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दे…दना…दन….आईपीएल 24- रिकॉर्ड तोड़ बल्लेबाजी

2024 अब तक का आईपीएल का सबसे ऐतिहासिक सीजन साबित हो रहा है। सोमवार को सनराइजर्स हैदराबाद और रॉयल चैलेंजर बेंगलुरु के बीच मुकाबला था। दोनों पारियों के 40 ओवर में कुल 10 विकेट पर 549 रन बने हैं। मतलब हर 13.72 रन/ओवर। इसी औसत से रन बने तो ओ दिन दूर नहीं जब 50 ओवर के वन-डे में 680 से ज्यादा रन बनेंगे। हर दूसरी-तीसरी गैंद पर चौके-छक्के देखना दर्शकों भी रास आ रहा है। खिलाड़ियों की ताबड़तोड़ पारियों ने फटाफट क्रिकेट को गति दे दी है।
पहले बेटिंग करते हुए हैदराबाद ने 120 गेंदों में 287 रन बनाए। 240 के स्ट्राइक रेट से। जवाब में 218.33 की औसत से बेंगलुरु ने 262 रन बनाए। खास बात यह है कि कुल 81 बाउंड्री लगी। जिनसे कुल 400 रन बने। इनमें 38 छक्कों से 228 रन बने जबकि 43 चौकों से 172 रन। 0 पर बेंगुलुरू के सौरव चौहान ही आउट हुए।
हैदराबाद : पांच खिलाड़ियों ने कुल 24 डोट बॉल खेली जबकि 22 छक्के लगाए। सबसे कम स्ट्राइक रेट 154.54 अभिषेक शर्मा का रहा। जिन्होंने 22 गेंद में 34 रन बनाए। सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट अब्दुल समद का रहा। समद ने 370 की औसत से 10 गेंद पर 37 रन बनाए। तीन छक्के-चार चौके लगाए। एक्सट्रा 15 रन।
बेंगलुरु : नौ खिलाड़ियों ने कुल 30 डोट बॉल खेली। सबसे कम 50 का औसत विजय व्यस्क का रहा। जिन्होंने 2 गेंद पर एक रन बनाया। सबसे ज्यादा 237.14 का औसत दिनेश कार्तिक का रहा। जिन्होंने पांच चौके और सात छक्कों से 35 गेंद पर 83 रन बनाए।

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‘हिंदुत्व’ से हड़बड़ाहट में विपक्ष मुस्लिम प्रत्याशियों से उठा भरोसा

सपा, बसपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों के लिए मुस्लिम वर्ग बड़ा मतदाता रहा है। हालांकि हिंदुत्व के मुद्दे पर भाजपा को मिल रही सफलता ने इन पार्टियों का मुस्लिमों के प्रति मोह भंग किया है। इसका अंदाजा 2014 से 2024 के मुकाबले घटी इन दलों के मुस्लिम प्रत्याशियों की संख्या से लगाया जा सकता है। हालत यह है कि 40 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्रों में भी इन दलों ने मुस्लिम प्रत्याशियों को नकार दिया। शायद अब यह दल मान चुके हैं कि मुस्लिम को टिकट देने से हिंदु वोट कम मिलते हैं। वहीं हिंदु को टिकट दिया तो परम्परागत मुस्लिम वोट तो मिलना ही हंै, हिंदु वोट भी मिलेंगे।
हमारे इस एनालिसिस का मकसद हिंदू-मुस्लिम को अलग करके देखना नहीं है। ये सिर्फ विश्लेषण है जो बताता कैसे सियासी दल अपने फायदे के लिए हिंदुओं और मुसलमानों का इस्तेमाल करते हैं। एआईएमआईएम यानि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी दावा करती है कि वो मुस्लिमों की आवाज है। कांग्रेस कहती है कि वो हिंदुओं और मुसलमान दोनों की आवाज उठाते हैं। आरजेडी बिहार में मुस्लिम-यादव(एमवाय)फैक्टर को आजमाती है।
भारत की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं के वोटों को निर्णायक माना जाता है। धार्मिक आबादी के हिसाब से देश में मुस्लिम दूसरे नंबर पर आते हैं। इन वोटों की क्या अहमियत होती है इसे देश का हर सियासी दल समझता भी है। कोई हंसाकर तो कोई डराकर मुस्लिमों के वोट लेना चाहता है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाजपार्टी, टीएमसी, आरजेडी जैसे तमाम सियासी दलों को उम्मीद है कि मुस्लिम उनकी नाव को पार लगा सकते हैं, लेकिन जब इन पार्टियों का मुस्लिमों को टिकट देने का नंबर आता है तो सब शून्य हो जाते है। हिंदुत्व की लहर को देखते हुए 2024 के आम चुनाव में इंडी गठबंधन के दल भी मुस्लिमों का खुला समर्थन करने से बच रहे हैं। इसीलिए 40 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले जिस मुरादाबाद ने अब तक 11 बार मुस्लिम नेताओं को चुनकर संसद भेजा, वहां से इस बार सपा ने सांसद डा. एसटी हसन का टिकट काटकर रुचि वीरा को गठबंधन प्रत्याशी बनाया। मुस्लिम आबादी वाले बिजनौर से कोई मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में नहीं है। यही हाल मुजफ्फरनगर, मेरठ और बागपत सहित कई उन सीटों का भी है।
मुजफ्फरनगर से भाजपा के संजीव बालियान मैदान में हैं तो करीब पांच लाख मुस्लिम आबादी के बावजूद सपा ने हरेंद्र मलिक और बसपा ने दारा सिंह प्रजापति को टिकट दे दिया। चार से पांच लाख मुस्लिम मतदाताओं वाली बिजनौर सीट से रालोद ने चंदन चौहान को गठबंधन प्रत्याशी बनाया सपा ने दीपक सैनी और बसपा ने चौ. वीरेंद्र सिंह को उतार दिया।
टिकट न देंगे तो भी वोट देंगे ही मुस्लिम- सियासी समीक्षक कहते हैं सपा, बसपा और कांग्रेस जैसे दल अब इस आशंका से डरने लगे हैं कि मुस्लिमों को ज्यादा टिकट देने से भाजपा इसे मुस्लिम तुष्टिकरण के रूप में प्रचारित कर ध्रुवीकरण न करा दे। इस पर मुस्लिम मतदाताओं के रुख के प्रश्न पर वह कहते हैं कि यह तीनों ही दल जान चुके हैं कि प्रतिनिधित्व न भी दिया जाए तो उनके लिए वोट बैंक बन चुका मुस्लिम जाएगा कहां?

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मोदी की गारंटी में भी तड़प रही ‘विकास की मछली’!

2024 के लोकसभा चुनाव की शहनाई वैसे तो बज चुकी है, अब तो पहले चरण का चुनाव भी होने वाला है। तकरीबन हर राजनीतिक पार्टी ने अपने बचे-खुचे सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय करने के साथ ही आधिकारिक ऐलान भी कर दिया है। यूपी की बात करें तो पूर्वांचल की एक ऐसी सीट रही जिसको लेकर हर कोई ऊधेड़बुन में रहा कि आखिर में भाजपा के बाद अब सपा-कांग्रेस गठजोड़ किस उम्मीदवार को टिकट देगा। अंत में मछलीशहर लोस सीट पर सपा ने अपनी ही पार्टी के पूर्व सांसद रहे और मौजूदा समय में इसी सीट के विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक तूफानी सरोज की बेटी प्रिया सरोज की उम्मीदवारी पर अपनी राजनीतिक मुहर लगाई। जबकि बीजेपी ने लगातार दूसरी बार इस सीट से वर्तमान सांसद बीपी सरोज को चुनावी मैदान में उतारा और वहीं बसपा ने पंजाब कॉडर के पूर्व आईएएस रहे कृपाशंकर सरोज को हाथी चुनाव चिन्ह सौंपकर अपनी दावेदारी पेश की।
2014 से लेकर अब तक बीजेपी का ही इस सीट पर कब्जा रहा हैं। इस क्षेत्र के कुछ वरिष्ठजनों की मानें तो पीएम मोदी के वाराणसी संसदीय सीट से सटे होने के बावजूद मछलीशहर क्षेत्र में विकास की मछली आज भी तड़पती हुई नजर आ रही। जौनपुर और वाराणसी क्षेत्रों को मिलाकर मछलीशहर सुरक्षित संसदीय सीट को बनाया गया है। जातीय आंकड़ों पर गौर करें तो यहां पर सबसे अधिक पासी यानी सरोज, सोनकर, धोबी, निषाद और उसके बाद यादव, मुस्लिम, ठाकुर, बनिया, वर्मा आदि अन्य जातियां शामिल हैं। मौजूदा राजनीतिक परिवेश में देखें तो बीजेपी, सपा और बसपा ने इस बार के चुनाव में एक ही वर्ग यानी सरोज-पासी समुदाय से जुड़े उम्मीदवार को उतारा है तो मुकाबला त्रिकोणीय होना लाजिमी है। यहां के स्थानीय जानकारों की मानें तो चूंकि मछलीशहर सीट को यहां पर न तो जौनपुर शहरी सीट और न ही वाराणसी सीट से किसी प्रकार का पॉलिटिकल बैकअप, नहीं मिल पाता तो सदन में इनके चुने गये जनप्रतिनिधियों की जनसमस्या को लेकर सुनवाई भी समय पर नहीं हो पाती है। यहां पर न तो अब तक किसी प्रकार का औद्योगिक विकास हो पाया और न ही कोई अन्य सतत विकास दिखा।
इस क्षेत्र के अधिकांश लोग खेती-बाड़ी पर निर्भर हैं। परंपरागत कल-कारोबार से जुड़कर जैसे-तैसे करके अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं। यहां के ज्यादातर युवा काम की तलाश में महाराष्ट्र-मुंबई-पुणे, गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, गाजियाबाद या कोलकाता जैसे शहरों की ओर पलायन को मजबूर रहते हैं।
हालांकि यहां पर शिक्षा का उन्नति तो दिखती है, मगर वो भी इस रूप में की कि यहां पर कुछेक शिक्षण संस्थानों को छोड़ दिया जाये तो अधिकांश प्रतियोगी और एकेडमिक छात्र-छात्रायें यूनिवर्सिटी की ओर उच्च और शोधपरक पठन-पाठन के लिये निकल जाते हैं…और यदि सफल हो गये तो फिर इक्का-दुक्का ही यहां पर लौटकर आते हैं। ऐसे में मछलीशहर संसदीय क्षेत्र में शैक्षिक बे्रन ड्रेन भी प्रचलन कहीं देखने को मिलता है। रेलवे, और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी शहर संसदीय सीट को लेकर पूर्व और वर्तमान में कई घोषणायें होती आई हैं। मौजूदा हाल में जमीनी हकीकत इससे कहीं जुदा है।

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‘किसी भी धार्मिक स्थल पर सियासी गतिविधियां मंजूर नहीं’

दो दिन पहले बोहरा समाज के जमातखाने में पहुंचकर भाजपा और पीएम मोदी के पक्ष में नारे लगवाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। बोहरा समुदाय किसी धार्मिक स्थल पर इस तरह की सियासी गतिविधि से सख्त नाराज दिखाई दे रहा है। इस मामले को लेकर रविवार रात को बड़ी संख्या में बोहरा समुदाय के लोग अलीगंज स्थित हैदरी जमातखाने में इकठ्‌ठे हुए। लोगों को संबोधित करते हुए दाऊदी बोहरा समुदाय के मुस्तुफा राजा ने कहा कि ईद के प्रोग्राम में हुईं सियासी गतिविधियों और जमातखाने को मस्जिद कहकर प्रचारित किए जाने की बात का खण्डन खुद आमिल साहब को सामने आकर करना चाहिए था।
राजा ने कहा कि समाज का जमातखाना सभी लोगों के लिए खुला है, इसमें सियासी दलों के लोग भी आते रहे हैं, लेकिन उन्हें मर्यादाओं में बांधकर रखना आमिल की जिम्मेदारी है। उन्होंने किसी को इस तरह की सियासी गतिविधि के लिए इजाजत दी, यह समुदाय के लिए असहनीय है। उन्होंने कहा- मस्जिद और जमातखाने के अलग-अलग हिस्सों और यहां की गतिविधियां मीडिया के सामने रखें। समुदाय के युवा और बुजुर्गों ने इस दौरान कहा कि मस्जिद सिर्फ नमाज और इबादत की जगह है, जबकि जमातखाने में समाज की मीटिंग, शादी-ब्याह और विभिन्न आयोजन किए जाते हैं। 12 अप्रैल को ईद मिलन का प्रोग्राम भी जमातखाने में ही आयोजित किया गया था, जिसमें सबसे मुलाकात का उचित अवसर मानकर भाजपा प्रत्याशी आलोक शर्मा भी पहुंचे थे, लेकिन बाद में इस जगह को मस्जिद कहकर प्रचारित कर दिया गया। इस बात से समाज में नाराजगी है।
जो सिंहासन पर है, वह सम्माननीय
आयोजन के दौरान आमिल जौहर अली द्वारा पीएम मोदी की तारीफ किए जाने पर समाज के लोगों ने कहा कि बात सिर्फ मोदीजी की नहीं है, हम देश के सर्वोच्च सिंहासन पर बैठे हर व्यक्ति को सम्मान देते आए हैं। उन्होंने कहा कि हमारे दर पर पीएम मोदी, उनके समर्थक आएं या राहुल गांधी या उनसे जुड़ा कोई व्यक्ति आएगा तो उसे भी इसी सम्मान से नवाजा जाएगा।

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रोहित ‘छक्कों’ का सरदार टी-20 में 500 पार

‘मुंबई चा राजा’ नाम से मशहूर रोहित शर्मा ने 63 गेंद में 11 चौके और पांच छक्के की मदद से 105 रन की पारी खेली। मैच के दौरान तीसरा छक्का लगाते ही उन्होंने टी-20 क्रिकेट में 500 छक्के भी पूरे कर लिए। वह अब टी-20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले भारत और एशिया के पहले तथा दुनिया के पांचवें बल्लेबाज बन गए हैं। हालांकि उनकी टीम मुंबई इंडियन महेंद्रसिंह धोनी की सीएसके से 20 रन से हार गई। चेन्नई के खिलाफ 30 गेंदों पर 7 चौके और 2 छक्के के सहारे अपनी फिफ्टी पूरी की। अर्धशतक पूरा करने के बाद रोहित ने 11वें ओवर में रवींद्र जडेजा की गेंद पर शानदार छक्का लगाकर टी20 क्रिकेट में अपने 500 छक्के पूरे किए। रोहित ने टी-20 क्रिकेट में अपने 500 छक्कों में से 270 छक्के आईपीएल में लगाए हैं, जो कि टूनार्मेंट के इतिहास में किसी भी बल्लेबाज द्वारा लगाया गया सबसे ज्यादा छक्के हैं। इंटरनेशनल क्रिकेट में रोहित के अब 600 छक्के हो गए हैं। टी-20 क्रिकेट में सर्वाधिक 1056 छक्कों के साथ क्रिस गेल शीर्ष पर हैं।

टक के लिए सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज- रोहित मुंबई के लिए सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। रोहित ने चेन्नई के खिलाफ आईपीएल करियर की दूसरी सेंचुरी जमाई। दोनों टक के लिए ही बनाई।

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