पुत्र राम की राज व्यवस्था का वर्णन किया है। परंतु यह सत्य नहीं है। अगर आप ध्यानपूर्वक और सुयोग्य विधि से इसे पढ़ने का प्रयास करेंगे, तो पता चलेगा कि उक्त वर्णन में तुलसीदास जी ने त्रिविध रामराज्य का उल्लेख किया है। 

प्रथम सर्वव्यापी रामराज्य, द्वितीय अवध नरेश पुरुषोत्तम राम का राज्य और तृतीय मानस का रामराज्य। आइए रामराज्य के इन तीनों बिंदुओं पर संक्षिप्त चर्चा कर ले। सर्वव्यापी राम के राज्य  से तात्पर्य है कि जो समस्त सृष्टि को व्यवस्थित रखता है। नीतियों का नियंता है और जो सृष्टि का अभियंता है। दूसरा अवध नरेश पुरुषोत्तम राजा का राज्य है, जिससे अपने आदर्श चरित्र या व्यवस्था द्वारा अवध राज्य में सुख-समृद्धि का प्रचार प्रसार किया जाता है। जन-मन के लिए न्याय की व्यवस्था की जाती है और यह तय किया जाता है कि सभी प्रजा को समान अधिकार मिलें, संतुष्टि मिले और समान अवसर मिलें। तीसरा मानस का रामराज्य है, जो मानव के मन, कर्म, वचन पर आरूढ़ होकर सर्व समाज को त्रिविध दुखों ईर्ष्या, द्वेष, दुर्गुणों से बचाकर सुखी और समृद्धशाली बनाता है। अर्थात समाज के चरित्र निर्माण पर विशेष जोर दिया जाता है और सामाजिक परंपराएं लोक आस्थाओं को जीवित रखने के लिए सभी उद्यम किए जाते हैं। 

तुलसीदास जी की मूल भावनाओं को यदि हम परिभाषित करने की चेष्टा करें, तो निस्संकोच कहा जा सकता है कि तुलसी का मूल उद्देश्य हर मनुष्य के मन पर ईश्वरीय राज्य की स्थापना का रहा होगा, क्योंकि जब तक समाज सुखी नहीं रहेगा, समृद्ध नहीं रहेगा, सत्य पर नहीं चलेगा, तब तक मानवता की बात निराधार है। 

त्रिलोक के स्वामी प्रभु श्रीराम के बारे में तुलसी ने कहा है- रामराज बैठे त्रैलोका। बहुधा आकाश, पृथ्वी और पाताल, इन तीनों को ही त्रिलोक कहते हैं, परंतु लोक का अर्थ यथार्थ में होता है कोई भाग विशेष, जिसे अंग्रेजी में स्फीयर या डोमेन कहते हैं। मनुष्य मन, वाणी और कर्म का संग्रहरूप होता है, इसलिए यह तीनों भाग विशेष मानव पृथ्वी के त्रिलोक हैं। इन तीनों में भी मन-लोक सबसे महत्वपूर्ण है। इसी मन-लोक पर शासन व्यवस्था का नाम रामराज्य है। चूंकि, रामराज्य की परिकल्पना में मन पर राम का राज्य है और राज्य पर राम का आधिपत्य, इसलिए रामाधिपत्य के कारण मनुष्य मन को वश में कर लेता है। यही रामराज्य का चरमोत्कर्ष है। यही रामराज्य की सिद्धि है। अधिपति और आधिपत्य का यही संतुलन रामराज्य का मूलाधार है।

यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, जैसा आजकल रामराज्य को परिभाषित किया जाता है। लोक-जीवन से संबंधित वैचारिक और सांस्कृतिक गहनता को समझे बिना हम प्रकट करने की होड़ में सबसे आगे निकल जाना चाहते हैं। हम इस बात की चिंता ही नहीं करते कि हमारे इस प्रकटीकरण से समाज को किस तरह का स्वरूप मिलेगा? तार्किक चिंतन की जगह पर हम भाषाई रहस्यवाद से अपनी सांस्कृतिक अवधारणा को ध्वस्त करना चाहते हैं। जबकि वर्तमान परिपेक्ष्य में जब पूरा देश आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है, राम के विचारों की बागडोर को पकड़ लेना अत्यंत लाभप्रद और सार्थक सिद्ध हो सकता है। किंतु विचारों को पूरी सच्चाई और निष्ठा से अपनाने की जरूरत है, न कि स्वार्थपरक रंगों में रंग कर प्रस्तुत करने की।
भारतीय परिपेक्ष्य में रामराज्य की परिकल्पना विशिष्ट महत्त्व रखती है। राम ने न सिर्फ भारत में, अपितु वैश्विक संदर्भ में भी अपनी सत्यता, सुंदरता और शिवत्व को सिद्ध किया है। आइए हम सब मिलकर रामराज्य की परिकल्पना को पुनः मूर्त रूप देने का प्रयास करें। श्रमदान करें, अर्थदान करें स्वाभिमानी बनें, आत्मनिर्भर बनें और निस्वार्थ होकर चरित्रवान राष्ट्र निर्माण करें। 

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न्यूयॉर्क के मेयर माता की चौकी में पहुंचे और अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा पर बोले

राम मंदिर निर्माण और रामलला की प्रतिष्ठा पर न्यूयॉर्क के मेयर एरिक एडम्स का बयान आया है। उनका कहना है कि यह हिंदुओं के लिए बड़ी खुशी का मौका है और दुनियाभर में हिंदुओं का सेलिब्रेशन बनता है। न्यूयॉर्क के मेयर एरिक एडम्स ने भी कहा है कि यह हिंदुओं के लिए सेलिब्रेशन की वजह है। एडम्स ने कहा कि भारत के ही हिंदुओं के लिए नहीं, बल्कि साउथ एशियन और कैरेबियन देशों के हिंदू समुदाय के लिए भी यह खुशी का एक मौका है और अपनी आध्यात्मिकता के लिए एक अवसर है। न्यूयॉर्क के ही गीता मंदिर में आयोजित माता की चौकी में वह पहुंचे थे। यहां उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का बनना बेहद अहम् है। एडम्स ने कहा- हमारे पास यहां न्यूयॉर्क में भारतीयों की बड़ी आबादी है। राम मंदिर का खुलना हिंदुओं के लिए सेलिब्रेशन का एक मौका है और उनकी आध्यात्मिकता के लिहाज से अहम् है। बता दें कि एरिक एडम्स मेयर के तौर पर सेकुलरिज्म के मूल्यों को मानते रहे हैं और हिंदू समुदाय के प्रति उदार रवैया रहा है। इससे पहले दिवाली के मौके पर उन्होंने न्यूयॉर्क में सार्वजनिक अवकाश का ऐलान कर दिया था। न्यूयॉर्क में हिंदू समुदाय के लोग करीब दो दशकों से दिवाली पर छुट्टी की मांग कर रहे थे। न्यूयॉर्क के अलावा अन्य अमेरिकी प्रांतों में भी भारतीय समुदाय के लोगों की बड़ी संख्या है। वाइट हाउस में भी दिवाली मनाने की परंपरा कई सालों से है।

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