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छिंदवाड़ा में कमलनाथ को करारा झटकामहापौर अहाके भाजपा में30 साल की उम्र में बने थे महापौर, 18 साल का वनवास दूर किया था

छिंदवाड़ा जीतने के लिए भाजपा पूरी ताकत झोक दी है। कमलनाथ और नाथ परिवार के करीबियों को भाजपा में लाने को सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने छिंदवाड़ा के मेयर विक्रम अहाके को बीजेपी की सदस्यता दिलाई। उन्होंने 2022 के निकाय चुनाव में बीजेपी के अनंत धुर्वे को 3786 वोटों से मात दी थी। छिंदवाड़ा कांग्रेस का अभेद्य किला है, जिसे बीजेपी 1997 में ही भेद पाई थी। 2014 और 2019 की मोदी लहर के बावजूद यहां कांग्रेस जीती, इसीलिए 400 पार का नारा देने वाली भाजपा ने छिंदवाड़ा को नाक का सवाल बना लिया है। कार्यकर्ताओं से लेकर विधायकों तक को तोड़ा गया। अब छिंदवाड़ा के महापौर विक्रम अहाके ने नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए सोमवार को बीजेपी का दामन थाम लिया। उन्हें सीएम हाउस में सीएम डॉ. यादव और प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने विक्रम अहाके को बीजेपी की सदस्यता दिलाई। अहाके रविवार से ही भोपाल में थे।
कौन हैं विक्रम अहाके – विक्रम अहाके कमलनाथ के करीबी माने जाते हैं, जो 30 साल की उम्र में छिंदवाड़ा के महापौर चुने गए। वह राजाखोह गांव के रहने वाले हैं। पिता नरेश अहाके किसान हैं। मां आंगनवाड़ी में काम करती हैं। अहाके ने कांग्रेस को महापौर पद पर 18 साल बाद जीत दिलाई थी। उन्होंने बीजेपी के अनंत धुर्वे को 3,786 वोटों से मात दी थी। विक्रम को 64363 मत प्राप्त हुए थे और 60577 वोट अनंत धुर्वे को मिले थे।
37 हजार वोटों का था अंतर-नकुलनाथ 2019 में सांसद बने जरूर, लेकिन उनकी जीत का अंतर महज 37 हजार 536 मतों का रहा था, वहीं कमलनाथ भी सिर्फ 25 हजार वोटों से ही विधानसभा का उपचुनाव जीत पाए थे, जबकि इससे पहले नाथ परिवार की जीत का अंतर लाखों में रहता था। कुछ दिन पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबी सैयद जफर भी बीजेपी में शामिल हो गए थे।

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2500 वेरिफाइड फॉलोअर्स तो प्रीमियम सर्विस, 5000 वालों को प्रीमियम प्लस

नई दिल्ली, एजेंसी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जिनके 2500 या इससे ज्यादा वेरिफाइड फॉलोअर्स हैं, कंपनी उन्हें अब फ्री में प्रीमियम सर्विस देगी। जिनके 5000 या इससे ज्यादा वेरिफाइड फॉलोअर्स हैं, उन्हें प्रीमियम प्लस की सुविधा मुफ्त मिलेगी। टेस्ला, स्पेस एक्स और के ओनर एलन मस्क ने इस बात का ऐलान किया है। के प्रीमियम सर्विस वाले यूजर्स को ऐड-फ्री, पोस्ट के लिए ज्यादा वर्ड लिमिट और पोस्ट को एडिट करने के साथ कई अन्य फीचर्स मिलते हैं।
प्रीमियम प्लस सर्विस वाले यूजर्स को प्रीमियम की सभी सुविधाओं के अलावा कंपनी का अपना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (अक) बेस्ड चैटबॉट ह्यग्रोकह्ण का एक्सेस मिलेगा। मस्क ने करीब एक हफ्ते पहले प्रीमियम सब्सक्राइबर्स को भी ग्रोक का एक्सेस देने का ऐलान किया था।
पहले यह था चार्जेस- भारत में वेब यूजर्स के लिए ब्लू सब्सक्रिप्शन कॉस्ट 650 रुपए थी। मोबाइल के लिए सब्सक्रिप्शन चार्ज 900 रुपए था। प्रीमियम+ सर्विस के लिए हर महीने 1300 रुपए लगते थे।

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ज्ञानवापी की तर्ज पर सर्वे… सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मुस्लिम पक्ष

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के आदेश पर ज्ञानवापी की तरह धार स्थित भोजशाला का वैज्ञानिक सर्वे (अरक सर्वे) आज (शुक्रवार) से शुरू हो गया। दिल्ली और भोपाल के अफसरों की सर्वे टीम सुबह 6 बजे भोजशाला परिसर में पहुंची। टीम ने भवन का निरीक्षण किया। मजदूरों को मेटल डिटेक्टर से जांच के बाद प्रवेश दिया गया है। सभी के मोबाइल फोन बाहर रखवा लिए गए हैं। मजदूर खुदाई के लिए उपयोगी सामग्री के साथ आए हैं। इस क्षेत्र की निगरानी 60 कैमरों की मदद से की जा रही है। सर्वे टीम पहले चरण में दोपहर 12 बजे तक काम करेगी। जुमे की नमाज के लिए काम रोका जाएगा।
सर्वे को देखते हुए शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। भोजशाला में एएसपी डॉ. इंद्रजीत बाकलवार, सीएसपी, तीन डीएसपी, आठ थाना प्रभारी सहित 175 का पुलिस बल तैनात किया गया है। शहर के हाईराइज भवनों पर भी पुलिस तैनात की गई है। शहर में 25 चौराहों पर पुलिस का फिक्स प्वॉइंट बनाया गया है। चार पुलिस मोबाइल भी लगातार भ्रमण कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मुस्लिम पक्ष-भोजशाला सर्वे मामले में मुस्लिम पक्ष ने 16 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर कोर्ट ने 1 अप्रैल को सुनवाई के लिए तारीख दी थी। हालांकि, आज से सर्वे शुरू होने के कारण मुस्लिम पक्ष अर्जेंट हेयरिंग के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। इस पर तत्काल सुनवाई की मांग करेगा।
गुरुवार को पहुंची थी 15 सदस्यीय टीम- इससे पहले गुरुवार रात दिल्ली और भोपाल से अरक (अ१ूँीङ्म’ङ्मॅ्रूं’ २४१५ी८ ङ्मा ्रल्ल्िरं) के 15 सदस्य धार पहुंचे। टीम में दिल्ली से अधीक्षण पुरातत्वविद् और क्षेत्रीय निदेशक शामिल हैं। टीम ने यहां सर्किटहाउस में कलेक्टर और एसपी से सर्वे के संबंध में बात की। एएसआई भोजशाला के पिछले हिस्से को कवर करने के उद्देश्य से पांच फीट ऊंची दीवार का निर्माण भी करवा रहा है।
सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अपर महानिदेशक प्रो. आलोक त्रिपाठी ने पत्र में बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश पर वैज्ञानिक सर्वे को जीपीआर-जीपीएस तरीके से किया जाएगा। इसको लेकर एक टीम धार आएगी, पांच सदस्यों की टीम को भोजशाला में पुरातात्विक जांच के दौरान पर्याप्त सुरक्षा सहित अन्य व्यवस्थाएं करवाने की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की रहेगी।

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आपके करप्शन ‘कुमार’ गिरफ्तार

कथित शराब नीति घोटाले में दो घंटे की छापेमार कार्रवाई के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने दिल्ली के सातवें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया। 2011 में भ्रष्टाचार खिलाफ हुए अन्ना आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाकर केजरीवाल ने सियासी पहचान पाई। ‘आप’ बनाई। दिल्ली की सत्ता में आए। 13 साल के सियासी सफर मेंं लगातार दूसरी बार दिल्ली के सीएम हैं। यह देश के इतिहास में किसी सीटिंग मुख्यमंत्री की पहली गिरफ्तारी है। कुछ दिन पहले ईडी ने हेमंत सोरेन को सीएम पद छोड़ने के कुछ देर बाद ही गिरफ्तार कर लिया था।
आरोप है कि दिल्ली सरकार ने नई एक्साइज पॉलिसी की आड़ में भ्रष्टाचार किया, जिसे शराब घोटाला भी कहा गया। सीएम केजरीवाल, जो कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की मुहिम के साथ राजनीति में आए थे, वह आज खुद भ्रष्टाचार के आरोप में बुरी तरह घिर गए हैं। नवंबर से ईडी केजरीवाल को समन दे रहा था। नौ समन पर केजरीवाल पेश नहीं हुए, इसीलिए 10वां समन लेकर ईडी स्वयं उनके घर पहुंच गई। दो घंटे छानबीन हुई। पूछताछ हुई। बाद में प्रिवेंशन आॅफ मनी लॉण्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल को कुछ राहत दी थी। तब ईडी ने जलबोर्ड मामले की फाइल खोल दी। केजरीवाल फिर हाईकोर्ट पहुंचे। बोले- अगर वो ईडी के सामने पेश होंगे तो उन्हें गिरफ्तार ना किया जाए। गुरुवार को अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कोई श्योरिटी नहीं दी। उनकी गिरफ्तारी पर रोक नहीं लगाई। शाम 7.5 बजे ईडी की टीम मुख्यमंत्री निवास पहुंची, साथ में दिल्ली पुलिस फोर्स भी था। 16 मार्च को भारत राष्ट्र समिति की नेता के. कविता की गिरफ्तारी हुई। आरोप है कि जांच में नई आबकारी नीति से लाभ उठाने के लिए के. कविता ने मुख्यमंत्री केजरीवाल और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के साथ साजिश रची। इसके तहत होलसेलर्स के जरिए लगातार रिश्वत का पैसा आप तक पहुंचाया जाता रहा।

कोर्ट में पेशी…..
ईडी के अनुसार केजरीवाल को आज दोपहर 2.30 बजे पीएमएलए कोर्ट में पेश किया जाएगा। 10 दिन की कस्टडी मांगेंगे, ताकि पूछताछ हो सके। इससे पहले गुरुवार रात आरएमएल हॉस्पिटल की टीम ईडी दफ्तर गई। केजरीवाल का मेडिकल चेकअप किया।
जेल में मनेगी होली..!
पीएमएलए कोर्ट ने पीएमएलए या पीसीए के तहत 15 दिन से पहले अब तक किसी को जमानत नहीं दी। मतलब केजरीवाल की होली जेल में मनेगी। हेमंत सोरेन को झारखंड सरकार के फ्लोर टेस्ट में शामिल होने की छूट दी थी।
रात में खटखटाया था कोर्ट का दरवाजा…
ईडी के केजरीवाल के घर पहुंचते ही उनकी लीगल टीम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए तुरंत सुनवाई की मांग की। मामले में सुप्रीम कोर्ट आज (शुक्रवार) को सुनवाई कर सकता है।

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भगोरिया: भीलों का अनोखा हाट- परम्परा और संस्कृति का केंद्र

सांस्कृतिक आभूषणों (तागली, कमरबंद, हाथ कड़े, रमझोल, पायल) व अलग-अलग रंगों वाली रंग-बिरंगी पोशाखें पहने युवतियां, दूसरी ओर गमछा/पगड़ी बांधे बाँसुरी पर तान सुनाते, अलहड़ मस्ती में कुर्राट देते युवक। और फिर क्या बच्चे, क्या बुढ़े, क्या युवा, क्या स्त्री, क्या पुरूष हर कोई अपनी ही मस्ती में थिरकता हुआ! कपोल कल्पित सी रंग बिरंगी दुनिया की यह तस्वीर देश के आदिवासी भील समुदाय के गढ़ मध्यप्रदेश के झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, और खरगोन की आदिवासी भील जनजाति के एक खास हाट (बाजार) ह्लभगोरिया हाटह्व का है जिसे स्थानीय भाषा मे ह्लभोंगर्या या भोंगर्योह्व कहा जाता हैं। उपरोक्त क्षेत्रों के अलावा गुजरात और राजस्थान की मध्यप्रदेश की राज्यवर्ती सीमा से लगे क्षेत्रों में भी भगोरिया लगता हैं. जहाँ आदिवासी भील जनजाति निवास करती है। वक्त वक्त पर भील जनजाति निवासरत् इस क्षेत्र में भील प्रदेश बनाने की मांग उठती रही है।
रबी की फसल की कटाई के बाद व होली के त्यौहार से ठीक एक सप्ताह पहले स्थानीय साप्ताहिक बाजार वाले दिन के अनुसार लगता हैं। इस हाट में खुशी का माहौल इसलियें भी रहता हैं क्योंकि सारे कृषि कार्य समाप्त हो जाते हैं। यहां पर उल्लेखनीय है कि भील जनजाति कृषि पर निर्भर होती हैं। भगोरिया हाट में रंग- गुलाल के साथ माझम-काकणी (शक्कर से बनी विशेष मिठाई), चने, जलेबी, बुंदी, बुंदी के लड्डु, अंगूर, गन्ने, शकरकंद, होली पूजन सामग्री और सेव की खूब खरीददारी होती हैं। ज्ञात हो कि देशभर में खूब खायीं जाने वाली सेव इन्हीं भीलों की देन हैं जिसे पहले ह्यभीलड़ी सेवह्ण कहा जाता था। और पान तो इस भगोरिया हाट की पहचान ही बन चुका है। आदिवासी समुदाय फागुन माह की पूर्णिमा (होलीका दहन) से ठीक एक महीने पहले माघ माह की पूर्णिमा पर होलिका स्थापना करते है, जिसे ह्लडांडा गाढ़नाह्व कहा जाता है। इसकी स्थापना के बाद आदिवासी समाज अगले चैत्र मास की नवमी तक विवाह (मांगलिक कार्य) नहीं करते है।
दिलचस्प इतिहास
भोंगर्या पर लिखी अनेकों किताबों का अध्ययन और पूर्वज बताते हैं कि भोंगर्या राजा भोज के समय लगने वाले हाटों को कहा जाता था। उस समय भील राजा कसुमर (पहले भील राजा) और बालून ने अपनी राजधानी भगोर (भगोर रियासत) में विशाल मेले और हाट का आयोजन (1000ई-1015ई) के बीच करना शुरू किया था। उस वक़्त झाबुआ अंचल में महज 05 रियासतें थी। धीरे-धीरे आस-पास के भील राजाओं ने भी इन्हीं का अनुसरण करना शुरू किया, जिससे हाट और मेलों को भोंगर्या कहना शुरू हुआ। इस बीच कुछ लोगों द्वारा यह अपवाह फैलाई जाने लगी कि भगोरिया में युवक-युवतियाँ अपनी मर्जी से भागकर शादी करते हैं. यह उत्सव आदिवासी वेलेंटाइन डे है, लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नही होता, सरासर झूठ है। मैं यह दावे से इसलिये कहता हूं क्योंकि स्वयं इस आदिवासी भील समुदाय का हिस्सा हूं, क्षेत्र से संबंध रखता हूं और विषय के संबंध में मैंने स्वयं ही शोध किया है. हां लेकिन यह जरूर है कि हाट में मित्रों- रिश्तेदारों को पान खिलाने का प्रचलन शुरूआत से रहा है. जो अब वक़्त के साथ गुम सा होने लगा है। आदिवासी भगोरिया हाट का महत्व इसलिये भी बढ़ा है क्योंकि उस वक़्त आवागमन के साधन कम हुआ करते थे तो इस हाट में होली का न्योता रिश्तेदारों को दिया जाता था क्योंकि नजदीकी भगोरिया हाट में सारे आसपास के लोग एकत्रित होते थे। रिश्तेदारी भी तब नजदीक ही हुआ करती थीं जिसकी वजह आवागमन के साधन न होना ही मुख्य रही है।
इनकी पारंपरिक वेशभूषा, आभूषणों ने आज विश्व स्तर पर अलग पहचान पाई है. और तो और विश्व भर से कई पर्यटक इस हाट को देखने आते है।
सभी फोटो प्रमोद जैन

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